प्रस्तुति- कृति शरण / सृष्टि शरण
★ सोरसन (बारां) का ब्रह्माणी माता का मंदिर- यहाँ देवी की पीठ का श्रृंगार होता है. पीठ की ही पूजा होती है !
★
चाकसू(जयपुर) का शीतला माता का मंदिर- खंडित मूर्ती की पूजा समान्यतया
नहीं होती है, पर शीतला माता(चेचक की देवी) की पूजा खंडित रूप में होती है !
★ बीकानेर का हेराम्ब का मंदिर- आपने गणेश जी को चूहों की सवारी करते देखा होगा पर यहाँ वे सिंह की सवारी करते हैं !
★
रणथम्भोर( सवाई माधोपुर) का गणेश मंदिर- शिवजी के तीसरे नेत्र से तो हम
परिचित हैं लेकिन यहाँ गणेश जी त्रिनेत्र हैं ! उनकी भी तीसरी आँख है.
★
चांदखेडी (झालावाड) का जैन मंदिर- मंदिर भी कभी नकली होता है ? यहाँ प्रथम
तल पर महावीर भगवान् का नकली मंदिर है, जिसमें दुश्मनों के डर से प्राण
प्रतिष्ठा नहीं की गई. असली मंदिर जमीन के भीतर है !
★
रणकपुर का जैन मंदिर- इस मंदिर के 1444 खम्भों की कारीगरी शानदार है..कमाल
यह है कि किसी भी खम्भे पर किया गया काम अन्य खम्भे के काम से.नहीं मिलता !
और दूसरा कमाल यह कि इतने खम्भों के जंगल में भी आप कहीं से भी ऋषभ देव जी
के दर्शन कर सकते हैं, कोई खम्भा बीच में नहीं आएगा.
★गोगामेडी(
हनुमानगढ़) का गोगाजी का मंदिर- यहाँ के पुजारी मुस्लिम हैं ! कमाल है कि
उनको अभी तक काफिर नहीं कहा गया और न ही फतवा जारी हुआ है !
★नाथद्वारा
का श्रीनाथ जी का मंदिर - चौंक जायेंगे श्रीनाथ जी का श्रृंगार जो
विख्यात है, कौन करता है ? एक मुस्लिम परिवार करता है ! पीढ़ियों से कहते
हैं कि इनके पूर्वज श्रीनाथजी की मूर्ति के साथ ही आये थे.
★ मेड़ता का चारभुजा मंदिर - सदियों से सुबह का पहला भोग यहाँ के एक मोची परिवार का लगता है ! ऊंच नीच क्या होती है ?
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डूंगरपुर का देव सोमनाथ मंदिर- बाहरवीं शताब्दी के इस अद्भुत मंदिर में
पत्थरों को जोड़ने के लिए सीमेंट या गारे का उपयोग नहीं किया गया है ! केवल
पत्थर को पत्थर में फंसाया गया है.
★बिलाडा(जोधपुर) की
आईजी की दरगाह - नहीं जनाब, यह दरगाह नहीं है ! यह आईजी का मंदिर है, जो
बाबा रामदेव की शिष्या थीं और सीरवियों की कुलदेवी हैं.
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दिल्ली भले ही देश का दिल हो, मगर इसके दिल का किसी ने हाल नहीं लिया। पुलिस मुख्यालय, सचिवालय, टाउनहाल और संसद देखने वाले पत्रकारों की भीड़ प्रेस क्लब, नेताओं और नौकरशाहों के आगे पीछे होते हैं। पत्रकारिता से अलग दिल्ली का हाल या असली सूरत देखकर कोई भी कह सकता है कि आज भी दिल्ली उपेक्षित और बदहाल है। बदसूरत और खस्ताहाल दिल्ली कीं पोल खुलती रहती है, फिर भी हमारे नेताओं और नौकरशाहों को शर्म नहीं आती कि देश का दिल दिल्ली है।
गुरुवार, 3 अगस्त 2017
राजस्थान के अद्भूत मंदिर
गुरुवार, 27 जुलाई 2017
अब लालू प्रसाद को कौन बचाएगा?
उर्मिलेश
वरिष्ठ पत्रकार,27 जुलाई 2017
बिहार में लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक-भविष्य के अंत की अटकलें और भविष्यवाणियां कई बार की जा चुकी हैं. इस बार भी की जा रही हैं.
और
क्यों न हों, लालू इस वक़्त अपने राजनीतिक जीवन के सबसे बुरे दिनों में
हैं, जब राज्य में एक शानदार जनादेश से बनी उनके महागठबंधन की सरकार रातों
रात जा चुकी है और सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब उनकी धुर-विरोधी
भाजपा के साथ नई सरकार बना चुके हैं.महागठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे उनके पुत्र तेजस्वी सत्ता से बेदखल होकर सड़क पर आ गए हैं. संकट का दूसरा और बेहद संगीन पहलू है कि इस बार सिर्फ़ लालू ही नहीं, उनके परिवार के प्रायः सभी प्रमुख सदस्य इस वक़्त किसी न किसी तरह के भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे दिख रहे हैं.
तेजस्वी सहित कई परिजनों पर बेनामी या आय से अधिक संपत्ति बनाने के आरोपों में एफआईआर दर्ज हो चुकी है. सीबीआई और अन्य एजेंसियों की पड़ताल चल रही है.
नीतीश ने महागठबंधन की भ्रूण हत्या की: लालू प्रसाद यादव
नज़रिया: लालू यादव के दिल में नीतीश नीति का शूल
नज़रिया: लालू की मुश्किल से नीतीश की चांदी?
लालू यादव का भविष्य क्या है?
ऐसे संकट और चुनौतियों में घिरे लालू प्रसाद यादव के पास पहले जैसी राजनीतिक तेजस्विता भी नहीं बची है, जिसने उन्हें नब्बे के दशक में सामाजिक न्याय के एक कद्दावर नेता के रूप में स्थापित किया था.उनके पास वह प्रभामंडल नहीं है. ऐसे में क्या वह उन राजनीतिज्ञों, टिप्पणीकारों और भविष्यवक्ताओं को अपने वजूद के प्रति आश्वस्त कर सकेंगे, जो उनकी राजनीतिक-मर्सिया लिखने की जल्दबाजी में दिख रहे हैं!
