शुक्रवार, 11 सितंबर 2015

सेक्स सत्ता सिनेमा और साध्वी राधे मम्मा





मॉडल और अभिनेत्रियों का सेक्स रैकेट चलाती थी राधे मां
Published 08-Sep-2015 09:04 IST | Updated 10:41 IST
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आखिर मुलायम सिंह यादव को इतना गुस्सा क्यों आता है...

आखिर मुलायम सिंह यादव को इतना गुस्सा क्यों आता है...
लालू यादव, मुलायम सिंह और शरद यादव (फाइल फोटो)
पटना: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव इन दिनों नाराज चल रहे हैं। हर राजनीतिक व्यक्ति इन दिनों इसी सवाल का जवाब खोज रहा हैं कि 'नेताजी'  को गुस्सा क्यों आता है। फिलहाल उनकी नाराजगी के शिकार हैं उनके बेटे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। अखिलेश यादव से मुलायम सिंह यादव का संबंध खट्टा-मीठा है। अपेक्षा और उस पर खरे उतरने का मामला है। आप कह सकते हैं कि घर की बात है।

लेकिन मुलायम नीतीश से क्यों नाराज हैं। जिस नीतीश कुमार पर जीतन राम मांझी को हटाकर मुख्यमंत्री बनने का दबाब डालने में सबसे ज्यादा प्रभावी भूमिका मुलायम सिंह यादव ने निभाई, जिस नीतीश कुमार को कुछ माह पूर्व बिहार में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने में कुछ घंटों में आम सहमति बनाकर संयुक्त संवाददाता सम्मेलन करने वाले मुलायम आजकल उन्हीं नीतीश से खफा क्यों हैं?

अब तक मुलायम सिंह यादव ने अपने समर्थकों और लालू यादव, शरद यादव के साथ मुलाकात में जो मन की बात की हैं उसमें उन्होंने सीटों के तालमेल में नजरअंदाज किए जाने के अलावा, कांग्रेस से बढ़ती नजदीकी को मुख्या कारण बताया है। इससे भी ज्यादा मुलायम अरविन्द केजरीवाल के साथ नीतीश कुमार की सार्वजनिक मंच पर बढ़ती नजदीकी को भी पसन्द नहीं किया। उससे भी ज्यादा कांग्रेस पार्टी को बिहार में 40 सीटें देने और स्वाभिमान रैली में कांग्रेस अध्यक्ष  सोनिया गांधी को बुलाने पर भी मुलायम ने नाराजगी जताई।

मुलायम के समर्थक भी मानते हैं कि पर्याप्त सीटें न मिलना एक बहाना है, क्योंकि नीतीश कुमार ने न केवल उन्हें महागठबंधन का अध्यक्ष बल्कि संसदीय दाल का भी अध्यक्ष घोषित किया था। आज भी लालू यादव ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अगर नेताजी तैयार हो जाएं तो साइकिल चुनाव चिन्ह पर 200 सीटों पर लड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन सभी जानते हैं कि मुलायम अब इस मामले में शायद ही लचीला रुख अपनाएं।

समाजवादी पार्टी की बिहार इकाई के नेता भी मानते हैं कि महागठबंधन से लड़ने में भले ही शायद कुछ उम्मीदवारों के विधायक बनने की संभावना थी लेकिन अब सभी सीटों पर लड़ने में शायद ही कोई गारंटी दे। पार्टी की चाबी वोटकटवा की होगी और इस बार बिहार में जो चुनावी माहौल है उसमें शायद ही कोई वोटकटवा को वोट दे।    

