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दिल्ली भले ही देश का दिल हो, मगर इसके दिल का किसी ने हाल नहीं लिया। पुलिस मुख्यालय, सचिवालय, टाउनहाल और संसद देखने वाले पत्रकारों की भीड़ प्रेस क्लब, नेताओं और नौकरशाहों के आगे पीछे होते हैं। पत्रकारिता से अलग दिल्ली का हाल या असली सूरत देखकर कोई भी कह सकता है कि आज भी दिल्ली उपेक्षित और बदहाल है। बदसूरत और खस्ताहाल दिल्ली कीं पोल खुलती रहती है, फिर भी हमारे नेताओं और नौकरशाहों को शर्म नहीं आती कि देश का दिल दिल्ली है।

शनिवार, 28 फ़रवरी 2015

आजादी के बाद के भारत का संक्षिप्त इतिहास








प्रस्तुति-- रिद्धि सिन्हा नुपूर , शैली सिन्हा


अनुक्रम

  • 1 १९४७ से १९५०
  • 2 १९५० से १९७०
  • 3 १९७० से १९८०
  • 4 १९८० से १९९०
  • 5 १९९० से २०००
  • 6 २००० से २०१०
  • 7 २०१० से अब तक
  • 8 इन्हें भी देखें
  • 9 बाहरी कड़ियाँ

१९४७ से १९५०

  • देश आजाद: १४ अगस्त १९४७ को जैसे ही घड़ी की सुई मे रात के १२ बजे, प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू ने देश के स्वतंत्र होने की घोषणा की।
  • शोक की लहर: ३० जनवरी १९४८ को उस समय सारे देश में शोक की लहर दौड़ गई, जब नाथूराम गोड्से ने महात्मा गांधी की हत्या कर दी।
  • भारत-पाकिस्तान के बीच प्रथम युद्ध: देश विभाजन के बाद नए पड़ोसी बने पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया। यह लड़ाई ३१ दिसम्बर १९४८ को समाप्त हुई और इसमें दोनों देशों के लगभग १५००-१५०० सैनिक मारे गए तथा पाकिस्तान ने कश्मीर के एक भूभाग पर अधिकार कर लिया।
  • भारत बना गणतंत्र: संविधान सभा द्वारा १९४९ में पारित किए जाने के बाद २६ जनवरी १९५० को पहली बार देश का संविधान स्वीकार किया गया।
  • जेल की बैरक में आईआईटी की स्थापना: सन् १९५० में पश्चिम बंगाल के खड़गपुर के निकट हुबली जेल के परिव्यक्त बैरक में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के रूप में देश के पहले तकनीकी उच्च शिक्षा संस्थान की नींव डाली गई।

१९५० से १९७०

  • भाषाई आधार पर राज्यों का गठन: अलग तेलुगू राज्य की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद १९५३ में पहली बार भाषाई आधार पर आंध्रप्रदेश राज्य का गठन किया गया।
  • वामपंथ का उदय: सन् १९५४ में शीत युद्ध के दौर से गुजर रहे विश्व के समक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू ने गुटनिरपेक्षता का सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसे बाद में यूगोस्लाविया के मार्शल टीटो, इंडोनेशिया के सुकर्णो और मिस्त्र के गमाल अब्दुल नासिर ने अंगीकार करते हुए गुटनिरपेक्ष आंदोलन को जन्म दिया।
  • भारत-चीन युद्ध: २० अक्टूबर १९६२ को पड़ोसी चीन ने विश्वासघात करते हुए अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख की सीमा पर धावा बोल दिया। इस युद्ध में भारत की शर्मनाक हार हुई और चीन ने अक्साई चिन पर अधिकार कर लिया।
  • पंडित नेहरू का देहांत: पक्षाघात का शिकार होने के बाद सन् १९६४ में पंडित नेहरू का निधन हो गया और प्रधानमंत्री की कुर्सी उनकी पुत्री इंदिरा गांधी के स्थान पर लाल बहादुर शास्त्री को प्राप्त हुई।
  • इंदिरा बनीं प्रधानमंत्री: ११ जनवरी १९६६ को ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद इंदिरा गांधी भारत की प्रथम महिला प्रधानमन्त्री बनीं।
  • हरित क्रांति का जन्म: सन् १९६७ से लेकर १९७८ तक चली हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बना दिया।
  • आईटी क्रांति: १९६८ में टाटा कन्सल्टन्सी सर्विसिज़ की स्थापना से भारत नई ऊँचाई पर पहुंचा दिया।
  • बैंकों का राष्ट्रीयकरण और प्रिवी पर्स का उन्नमूलन: १९ जुलाई १९६९ को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया और साथ ही, उन्होंने लगभग ४०० रजवाड़ों को आजादी के समय से ही मिल रहे खैरात (प्रिवी पर्स) को बंद कर दिया।

१९७० से १९८०

  • भारत-पाक के मध्य तीसरा युद्ध: सन् १९७१ में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान आपस में भिड़ गए। परिणामस्वरूप एक नए देश बांग्लादेश(२५ दिसम्बर १९७१) का जन्म हुआ। शिमला समझौते के अंतर्गत दोनों देशों के बीच शांति स्थापित हुई।
  • चिपको आन्दोलन का जन्म: सन् १९७३ में उत्तराखंड राज्य के कुछ ग्राम वासियों ने वनों को काटने से बचाने के लिए एक अनोखे आंदोलन आरंभ किया, जिसमें वे पेड़ से चिपक जाते थे।
  • पहला परमाणु परीक्षण: १८ मई १९७४ को राजस्थान के पोखरण में भारत ने पहली बार सफल परमाणु परीक्षा किया। इस मिशन का नाम बुद्धा स्माइल्स रखा गया।
  • शोले की रिकार्ड तोड़ सफलता: १९७५ में रमेश सिप्पी द्वारा निर्देशित चलचित्र शोले ने बालीवुड नया कीर्तिमान रचा और उस समय तक का यह सर्वश्रेष्ठ चलचित्र घोषित किया गया।
  • अन्तरिक्ष में भारत: १९ अप्रैल १९७५ को पहले भारतीय उपग्रह आर्यभट्ट का सफल प्रक्षेपण।
  • आपातकाल की घोषणा: जून १९७५ में इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की।
  • टीकाकरण अभियान की शुभारंभ: १९७८ में सभी शिशुओं और गर्भवती महिलाओं को डिप्थीरिया, पोलियो, टिटनेस और कुकुरखांसी से बचाने के लिए टीकाकरण का सघन अभियान छेड़ा गया।
  • मदर टेरेसा को नोबेल पुरस्कार: अपने जीवन का अधिकांश भाग कलकत्ता की मलिन बस्तियों में रहने वाले गरीबों की सेवा में गुजार देने वाली मदर टेरेसा को सन् १९७९ में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

