बुधवार, 19 मार्च 2014

यौनकर्मी महोत्सव: कोशिश हक़ पाने की!




पीएम तिवारी
 सोमवार, 3 फ़रवरी, 2014 को 20:09 IST तक के समाचार
यौनकर्मी महोत्सव
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में इन दिनों छह दिवसीय यौनकर्मी महोत्सव चल रहा है. देश के विभिन्न राज्यों से अपनी मांगों के समर्थन में दो सौ से ज्यादा यौनकर्मी, उनके हितों की लड़ाई में जुटे संगठनों के प्रतिनिधि और लोक कलाकार इस महोत्सव में पहुंचे हैं.
सोनागाछी रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर के प्रिंसिपल डॉक्टर समरजीत जाना कहते हैं, "दुर्बार महिला समन्वय समिति की ओर से आयोजित इस छह-दिवसीय उत्सव का मकसद महिलाओं की खरीद-फरोख्त रोकना, यौनकर्मियों को मौलिक अधिकार दिलाना और उनको उनने हक के प्रति जागरूक बनाना है."
इस उत्सव की थीम है ‘प्रतिवादे नारी, प्रतिरोधे नारी' यानी महिलाओं का विरोध, महिलाओं का बचाव.
जाना का कहना है कि यौनकर्मियों को भी एक पेशेवर के तौर पर मान्यता मिलनी चाहिए. दूसरे पेशों की तरह इसे भी कानूनी तौर पर पेशे का दर्जा दिया जाना चाहिए.
इस मौके पर बीबीसी ने कुछ यौनकर्मियों से उनके अतीत, इस पेशे की मौजूदा स्थिति और उनके हक की लड़ाई के बारे में बातचीत की.

मुन्नी देवी, उत्तर प्रदेश

मैं मजबूरी में यौनकर्मी बनी हूं. अगर पेशा नहीं करूं तो रोटी, कपड़ा, मकान और बच्चों की पढ़ाई का खर्च कहां से आएगा?
इस पेशे ने ही मुझे एचआईवी का संक्रमण दे दिया. पहली बार जब इस बीमारी का पता लगा तो मुझे भारी झटका लगा था. मेरे दो बेटे और एक बेटी है. मैं सोचने लगी कि यह बीमारी तो मेरी जान ले लेगी. मैं कैसे रहूंगी?
मैं सरकार से यही चाहती हूँ कि आम लोगों की सेवा करने वाले दूसरे लोगों की तरह हम सेक्स वर्करों को भी सुविधाएं मिले.

भाग्या, मैसूर

यौनकर्मी महोत्सव
अपने बच्चों के पालन-पोषण और उनके स्कूल का खर्च उठाने के लिए मैं इस पेशे में आई थी. यह पेशा अच्छा है. इसकी कमाई से बच्चों का लालन-पालन बेहतर तरीके से हो रहा है और मैं भी बेहतर जिंदगी जी रही हूं.
मुझे इस पेशे में आने का कोई अफसोस नहीं है.
हम चाहते हैं कि सरकार हमारा भी आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवा दे. हमें सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं मिलती.
विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाली सहायता भी हम तक नहीं पहुंचती. हमें पेंशन मिलनी चाहिए. हम अपने हक की लड़ाई को मजबूत करने यहां आए हैं.

सुल्ताना बेगम, राजस्थान

यौनकर्मी महोत्सव
मैं इस पेशे में कैसे आई, यह तो बताना मुश्किल है. वक्त और हालात मुझे इसमें ले आए. अब हम अपना संगठन बनाकर अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं.
पहले यौनकर्मियों को काफी परेशानियां उठानी पड़ती थीं. अब पहले के मुकाबले दिक्कतें कम हुई हैं. रुपए में 40 पैसे कम हुई हैं लेकिन अब भी 60 पैसे बाकी हैं.
सबसे बड़ी समस्या यह है कि यौनकर्मियों के बच्चों को स्कूलों में दाखिला नहीं मिलता. यौनकर्मियों के बूढ़े हो जाने पर उनका गुजारा मुश्किल हो जाता है.
हम सरकार से चाहते हैं कि ऐसी यौनकर्मियों के लिए पेंशन की व्यवस्था हो. कोई भी यौनकर्मी 40-50 की उम्र के बाद यह पेशा नहीं कर पाती. सरकार 40 की उम्र के बाद हम यौनकर्मियों को भी दूसरे लोगों की तरह दो हजार रुपए महीने पेंशन दे.

सुनीता बारा, झारखंड

यौनकर्मी महोत्सव
मैं अब स्वावलंबी और आत्मनिर्भर हूं. मैं पर्याप्त कमा लेती हूं. किसी को सेवा देती हूं तो बदले में मुझे पैसे मिल जाते हैं.
हम लोग अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए यहां आए हैं. यौनकर्मियों को समाज में बहुत खराब निगाहों से देखा जाता है. मैं चाहती हूं कि दूसरी कामकाजी महिलाओं की तरह हमें भी इज्जत की निगाह से देखा जाए.
हम लोग दूसरी महिलाओं की तरह सम्मान और बराबरी का अधिकार चाहते हैं. आखिर हम भी एक सामान्य महिला हैं.

सोनी देवी, पटना

यौनकर्मी महोत्सव
इस पेशे से होने वाली कमाई से ही बाल-बच्चों को थोड़ा-बहुत पढ़ाया-लिखाया और घर का खर्च चलाते हैं. लेकिन अब हमारी उम्र ढल गई है. अब सरकार की ओर से कोई सहायता मिलती तो बढ़िया होता.
मेरे बेटों को कोई छोटी-मोटी नौकरी मिल जाती, हमें पेंशन मिलती तो जीवन कुछ आसान हो जाता. हमें अपना हक मिलना चाहिए.
यौनकर्मी महोत्सव
यौनकर्मियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के लिए उत्सव में समाज के विभिन्न तबकों की भागादीर सुनिश्चित की गई है. इनें फिल्मकार गौतम घोष और साहित्यकार समरेश मजुमदार समेत देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकार भी शामिल हैं.