बिहार राजनीति के बहुत सारे विशेषज्ञों को लग रहा है कि लालू की राजनीति को ख़त्म करने की केंद्र की मौजूदा भाजपा-नीत सरकार की संगठित मुहिम को अब नीतीश कुमार का भी समर्थन मिल गया है, ऐसे में लालू का टिकना मुश्किल होगा.
नज़रियाः नीतीश के झटके से 2019 पर क्या पड़ेगा असर?
नज़रिया: 'नीतीश कुमार यू-टर्न की राजनीति के मास्टर हैं'
भ्रष्टाचार के आरोप निराधार नहीं
इसमें कोई दो राय नहीं कि लालू प्रसाद और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के ऊपर लगे भ्रष्टाचार के सारे आरोप निराधार नहीं हैं.अंतर सिर्फ़ इतना है कि ऐसे बहुत सारे आरोपों की जद में सत्ताधारी दल के नेता भी आ सकते थे, अगर उनकी भी घेराबंदी केंद्रीय या राज्य एजेंसियां उसी तरह करतीं जैसे वे इन दिनों विपक्षी नेताओं की कर रही हैं.
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से सम्बद्ध दो मुख्यमंत्रियों मानिक सरकार (त्रिपुरा) और पिनरई विजयन और कुछेक अन्य को छोड़कर इस वक़्त देश के सभी प्रमुख विपक्षी नेताओं के ख़िलाफ़ किसी न किसी न्यायालय या केंद्रीय एजेंसियों के समक्ष भ्रष्टाचार या कदाचार के गंभीर मामले लंबित हैं.
बीते तीन सालों के दौरान यह सिलसिला तेज हुआ है. ऐसे में बिहार के ताजा घटनाक्रमों की रोशनी में यह सवाल उठना लाजिमी है- क्या है लालू का सियासी भविष्य?
फ़ायदे में रहेगी भाजपा
नीतीश की अगुवाई में बनी नई सरकार के दौरान भाजपा सबसे फ़ायदे में रहने वाली है. सरकार में भाजपा की वापसी से संघ को बिहार में एक बार फिर अपना सांगठनिक विस्तार करने का मुंहमांगा मौक़ा मिल गया है.शपथग्रहण के दौरान राजभवन में और उसके बाद बिहार के विभिन्न ज़िलों में लगने वाले हिन्दुत्व ब्रैंड के नारों से भी इस बात का संकेत मिलता है.
बीते चार सालों से भाजपा बिहार की सत्ता से बाहर थी. केंद्र की सत्ता के बावजूद उसे राज्य में सांगठनिक विस्तार में तमाम तरह की दिक़्क़तें आ रही थीं. लेकिन अब उसका रास्ता निरापद है.
सरकार के गठन के साथ ही जद(यू) में विभाजन का सिलसिला शुरू होता दिख रहा है. उसके लिए शुरुआती संकेत अच्छे नहीं हैं.
कोई आश्चर्य नहीं, कुछ समय बाद जद(यू) का बिहार में वही हाल हो जो एक समय गोवा में भाजपा के लिए सियासी जगह बनाने वाली उसके गठबंधन की बड़ी पार्टी महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी का हुआ.
लालू की जगह लेना आसान नहीं
वह सिमटती गई और भाजपा फैलती गई. बिहार के मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन के ख़िलाफ़ इस वक़्त बड़ी ताक़त लालू की पार्टी ही है. राज्य में आज भी सामाजिक न्याय के आधार-क्षेत्र में किसी नए दल या नेता का उतना प्रभाव विस्तार नहीं हुआ है कि वह अचानक कमज़ोर होते लालू की जगह ले ले.लेकिन लालू एक कद्दावर नेता के तौर पर बहुत लंबे समय तक बरकरार रहेंगे, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता. मोदी-शाह की टीम आज देशव्यापी स्तर पर जिस तरह संगठित और व्यवस्थित ढंग से राजनीतिक योजनाएं तैयार करती हैं और जिस बड़े पैमाने पर उसे कॉर्पोरेट और मुख्यधारा मीडिया का ज़बर्दस्त समर्थन प्राप्त है, वह भारत के आधुनिक इतिहास में अभूतपूर्व है.
बीजेपी से कैसे मुक़ाबला करेंगे लालू
दूसरी तरफ़ लालू एक ऐसी क्षेत्रीय पार्टी का नेतृत्व करते हैं, जिसके पास न तो कोई थिंकटैंक है, न किसी तरह का बड़ा कॉर्पोरेट और मुख्यधारा मीडिया का समर्थन. प्रशासनिक कामकाज के उनके रिकॉर्ड भी अच्छे नहीं हैं.उनकी ऊलजलूल सियासी नौटंकियां एक समय लोगों को रोचक लगती थीं लेकिन अब वक़्त के साथ वह भी ज़्यादा कारगर नहीं रहीं.
उनके दोनों बेटे और एक बेटी राजनीति में हैं. लेकिन इनमें बड़े नेता का कौशल और विश्वास फ़िलहाल नहीं नजर आता. तेजस्वी में कुछ संभावनाएं नज़र आती थीं पर वह भी बहुत कम उम्र में ही विवादों में घेर लिए गए हैं.
इन वजहों से लालू का राजनीतिक भविष्य सवालों से घिरा नज़र आता है. लेकिन बिहार के समाज और राजनीति के तीन ठोस पहलू इस बात का संकेत देते हैं कि लालू अगर अतीत की अपनी ग़लतियों से सबक लें तो मुश्किलों के बावजूद वह फिलवक़्त टिके रह सकते हैं.
ग़लतियों से बाज आएं लालू
ये तीन पहलू हैं- बिहार में पिछड़ों के बड़े हिस्से और अल्पसंख्यकों के बीच किसी नए स्वीकार्य नेतृत्व का अभी तक न उभरना, सवर्ण-हिन्दुत्व आक्रामकता के मौजूदा दौर में सेक्युलर लोगों की गोलबंदी की संभावना और जद(यू) में संभावित विभाजन या फूट.यह तीनों राजनीतिक पहलू राजद-कांग्रेस गठबंधन को नई ज़मीन दे सकते हैं. लेकिन तब लालू को अपने वंशवादी आग्रहों को ढीला करना होगा. अपनी पार्टी के अन्य तपे-तपाये नेताओं को आगे करना होगा.
इस वक़्त हिन्दुत्व पार्टी के अजेंडे में पिछड़ों में जनाधार का विस्तार करना सबसे अहम बना हुआ है.
गुरुवार, 13 जुलाई 2017
Temples of India (भारत के मंदिर)