१९८० से १९९०

  • एशियाई खेलों का सफल आयोजन: सन् १९८२ में भारत में दूसरी बार एशियाई खेलों का सफल आयोजन किया गया, जो कि पिछली बार की अपेक्षा कहीं बड़े पैमाने पर रहा और साथ ही इसी वर्ष रंगीन टीवी भी भारत आया।
  • भारत बना क्रिकेट विश्व चैंपियन: १९८३ में खेलों की दुनिया में सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए भारत ने कपिल देव की कप्तानी मे वेस्ट इंडीज को हराकर क्रिकेट विश्व कप अपने नाम कर लिया।
  • ऑपरेशन ब्लूस्टार: जून १९८४ में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्देश पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में जरनैल सिंह भिंडरावाले के नेतृत्व में घुसे खालिस्तानी आतंकवादियों को निकाल बाहर करने के लिए सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया।
  • अंतरिक्ष में प्रथम भारतीय: अप्रैल १९८४ में भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और सफलता प्राप्त की, जब पहला भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा, जो भारतीय वायुसेना के एक पायलट थे, अंतरिक्ष पहुंचे।
पहला भारतीय अंतरिक्ष यात्री, राकेश शर्मा।
  • इंदिरा गांधी की हत्या: ३१ अक्टूबर १९८४ को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही सिख अंगरक्षकों ने गोली मारकर हत्या कर दी। इस हत्या को ऑपरेशन ब्लू स्टार के प्रतिकार के रूप में देखा गया। (यह केवल कुछ इतिहासकारो की राय है)। इंदिरा गांधी की हत्या के हुए सिक्ख विरोधी दंगों में २,००० से अधिक लोग मारे गए।
  • एवरेस्ट विजय: २३ मई १९८४ को बचेंद्री पाल विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाली भारत की पहली और विश्व की पांचवीं महिला बनीं।
  • भोपाल गैस त्रासदी: ३ दिसम्बर १९८४ को विश्व का सर्वाधिक भीषण औद्योगिक दुर्घटना सामने आई, जब मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में यूनियन कार्बाइड के कारखाने में गैस का रिसाब होने से लगभग ३,००० लोग अकाल मृत्यु का शिकार बने।
भोपाल गैस कांड स्मारक।
  • सड़क पर उतरी मारुति: १९८४ में ८०० सीसी की मारुति कार लांच हुई, जिसने देश में वाहन क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया।
  • शाह बानो मामला: इस विवादास्पद मामले में उच्चतम न्यायालय ने मुस्लिम बोर्ड के निर्णय को पलटते हुए शाह बानो को गुजारा भत्ता देने को कहा लेकिन कट्टरपंथी मुस्लिम कार्यकर्ताओं के दबाव के आगे राजीव गांधी सरकार ने उच्चतम न्यायालय के निर्णय को प्रभावहीन बनाया।
  • कनिष्क बमकांड: २३ जून १९८५ को बब्बर खालसा के आतंकवादियों ने आयरलैंड से टोरंटो आ रहे एयर इंडिया के विमान को बम से उड़ा दिया, जिसमें सवार सभी ३२९ यात्री मारे गए।
  • असम समझौता: १९८५ में राजीव गांधी सरकार और असम के चरमपंथी गुटों में ऐतिहासिक समझौते से यह आस बंधी थी कि इस राज्य में शांति हो जाएगी, लेकिन ऐसा पूरी तरह संभव नहीं हो सका।
  • भारत-श्रीलंका शांति समझौता: भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी और श्रीलंका के राष्ट्रपति जेआर ने १९८७ में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता एक भूल साबित हुआ और इसके चलते श्रीलंका में हिंसक आंदोलन जोर पकड़ने लगा।
  • मताधिकार की आयु सीमा घटी: १९८८ में राजीव गांधी सरकार ने मतदान के लिए न्यूनतम आयु सीमा २१ वर्ष से घटाकर १८ वर्ष कर दी।
  • पृथ्वी प्रक्षेपास्त्र का सफल परीक्षण: भारत ने पूर्णतया स्वदेशी तकनीक पर आधारित बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र का १९८८ में सफल परीक्षण किया।
  • आरक्षण का पेंच: अगस्त १९९० में तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए २७ प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू कर दिया।

१९९० से २०००

  • राजीव गांधी की हत्या: २१ मई १९९१ को तमिलनाडु के श्रीपेराम्बदुर में लिट्टे की आत्मघाती हमलावर धनु ने राजीव गांधी की हत्या कर दी।
  • आर्थिक उदारीकरण: १९९२ में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव और वित्त मंत्री डॉ॰ मनमोहन सिंह ने देश में आर्थिक सुधारों का नया दौर आरंभ किया।
  • सत्यजीत राय को ऑस्कर अवार्ड: विश्व सिनेमा को यादगार फिल्में देने वाले निर्माता-निर्देशक सत्यजीत राय को १९९२ में ऑस्कर का लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया।
  • प्रतिभूति घोटाला: शेयर बाजारों में नियोजित तरीके से तेजी लाकर शेयरधारकों के करोड़ों रुपए का वारा-न्यारा करने का खेल पहली बार जगजाहिर हुआ। इस पूरे प्रकरण में हर्षद मेहता नामक व्यक्ति की सबसे बड़ी भूमिका थी।
  • बाबरी विध्वंस: ६ दिसम्बर १९९२ को अयोध्या में विवादास्पद बाबरी ढांचे को भीड़ ने ढहा दिया। जिसकी प्रतिक्रिया में देश सांप्रदायिक दंगों की आग धधकने लगा था।
  • मुंबई बमकांड: बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की घटना के बाद मुंबई(१९९३) में श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट हुए, जिसमें लगभग २५० लोग मारे गए।
  • सुष्मिता को ब्रह्मांड सुंदरी का ताज: सुष्मिता सेन ब्रह्मांड सुंदरी का ताज पहनने वाली भारत की पहली महिला बनीं।
  • सेलफोन की शुरूआत: १९९५ में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु और केंद्रीय संचार मंत्री सुखराम ने सेलफोन पर पहली बार बात करते हुए देश में मोबाइल सेवा की शुरूआत की।
  • इंटरनेट युग का आरंभ: १९९५ में विदेश संचार निगम लिमिटेड (वीएसएनएल) ने देश के छह नगरों में इंटरनेट सेवा का शुभारंभ किया।
  • पोखरण-2: अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के शासनकाल में भारतीय वैज्ञानिकों ने ११-१३ मई १९९८ में पोखरण में पांच परमाणु परीक्षण किए। पाकिस्तान ने भी प्रतिकार स्वरूप २८ मई १९९८ में छह परमाणु परीक्षण कर डाले।
  • अमर्त्य सेन को नोबेल पुरस्कार: १९९८ में अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • भारत-पाक बस सेवा: १९९९ में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत-पाकिस्तान के बीच बस सेवा आरंभ की।
  • कारगिल की लड़ाई: जुलाई, १९९९ में भीरतीय सेना को कारगिल में पाकिस्तानी सेना की घुसपैठ की जानकारी मिली। जिसके बाद भारतीय सेना ने घुसपैठियों के विरुद्ध कार्रवाई आरंभ कर दी। इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप पाकिस्तानी सेना और घुसपैठिये पीछे हटे।
  • मैच फिक्सिन्ग: अप्रैल, २००० में क्रिकेट में मैच फिक्सिन्ग् उजागर होने से क्रिकेट की दुनिया में तहलका मचा। दिल्ली पुलिस ने दक्षिण अफ्रीका के कप्तान हेन्स क्रोनिये के विरुद्ध इस संबंध में मामला दर्ज किया।