असल सवाल यह है कि आखिर मुलायम बिहार के महागठबंधन को मझधार में छोड़कर क्यों चले गए और उनके तेवर इतने गरम क्यों हैं? अगर राष्ट्रीय जनता दाल के नेताओं की मानें तो बीजेपी कुछ पुराने और नए मुकदमों में साक्ष्यों के आधार पर समाजवादी  पार्टी के कुछ बड़े नेताओं को ब्लैकमेल कर रही है। इन नेताओं का कहना है कि सीबीआई ने लालू यादव के खिलाफ चारा घोटाले के एक मामले में सर्वोच्च न्यायालय में जिस प्रकार से अपील दायर की उससे साफ हैं कि लालू यादव को भी यह डर दिखाया गया। हालांकि लालू यादव ने स्वाभिमान रैली में साफ किया था कि उन्हें सीबीआई चाहे तो गिरफ्तार कर सकती है, उन्हें कोई डर नहीं है।

अंत में सवाल है कि इस उठापटक का आखिर क्या हश्र होगा। कुछ महिने पहले समाजवादी पार्टी के राज्य सभा में नेता रामगोपाल यादव और नीतीश कुमार में विलय के मुद्दे पर बहस हो रही थी। रामगोपाल यादव ने नीतीश कुमार को सलाह दी कि आप और लालू यादव अपनी पार्टियों का विलय कर चुनाव लड़ जाएं, लेकिन तब नीतीश कुमार ने तर्क दिया था कि अगर बिहार में हम लोग मिलकर बीजेपी को रोक नहीं पाए तो आप कल्पना भी मत कीजिएगा कि आप 2017 में उत्तर प्रदेश बचा सकते हैं।


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यादव सिंह की काली कमाई का मुलायम कनेक्शऩ!

समाचारों में
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    नोएडा के इंजीनियर यादव सिंह से यूपी की सत्ताधारी पार्टी और परिवार ...
  • यादव सिंह की मदद से मुलायम के भतीजे ने कमाया 'मोटा माल'
    नवभारत टाइम्स‎ - 5 घंटे पहले
  • आखिर मुलायम सिंह यादव को इतना गुस्सा क्यों आता है...
    एनडीटीवी खबर‎ - 3 दिन पहले
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    नेताजी की बेशर्मी से भ्रष्ट यादव सिंह बना कुबेर

     

     

     

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    नोएडा के चीफ इंजीनियर के पक्ष में यूपी सरकार, सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटायायूपी की अखिलेश सरकार नोएडा के चीफ इंजीनियर यादव सिंह के पक्ष में खड़ी हो गई है। यादव सिंह के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश को यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
    यादव सिंह के खिलाफ CBI ने दर्ज किए भ्रष्टाचार के दो मामलेकेंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के तत्कालीन चीफ इंजीनियर यादव सिंह और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार तथा आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति अर्जित करने को लेकर मंगलवार को दो अलग-अलग मामले दर्ज किए।
    यादव सिंह की काली कमाई तलाशने में छूट रहा पसीनाभ्रष्टाचार के रिकार्ड तोड़कर धनकुबेर बन बैठे नोएडा विकास प्राधिकरण के निलंबित मुख्य अभियंता यादव सिंह ने अपनी 40 फर्जी कंपनियों को बेचकर जुटाई रकम कहां छिपाई है, यह पता लगाने में आयकर विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
    नोएडा विकास प्राधिकरण के विवादास्पद मुख्य अभियंता यादव सिंह निलंबितराज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि यादव सिंह को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच नोएडा के मुख्य कार्याधिकारी करेंगे।
    काले धन पर बनी एसआईटी करेगी नोएडा अथॉरिटी के 100 करोड़ के बाबू की जांचएसआईटी ने आज सीबीडीटी से कहा कि वह इस बारे में प्रवर्तन निदेशालय के साथ जानकारी बांटे, ताकि सिंह और उनके सहयोगियों के खिलाफ मनी लांड्रिंग के आरोप तय किए जा सकें। यादव सिंह पर भारी मात्रा में अवैध धन संपत्ति एकत्रित करने का आरोप है।
    यादव सिंह पर सपा-बसपा, दोनों रही हैं मेहरबानयादव सिंह के बारे में एनडीटीवी इंडिया के पास ऐसे ढेरों दस्तावेज मौजूद हैं, जिनसे साफ ज़ाहिर होता है कि किस तरह तमाम नियमों की धज्जियां उड़ाकर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सरकारों ने यादव सिंह को तरक्की और मलाईदार पद दिए।
    1,000 करोड़ का इंजीनियर? कौन है वाईएस...आयकर विभाग की 130 लोगों की टीम ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह के दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के 20 ठिकानों पर छापेमारी की, तो धीरे-धीरे इनकी अकूत संपत्ति के राज खुलने लगे।
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    मंगलवार, 8 सितंबर 2015