Shiv Temple (शिव मंदिर)
1 to 10
- भीमशंकर ज्योतिर्लिंग- कुंभकर्ण के पुत्र को मार कर यहां स्थापित हुए थे भगवान शिव
- यह हैं किन्नर कैलाश, कहते है महादेव के इस धाम में जाने की इंसान एक बार ही कर पाता है हिम्मत
- बाबा तामेश्वरनाथ धाम- इस शिवलिंग की कुंती ने की थी सबसे पहले पूजा
- शलमाला नदी में एक साथ बने है हज़ारों शिवलिंग, नदी की धारा स्वयं करती है अभिषेक
- सलेमाबाद शिव मंदिर में पिछले 15 सालों से रोज़ नाग आ कर करता है शिव जी की पूजा
- अदभुत- सूर्य की किरणें पड़ते ही सुनहरा हो जाता है कैलाश, बनती है ॐ की आकृति
- श्रीखंड महादेव यात्रा- अमरनाथ से भी कठिन है महादेव की यह यात्रा
- मंढीप बाबा- इस स्वयंभू शिवलिंग दर्शन के लिए पार करनी पड़ती है एक ही नदी 16 बार, साल में एक बार होते है दर्शन
- असीरगढ़ का किला – श्रीकृष्ण के श्राप के कारण यहां आज भी भटकते हैं अश्वत्थामा, किले के शिवमंदिर में प्रतिदिन करते है पूजा
- काठगढ़ महादेव – यहां है आधा शिव आधा पार्वती रूप शिवलिंग (अर्धनारीश्वर शिवलिंग)
11 to 20
- स्तंभेश्वर महादेव – शिव पुत्र कार्तिकेय ने करी थी स्थापना, दिन में दो बार नज़रों से ओझल होता है यह मंदिर
- टूटी झरना मंदिर- रामगढ़(झारखंड) – यहाँ स्वयं माँ गंगा करती है शिवजी का जलाभिषेक
- बिजली महादेव- कुल्लू -हर बारह साल में शिवलिंग पर गिरती है बिजली
- लिंगाई माता मंदिर – स्त्री रूप में होती है शिवलिंग की पूजा
- अचलेश्वर महादेव – अचलगढ़ – एक मात्र मंदिर जहां होती है शिव के अंगूठे की पूजा
- ममलेश्वर महादेव मंदिर – यहां है 200 ग्राम वजनी गेहूं का दाना – पांडवों से है संबंध
- नागचंद्रेश्वर मंदिर – साल में मात्र एक दिन खुलता है मंदिर
- चमत्कारिक भूतेश्वर नाथ शिवलिंग – हर साल बढ़ती है इसकी लम्बाई
- अनोखा शिवलिंग – महमूद गजनवी ने इस पर खुदवाया था कलमा
- महादेवशाल धाम – जहाँ होती है खंडित शिवलिंग की पूजा – गई थी एक ब्रिटिश इंजीनियर की जान
21 to 30
- निष्कलंक महादेव – गुजरात – अरब सागर में स्तिथ शिव मंदिर – यहां मिली थी पांडवों को पाप से मुक्ती
- परशुराम महादेव गुफा मंदिर – मेवाड़ का अमरनाथ – स्वंय परशुराम ने फरसे से चट्टान को काटकर किया था निर्माण
- कमलनाथ महादेव मंदिर – झाडौल – यहां भगवान शिव से पहले की जाती है रावण की पूजा
- कामेश्वर धाम कारो – बलिया – यहाँ भगवान शिव ने कामदेव को किया था भस्म
- अचलेश्वर महादेव – धौलपुर(राजस्थान) – यहाँ पर है दिन मे तीन बार रंग बदलने वाला शिवलिंग
- लक्ष्मणेश्वर महादेव – खरौद – यहाँ पर है लाख छिद्रों वाला शिवलिंग (लक्षलिंग)
- भोजेश्वर मंदिर (Bhojeshwar Temple) – भोपाल – यहाँ है एक ही पत्थर से निर्मित विशव का सबसे बड़ा शिवलिंग
- जंगमवाड़ी मठ – वाराणसी : जहा अपनों की मृत्यु पर शिवलिंग किये जाते हे दान
- एक हथिया देवाल- मात्र एक हाथ से और एक रात में बने इस प्राचीन शिव मंदिर के शिवलिंग की नहीं होती है पूजा, आखिर क्यों?
Mata Temple (माता के मंदिर)
1 to 10
- कामाख्या शक्तिपीठ से जुड़े कुछ रोचक तथ्य, जो कम लोगों को है पता
- मैहर देवी का मंदिर: ये है माँ शारदा का इकलौता मंदिर, यहाँ आज भी आते हैं आल्हा और उदल