२००० से २०१०

  • भारतीय संसद भवन पर हमला: १३ दिसम्बर २००१ को आतंकवादियों ने संसद भवन पर हमला किया, लेकिन देश के बहादुर सिपाहियों ने अपनी प्राणों की आहुति देकर भी आतंकवादियों के इरादों को विफल कर दिया।
  • तहलका कांड: तहलका डॉटकॉम ने स्टिंग ऑपरेशन के द्वारा रक्षा सौदों के लिए सांसदों और सैन्य अधिकारियों को घूस लेते हुए उजागर किया।
  • गोधरा जनसंहार: गुजरात के गोधरा में २७ फ़रवरी २००२ को हिंदू तीर्थयात्रियों से भरी एक ट्रेन की बोगी को कुछ असामाजिक तत्वों ने जला डाला और जिसकी प्रतिक्रिया स्वरूप अगले ही दिन पूरे राज्य में दंगे भड़क उठे।
  • कल्पना चावला का दुखद अंत: अंतरिक्ष पर पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला कल्पना चावला की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा ही उनकी अंतिम यात्रा साबित हुई। ३ फ़रवरी २००३ के दिन पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते समय कोलंबिया शटल यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और कल्पना सहित इसमें सवार सातों अंतरिक्ष यात्री मारे गए।
  • सहवाग बनें `मुल्तान का सुल्तान´: २००४ में पाकिस्तान के विरुद्ध मुल्तान टेस्ट में सहवाग शानदार तिहरा शतक जमाने वाले पहले क्रिकेटर बने।
  • भारत-अमेरिका परमाणु समझौता: २००५ में भारतीय प्रधानमंत्री डॉ॰ मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने ऐतिहासिक असैन्य परमाणु सहयोग संधि पर हस्ताक्षर किए।
  • सूचना का अधिकार: २००५ के सूचना के अधिकार कानून ने सरकारी बाबुओं को जवाबदेह बनाया।
  • ११/७, मुंबई की उपनगरीय रेलों में श्रृंखलाबद्ध बम विस्फ़ोट: ११ जुलाई २००६ को एक बार फिर मुंबई आतंकवादियो के निशाने पर आ गई। शाम के समय अपने घरों को लौट रहे लोकल ट्रेन के खचाखच भरे डिब्बों में २० मिनट के अंतराल पर हुए सात बम धमाको में २५० लोग मारे गए।
  • टाटा ने कोरस को खरीदा: २००७ में किसी भारतीय कंपनी द्वारा अब तक के सबसे बड़े अधिग्रहण के रूप में टाटा स्टील ने एंग्लो-डच कंपनी कोरस को खरीद लिया।
  • पहली महिला राष्ट्रपति: महाराष्ट्र की पहली महिला राज्यपाल बनने वाली प्रतिभा पाटील ने २५ जुलाई २००७ को देश की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की।
  • मुंबई २६/११: एक बार फिर राष्ट्र की वित्तीय राजधानी पर आतंकवादियों का हमला। बुधवार, २६ नवम्बर २००८ की रात लगभग १० पाकिस्तानी आतंकवादी आधुनिक हथियारों से युक्त होकर चर्चगेट स्टेशन, कामा अस्पताल और ताज और ओबेरॉय-ट्रायडैन्ट में घुसे। ३ दिन तक चले कमांडो ऑपरेशन में २०० से अधिक लोग मारे गए और १० में से नौ आतंकवादी भी। एक आतंकवादी, अजमल कसाब को जीवित पकड़ लिया गया।

२०१० से अब तक

  • भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना हजारे का आन्दोलन : अगस्त २०११ में

इन्हें भी देखें

  • भारत का संक्षिप्त इतिहास (स्वतंत्रता-पूर्व)
  • भारत का आर्थिक इतिहास
  • भारत का इतिहास