भागीदारी

यौनकर्मी महोत्सव
दुर्बार महिला समन्वय समिति की सचिव भारती दे कहती हैं, "हमारा संगठन इस पेशे में जबरन उतारी जाने वाली या नाबालिग युवतियों को बचाने की दिशा में ठोस काम कर रहा है. साथ ही हम यौनकर्मियों को उनका जायज हक दिलाने की भी लड़ाई लड़ रहे हैं."
भारती का कहना है कि संगठन ने यौनकर्मियों के बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए भी कई योजनाएं शुरू की हैं ताकि उनकी आंखों में एक बेहतर भविष्य का सपना पैदा किया जा सके.

संतान

यौनकर्मी महोत्सव
सोनागाछी की एक यौनकर्मी की संतान पूजा कहती हैं, "हम यौनकर्मियों के बच्चों ने भी अपना संगठन आमरा पदातिक बनाया है. इसके तहत छोटे बच्चों की देखभाल के लिए नाइट सेंटर हैं. मां के पेशा करने पर छोटे बच्चे वहीं रहते हैं. कइयों को गीत और नृत्य का प्रशिक्षण दिया जाता है."
वह बताती है कि सोनागाछी की यौनकर्मियों के दो बच्चे हाल में ही पौलैंड से फुटबॉल खेलकर आए हैं. उनको सेना में नौकरी मिल गई है.
महोत्सव में यौनकर्मियों को सूचना के अधिकार के बारे में भी जानकारी दी जा रही है.
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गुजरात का वाडियाः जहां सजती है देह की मंडी

अंकुर जैन
अहमदाबाद से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
 बुधवार, 19 मार्च, 2014 को 13:46 IST तक के समाचार
सनीबेन और सोनीबेन
बीते 80 सालों से भी ज़्यादा अरसे से ये रिवाज गुजरात के इस गाँव में बदस्तूर जारी है. इस गाँव में पैदा होने वाली लड़कियां वेश्यावृत्ति के धंधे को अपनाने के लिए एक तरह से अभिशप्त हैं.
तक़रीबन 600 लोगों की आबादी वाले इस गाँव की लड़कियों के लिए देह व्यापार के पेशे में उतरना एक अलिखित नियम सा बन गया है. यह गुजरात के बांसकांठा ज़िले का वाडिया गाँव है. इसे यौनकर्मियों के गाँव के तौर पर जाना जाता है. इस गाँव में पानी का कोई कनेक्शन नहीं है, कुछ ही घरों में बिजली की सुविधा है, स्कूल, बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ और सड़कें तक नहीं हैं.
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साफ़ सफ़ाई जैसी कोई चीज़ इस गाँव में नहीं दिखाई देती लेकिन ये वो विकास नहीं हैं, जो इस गाँव की औरतें चाहती हैं. वे ऐसी ज़िंदगी की तलबगार हैं जिसमें उन्हें किसी दलाल या ख़रीदार की ज़रूरत न पड़े. वाडिया की औरतों का उस भारत से कोई जुड़ाव नहीं दिखाई देता जिसने हाल की मंगल के लिए एक उपग्रह छोड़ा है.
भारत के विकास की कहानी का इन औरतों के लिए केवल एक ही मतलब है कि अब उनके ज़्यादातर ग्राहक कारों में आते हैं. पिछले साठ सालों से वे यही ज़िदगी जी रही हैं.

तवायफ़ों का गाँव

वाडिया गाँव
गुजरात की राजधानी गाँधीनगर से क़रीब 250 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ये वाडिया गाँव बीते कई दशकों से देह व्यापार से जुड़ा हुआ है. गाँव के ज़्यादातर मर्द दलाली करने लगे हैं और कई बार उन्हें अपने परिवार की औरतों के लिए खुलेआम ग्राहकों को फंसाते हुए देखा जा सकता है. इस गाँव के बाशिंदे ज़्यादातर यायावर जनजाति के हैं. इन्हें सरनिया जनजाति कहा जाता है.
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माना जाता है कि ये राजस्थान से गुजरात आए थे. सनीबेन भी इस सरनिया जनजाति की हैं. उनकी उम्र कोई 55 साल की होगी और अब वह यौनकर्मी नहीं है. पड़ोस के गांव में छोटे-मोटे काम करके वह अपना गुजारा करती हैं. वह कहती हैं, "मैं तब दस बरस की रही होउंगी जब यौनकर्मी बनी थी. ख़राब स्वास्थ्य और ढलती उम्र की वजह से मैंने यह पेशा अब छोड़ दिया है."
सनीबेन की तरह ही सोनीबेन ने भी उम्र ढल जाने के बाद यह पेशा छोड़ दिया. उन्होंने कहा, "मैं 40 बरस तक सेक्स वर्कर रही. अब मेरी उम्र हो गई है और गुज़ारा करना मुश्किल होता जा रहा है." सनीबेन और सोनीबोन दोनों ही ये कहती हैं कि उनकी माँ और यहाँ तक कि उनकी माँ की माँ ने भी शादी नहीं की थी और इसी पेशे में थीं.