- चूड़ामणि देवी मंदिर- मान्यता है की इस मदिर में चोरी करने पर ही पूरी होती है मनोकामना
- श्राई कोटि माता मंदिर- यहां पति-पत्नी एक साथ नहीं कर सकते मां दुर्गा के दर्शन, शिव पुत्रों से जुडी है कहानी
- ज्वालामुखी देवी – यहाँ अकबर ने भी मानी थी हार – होती है नौ चमत्कारिक ज्वाला की पूजा
- दंतेश्वरी मंदिर – दन्तेवाड़ा – एक शक्ति पीठ – यहाँ गिरा था सती का दांत
- 51 Shakti Peeth (51 शक्ति पीठ)
- करणी माता मंदिर, देशनोक (Karni Mata Temple , Deshnok) – इस मंदिर में रहते है 20,000 चूहे, चूहों का झूठा प्रसाद मिलता है भक्तों को
- कामाख्या मंदिर – सबसे पुराना शक्तिपीठ – यहाँ होती हैं योनि कि पूजा, लगता है तांत्रिकों व अघोरियों का मेला
- तरकुलहा देवी (Tarkulha Devi) – गोरखपुर – जहाँ चढ़ाई गयी थी कई अंग्रेज सैनिकों कि बलि
11 to 18
- तनोट माता मंदिर (जैसलमेर) – जहा पाकिस्तान के गिराए 3000 बम हुए थे बेअसर
- दैवीय चमत्कार- 50 लाख लीटर पानी से भी नहीं भरा शीतला माता के मंदिर में स्तिथ ये छोटा सा घडा़
- जीजी बाई का मंदिर- एक अनोखा मंदिर जहाँ मन्नत पूरी होने पर मां दुर्गा को चढ़ती है चप्पल और सैंडिल
- जीण माता मंदिर- औरंगजेब भी नहीं कर पाया था इस मंदिर को खंडित, मधुमक्खियों ने की थी रक्षा
- सिमसा माता मंदिर- जहां फर्श पर सोने से होती है नि:संतान महिलाओं को संतान की प्राप्ति
- मां बम्लेश्वरी मंदिर- ऊंचे पहाड़ पर स्थित माता के इस मंदिर से जुड़ी है एक प्रसिद्ध प्रेम कहानी
- चौसठ योगिनी मंदिर, मुरैना- यह मंदिर कहलाता था तांत्रिक विश्वविद्यालय, होते थे तांत्रिक अनुष्ठान
- कैला देवी मंदिर, करौली- यहाँ डकैत भी आकर करते है माँ काली की साधना
Hanuman Temple (हनुमान मंदिर)
- चमत्कारिक मेहंदीपुर बालाजी मंदिर- प्रेत-भूत बाधा दूर करने का सबसे प्रसिद्ध और विश्वसनीय स्थान
- भारत के प्रसिद्ध 16 हनुमान मंदिर
- गिरजाबंध हनुमान मंदिर – रतनपुर – एक अति प्राचीन मंदिर जहाँ स्त्री रूप में होती है हनुमान कि पूजा
- तेलंगाना में है हनुमान जी और उनकी पत्नी सुवर्चला का मंदिर
- कष्टभंजन हनुमान मंदिर- जहाँ हनुमान जी के पैरों में स्त्री रूप में बैठे है शनि देव
- भारत में दो जगह है हनुमान पुत्र मकरध्वज के मंदिर
Other Temple (अन्य मंदिर)
- इस मंदिर में है अदभुत ‘शालिग्राम’, पिछले 200 सालों से बढ़ रहा है आकार
- श्रीकृष्ण जी की ये 7 प्रतिमाएं हैं बहुत विशेष, जानिए क्या है कारण?
- गंधर्वसेन मंदिर,गंधर्वपुरी- जहां चूहे लगाते हैं इच्छाधारी नाग की परिक्रमा
- ये है वो 10 मंदिर जिनका पांडवों से है विशेष संबंध
- भारत के 10 रहस्यमय मंदिर, कोई नहीं जान पाया अब तक इनके राज
- ‘मत्स्य माताजी’- एक अनोखा मंदिर जहां होती है व्हेल मछली की पूजा
- सूर्य मंदिर, मुलतान- श्री कृष्ण पुत्र सांबा ने करवाया था निर्माण
- बद्रीनाथ धाम- यही वेदव्यास जी ने लिखी थी महाभारत, कहते है इसे धरती का वैकुंठ
- सर्प मंदिर, मन्नारशाला – भारत के 7 आश्चर्यों में होती है गिनती, मंदिर परिसर में है 30000 सर्प प्रतिमाएं
- नारायण धाम, उज्जैन- यहाँ कृष्ण संग विराजित है सुदामा, दोस्ती को समर्पित है यह मंदिर