    गुजरात विकास के मोदी फैक्टर की काली हकीकत

     

      

     

    गुजरात में छात्रों का टोटा, 32 कॉलेजों में एक भी स्टूडेंट नहीं

     

    प्रस्तुति- अमन कुमार

    32 mba and mca colleges did not get students this year
    गुजरात में एमबीए और एमसीए कोर्स कराने वाले कॉलेजों का भविष्य अंधेरे में नजर आने लगा है। राज्य के कुल 289 कॉलेजों में से 32 में इस साल एक भी स्टूडेंट ने आवेदन नहीं किया है।

    टीओआई की खबर के मुताबिक इन कोर्सों की राज्य में 20,810 सीटें उपलब्ध हैं लेकिन इनमें केवल 7,513 ही भर पाई हैं और 13,657 खाली हैं। केवल 41% ही सीट भर पाई हैं।

    इतना ही नहीं जिन कॉलेजों में स्टूडेंट्स आए भी हैं उनकी हालत भी कुछ अच्छी नहीं है। इनमें से 79 कॉलेज में केवल 10 बच्चों ने आवेदन किया है और 91 कॉलेज में केवल 20 सीटों पर ही प्रवेश हो पाया है।

    हाल ही में संपन्न हुई प्रवेश प्रक्रिया के द्वितीय चरण के बाद भी कॉलेजों की स्थिति खराब ही रही। एमबीए कोर्स कराने वाले 124 कॉलेजों में से केवल 30 ही अपनी सीटें भर पाए हैं। वहीं, एमसीए कराने वाले 84 कॉलेजों में से पहले सत्र के लिए केवल 16 कॉलेजों में ही 100 प्रतिशत प्रवेश हुआ है।

    एमसीए के तीसरे सत्र में स्थिति फिर भी बेहतर है। यहां 81 कॉलेज में से 47 की तीसरे सत्र की सारी सीटें भर गई हैं।

    हांलाकि, इसकी वजह भी अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद का नया नियम माना जा रहा है। नियम के अनुसार गणित और सांख्यकि से बीएससी या बीसीए करने वाले एमसीए के तीसरे सत्र में सीधे प्रवेश ले सकते हैं।

    व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की प्रवेश समिति के पदाधिकारी के मुताबिक कुल सीटों में से एमबीए की 4,050 सीट, एमएसीए सत्र एक की 1,261 और एमसीएस सत्र तीन की 1,842 सीट भर चुकी हैं। खाली सीटों में एमबीए कोर्स की 6,587, एमएसीए सत्र एक की 4,923 और एमएसीए सत्र तीन की 2,147 सीटें बची हैं।