बाहरी कड़ियाँ

  • भारत का इतिहास
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  • इतिहास

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आम बजट 2015-16 की खास बातें



आंकडों के जाल में गोलमाल 

प्रस्तुति--अखौरी प्रमोद, रुपेश कुमार 

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आम बजट 2015-16 की मुख्य विशेषताएं
ज़ी मीडिया ब्‍यूरो
नई दिल्ली : वित्त मंत्री अरुण जेटली शनिवार को ओर से लोकसभा में प्रस्तुत आम बजट के मुख्य इस प्रकार हैं :
- इस साल इनकम टैक्‍स की छूट की सीमा नहीं बढ़ेगी।
-इनकम टैक्‍स छूट सीमा में कोई बदलाव नहीं, पुराना टैक्‍स स्‍लैब ही लागू होगा।
-कॉरपोरेट टैक्‍स दर को अगले 4 साल में घटाकर 30 फीसदी से 25 फीसदी किया जाएगा।
-एक करोड़ से ज्‍यादा आय वालों पर दो फीसदी अतिरिक्‍त टैक्‍स लगाया जाएगा।
-वेल्‍थ टैक्‍स खत्‍म, सुपर रिच कैटेगरी पर लगेगा दो फीसदी सरचार्ज।
- कर छूटों को युक्तिसंगत बनाया जाएगा।
-सर्विस टैक्‍स में बढ़ोतरी, तकरीबन हर चीज होगी महंगी।
- हेल्‍थ इंश्‍योरेंस में छूट सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25000 रुपये की गई।
- पेंशन फंड पर छूट सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये की गई।
- वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए हेल्‍थ इंश्‍योरेंस 20000 से बढ़ाकर 30000 करोड़ रुपये किया गया।
- यात्रा भत्‍ता की टैक्‍स छूट सीमा 800 रुपये से बढ़ाकर 1600 रुपये की गई।
- एक लाख से ज्‍यादा की खरीद पर पैन नंबर बताना जरूरी होगा।
-2016 से लागू किया जाएगा जीएसटी।
- रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया पर जोर।
- शहरी आवास के लिए 22407 करोड़ रुपये का प्रावधान।
- विदेश में कालाधन छिपाने पर सात साल की सजा।
- कालेधन के दोषियों को दस साल की सजा।
- कालेधन रखने वालों पर सरकार का बडा ऐलान।
- बेनामी संपत्तियों को जब्‍त करने पर कानून बनेगा।
- कॉरपोरेट टैक्‍स दर को अगले 4 साल में घटाकर 30 फीसदी से 25 फीसदी किया जाएगा।
- रक्षा क्षेत्र के लिए 2.46 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान।
- नमामि गंगे के लिए 4173 करोड़ रुपये का प्रावधान।
- बिहार और पश्चिम बंगाल को आंध्र प्रदेश जैसी ही मदद दी जाएगी।
- आईएसएम धनबाद को आईआईटी का दर्जा देंगे।
- 20000 गांवों में सौर ऊर्जा पहुंचाने का लक्ष्‍य।
- 80000 सीनियर सेंकेडरी स्‍कूल खोलने का लक्ष्‍य।
-कालाधन रोकने के लिए कैश ट्रांजेक्‍शन को बढ़ावा।
- वीजा ऑन अरावइल में 150 देशों को शामिल करेंगे।
- विदेशी निवेश के नियम सरल बनाएंगे।
- गोल्‍ड अकाउंट खोलने की योजना और बदले में ब्‍याज मिलेगा।
- राष्‍ट्रीय स्किल मिशन योजना की शुरुआत।
- पीएम विद्या लक्ष्‍मी योजना में छात्रों को एजुकेशन लोन। गरीब छात्रों को मिलेगा कर्ज।
- बिहार में एम्‍स जैसे नए संस्‍थान बनाने का प्रस्‍ताव।
- जेएंडके, पंजाब, तमिलनाडु, हिमाचल, असम में नए एम्‍स बनाए जाएंगे।
- कर्नाटक में आईआईटी खोला जाएगा।
- विदेशी निवेश को सरल बनाया जाएगा।
-कृषि सिंचाई योजना में तीन हजार करोड़ रुपये बढ़ाएंगे।
- अगले साल से 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होंगी।
- फेमा नियमों में बदलाव का प्रस्‍ताव।
- मनरेगा में पांच हजारा करोड़ रुपये की राशि बढ़ेगी।
- सेबी और एफएमसी का विलय किया जाएगा।
- डायरेक्‍ट टैक्‍स प्रणाली लागू किया जाएगा।
- कर्मचारियों को ईपीएफ या पेंशन स्‍कीम चुनने का विकल्‍प दिया जाएगा।
- ईपीएफ या पेंशन स्‍कीम को लागू किया जाएगा।
- नकद लेन देन को कम करने के लिए डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड का इस्‍तेमाल बढ़ाया जाएगा।
- गोल्‍ड अकाउंट खोलने की योजना से ब्‍याज मिलेगा।
- विदेशी सोने की सिक्‍कों की जगह देशी सोने की सिक्‍कों का चलन बढ़ेगा।
- 4000 मेगावाट के 5 अल्‍ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्‍ट शुरू होंगे।
-टैक्‍स फ्री इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बॉन्‍ड का ऐलान1
- विदेशी मुद्रा भंडार 340 बिलियन डॉलर
- सरकार ने बढ़ाया निवेश का माहौल
- चालू खाते का घाटा 1.3 फीसदी से कम रहने की उम्मीद
- सरकार की तीन बड़ी उपलब्धियां- 1. जन-धन योजना 2. पारदर्शी कोल ब्लाक नीलामी 3.स्वच्छ भारत अभियान
- 50 लाख शौचालय का निर्माण हो चुका है
- हमारा लक्ष्य 6 करोड़ शौचालय बनाने का
- सब्सिडी पहुंचाने के लिए JAM का उपयोग
- सभी योजनाएं गरीबी केंद्रित होनी चाहिए
- 2022 तक 2 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य
- 2015-16 में 8 फीसदी विकास दर का लक्ष्य
- प्रधानमंत्री बीमा योजना लागू होगी।
- 2020 तक सभी गांवों तक बिजली पहुंचाएंगे।
- 2022 तक गरीबी उन्‍मूलन का लक्ष्‍य।
- 2022 तक दो करोड़ घर को पूरा करने का लक्ष्‍य।
- हर गांव को संचार नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश
- एक लाख किलोमीटर तक सड़क बनाने का लक्ष्‍य।
-निर्भया कोष में अतिरिक्‍त 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान।
- सब्सिडी के लिए जेएएम आधार बनेगा।
- समावेशी विकास के लिए पूर्वोत्‍तर राज्‍यों पर जोर।
- मोदी सरकार के लिए जन धन योजना बड़ी उपलब्धि।
- 5300 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के लिए आवंटित
- 250000 करोड़ रुपये किसानों को नाबार्ड के गठित फंड के जरिये मिलेंगे।
- उच्‍च आय वर्ग वाले लोग एलपीजी सुविधा न लें।
-मनरेगा के लिए 34600 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
- 15000 करोड़ रुपये आरईबी योजना में लागू होगा।
- गांववालों को कर्ज देने के लिए पोस्‍ट ऑफिस का सहरा लिया जाएगा।
- पीएम बीमा योजना के तहत हर नागरिक को बीमा
- 12 रुपये प्रीमियम पर हर साल दो लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा
- पीएम बीमा योजना शुरू करने का ऐलान
- जीडीपी 7.4 फीसदी रहने का अनुमान
- अल्‍पसंख्‍यक युवाओं की शिक्षा के लिए नई मंजिल योजना लॉन्‍च योजना करेंगे
- अटल पेंशन योजना शुरू की जाएगी, इसके तहत 60 साल के बाद पेंशन मिलेगी। 1000 रुपये सरकार देगी और 1000 रुपये दावेदार देंगे।
- बीपीएल बुजुर्गों के लिए पीएम बीमा योजना।
- जन धन योजना में दो लाख रुपये का दुर्घटना बीमा मिलेगा।
-जन धन योजना के तहत पेंशन भी मिलेगी।
-जन धन योजना से डाकघरों को जोड़ने का प्‍लान।
-अगले वित्त वर्ष से चार वर्षो में कारपोरेट कर को 30 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव।
-बचत सुगम बनाने के लिए करदाता को व्यक्तिगत छूट जारी करेगी।
-कालेधन के सृजन और उसे छिपाने के कृत्य से प्रभावी और कठोरतापूर्वक निपटा जाएगा।
-इस मामले में स्विस अधिकारियों के साथ बातचीत के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं।
-कालेधन पर महत्वपूर्ण नए कानून।
- देश में विनिर्माण इकाईयों का विकास और निवेश तथा संवर्धन उपलब्ध कराना ताकि उनमें रोजगार सृजन हो सके।
-एंबुलेंस के चेसिस पर उत्पाद शुल्क को 24 प्रतिशत से घटाकर 12.5 प्रतिशत किया गया।
- कर प्रक्रियाओं का सरलीकरण।
- वार्षिक रूप से एक करोड़ से अधिक कर योग्य आय वाले लोगों पर 2 प्रतिशत का अतिक्त अधिभार।
-घरेलू अंतरण मूल्य निर्धारण की प्रारंभिक सीमा पांच करोड़ रुपए से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए की गई।
-नशीले पदार्थो के दुरुपयोग के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय निधि में किया गया अनुदान आयकर अधिनियम की धारा 80जी के अंतर्गत 100 प्रतिशत छूट।
-स्वच्छ भारत कोष और स्वच्छ गंगा निधि में सीएसआर में अंशदानों के लिए 100 प्रतिशत की कर छूट।
-स्वच्छ पर्यावरण पहलों के लिए वित्त पोषण के लिए कोयला आदि पर स्वच्छ ऊर्जा उप कर को 100 रुपए से बढ़ाकर 200 रुपए प्रति मीट्रिक टन किया गया।
-नौ महीनों में देश कामयाबी की छलांग लगाते हुए 7.4 प्रतिशत के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद के साथ अब नई श्रृंखला में विश्व की सबसे तेजी से उभरने वाली अर्थवस्था के रुप में सामने आया है।
-विद्युत चालित वाहनों और हाई ब्रिड वाहनों पर लागू रियायती सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क की समय सीमा 31 मार्च 2016 तक बढ़ाई गई।
-स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम की छूट सीमा को 15 हजार रुपए से 25 हजार रुपए तक, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए 20,000 से 30,000 हजार रूपये तक किया गया।
-80 वर्ष से अधिक की आयु वाले वरिष्ठ नागरिक जो स्वास्थ्य बीमा में कवर नहीं है, उन्हें चिकित्सीय व्यय के लिए 30 हजार रुपए की कटौती की अनुमति दी गई।
-विकलांग व्यक्तियों के लिए 25 हजार रुपए की अतिरिक्त कटौती। पेंशन निधि और नई पेंशन स्कीम में अंशदान के लिए 50 हजार रुपए की अतिरिक्त छूट।
-कृषि उत्पाद की ढुलाई में सेवाकर से छूट जारी रहेगी।
-कृत्रिम ह्रदय को 5 प्रतिशत के बुनियादी सीमा शुल्क और सी वी डी से छूट।
-केवल 12 रूपये प्रतिवर्ष के प्रीमियम पर 2 लाख रुपए के दुर्घटना जन्य मृत्यु जोखिम को कवर करने के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना।
-पीपी एफ में लगभग 3 हजार करोड़ रुपए कर्मचारी भविष्यनिधि की संचित राशि में अनुमानत: 6 हजार करोड़ रुपए की अदावाकृत जमा राशि।
-सड़कों और रेल मार्गों के लिए परिव्यय में तीव्र वृद्धि।
-20,000 करोड़ रुपए के वार्षिक प्रवाह से राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना निधि की स्थापना की जाएगी।
-प्लग और प्ले मोड में 4000.4000 मेगावाट क्षमता वाली 5 नई अल्ट्रा मेगा विद्युत परियोजनाएं।
-सोना खरीदने के लिए विकल्प के तौर पर सरकारी स्वर्ण बाण्ड स्कीम बनाना।
-भारतीय सोने के सिक्के बनाने की दिशा में कार्य करना, जिसके अग्र भाग में अशोक चक्र होगा।
-निर्भया निधि के लिए 1000 करोड़ रुपए।
-आगमन पर वीजा सुविधा का विस्तार चरणबद्ध तरीके से 150 देशों तक करना।
-नवीकरणीय उर्जा क्षमता को 2022 तक बढ़ाकर 1,75,000 मेगावाट तक करने का लक्ष्य।
-आंध्र प्रदेश की तरह बिहार और पश्चिम बंगाल में विशेष सहायता उपलब्ध कराई।
-जम्मू-कश्मीर, पंजाब, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश और असम में नए एम्स की स्थापना, बिहार में एम्स जैसे दूसरे संस्थान की स्थापना।
-वित्त वर्ष के लिए आयोजा भिन्न व्यय 13,12,200 करोड़ रुपए अनुमानित।
-आयोजना व्यय 4,65,277 करोड़ रुपए अनुमानित है।
-कुल व्यय 17,77,477 करोड़ रुपए अनुमानित है।
-रक्षा, आंतरिक सुरक्षा व्यय और अन्य आवश्यक व्यय की आवश्कता की पर्याप्त पूर्ति का प्रावधान किया गया।
-सकल कर प्राप्तियां 14,49,490 करोड़ रुपए अनुमानित है।
-राज्यों को अंतरण 5,23,958 करोड़ रुपए अनुमानित है।
-केन्द्र सरकार का हिस्सा 9,19,842 करोड़ रुपए होगा।
-आगामी वित्त वर्ष के लिए कर-भिन्न राजस्व 2,21,733 करोड़ रुपए अनुमानित है।
-प्रति बूंद जल से अधिक फसल प्राप्त करने हेतु प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना।
-वर्ष 2015-16 के लिए आठ दशमलव पांच लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण लक्ष्य।
-ऋण देने में अंतरजातीय और अंतर जन जातीय उद्यमों को वरीयता।
-गांवों में फैले 1,54,000 उपस्थित केंद्रों वाले डाक नेटवर्क का सामान्य वित्तीय प्रणाली तक लोगों की पहुंच बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाएगा।
-आजीविका के लिए परिवार के कम से कम एक सदस्य को रोजगार।
-गरीबी उन्मूलन पर ध्यान केंद्रीत करने का लक्ष्य । मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से भारत को विश्व के विनिर्माण केंद्र में परिवर्तित करना।
-युवाओं को रोजगार सृजन बनाने के लिए उद्यमिता की भावना का प्रोत्साहन और विकास।
-पूर्व और पूर्वोत्तर क्षेत्रों का देश के अन्य भागों की तरह ही विकास कारना।
-सरकार सकल घरेलू उत्पाद की तीन प्रतिशत की दर पर राजकोषीय घाटा लक्ष्य हासिल करने के लिए कृतसंकल्प है।
-लाभार्थियों की संख्या एक करोड से बढ़ाकर 10 दशमलव 3 करोड़ के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण का विस्तार।
-कृषि उत्पादन के लिए दो महत्वपूर्ण निर्णायक कारकों मृदा और जल से निपटने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।
-परंपरागत कृषि विकास योजना को पूरी तरह से सहायता प्रदान की जाएगी।
-पिछले नौ माह में भारतीय अर्थव्यवस्था की साख बढ़ी।
-भारतीय अर्थव्यवस्था तीव्र विकास के पथ पर।
-कमजोर वैश्विक आर्थिक वृद्धि के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के अधिकांश विकास संकेतक उन्नति के मार्ग पर।
-भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में आर्थिक रूप से सशक्त राज्यों की समान रूप से सहभागिता।
-शेयर बाजार में 2014 में दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन।
-दीर्घकालिक गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन और दोहरे अंकों की विश्वसनीय आर्थिक विकास दर हासिल की गई।
-विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर सेवा के माध्यम से सरकार ने जनता का विश्वास हासिल किया।
-वित्तीय समायोजन- सौ दिनों के भीतर 12.5 करोड़ परिवारों को वित्तीय मुख्य धारा में शामिल गया।
-राज्यों के संसाधनों में वृद्धि के लिए पारदर्शी कोयला ब्लॉक नीलामी।
-स्वच्छ भारत अभियान न सिर्फ स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार का एक कार्यक्रम है बल्कि यह भारत के पुनर्निमाण आंदोलन का रूप ले चुका है।
-व्यापक सुधारों का शुभारंभ- माल और सेवाकर जीएसटी मुद्रा स्फीति में महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गई।
-वर्ष के अंत तक 5 प्रतिशत खुदरा मुद्रस्फीति। मौद्रिक नीति को सरल बनाया।
-मुद्रास्फीति को 6 प्रतिशत से कम रखने की दृष्टि से भारतीय रिजर्व के साथ मौद्रिक नीति प्रारूप समझैता।
-वर्ष 2022 में स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ अमृत महोत्सव, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में टीम इंडिया हेतु दृष्टिकोण सभी के लिए आवास- शहरी क्षेत्रों में 2 करोड़ और ग्रामीण क्षेत्रों में 4 करोड़ आवास।
-24 घंटे बिजली, स्वच्छ पेयजल, एक शौचालय सड़क संपर्क की मूलभूत सुविधा।