- ये हैं भारत के 7 प्रसिद्ध, खूबसूरत बौद्ध मंदिर
- शनि पर्वत, मुरैना- हनुमान जी ने लंका से फेंका तो यहां गिरे शनिदेव, मौजूद हैं गिरने के निशान
- शनि शिंगणापुर- इस गांव में नहीं लगते है कहीं भी ताले, शनिदेव करते हैं रक्षा
- भारत के 10 प्रसिद्ध सूर्य मंदिर
- पाकिस्तान स्तिथ हिन्दुओं के 20 प्राचीन, पौराणिक और ऐतिहासिक मंदिर
- भारत के 10 सबसे अमीर मंदिर
- अद्भुत हैंगिंग लेपाक्षी टेम्पल
- अदभुत गणेश प्रतिमा – दंतेवाड़ा में 3000 फ़ीट की ऊँचाई पर स्थापित 10 वि सदी की गणेश प्रतिमा
- अष्टविनायक – गणेश जी के आठ अति प्राचीन मंदिर, जहाँ है स्वयंभू गणेश जी
- चमत्कारिक कनिपक्कम गणपति मंदिर (आंध्रप्रदेश) – लगातार बढ़ा रहा है मूर्ति का आकार
- भारत के प्रमुख तीर्थ – 51 शक्ति पीठ, 12 ज्योतिर्लिंग, 7 सप्तपुरी और 4 धाम
- पहाड़ी मंदिर – रांची – भारत का एक मात्र मंदिर जहाँ राष्ट्रीय पर्वो पर फहराया जाता है तिरंगा
- बाबा हरभजन सिंह मंदिर – सिक्किम – इस मृत सैनिक की आत्मा आज भी करती है देश की रक्षा
- बुलेट बाबा का मंदिर – जहाँ कि जाती हैं बुलेट बाइक कि पूजा, माँगी जाती हैं सकुशल यात्रा कि मन्नत
- महात्मा गांधी जी का मंदिर – उड़ीसा
- जानिये भारत में स्तिथ यमराज (धर्मराज) के चार प्राचीन मंदिरों के बारे में
- गंधेश्वर शिवलिंग – खुदाई में मिला 2000 साल पुराना शिवलिंग – आती है तुलसी की सुगंध
- क्यों है ब्रह्मा जी का पुरे भारत में एक मंदिर ?
- लादा महादेव टंगरा – यहां चट्टान पर हाथ फेरने से रिसता है पानी, दिखते हैं सीता-राम के पद-चिन्ह
- रहस्यमयी और चमत्कारिक काल भैरव मंदिर – जहां भगवान काल भैरव करते है मदिरा पान
- 12 ज्योतिर्लिंग (12 Jyotirlinga)
- 7 धार्मिक स्थल जहाँ महिलाओं के प्रवेश पर है पाबंदी
- लोहार्गल – यहां पानी में गल गए थे पांडवों के अस्त्र-शस्त्र, मिली थी परिजनों की हत्या के पाप से मुक्ति
- टाइगर टेंपल- थाईलैंड- जहाँ सैकड़ों टाइगर रहते है बौद्ध भिक्षुओं के साथ
- मलूटी- झारखंड – इसे कहते है मंदिरों का गाँव और गुप्त काशी
- आदि केशव पेरुमल मंदिर – श्री पेरंबदूर – शिवजी के भूत गणों ने किया था इसका निर्माण
- भारत के इन 10 मंदिरों में मिलता है अजब गजब प्रसाद
- शृंग ऋषि और भगवान राम की बहन ‘शांता’ का मंदिर
- आंजन धाम- मान्यता है की यही माँ अंजनी ने दिया था हनुमान को जन्म
- कहानी भारत के 5 रहस्यमयी मंदिरों की
- भगवान श्रीराम के 10 प्रमुख मंदिर
- ये है भारत में वो स्थान जहाँ होती है रावण की पूजा
भोपाल का भोजेश्वर मंदिर
: यहाँ है एक ही पत्थर से निर्मित सबसे विशाल शिवलिंग
Bhojeshwar Temple History & Story in Hindi
: भोजपुर (Bhojpur), मध्य प्रदेश कि राजधानी भोपाल से 32 किलो मीटर दूर
स्तिथ है। भोजपुर से लगती हुई पहाड़ी पर एक विशाल, अधूरा शिव मंदिर हैं। यह
भोजपुर शिव मंदिर (Bhojpur Shiv Temple) या भोजेश्वर मंदिर (Bhojeshwar
Temple) के नाम से प्रसिद्ध हैं। भोजपुर तथा इस शिव मंदिर का निर्माण परमार
वंश के प्रसिद्ध राजा भोज (1010 ई – 1055 ई ) द्वारा किया गया था।
इस मंदिर कि अपनी कई विशेषताएं हैं।