    गुरुवार, 3 सितंबर 2015

    अनोखे रिश्तों की दास्तांन





    सूबेदार की बेटी और गरीब लकड़हारे के अनोखे प्यार को दर्शाता है ये तालाब Posted by: Belal Jafri Updated: Friday, January 3, 2014, 12:10 [IST] Ads by Google Asian Paints Hassle free Painting service Experts at work, On Time Closure asianpaints.com/Home-Solutions Divorced or Widowed Second Marriage Profiles Register, Choose & Contact. Now ! secondshaadi.com/Marry-Again भारत कई अनसुलझे रहस्यों का देश है, यहां मौजूद हर रहस्य के पीछे कोई न कोई दिलचस्प किवदंती है। भारत के ये रहस्य कभी भूत प्रेतों और आत्माओं से जुड़े हैं तो कभी किसी वीर क्षत्रिय की बहादुरी भरी गाथाओं या फिर राजा रानी की कहानियों और अपने में बेहतरीन वास्तुकला संजोए मंदिरों से। यदि आप भारत की यात्रा करेंगे तो आप पाएंगे कि यहां कश्मीर से लेके कन्याकुमारी और राजस्थान से लेके गंगटोक तक ऐसा बहुत कुछ है जो आपको अपनी तरफ आकर्षित करेगा। इसी क्रम में आज हम आपको बताएंगे एक ऐसे तालाब और स्मारक के बारे में जिसका निर्माण एक प्रेमी जोड़े की याद में किया गया है। कहते हैं प्यार बंदिशें नहीं देखता बस हो जाता है। साथ ही प्यार कोई ऊंच नीच जात पात भी नहीं देखता। सूबेदार की बेटी और गरीब लकड़हारे के अनोखे प्यार को दर्शाता है ये तालाब अब तक आपने सुना होगा कि फलां प्रेमी ने अपनी प्रेमिका की याद में किसी स्मारक का निर्माण किया या फिर उसको याद करते हुए कुछ बनवाया, लेकिन अब अगर कोई प्रेमिका अपने मरे हुए प्रेमी के लिए कुछ करे तो बात ज़रा दिलचस्प होगी। जी हाँ ये सच है, अगर आप को ये अनोखा नज़ारा देखना है तो राजधानी दिल्ली से 65 किलोमीटर दूर हरियाणा के झज्जर आइये और यहां मौजूद बुआ वाला तालाब की यात्रा करिये। बुआ वाला तालाब का निर्माण आज से 375 वर्ष पूर्व हुआ था। इस तालाब के निर्माण के पीछे एक दिल चीर देने वाली कहानी जुडी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक दिन झज्जर नवाब के एक सूबेदार मुस्तफा खान की बहादुर बेटी बुआ घुड़सवारी करते हुए जंगल में पहुंच गई। दुर्भागय से उनपर बाघ ने हमला कर दिया और वह मदद क लिए चिल्लाई। उनकी चीख सुनकर पास में ही काम कर रहा हसन नाम का एक गरीब लेकिन सुंदर लकड़हारा उस ओर दौड़ा। उसने बाघ को मार गिराया और लड़की को जख्मी हालत में वापस लेकर आया। बुआ के पिता ने लकड़हारे को ईनाम देने की घोषणा की, पर हसन ने ईनाम के बदले उनकी बेटी से शादी की इच्छा जाहिर की। सूबेदार की बेटी और गरीब लकड़हारे के अनोखे प्यार को दर्शाता है ये तालाब बेमन से मुस्तफा खान ने लकड़हारे की बात मान ली, पर शादी को कुछ समय के लिए आगे बढ़ा दिया। एक दिन उन्होंने हसन से कहा कि वह नवाब की सेना में भर्ती हो जाए और युद्ध में हिस्सा ले। हसन ने ऐसा ही किया और युद्ध में मारा गया। कहा जाता है की अपने प्रेमी हसन की मौत से टूट चुकी बुआ का भी देहांत कुछ समय बाद हो गया और उसे अपने प्रेमी हसन की कब्र के बगल में दफनाया गया। कैसे पहुँचें झज्जर हम जानते हैं इस कहानी को पढ़ने के बाद आपका जरूर इस तालाब और इस मख़बरे को देखने का मन होगा। झज्जर जाने के लिए आप यहां क्लिक करें- कैसे जाएं झज्जर पढ़ें : वो मंदिर जिसको आज भी है अपनी पूजा का इंतेजार

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