गर्भ निरोध

वाडिया गाँव
सोनीबेन कहती हैं, "वाडिया में कई ऐसे घर थे और अब भी हैं, जहाँ माँ, माँ की माँ और बेटी तीनों के ही ग्राहक एक ही घर में एक ही वक़्त में आते हैं." उन्होंने बताया, "हमारे दिनों में बच्चा गिराना आसान काम नहीं था. इसलिए ज़्यादातर लड़कियों को 11 बरस की उम्र होते-होते बच्चे हो जाते थे लेकिन अब औरतें बिना किसी हिचक के गर्भ निरोधक गोलियाँ लेती हैं और बच्चा गिरवाती भी हैं."
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हालांकि सोनीबेन का कहना है, "वाडिया की औरतों के लिए यौनकर्मी बनने के अलावा कोई और उपाय नहीं रहता है. उन्हें कोई काम भी नहीं देता है. अगर कोई काम दे भी देता है तो वह सोचता है कि हम उसे काम के बदले ख़ुद को सौंप देंगे."
रमेशभाई सरनिया की उम्र 40 साल है और वह वाडिया में किराने की एक दुकान चलाते हैं. रमेशभाई के विस्तृत परिवार के कुछ लोग देह व्यापार के पेशे से जुड़े हुए हैं लेकिन उन्होंने ख़ुद को इस पेशे से बाहर कर लिया. रमेशभाई ने किसी अन्य गाँव की एक आदिवासी लड़की से शादी भी की.

स्कूल नहीं

वाडिया गाँव
रमेशभाई कहते हैं, "वाडिया एक प्रतिबंधित नाम है. इस गाँव के बाहर हम में से ज़्यादातर लोग कभी यह नहीं कहते कि हम वाडिया से हैं नहीं तो लोग हमें नीची नज़र से देखेंगे. अगर आज कोई औरत अपने बच्चों ख़ासकर बेटियों की बेहतर ज़िंदगी की ख़्वाहिश रखती भी हैं तो उसके पास कोई विकल्प नहीं होता है."
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वह बताते हैं, "वहाँ शादी जैसी कोई परंपरा नहीं है. कोई अपने बाप का नाम नहीं जानता. ज़्यादातर लड़कियों का जन्म ही सेक्स वर्कर बनने के लिए होता है और मर्द दलाल बन जाते हैं. वाडिया के किसी बाशिंदे को कोई नौकरी तक नहीं देता है." रमेशभाई की तीन बेटियाँ और दो बेटे हैं. उन्होंने अपने बड़े बेटे को स्कूल भेजा लेकिन बेटियों को नहीं.
उनका कहना है, "कुछ गिने चुने परिवारों ने यह तय किया कि वे अपनी बेटियों को देह व्यापार में नहीं जाने देंगे. वे कभी भी अपनी बेटियों को नज़र से दूर नहीं करते, यहाँ तक कि स्कूल भी नहीं भेजते. गाँव में सक्रिय दलालों से ख़तरे की भी आशंका रहती है. सुरक्षा कारणों से मैं अपनी बेटियों को स्कूल तक जाने की इजाज़त नहीं दे सकता. वे केवल शादी के बाद ही घर से बाहर जा पाएंगी."

अग़वा का डर

वाडिया गाँव
रमेशभाई को हाल ही में नया गुर्दा लगाया गया है. उनकी पत्नी ने उन्हें किडनी दी है. रमेशभाई की तरह ही वाडिया गाँव में 13 से 15 परिवार ऐसे हैं जो कि देह व्यापार के पेशे में अपनी बेटियों को नहीं भेजते हैं. हालांकि गाँव की कई लड़कियों ने प्राइमरी स्कूल तक की तालीम हासिल की है लेकिन वाडिया में ऐसी कोई भी लड़की नहीं है जिसने छठी के बाद स्कूल देखा हो.
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क्योंकि कोई भी माँ-बाप अपनी बेटी को गाँव के बाहर इस डर से नहीं भेजना चाहते हैं कि कहीं दलाल उनकी बेटी को अग़वा न कर ले. ऐसा लगता है कि जैसे वाडिया को किसी की परवाह नहीं है. वाडिया की यौनकर्मियों के ख़रीदार समाज के सभी वर्गों से आते हैं. इनमें मुंबई से लेकर अहमदाबाद तक के कारोबारी हैं, पास के गाँवों के ज़मींदार हैं तो राजनेता भी और सरकारी अफ़सर भी.
वाडिया गाँव का ये पेशा राज्य सरकार की नाक के नीचे फलता फूलता रहा है. इस गाँव में एक पुलिस चौकी भी है लेकिन कोई पुलिसकर्मी शायद ही कभी यहाँ दिखाई देता है. हालांकि कुछ ग़ैर सरकारी संगठनों के अलावा शायद ही किसी ने वाडिया और उसकी औरतों के लिए सहानुभूति दिखाई हो.

सामाजिक समस्या

वाडिया गाँव
बांसकांठा के पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार यादव कहते हैं, "जब भी हमें ये ख़बर मिली कि गाँव में कोई देह व्यापार कर रहा है तो हमने वहाँ छापा मारा. लेकिन इसके बावजूद हम वहाँ वेश्यावृत्ति को पूरी तरह से नहीं रोक पाए हैं क्योंकि यह एक सामाजिक समस्या है. ज़्यादातर परिवार अपनी लड़कियों को इस पेशे में भेजते रहे हैं."
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हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की निगरानी बढ़ी है लेकिन दलालों और मानव तस्करों पर लगाम नहीं लगाई गई है. स्थानीय लोग बताते हैं कि ज़्यादातर गाँव वालों को पता होता है कि पुलिस कब आने वाली है और इन छापों का कोई नतीजा नहीं निकलता.
देह व्यापार में कमी के दावों को ख़ारिज करते हुए पड़ोस के गाँव में अस्पताल चलाने वाले एक डॉक्टर बताते हैं कि उनके पास कम उम्र की कई ऐसी लड़कियाँ और औरतें गर्भपात करवाने या फिर गुप्तांगों पर आई चोट की तकलीफ का निदान करवाने आती हैं. डॉक्टर ने अपना नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया कि उसने किशोर उम्र की लड़कियों को गर्भपात कराने में मदद की है.