First Published: Saturday, February 28, 2015 - 11:43
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सोमवार, 2 फ़रवरी 2015

बाल विवाह के लिए अभिशप्त लड़कियाॅ

 

 

 

—उपासना बेहार—

‘‘मैं अभी बहुत पढ़ना चाहती हूॅ लेकिन मेरे घर वाले मेरी शादी जबरदस्ती करवा रहे थे। शादी रुक जाने से बहुत खुश हूॅ और अब मैं फिर से स्कूल जा पाऊॅगी और अपने मां पिता को कुछ बन कर दिखाऊंगी।’’ ये कहना था 13 साल की तनु की जिसका बाल विवाह होने जा रहा था और प्रषासन की मुष्तेदी से यह विवाह रुक गया। मध्यप्रदेश के उज्जैन के जमुनिया खुर्द गाॅव की 13 साल की सोनू और तनु के विवाह की तैयारियाॅ चल रही थी। जिसे प्रषासन के हस्तक्षेप के बाद रदद् किया गया। यह घटना उसी 24 जनवरी के चंद रोज पहले हुआ है जिस दिन को पूरा देश ‘नेशनल गर्ल चाइल्ड़ डे’ के रुप में मनाता है।

देश और प्रदेश में ऐसी हजारों तनु और सोनू जैसी बच्चियाॅ हैं जो पढ़ना चाहती थी कुछ बनना चाहती थी लेकिन उन सब की आकाक्षांए और अरमान बाल विवाह की भंेट चढ़ गयी।

संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया का ऐसा छठा देश है, जहां बाल विवाह का प्रचलन सबसे ज्यादा है। भारत में 20 से 49 साल की उम्र की करीब 27 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं जिनकी शादी 15 से 18 साल की उम्र के बीच हुई है। जुलाई 2014 में यूनिसेफ द्वारा ‘एंडिग चाइल्ड मैरिजः प्रोग्रेस एंड प्रास्पेक्ट्स’ शीर्षक से बाल-विवाह से संबंधित एक रिपोर्ट जारी की गई। इस रिपोर्ट के अनुसार विश्व में 720 मिलियन महिलाएं ऐसी हैं, जिनकी शादी 18 साल या इससे कम उम्र में हो गई है। विश्व की कुल बालिका बधु की एक तिहाई बालिका बधु भारत में पाई जाती है अर्थात प्रत्येक 3में से बालिका बधु भारतीय है।

इसी प्रकार वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार मध्यप्रदेश में वर्ष 2012-13 में वर्ष 2011-12 की तुलना में अधिक बाल विवाह हुए हैं। प्रदेश में लड़कियों के बाल विवाह की दर पिछले वर्ष की अपेक्षा वर्ष 2012-13 में 20 जिलों में बढ़ी है जिसमें सबसे ज्यादा झाबुआ, दूसरे स्थान पर शाजापुर तथा तीसरे स्थान पर राजगढ़ है। वैसे प्रदेश में बाल विवाह लड़कियों में लड़कों की तुलना में कम रही है, लेकिन पिछले वर्ष 2011-12 की तुलना में बालिका विवाह 0.2 फीसदी की वृद्धि हुई है।

अगर लड़कों के बाल विवाह को देखें तो उनके बाल विवाह के जिलों में भी बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2012-13 में 21.3 फीसदी लड़कों के विवाह 21 वर्ष से कम उम्र में हुए है, जबकि पिछले वर्ष यह दर 18.3 फीसदी रही। वर्ष 2012-13 में 35 जिलों में लड़कों के बाल विवाह बढ़े हैं और इसमें 10 फीसदी वृद्धि की दर से झाबुआ प्रथम स्थान पर है, वहीं शाजापुर 9.6 फीसदी दर के साथ दूसरे और टीकमगढ़ 42.7 के साथ तीसरे पर है। इसी तरह इंदौर, भोपाल और जबलपुर जैसे शहर भी बाल विवाह वृद्धि दर से अछूते नहीं है।