इस मंदिर कि पहली विशेषता इसका विशाल शिवलिंग हैं जो कि विशव का एक ही
पत्थर से निर्मित सबसे बड़ा शिवलिंग (World’s Tallest Shiv Linga) हैं।
सम्पूर्ण शिवलिंग कि लम्बाई 5.5 मीटर (18 फीट ), व्यास 2.3 मीटर (7.5 फीट
), तथा केवल लिंग कि लम्बाई 3.85 मीटर (12 फीट ) है।

दूसरी विशेषता भोजेश्वर मंदिर (Bhojeshwar Temple) के पीछे के भाग में
बना ढलान है, जिसका उपयोग निर्माणाधीन मंदिर के समय विशाल पत्थरों को ढोने
के लिए किया गया था। पूरे विश्व में कहीं भी अवयवों को संरचना के ऊपर तक
पहुंचाने के लिए ऐसी प्राचीन भव्य निर्माण तकनीक उपलब्ध नहीं है। ये एक
प्रमाण के तौर पर है, जिससे ये रहस्य खुल गया कि आखिर कैसे 70 टन भार वाले
विशाल पत्थरों का मंदिर क शीर्ष तक पहुचाया गया।

भोजेश्वर मंदिर (Bhojeshwar Temple) कि तीसरी विशेषता इसका अधूरा
निर्माण हैं। इसका निर्माण अधूरा क्यों रखा गया इस बात का इतिहास में कोई
पुख्ता प्रमाण तो नहीं है पर ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर एक ही रात में
निर्मित होना था परन्तु छत का काम पूरा होने के पहले ही सुबह हो गई, इसलिए
काम अधूरा रह गया।