लिंग परीक्षण

वाडिया गाँव
वह कहते हैं, "गर्भपात के लिए आई कई लड़कियों की हालत बेहद नाज़ुक होती हैं क्योंकि वे गर्भ ठहर जाने के बाद भी यौन संबंध बनाती रहती हैं. मैं जानता हूँ कि जो मैं कर रहा हूँ वो अनैतिक है लेकिन इस गाँव में कई लड़कियाँ डॉक्टरी इलाज के अभाव में मर जाती हैं."
डॉक्टर ने बताया कि दलाल कई बार इस बात पर ज़ोर देते हैं और कई बार तो धमकाते भी हैं कि मैं बच्चे के लिंग की जाँच करूं और अगर वो बेटी हो तो उसका गर्भपात न किया जाए.
उन्होंने कहा, "वे ये नहीं समझते कि एक 11 साल की लड़की बच्चे को जन्म नहीं दे सकती लेकिन उनके लिए एक लड़की आमदनी का केवल एक ज़रिया भर होती है. इसलिए मैं गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग के बारे में बता देता हूँ."
देह व्यापार से जुड़ी औरतों के लिए काम करने वाले ग़ैर सरकारी संगठन 'विचर्त समुदाय समर्पण मंच' से जुड़ी मितल पटेल कहती हैं कि किसी भी सरकारी एजेंसी ने वाडिया गाँव के लोगों के लिए सहानुभूति नहीं रखी. मुझे लगता है कि यह उनके हित में है कि वाडिया के लोगों के हालात वैसे ही बने रहें.
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बुधवार, 5 मार्च 2014

तेरा क्या होगा -ak@delhi49days.com





सीएम को लात मारकर पीएम की चाहत में केजरी



arvind kejriwal
अरविंद केजरीवाल
नेहा लालचंदानी,
 नई दिल्ली: अभी दिल्ली अधर में ही लटकी हुई है लेकिन आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में अपना दमखम जताने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। सारे नफे-नुकसान, आगे-पीछे को तौलने के बाद आम आदमी पार्टी ने मंगलवार को 2014 लोकसभा चुनाव में खड़े होने का फैसला ले लिया। हालांकि, यह तो नहीं कहा जा सकता कि पार्टी 543 सीटें हासिल कर बहुमत सिद्ध कर पाएगी, लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी अच्छी खासी संख्या में कैंडिडेट खड़े करेगी।

इसके लिए पार्टी ने एक नई सब कमिटी का गठन भी कर दिया है, जिसमें पार्टी की पॉर्लियामेंट्री अफेयर्स कमिटी के मेंबर योगेंद्र यादव और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह समेत कुछ अन्य सदस्य शामिल हैं। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बताया कि यह कमिटी न केवल अगले विधानसभा चुनाव, बल्कि लोकसभा चुनाव को भी ध्यान में रखते हुए प्रचार की योजना बनाएगी।

पार्टी में कुछ लोगों ने आशंका जताई थी कि अगर दिल्ली में दोबारा विधानसभा चुनाव होते हैं तो लोकसभा चुनाव आते-आते आम आदमी पार्टी की जेब कमज़ोर पड़ सकती है। लेकिन अंततः तय किया गया कि पार्टी की प्रसिद्धि अभी चरम पर है इसलिए यह मौका हाथ से जाने न दिया जाए और लोकसभा चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक पकड़ मज़बूत की जाए।

इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह चाहते हैं कि हरियाणा में वाड्रा-डीएलएफ डील का खुलासा करने वाले मशहूर IAS अफसर अशोक खेमका पार्टी का चेहरा बनें। हालांकि, खेमका इसपर टिप्पणी करने से बचते रहे। पार्टी रेत माफिया को एक्सपोज़ करने वाली अफसर दुर्गाशक्ति नागपाल से भी संपर्क करने की कोशिश कर रही है।

केजरीवाल ने कहा कि लोकसभा चुनाव को देखते हुए दिल्ली समेत देश की अलग-अलग जगहों पर नए लोगों को पार्टी से जोड़ने के लिए प्रचार अभियान चलाया जाएगा। पार्टी कॉरपोरेट्स, शिक्षाविद, यूथ, महिलाएं और सोशल एक्टिविस्ट्स से लेकर हर तबके के साफ सुथरी छवि वाले लोगों का सपोर्ट हासिल करने की कोशिश करेगी। अरविंद ने इस बात के भी संकेत दिए हैं कि दिल्ली में तो आम आदमी पार्टी सभी 7 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी और विधानसभा चुनाव में भी अपने ज्यादातर उन्हीं उम्मीदवारों को फिर से मैदान में उतारेगी, जिन्होंने इस बार चुनाव लड़ा था। पार्टी भी यह भी देखेगी कि देश के किन-किन हिस्सों में लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी अपने उम्मीदवारों को उतार सकती है। हालांकि केजरीवाल ने कहा कि यह हमारे अकेले के बस की बात नहीं है। इसके लिए हमें बहुत सारे लोगों के सहयोग की दरकार है। उन्होंने छोटी क्षेत्रीय पार्टियों के आप में विलय की संभावना से भी इनकार नहीं किया।

आप के सूत्रों का कहना है कि अगर दिल्ली में बीजेपी सरकार बना ले तो उन्हें फायदा होगा क्योंकि ऐसा होने से दिल्ली के री-इलेक्शन की तैयारी का बोझ पार्टी पर से कम हो जाएगा और वे लोकसभा चुनाव पर फोकस कर पाएंगे।

केजरीवाल ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि अगर दोनों चुनावों की डेट्स क्लैश होती हैं तो पार्टी को दोनों में से एक या दोनों को छोड़ने के बारे में सोचना पड़ सकता है। लेकिन, अगर ऐसा नहीं होता है तो आम आदमी पार्टी अन्य राजनीतिक दलों को कड़ी टक्कर देने में कामयाब होगी।