बाल विवाह बाल अधिकारों का उल्लंघन है। लिंगभेद, अशिक्षा, अज्ञानता, असुरक्षा, धार्मिक-सामाजिक मान्यताएँ, रीति-रिवाज,परम्पराऐं, लड़कियों को कमतर समझना,उन्हें आर्थिक बोझ मानना, इत्यादि प्रमुख कारण है। समाज की यह सोच भी कि लड़कीयों की कम उम्र में शादी कर देने से वे दूसरे घर में जल्दी सामंजस्यता बिठा लेती हैं, यह भी बाल विवाह के अनेक कारणों में से एक है।

जिन बच्चियों का बाल विवाह होता है उनका शारीरिक, मानसिक, सामाजिक व शैक्षणिक विकास सही तरिके से नही हो पाता है। कम उम्र में शादी होने से उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने के,स्वास्थ्य ,पोशण, शिक्षा के अधिकार से महरुम होना पड़ता है और वे हिंसा, दुव्र्यवहार, शोषण, यौन शोषण की षिकार हो जाती हैं। बाल विवाह के कारण बच्चियाॅ कम उम्र में गर्भवती हो जाती हैं जिससे उनमें स्वास्थ्य समस्याएं होने की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है और इसके कारण उनकी मृत्यु, गर्भपात में वृद्धि, कुपोषित बच्चों का जन्म, माता में कुपोशण, खून की कमी होना, शिशु मृत्यु दर, माता में प्रजनन मार्ग संक्रमण यौन संचरित बीमारियाॅ बढती हैं। कच्ची उम्र में माँ बनने वाली ये बालिकाएं न तो परिवार नियोजन के प्रति सजग होती हैं और न ही नवजात शिशुओं के उचित पालन पोशण में दक्ष होती हैं इस कारण बच्चों की सही देखभाल नही हो पाती और बच्चे ताउम्र कमजोर रहते हैं। अध्ययनों से यह सिद्ध हो चुका है कि 15 वर्ष की उम्र में माँ बनने से मातृ मृत्यु की संभावना 20 वर्ष की उम्र में माँ बनने से पांच गुना अधिक होती है।

कम उम्र में शादी करने से लड़कियाॅ षिक्षा से वंचित हो जाती हैं। उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। अनपढ़ या कम पढ़ी लिखी होने के कारण वे अपने घर में बहुत ज्यादा आर्थिक सहयोग नही कर पाती हैं और गरीबी निरंतर बनी रहती है। इसके अलावा वे अषिक्षित होने के कारण अपने बच्चों को भी शिक्षित नहीं कर पातीं। यदि विवाह के पश्चात् पति कि मौत हो जाए तो उसे छोटी उम्र से ही विधवा का जीवन जीना पड़ता है। इस प्रकार से बाल विवाह लड़की को लिंगभेद, बीमारी, अषिक्षा एवं गरीबी के भंवरजाल में फंसा देता है और एक बार बच्ची इस जाल में फंस जाये तो उससे निकलना मुष्किल हो जाता है। कुल मिलाकर बाल विवाह का दुष्परिणाम जीवन भर सबसे ज्यादा बालिका बधू को भोगना पड़ता है।

बाल विवाह की कुरीति को रोकने के लिए 1928 में शारदा एक्ट बनाया गया था। इस एक्ट के मुताबिक नाबालिग लड़के और लड़कियों का विवाह करने पर जुर्माना और कैद हो सकती थी। आजादी के बाद से लेकर आजतक इस एक्ट में कई संशोधन किए गए है। सन् 1978 में इसमें संषोधन कर लडकी की उम्र शादी के वक्त 15 से बढ़ाकर 18 साल और लड़के की उम्र 18 से बढकर 21 साल कर दी गई थी। बाल ‘विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006’ की धारा 9 एवं 10 के तहत् बाल विवाह के आयोजन पर दो वर्ष तक का कठोर कारावास एवं एक लाख रूपए जुर्माना या दोनों से दंडित करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा बाल विवाह कराने वाले अभिभावक, रिश्तेदार, विवाह कराने वाला पंडित, काजी को भी तीन महीने तक की कैद और जुर्माना हो सकता है। बाल विवाह की शिकायत कोई भी व्यक्ति निकटतम थाने में कर सकता है। अगर बाल विवाह हो जाता है तब किसी भी बालक या बालिका की आनिच्छा होने पर उसे न्यायालय द्वारा वयस्क होने के दो साल के अंदर अवैध घोषित करवाया जा सकता है।

देश में बाल विवाह के खिलाफ कानून बने हैं और समय के अनुसार उसमें लगातार संषोधन कर उसे ओर प्रभावषाली बनाया गया है फिर भी बाल विवाह लगातार हो रहे हैं। अगर सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद देश में बाल विवाह जैसी कुप्रथा का अंत नही हो पा रहा है, तो इस असफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि बालविवाह एक सामाजिक समस्या है और इसका निदान सामाजिक जागरुकता से ही सम्भव हो सकेगा। केवल कानून बनाने से यह कुरीति खत्म नही होने वाली है।

अगर इस कुप्रथा को जड़ से खत्म करना है तो इसके लिए समाज को ही आगे आना होगा तथा बालिकाओं के पोशण, स्वास्थ्य, सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करना होगा। समाज में शिक्षा को बढ़ावा देना होगा। अभिभावकों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरुक करना होगा साथ ही साथ सरकार को भी बाल विवाह के विरुद्व बने कानून का जोरदार ढंग से प्रचार-प्रसार करना होगा तथा कानून का कड़ाई से पालन करना होगा। बाल विवाह प्रथा के खिलाफ समाज में जोरदार अभियान चलाना होगा। साथ ही साथ सरकार को विभिन्न रोजगार के कार्यक्रम भी चलाना होगा ताकि गरीब परिवार गरीबी की जकड़ से मुक्त हो सकें और इन परिवारों की बच्चियां बाल विवाह का निशाना न बन पाएं।

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रविवार, 1 फ़रवरी 2015

बैंक और बीमा योजना में फंसा आम आदमी

 


















देवाशिष बसु /  January 27, 2015









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बैंकों द्वारा बीमा योजनाएं बेचने से बैंकों को तो कमाई हो रही है लेकिन इसका खमियाजा उपभोक्ताओं को चुकाना पड़ रहा है। इस समस्या से कैसे निपटा जाए, विस्तार से बताने का प्रयास कर रहे हैं देवाशिष बसु

आप बैंक में अपने सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट या एफडी) को नए सिरे से निवेश करने की प्रतीक्षा में बैठे हैं तभी बैंक का एक कर्मचारी आपके पास आता है और आपको सुझाव देता है कि अपने पैसे को एफडी में ही निवेश करते रहने के बजाय आप बीमा योजनाएं क्यों नहीं खरीदते? वह आपको बताता है कि इन बीमा योजनाओं में कमाल की विशेषताएं हैं।

वह आपको बताता है कि अगर आप सालाना 2 लाख रुपये का प्रीमियम चुकाने को तैयार हों तो 25 साल बाद आपके पास एक करोड़ रुपये का कोष तैयार हो जाएगा। आप इन सारी बातों से आकर्षित हो जाते हैं और जब आप बैंक से बाहर निकलते हैं तो आपके पास एक ऐसी योजना होती है जिसमें आपको अगले 25 सालों के दौरान वार्षिक 5 फीसदी से भी कम की दर से प्रतिफल हासिल होता है। ध्यान से देखने पर आप पाएंगे कि यह प्रतिफल तो उस एफडी से भी खराब है जिसे करने से आपके बैंककर्मी ने आपको रोक दिया था। कई अन्य मामलों में तो लोगों को इससे भी बुरी स्थिति का सामना करना पड़ता है।