चौथी विशेषता भोजेश्वर मंदिर (Bhojeshwar Temple) कि गुम्बदाकार छत
हैं।चुकी इस मंदिर का निर्माण भारत में इस्लाम के आगमन के पहले हुआ था अतः
इस मंदिर के गर्भगृह के ऊपर बनी अधूरी गुम्बदाकार छत भारत में ही गुम्बद
निर्माण के प्रचलन को प्रमाणित करती है। भले ही उनके निर्माण की तकनीक
भिन्न हो। कुछ विद्धान इसे भारत में सबसे पहले गुम्बदीय छत वाली इमारत
मानते हैं। इस मंदिर का दरवाजा भी किसी हिंदू इमारत के दरवाजों में सबसे
बड़ा है।

इस मंदिर की पांचवी विशेषता इसके 40 फीट ऊचाई वाले इसके चार स्तम्भ हैं। गर्भगृह की अधूरी बनी छत इन्हीं चार स्तंभों पर टिकी है।
भोजेश्वर मंदिर (Bhojeshwar Temple) कि एक अन्य विशेषता यह है कि इसके अतिरिक्त भूविन्यास, सतम्भ, शिखर , कलश और चट्टानों की सतह पर आशुलेख की तरह उत्कीर्ण नहीं किए हुए हैं।
भोजेश्वर मंदिर (Bhojeshwar Temple) के विस्तृत चबूतरे पर ही मंदिर के
अन्य हिस्सों, मंडप, महामंडप तथा अंतराल बनाने की योजना थी। ऐसा मंदिर के
निकट के पत्थरों पर बने मंदिर- योजना से संबद्ध नक्शों से पता चलता है।
इस प्रसिद्घ स्थल में वर्ष में दो बार वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है जो मकर संक्रांति व महाशिवरात्रि पर्व के समय होता है। इस धार्मिक उत्सव में भाग लेने के लिए दूर दूर से लोग यहां पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि पर यहां तीन दिवसीय भोजपुर महोत्सव का भी आयोजन किया जाने लगा है।

भोजपुर शिव मंदिर(Bhojpur Shiv Temple) के बिलकुल सामने पश्चमी दिशा में
एक गुफा हैं यह पारवती गुफा के नाम से जानी जाती हैं। इस गुफा में
पुरातात्विक महत्तव कि अनेक मुर्तिया हैं।

भोजपुर (Bhojpur) में एक अधूरा जैन मंदिर भी है। इस मंदिर में भगवन
शांतिनाथ कि 6 मीटर ऊंची मूर्ति हैं। दो अन्य मुर्तिया भगवान पार्शवनाथ व
सुपारासनाथ कि हैं। इस मंदिर में लगे एक शिलालेख पर राजा भोज का नाम लिखा
है। यह शिलालेख एक मात्र Epigraphic Evidence हैं जो कि राजा भोज से
सम्बंधित हैं।

इसी मंदिर परिसर में आचार्य माँटूंगा का समाधि स्थल हैं जिन्होंने Bhaktamara Stotra. लिखा था।

Shivlinga at Bhojpur Shiv Temple (World’s tallest shivlinga made by one rock)

Earthen ramp behind the temple at Bhojpur

Bhojpur Shiv Temple

Bhojpur Shiv Temple

Pillars of Temple
भोजेश्वर मंदिर (Bhojeshwar Temple) कि एक अन्य विशेषता यह है कि इसके अतिरिक्त भूविन्यास, सतम्भ, शिखर , कलश और चट्टानों की सतह पर आशुलेख की तरह उत्कीर्ण नहीं किए हुए हैं।
इस प्रसिद्घ स्थल में वर्ष में दो बार वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है जो मकर संक्रांति व महाशिवरात्रि पर्व के समय होता है। इस धार्मिक उत्सव में भाग लेने के लिए दूर दूर से लोग यहां पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि पर यहां तीन दिवसीय भोजपुर महोत्सव का भी आयोजन किया जाने लगा है।