अरविंद का कहना है कि विधानसभा चुनाव में कई लोगों को यह संदेह था कि हम जीत भी पाएंगे कि नहीं। इसी वजह से कई लोगों ने आप के बजाय बीजेपी को वोट दिया। उनको भरोसा है कि अगले चुनाव में वो निश्चित तौर पर आम आदमी पार्टी को ही वोट देंगे। उन्होंने इस आशंका से इनकार किया है कि अगले चुनाव में आप को फायदे के बजाय उलटा नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनका कहना था कि अगले चुनाव में बीजेपी को और ज्यादा नुकसान होगा। उन्होंने कांग्रेस या बीजेपी के समर्थन से आम आदमी पार्टी के द्वारा सरकार बनाने की किसी भी तरह की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि हम अगले चुनाव की तैयारी कर रहे हैं।

अरविंद ने यह भी बताया कि दिल्ली में ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी को उम्मीद से काफी कम वोट मिले। इसके अलावा आप के वोट काटने के लिए कांग्रेस बीजेपी ने कई सीटों पर डमी कैंडिडेट खड़े किए थे और उन्हें जलती हुई टॉर्च के सिंबल पर चुनाव लड़वाया था। शाजिया इल्मी समेत पार्टी के कुछ उम्मीदवारों की हार के लिए उन्होंने चुनाव से पहले किए गए स्टिंग ऑपरेशन को जिम्मेदार ठहराया।

सोमवार, 3 मार्च 2014

क्या हुआगर बदनाम हुआ......








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आसाराम बापू

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आसाराम बापू
जन्म आसूमल सिरूमलानी
17 अप्रैल 1941 (आयु 72)
ग्राम बेराणी, नवाबशाह जिला, सिंध प्रान्त, पाकिस्तान
निवास अहमदाबाद, गुजरात, भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
संस्था संत श्री आसारामजी आश्रम
धर्म हिन्दू
जीवनसाथी लक्ष्मी देवी
संतान नारायण साईं (पुत्र)
भारती देवी (पुत्री)
माता - पिता महँगीबा (माँ)
थाऊमल सिरूमलानी (पिता)
जालपृष्ठ
आसाराम डॉट ऑर्ग
आसाराम बापू (पूरा नाम: आसूमल थाऊमल हरपलानी[1] अथवा आसूमल सिरूमलानी,[2] जन्म: 17 अप्रैल, 1941, नवाबशाह जिला, सिंध प्रान्त) भारत के एक कथावाचक, आध्यात्मिक गुरु एवं स्वयंभू सन्त हैं[3] जो अपने शिष्यों को एक सच्चिदानन्द ईश्वर के अस्तित्व का उपदेश देते हैं। उन्हें उनके भक्त प्राय: बापू के नाम से सम्बोधित करते हैं। आसाराम 400 से अधिक छोटे-बड़े आश्रमों के मालिक हैं। उनके शिष्यों की संख्या करोड़ों में है।
आसाराम बापू सामान्यतः विवादों से जुड़े रहे हैं जैसे आपराधिक मामलों में उनके खिलाफ दायर याचिकाएँ, उनके आश्रम द्वारा अतिक्रमण, 2012 दिल्ली दुष्कर्म पर उनकी टिप्पणी एवं 2013 में नाबालिग लड़की का कथित यौन शोषण। उन पर लगे आरोपों की पर्त एक के बाद एक खुलती जा रही है। आरोपों की आँच उनके बेटे नारायण साईं तक पहुँच चुकी है जो अभी भी फरार है। न्यायालय ने उन्हें न्यायिक हिरासत में रखने का निर्णय लिया है। फ़िलहाल आसाराम जोधपुर जेल की सलाखों के पीछे कैद हैं।

जीवनी

पूर्व जीवन

आसाराम का जन्म 17 अप्रैल 1941[4] को ब्रितानी भारत के नवाबशाह जिले के बेराणी गाँव में, जो अब पाकिस्तान में है, हुआ था। उनकी माँ का नाम महँगीबा एवं पिता का नाम थाऊमल सिरूमलानी था।[5][6] 1947 में भारत विभाजन के समय वे और उनके परिवार के सभी लोग भारतीय अधिराज्य के गुजरात राज्य के अहमदाबाद में स्थापित हो गये। धन-वैभव सब कुछ छूट जाने के कारण परिवार आर्थिक संकट के चक्रव्यूह में फँस गया। अहमदाबाद आने के बाद आजीविका के लिए थाऊमल ने लकड़ी और कोयले का व्यवसाय आरम्भ किया। परिस्थितियों में सुधार होने के बाद उन्‍होंने शक्कर का व्यवसाय भी शुरू किया।[7] पिता के निधन के बाद, उन्होंने अपनी माँ से ध्यान और आध्यात्मिकता की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने घर छोड़ दिया और देश भ्रमण पर निकल पड़े। भ्रमण करते-करते वे स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज के आश्रम वृन्दावन चले गये।[8]

व्यक्तिगत जीवन

अपने व्यक्तिगत जीवन में आसूमल ने लक्ष्मी देवी से विवाह कर लिया जिससे उनके एक पुत्र नारायण साईं और एक पुत्री भारती देवी उत्पन्न हुए।