आखिर बैंकर आपको बीमा योजना खरीदने और अपना पैसा बैंक से निकालने के लिए क्यों प्रेरित करता है? दरअसल आपकी जानकारी के बिना ही बैंक बीमा कंपनियों के लिए बिक्री एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। बैंक अगर आपको बीमा योजना खरीदवाता है तो उसे आपकी एफडी की तुलना में कहीं अधिक कमीशन मिलेगा। इसके अलावा उसे विपणन सहयोग के नाम पर भी कमाई होगी। यह सिलसिला चलते एक दशक से अधिक वक्त बीत गया। बीमा नियामक ने अब तक इकलौता कदम यह उठाया है कि उसने बैंक जैसे संस्थानों द्वारा की जाने वाली लूट की मात्रा थोड़ा कम कर दी।

करीब दो सप्ताह पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने बीमा योजनाएं बेचने वाले बैंकों के लिए नए दिशा निर्देश जारी किए जिन्हें बैंकएश्योरेंस का नाम दिया गया। चूंकि बैंक बतौर एजेंट काम कर रहे हैं इसलिए हमारे प्रति यानी बैंक के ग्राहकों के प्रति उनकी एक न्यूनतम जिम्मेदारी होती है। नए दिशानिर्देशों के तहत बैंकों को ब्रोकर के रूप में काम करने का विकल्प दिया गया है। सब जानते हैं कि बीमा ब्रोकर को हमेशा और अनिवार्य तौर पर उपभोक्ता के हितों का ध्यान रखना होता है न कि बीमा कंपनी के।

लेकिन बैंक चाहते हैं कि वे अपनी शाखाओं के नेटवर्क का इस्तेमाल करके बीमा कंपनी से फायदा उठाएं। वे बतौर ब्रोकर ऐसा कुछ नहीं कर सकते क्योंकि बीमा एजेंट की तरह ब्रोकर के लिए किसी एक कंपनी की बीमा योजनाओं की बिक्री करना सही नहीं है। इतना ही नहीं वे ब्रोकर के काम से जुड़ी जिम्मेदारियां और जवाबदेही भी नहीं उठाना चाहते। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या नए दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए बैंक बीमा ब्रोकर बनेंगे? इसका उत्तर न ही होना है लेकिन मैं आशा करता हूं कि कम से कम एक बैंक ऐसा होगा जो बीमा ब्रोकर की भूमिका निभाकर मुझे गलत साबित करेगा और उपभोक्ताओं के पक्ष में खड़ा होगा।

इस मॉडल को संक्षेप में देखें तो बैंकों के पास लाखों की संख्या में ग्राहक होते हैं और बीमा कंपनियां उन तक पहुंचना चाहती हैं। इसलिए वे कंपनियां बैंकों के साथ साझा कारोबार की शुरुआत करती हैं। एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी लाइफ इसका उदाहरण है। वे उपभोक्ताओं को प्रेरित करते हैं कि वे अपने साझेदार द्वारा दी जाने वाली बीमा योजनाएं ही खरीदें। जाहिर है इससे उपभोक्ता के समक्ष विकल्प एकदम सीमित हो जाते हैं। इस तरह बिना किसी जिम्मेदारी या दबाव के पूरा कमीशन व लाभ बैंक के पास पहुंच जाता है। इतना ही नहीं कुछ योजनाएं जो उपभोक्ता के लिए निहायत बुरी होती हैं, वे बैंकों के लिए पर्याप्त कमीशन जुटाने वाली साबित होती हैं।

इस मामले में एक अंदरूनी व्यक्ति की राय जानना बेहतर होगा। दीपक सतवालेकर वर्ष 2011 में ने केवल एचडीएफसी लाइफ को चला रहे थे बल्कि वे बैंकएश्योरेंस पर बीमा नियामक आईआरडीए की समिति के सदस्य भी थे। उन्होंने लिखा, 'अपने वितरण नेटवर्क के साथ बैंकों ने बीमा कंपनियों को लगभग बंधक बना लिया है। उन्होंने अपने लिए अधिक से अधिक लाभ कमाने के चक्कर में किसी खास बीमा कंपनी की योजनाओं में अधिक रुचि दिखाई है। ऐसे में अगर बैंकों को अलग-अलग इलाकों में दो अलग-अलग बीमा कंपनियों को चुनने का अधिकार दिया जाता है तो यह एक तरह से फिरौती को कानूनी बनाने जैसा होगा।' गौर कीजिए कि सातवेलकर केवल बीमा कंपनियों के दुख की बात कर रहे हैं, जरा सोचिए ग्राहकों का क्या हाल होता होगा?

संक्षेप में कहें तो बैंकएश्योरेंस मॉडल अपने मूल में उपभोक्ता विरोधी है। आरबीआई ने इस पर जो दिशानिर्देश दिए हैं उनमें बैंकों से कहा गया है कि वे एक ऐसी व्यवस्था विकसित करें जिसमें उपभोक्ताओं के लिए योजनाओं की निरंतरता का आकलन किया जा सके। उसने बैंकों से यह भी कहा है कि वह अपने उपभोक्ताओं के साथ निष्पक्षता, पारदर्शिता और ईमानदारी से पेश आए और ऐसी योजनाओं को किसी बैंक योजना के साथ जोड़कर न पेश करे। इसके अलावा शिकायत निस्तारण के लिए एक मजबूत आंतरिक व्यवस्था बनाने की बात भी कही गई। सवाल यह उठता है कि अगर बैंक इन बातों का अनुपालन नहीं करते हैं तो क्या होगा? इस पर आरबीआई का कहना है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा और बैंकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

लेकिन अतीत में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के मामले में आईआरडीए और आरबीआई का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं रहा है। आरबीआई ने कभी ग्राहकों के साथ गलत व्यवहार के लिए बैंकों पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की है। कोबरापोस्ट स्कैंडल के खुलासे के बाद भी बैंकों को हल्के में जाने दिया गया। इन दिशानिर्देश में ऐसा कुछ नया नहीं है जिसके चलते बैंक अपने मौजूदा आक्रामक व्यवहार को बदलें और बीमा योजनाएं बेचने में थोड़ी सभ्यता का परिचय दें। जब बैंक ब्रोकर बनने से इनकार कर देंगे तो यह बात जल्दी ही सबके सामने आ जाएगी।

आरबीआई को क्या करना चाहिए था? उसे अधिकांश विकसित देशों की तर्ज पर सैद्घांतिक तौर पर वित्तीय सेवा कंपनियों के आचरण और उपभोक्ताओं के हितों को नियामकीय व्यवस्था के केंद्र में ला देना चाहिए। लेकिन चूंकि भारतीय नियामक ऐसा नहीं करेंगे इसलिए अब वक्त आ गया है कि वित्त मंत्रालय का वित्तीय सेवा विभाग इसमें दखल दे और विभिन्न नियामकों के शिकायत निवारण विभाग को अलग करके एक स्वतंत्र संस्था बनाए जो सभी वित्तीय सेवा कंपनियों के आचरण पर नजर रखे और उनको ग्राहकों के प्रति जवाबदेह बनाए। वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग (एफएसएलआरसी) ने इस विचार की अनुशंसा की थी और संभावित संस्था को फाइनैंशियल रिड्रेसल एजेंसी का नाम भी दिया था। अब वक्त आ गया है कि जितनी जल्दी संभव हो ऐसी एजेंसी का गठन किया जाए।
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कैसा होगा बजट का स्वरूप ?