Parvati cave at Bhojpur

Jain Temple of Bhojpur

Mantunga Acharya Shrine at Bhojpur, Madhya Pradesh
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बुधवार, 17 मई 2017
दुनिया की 10 सबसे गर्म जगह
दुनिया की 10 सबसे गर्म जगह, यहां 70 डिग्री तक पहुंच जाता है तापमान
यहां हम दुनिया की कुछ ऐसी जगहों के बारे में बता रहे हैं, जहां लोगों को समय-समय पर रिकॉर्डतोड़ गर्मी का मुकाबला करना पड़ा।
1. दश्त-ए-लुत, ईरान (Dasht-e lut, Iran)
साल 2004, 2005, 2006, 2007 और 2009 में ईरान का दश्त-ए-लुत धरती पर सबसे ज्यादा गर्म स्थान रहा। हालांकि, 2005 में यहां अधिकतम तापमान 70.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लुत के एक बड़े हिस्से में इतनी गर्मी पड़ती है कि यहां किसी जीव-जंतु के लिए रहना संभव नहीं है।
अधिकतम तापमान- 69.3 डिग्री सेल्सियस
ऑस्ट्रेलिया धरती पर सबसे शुष्क (सूखे) महाद्वीप है। ‘बैडलैंड्स’ के नाम से मशहूूर यहां क्वींसलैंड आउटबैक का हिस्सा एक बड़ा रेगिस्तान है। 2003 में यहां भयंकर सूखा पड़ा था, उस वक्त यहां का तापमान 69.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
3. फ्लेमिंग माउंटेन, शिनजियांग, चीन (Flaming mountains, Xinjiang, China)
अधिकतम तापमान- 66.8 डिग्री सेल्सियस
चीन के शिनजियांग में तियान शान पहाड़ों की श्रृंखला में आने वाले फ्लेमिंग माउंटेन को भी गर्म इलाकों में जाना जाता है। 2008 में यहां पर जमीन की सतह का तापमान 66.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। उस साल ये धरती पर नापा गया सबसे ज्यादा तापमान था।
4. केव ऑफ द क्रिस्टल, मैक्सिको (Cave of the crystals, Mexico)
अधिकतम तापमान- 58 डिग्री सेल्सियस
मैक्सिको के नैका में क्रिस्टल गुफा मौजूद है। इसे अब तक मिला सबसे बड़ा प्राकृतिक क्रिस्टल माना जाता है। ये गुफा बेहद गर्म है। यहां पर हवा का अधिकतम तापमान 58 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है। यही वजह है कि इस गुफा को बहुत ज्यादा छानबीन नहीं की जा सकी है।
5 . अल-अजीजियाह, लीबिया (Al aziziyah, Libya)
अधिकतम तापमान- 57.8 डिग्री सेल्सियस
लीबिया की राजधानी त्रिपोली में 40 किलोमीटर दक्षिण में मौजूद अल-अजीजियाह बेहद गर्म शहरों में से एक है। 1922 में यहां का अधिकतम तापमान 57.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वैसे आमतौर पर हर गर्मी में यहां का तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक जाता है।
6. डेथ वैली, अमेरिका (Death valley, America)
अधिकतम तापमान- 56.7 डिग्री सेल्सियस
कैलिफोर्निया के मोजेव रेगिस्तान में स्थित डेथ वैली उत्तरी अमेरिका के सबसे सूखे और गर्म इलाकों में से है। ये समुद्र के स्तर से काफी नीचे बसा है। यहां पर रिकार्ड अधिकतम तापमान 56.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। ये हिस्सा पहाड़ों से घिरा हुआ है।
7. तिरट जवी, इजरायल (Tirat zvi, Israel)
अधिकतम तापमान- 54 डिग्री सेल्सियस
एशिया में हवा में सबसे ज्यादा नमी इसी शहर में रिकॉर्ड की गई है। यह इजरायल का धार्मिक शहर है, जो बेत शेन वैली के पास स्थित है। यह समुद्र तल से 722 फीट नीचे है। जॉर्डन नदी पास होने से यह की धरती अत्यधिक उपजाऊ है।1942 में 54 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया था, जो एशिया में सबसे ज्यादा था।
8. केबिली, ट्यूनीशिया (Kebili, Tunisia)
अधिकतम तापमान- 55 डिग्री सेल्सियस
यह मध्य ट्यूनीशिया का नखलिस्तान है। सिर्फ खजूर के पेड़ ही यहां आपको छाया दे सकते हैं। यह अफ्रीका के सबसे गर्म शहरों में से एक है। हालांकि, चरम जलवायु के बावजूद भी यह कस्बा प्राकृतिक रूप से काफी समृद्ध है। बताया जाता है कि इस कस्बे में दो लाख साल से बसाहट है।
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