आसूमल से आसाराम

वृन्दावन में गुरू से दीक्षा लेने के बाद आसूमल ने अपना नाम बदल कर आसाराम रख लिया और घूम घूम कर आध्यात्मिक प्रवचन के साथ-साथ स्वयं भी गुरु-दीक्षा देने लगे। उनके सत्संग कार्यक्रमों में श्रद्धालु भारी संख्या में पहुँवने लगे। लगभग 20,000 छात्र तो उनके अहमदाबाद में दिसम्बर 2001 में हुए सत्संग में ही पहुँचे थे।[9] अगस्त 2012 में गोधरा के समीप उनका हैलीकॉप्टर क्रैश हो गया जिसमें संयोग से आसाराम व पायलट सहित सभी यात्री सुरक्षित बच गये।[10] यद्यपि इस दुर्घटना में सभी का बच जाना महज एक संयोग था परन्तु उनके भक्तों ने इसे बापू का चमत्कार मान लिया। उसके बाद उनके सत्संग में शामिल होने वालों की संख्या दिन दूनी रात चौगुनी होती चली गयी।

विवादों में आसाराम

अगस्त 2013 में बापू आसाराम के ऊपर जोधपुर में उनके ही आश्रम में एक षोडशी (सोलह साल की) कन्या के साथ कथित अप्राकृतिक दुराचार के आरोप लगे।[11][12][13] दो दिन बाद नाबालिग कन्या के पिता ने दिल्ली जाकर पुलिस में इस काण्ड की रिपोर्ट दर्ज़ करायी। पुलिस ने बलात्कार पीड़िता का मेडिकल टेस्ट कराया और जब इस बात की पुष्टि हो गयी कि रिपोर्ट झूठी नहीं है तब उसने कन्या का कलमबन्द बयान लेकर सारा मामला राजस्थान पुलिस को ट्रान्सफर कर दिया।[14] आसाराम को पूछताछ हेतु 31 अगस्त 2013 तक का समय देते हुए सम्मन जारी किया गया। इसके बावजूद जब वे हाजिर नहीं हुए तो दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 342 (गलत तरीके से बन्धक बनाना), 376 (बलात्कार), 506 (आपराधिक हथकण्डे) के अन्तर्गत मुकदमा दर्ज़ करने हेतु जोधपुर की अदालत में सारा मामला भेज दिया।[15] फिर भी आसाराम गिरफ़्तारी से बचने के उपाय करते रहे। उन्होंने इन्दौर जाकर प्रवचन देना प्रारम्भ कर दिया। पण्डाल के बाहर गिरफ़्तारी को पहुँची पुलिस के साथ बापू के समर्थकों ने हाथापायी की।[16] आखिरकार रात के बारह बजे तक प्रतीक्षा करने के बाद जैसे ही 1 सितम्बर 2013 की तारीख आयी, राजस्थान पुलिस ने आसाराम को गिरफ़्तार कर लिया और विमान द्वारा जोधपुर ले गयी।[17][13] उन्होंने नाबालिग कन्या के सभी आरोपों को नकारते हुए[18] केन्द्र में सत्तारूढ़ काँग्रेस पार्टी की अध्यक्षा सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी पर ही उनके विरुद्ध साजिश रचने का प्रत्यारोप (उल्टा आरोप) लगा दिया।[19]

सलाखों के पीछे

फिलहाल आसाराम जोधपुर की जेल में बन्द हैं और जमानत के लिये प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने अपनी जमानत के लिये राम जेठमलानी को अपना वकील नियुक्त किया। राजस्थान उच्च न्यायालय में जेठमलानी द्वारा यह दलील दी गयी कि आरोप लगाने वाली लड़की बालिग है व मानसिक रूप से विक्षिप्त है तथा उनके मुवक्किल (आसाराम) को एक साजिश के तहत फँसाया गया है। टीवी चैनल पर यह समाचार देखते ही शाहजहाँपुर में रह रही पीड़ित बालिका ने आहत होकर अपने बाप से कहा कि वह अब जीना नहीं चाहती। पीड़िता के पिता ने कहा कि आसाराम को तो सजा न्यायालय से मिलेगी लेकिन उनकी बेटी पर मिथ्या आरोप लगाने वाले वकील को ईश्वर की अदालत में दण्ड मिलेगा।[20] बहरहाल, अदालत ने आगामी 1 अक्तूबर 2013 तक का वक्त जेठमलानी को सबूत जुटाने के लिये दिया।
1 अक्तूबर 2013 को न्यायाधीश निर्मलजीत कौर की अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि आसाराम बाल यौन शोषण (पीडोफीलिया) नाम की बीमारी से ग्रस्त हैं। इस सम्बन्ध में एक चिकित्सक का प्रमाण पत्र भी पेश किया गया। अभियोजन पक्ष के वकील का यह दावा जेठमलानी के उस दावे पर हुकुम का इक्‍का साबित हुआ जिसमें उन्‍होंने नाबालिग बच्‍ची को पुरुषों की ओर आकर्षित होने की बीमारी की दलील दी थी। पुख्ता सबूतों को देखते हुए जज ने आसाराम की जमानत याचिका खारिज कर दी।[21]
अदालत में मुकदमे की तफ्तीश के दौरान उन पर लगे आरोपों की पर्त एक के बाद एक खुलती जा रही है। आरोपों की आँच उनके बेटे नारायण साईं तक पहुँच चुकी है। वह अभी तक फरार है और पुलिस के हाथ नहीं आ रहा। इन हालात को देखते हुए न्यायालय ने उन्हें न्यायिक हिरासत में रखने का निर्णय लिया है। फ़िलहाल आसाराम जेल की सलाखों के पीछे ही रहेंगे।