प्रस्तुति-- स्वामी शरण, मेहर स्वरूप 


आम बजट के 101 मुख्य अंश-

1-सिगरेट, सिगार, गुटखा, तंबाकू महंगे होंगे
2-कोल्ड ड्रिंक्स, बोतलबंद जूस महंगे होंगे
3-तेल साबुन, कंप्यूटर पार्ट्स सस्ते
4-एलसीडी, एलईडी टीवी सस्ते
5-मोबाइल फोन सस्ते हुए
6-रेडीमेड कपड़े, इंपोर्टेड कॉस्मेटिक्स महंगे
7-होमलोन की छूट सीमा 1.5 से बढ़ाकर 2 लाख रुपये की गई
8-आयकर मानक छूट सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख की गई
9-बुजुर्गों के लिए 2.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख की गई आयकर छूट सीमा
10-15 हजार से कम के मासिक वेतन पर पीएफ नहीं कटेगा
11-कश्मीरी विस्थापितों के पुनर्वास के लिए 500 करोड़ रुपये
12-युवा नेतृत्व कार्यक्रम के लिए 100 करोड़ रुपये
13-उत्तराखंड में हिमालय के अध्ययन केंद्र के लिए 100 करोड़
14-वाराणसी सारनाथ गया के बीच बौद्ध सर्किट बनेगा
15-गंगा के लिए बनेगा एनआरआई फंड
16-गंगा संरक्षण मिशन, नमामि गंगा के लिए 2037 करोड़
17-शहरों की विरासत बचाने के लिए 200 करोड़
18-राष्ट्रीय खेल अकादमियां बनाई जाएंगी
19-सरहदी इलाकों में रेल लाइन के लिए 1000 करोड़
20-जम्मू-कश्मीर में स्टेडियमों के लिए 200 करोड़
21-मणिपुर में खेलों के लिए 100 करोड़ रुपये
22-पीपीएफ में अब 1.5 लाख रुपये का निवेश संभव
23-सेना में वन रैंक वन पेंशन के लिए 1,000 करोड़ रुपये
24-युद्ध स्मारक के लिए 100 करोड़ रुपये
25-बुनियादी क्षेत्र में लंबी अवधि के कर्ज को बढ़ावा
26-14 हजार किलोमीटर गैस पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य
27-8500 किलोमीटर नए नेशनल हाइवे बनेंगे
28-16 नए बंदरगाह प्रोजेक्ट
29-गंगा में इलाहाबाद के हल्दिया तक जहाज चलेंगे
30-वित्तीय क्षेत्र में एक केवाईसी नॉर्म होगा
31-हर परिवार का बैंक अकाउंट खोलने पर जोर
32-एक बैंक अकाउंट पर एक डीमैट अकाउंट का प्रस्ताव
33-चिटफंड कानून में सुधार का प्रस्ताव
34-कृषि उत्पादों के भंडारण के लिए 5 हजार करोड़ रुपये
35-वाराणसी के बुनकरों के लिए 50 करोड़ रुपये का फंड
36-राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़कों के लिए 37हजार करोड़
37-गंगा परियोजना के तहत जलमार्ग विकास होगा
38-सरकारी-निजी साझेदारी को बढ़ावा देंगे
39-हस्तकला अकादमी के लिए 30 करोड़ रुपये
40-अल्ट्रा मॉर्डन ताप बिजली तकनीक के लिए 100 करोड़
41-अत्याधुनिक सौर योजनाओं के लिए 500 करोड़
42-पश्मीना उत्पादन के लिए 50 करोड़
43-चार फीसदी कृषि दर हासिल करने का लक्ष्य
44-कमजोर तबकों को सस्ता चावल-गेहूं मुहैया कराना प्राथमिकता
45-किसान टेलीविजन के लिए 100 करोड़ रुपये
46-कृषि कर्ज के लिए आठ लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य
47-समय पर कृषि ऋण लौटाने वालों को 3 फीसदी की ब्याज छूट इस साल भी जारी रहेगी
48-किसानों को हेल्थ कार्ड के लिए 100 करोड़ रुपये
49-जलवायु परिवर्तन के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र
50-5 लाख किसान समूहों को नाबार्ड से मदद
51-500 करोड़ के महंगाई फंड का ऐलान
52-साफ पानी के लिए 3650 करोड़ रुपये
53-600 नए सामुदायिक रेडियो स्टेशन खोले जाएंगे
54-कृषि आधुनिकीकरण के लिए दो नए केद्रों पर 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे
55-अहमदाबाद और लखनऊ में मेट्रो के लिए 100 करोड़ रुपये
56-मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये
57-गांवों में ब्रॉडबैंड के लिए डिजिटल इंडिया योजना
58-देश में पांच नए आईआईटी और पांच नए आईआईएम के लिए 500 करोड़ रुपये
59-नेशनल हाउसिंग बैंक योजना के लिए आठ हजार करोड़ रुपये
60-चार नए एम्स के लिए 500 करोड़ रुपये
61-बुजुर्गों के लिए एम्स में अलग से दो सेंटर
62-खाद और पेट्रोलियम सब्सिडी की समीक्षा होगी
63-नए शिक्षक प्रशिक्षण के लिए 500 करोड़ रुपये
64-नई यूरिया नीति का प्रस्ताव
65-प्रधानमंत्री सड़क योजना के लिए 14 हजार करोड़ रुपये
66-ग्रामीण उद्यमिता के लिए 100 करोड़ रुपये
67-ईपीएफ योजना के तहत श्रमिकों के लिए न्यूनतम 1,000 रुपये की पेंशन
68-संस्थान बदलने पर भी कर्मचारियों का ईपीएफ खाता नंबर समान ही रहेगा
69-50 हजार करोड़ रुपये दलित योजना के लिए
70-बड़े शहरों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए गृह मंत्रालय 150 करोड़ रुपये देगा
71-1,000 करोड़ रुपये से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की शुरुआत
72-500 करोड़ रुपये ग्राम ज्योति योजना के लिए
73-सरदार पटेल की मूर्ति के लिए 200 करोड़ रुपये
74-सीधे विदेशी निवेश के लिए कुछ रियायतें
75-2019 तक हर घर में शौचालय की योजना
76-7060 करोड़ रुपये नए शहरों के लिए
77-बीमा क्षेत्र में एफडीआई 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत तक
78-बैंकिंग व्यवस्था को और मजबूत करेंगे
79-रक्षा में एफडीआई को 49 फीसदी तक लाया जाएगा
80-हम प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देंगे
81-रोजगार को बढ़ावा देने वाले उद्योग जरूरी
82-कालाधन देश की अर्थव्यवस्था के लिए अभिशाप, इसे खत्म करने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे
83-चालू वित्त वर्ष में 4.1 प्रतिशत राजकोषीय घाटे का लक्ष्य कठिन, लेकिन मैंने इसे चुनौती के तौर पर स्वीकार किया है
84-अगले साल 3.6 फीसदी वित्तीय घाटा रखने का लक्ष्य
85-खर्च प्रबंधन आयोग बनाएगी सरकार
86-घरेलू कंपनियों को भी एडवांस टैक्स रूलिंग की सुविधा देने का प्रस्ताव
87-2015-16 में वित्तीय घाटा कम कर 3 प्रतिशत पर लाएंगे
88-दलितों और आदिवासियों को खाद्य संरक्षण भी देंगे
89-रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स नहीं लाने जा रही है सरकार
90-हम निवेशकों के अनुकूल टैक्स नीति लाएंगे
91-बीते दो सालों ने हमारी चुनौतियां बढ़ाई हैं
92-लगातार मंदी कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं में
93-विश्व अर्थव्यवस्था 3.4 प्रतिशत से बढ़ने की उम्मीद
94-भारतीय अर्थव्यवस्था को इन्हीं से रास्ता निकालना होगा
95-एनडीए के पहले बजट में मकसद नीति-निर्धारण
96-शुरुआती लक्ष्य 7-8 फीसदी वृद्धि दर
97-देश की बड़ी आबादी गरीबी रेखा के नीचे
98-सबका साथ सबका विकास लक्ष्य पूरा करना
99-टैक्स जीडीपी अनुपात सुधारने की जरूरत
100-बुनियादी क्षेत्र और विनिर्माण में वृद्धि जरूरी
101-एक मजबूत जीवंत भारत में कोई कस
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