सन्दर्भ

  1. ऊपर जायें "The Politics of Sex [सम्भोग की राजनीति]" (अंग्रेज़ी में). इण्डिया टुडे. 30 अगस्त 2013.
  2. ऊपर जायें प्रीति पंवार (29 अगस्त 2013). "Asaram Bapu's life journey from a tea seller to the spiritual guru [आसाराम बापू का एक चाय विक्रेता से आध्यात्मिक गुरु तक का सफर]" (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि: 1 सितम्बर 2013.
  3. ऊपर जायें "आध्यात्मिक गुरु आसाराम बापू को केआरके ने कहा- `राक्षस`". ज़ी न्यूज़. 22 अगस्त 2013. अभिगमन तिथि: 5 सितम्बर 2013.
  4. ऊपर जायें "Coal-seller Harpalani turned Asaram ‘bapu’ faces new allegations [कोयला विक्रेता हरपलानी से बने आसाराम 'बापू' का नये आरोपों से सामना]" (अंग्रेज़ी में). दैनिक भास्कर. 22 अगस्त 2013. अभिगमन तिथि: 5 सितम्बर 2013.
  5. ऊपर जायें जसीम खान (25 अगस्त 2013). "कैसे आसूमल थाऊमल हरपलानी बना आसाराम बापू?". एबीपी न्यूज़. अभिगमन तिथि: 5 सितम्बर 2013.
  6. ऊपर जायें "Asaram worked at a tea stall before he became a 'godman'" (अंग्रेज़ी में). आईबीएन7. 30 अगस्त 2013. अभिगमन तिथि: 5 सितम्बर 2013.
  7. ऊपर जायें दिगपाल सिंह (2 सितम्बर 2013). "जब मोदी से बोले आसाराम, ‘देखें तुम्‍हारी गद्दी कब तक और कैसे रहती है’". आज तक. अभिगमन तिथि: 5 सितम्बर 2013.
  8. ऊपर जायें "Asaram, Son Asked To Appear Before Commission By June 6 [आसाराम, पुत्र ने 6 जून तक आयोग के समक्ष पेश होने के लिए कहा]" (अंग्रेज़ी में). इण्डिया टीवी न्यूज़. 10 मई 2011. अभिगमन तिथि: 5 सितम्बर 2013.
  9. ऊपर जायें "Students throng at Asaram Bapu's discourse". December 2, 2001. अभिगमन तिथि: 7 सितम्बर, 2013.
  10. ऊपर जायें "Spiritual leader Asaram Bapu survives chopper crash". The Times of India. August 30, 2012. अभिगमन तिथि: 7 सितम्बर, 2013.
  11. ऊपर जायें "Rajasthan Police dispatches team to interrogate Asaram Bapu in rape case". India Today. August 26, 2013. अभिगमन तिथि: 2013-09-06.
  12. ऊपर जायें "After rape, Asaram Bapu threatened me to keep quiet, says girl". Financial Express. August 26, 2013. अभिगमन तिथि: 2013-09-06.
  13. इस तक ऊपर जायें: "Asaram Bapu brought to Jodhpur after late night arrest". NDTV. September 1, 2013. अभिगमन तिथि: 2013-09-06.
  14. ऊपर जायें "Asaram Bapu rape case: Medical test confirms sexual assault of victim". India Today. August 21, 2013. अभिगमन तिथि: 2013-09-06.
  15. ऊपर जायें "FIR registered by victim against Asaram Bapu reveals a horrific tale of sexual assault". India Today. August 31, 2013. अभिगमन तिथि: 2013-09-06.
  16. ऊपर जायें Singh, Mahim Pratap (August 31, 2013). "Asaram supporters attack on journalists condemned". The Hindu.
  17. ऊपर जायें "Indian guru Asaram Bapu arrested over rape claims". September 1, 2013.
  18. ऊपर जायें "Bakwaas: Asaram Bapu's response to charges that he threatened teen girl". NDTV. August 27, 2013.
  19. ऊपर जायें "Asaram Bapu says Sonia Gandhi and her son Rahul behind conspiracy against him in sexual assault case". India Today. August 29, 2013. अभिगमन तिथि: 2013-09-06.
  20. ऊपर जायें "आसाराम के वकील का बयान सुन पीड़िता बोली, पापा अब मैं जीना नहीं चाहती..". दैनिक जागरण. 19 सितम्बर 2013. अभिगमन तिथि: 19 सितम्बर 2013.
  21. ऊपर जायें "आसाराम को है बच्चों का यौन शोषण करने की बीमारी". हिन्दुस्तान, नई दिल्ली/जोधपुर. 2 अक्तूबर 2013. अभिगमन तिथि: 2 अक्तूबर 2013.

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बाहरी कड़ियाँ

मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

केजरीवाल : सड़क से सीेेएम तक





केजरीवालः समाजिक कार्यकर्ता से दिल्ली के मुख्यमंत्री तक

 सोमवार, 23 दिसंबर, 2013 को 11:52 IST तक के समाचार
अरविंद केजरीवाल
राजनेताओं और अफ़सरों की जुबान में झोला ब्रिगेड कहे जाने वाले एनजीओ सर्कल यानी स्वयंसेवी संस्थाओं में लोग अरविंद केजरीवाल को बरसों से जानते थे.
उनकी पहचान कभी अरुणा राय के जूनियर साथी के रूप में, तो कभी कुछ अलग पहचान बनाने में जुटे आरटीआई कार्यकर्ता और कभी मेगसेसे पुरस्कार से सम्मानित स्वयंसेवी के रूप में होती रही है.
लेकिन भारत के घर-घर में केजरीवाल की तस्वीर पहुंची टीवी स्क्रीन के प्राइम टाइम और अखबारों के पहले पन्ने पर चढ़ कर वर्ष 2011 में.
केजरीवाल हमेशा भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ने वाले अन्ना हज़ारे की बगल में बैठे दिखते, उनके कान में फुसफुसाते, उनके वाक्यों को सँभालते, और बात बिगड़ती देख उन्हें पत्रकारों के बीच में से उठाकर ले जाते दिखे.
अक्सर आधी बांह वाली कमीज़ पहनने वाले केजरीवाल दो साल पहले कहीं से लीडर नहीं लगते थे, लेकिन आज वो ऐसे खांटी नेता हैं जिसने सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी, दोनों की सत्ता की डगर को मुश्किल बना दिया.
भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के जो नेता उनको नेता नहीं मान रहे थे, वो आज आप से सीखने की बात कर रहे हैं. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वो आप से सीख लेंगे.
वहीं बीजेपी को भी मानना पड़ा कि उनकी जीत चौंकानेवाली थी.

तीसरा विकल्प

आम आदमी पार्टी
भले ही आम आदमी पार्टी को सरकार बनाने का फैसला लेने में वक्त लगा लेकिन केजरीवाल ने आखिरकार फैसला ले ही लिया. बारह महीने में ही उनके नए नए तैयार हुए राजनीतिक दल ने न सिर्फ दिल्ली की राजनीतिक में बलचल मचा दी है बल्कि बड़े राजनीतिक दलों को चिंता में डाल दिया है.
कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी दिल्ली के बाहर के उन वोटरों के लिए एक विकल्प बन सकती है जो लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस में ही किसी एक को चुनने को मजबूर थे.
एक वक्त दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित आम आदमी पार्टी को कोई तवज्जो तक देने को तैयार नहीं थीं. वो तो इसे अभी राजनीतिक पार्टी मानने को भी तैयार नहीं थी.
जब अरविंद केजरीवाल ने राजनीति में उतरने के लिए अन्ना हजारे से अपने रास्ते अलग कर लिए थे तो बहुत से लोगों ने कहा था कि वो अन्ना हजारे के बिना कुछ नहीं कर पाएंगे.

सिस्टम की 'सफ़ाई'

अरविंद केजरीवाल
इससे पहले केजरीवाल ने विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों में मुहिम चलाई.
केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के इन मामलों को तब उठाया जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार पर एक के बाद एक घोटालों का आरोप लग रहे थे. हालांकि उनके आलोचक कहते हैं कि वो सस्ती लोकप्रियता के लिए ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं.
लेकिन इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि अरविंद केजरीवाल ने चुप्पी की एक संस्कृति को तोड़ा है. जो उनके मन में था, उसे वो ज़ुबान पर लाए हैं.
अरविंद केजरीवाल ये कहते हुए साल भर पहले राजनीति के मैदान में कूदे कि - “देश को बेचा जा रहा है और सभी पार्टियां इसके लिए दोषी हैं. हमें ये सिस्टम साफ़ करना होगा.”
पूर्व नौकरशाह अरविंद केजरीवाल को सामाजिक कार्य और भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए मुहिम चलाने के लिए 2006 में रामन मेगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
वर्ष 2010 में उन्होंने भ्रष्टाचार के विरोध में 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' की स्थापना की, जिसका मकसद सरकार पर भ्रष्टाचार विरोधी कड़े कानून बनाने के लिए दबाव डालना था.
लेकिन 45 वर्षीय केजरीवाल सुर्खियों में तब आए जब उन्होंने अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में पर्दे के पीछे अहम भूमिका निभाई.

आईआईटी से इंजीनियरिंग की

आम आदमी पार्टी के नेता
भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन का चेहरा बेशक 74 वर्षीय अन्ना हजारे रहे, लेकिन इसकी सफलता के पीछे जिन लोगों ने अहम भूमिका निभाई उनमें टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल का खासा योगदान रहा.
हरियाणा के हिसार में साल 1968 में जन्मे केजरीवाल ने आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की थी.
कुछ दिनों तक निजी क्षेत्र के टाटा समूह के साथ काम किया और फिर वो वर्ष 1992 में राजस्व अधिकारी के तौर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हो गए.
केजरीवाल ने वर्ष 2006 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और पब्लिक कॉज़ रिसर्च फाउंडेशन के नाम से एक गैर सरकारी संगठन की स्थापना की थी. इसके साथ ही उन्होंने सरकारी तंत्र में पारदर्शिता को बढ़ावा देने और सूचना के अधिकार के प्रति जागरुकता पैदा करने का अभियान शुरू कर दिया.
अंग्रेजी पत्रिका कारवाँ में छपे एक लेख के मुताबिक खुद केजरीवाल को भ्रष्टाचार की वजह से कभी कोई कष्ट नहीं झेलना पड़ा है.
इस लेख में कहा गया है कि “वरिष्ठ अधिकारी की अच्छी खासी नौकरी छोड़ने और सामाजिक कार्यकर्ता बनने की वजह कोई रोष या कड़वाहट नहीं थी. लेकिन सरकारी तंत्र में दस साल तक काम करने के बाद उनका इसमें भरोसा नहीं रहा.”

'दिन गिनना शुरू करो'

आम आदमी पार्टी
राजनीति के मैदान में आने के बाद केजरीवाल जनता को सत्ता के हस्तांतरण, भ्रष्चार से लड़ने, महंगाई को काबू करने और किसानों को उनकी उपज का उचित दाम दिलवाने की बात कर रहे हैं.
अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा था, “आज से आम लोग राजनीति में दाखिल हो रहे हैं, भ्रष्ट नेताओं, अपने दिन गिनना शुरू कर दो.”
अरविंद केजरीवाल राजनीति के पहले दौर में तो सफल हो गए हैं अब उनपर जिम्मेदारी और साथ ही बोझ होगा जनता को किए गए वादे को पूरा करने का. अगर वो सफल हो जाते हैं तो कहा जाएगा कि वाकई एक आम आदमी भी ठान ले तो राजनीतिक में बदलाव ला सकता है.
और अगर उनके हाथ नाकामी लगती है, तो इसे उसी गणतांत्रिक प्रक्रिया का एक अंग माना जाएगा जहां लोकतंत्र चुनाव के साथ शुरू होता है और उनमें जीत दर्ज करने के बाद समाप्त हो जाता है.
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