सोमवार, 22 मार्च 2021

आत्मीयता

रामायण कथा का एक अंश, जिससे हमे सीख मिलती है "एहसास" की...* 

.......

श्री राम, लक्ष्मण एवम् सीता' मैया चित्रकूट पर्वत की ओर जा रहे थे,

राह बहुत पथरीली और कंटीली थी !

की यकायक श्री राम के चरणों मे कांटा चुभ गया !


श्रीराम रूष्ट या क्रोधित नहीं हुए, बल्कि हाथ जोड़कर धरती माता से अनुरोध करने लगे !

बोले- "माँ, मेरी एक विनम्र प्रार्थना है आपसे, क्या आप स्वीकार करेंगी ?"

धरती बोली- "प्रभु प्रार्थना नहीं, आज्ञा दीजिए !"

प्रभु बोले, "माँ, मेरी बस यही विनती है कि जब भरत मेरी खोज मे इस पथ से गुज़रे, तो आप नरम हो जाना !

कूछ पल के लिए अपने आँचल के ये पत्थर और कांटे छूपा लेना !

मुझे कांटा चुभा सो चुभा, पर मेरे भरत के पाँव मे अघात मत करना"


श्री राम को यूँ व्यग्र देखकर धरा दंग रह गई !

पूछा- "भगवन, धृष्टता क्षमा हो ! पर क्या भरत आपसे अधिक सुकूमार है ?

जब आप इतनी सहजता से सब सहन कर गए, तो क्या कूमार भरत सहन नही कर पाँएगें ?

फिर उनको लेकर आपके चित मे ऐसी व्याकूलता क्यों ?"

श्री राम बोले- "नही...नही माते, आप मेरे कहने का अभिप्राय नही समझीं ! भरत को यदि कांटा चुभा, तो वह उसके पाँव को नही, उसके हृदय को विदीर्ण कर देगा !"

"हृदय विदीर्ण !! ऐसा क्यों प्रभु ?",

धरती माँ जिज्ञासा भरे स्वर में बोलीं !


"अपनी पीड़ा से नहीं माँ, बल्कि यह सोचकर कि...इसी कंटीली राह से मेरे भैया राम गुज़रे होंगे और ये शूल उनके पगों मे भी चुभे होंगे !

मैया, मेरा भरत कल्पना मे भी मेरी पीड़ा सहन नहीं कर सकता, इसलिए उसकी उपस्थिति मे आप कमल पंखुड़ियों सी कोमल बन जाना..!!"

मन के भीतर कोमल एहसास ही आत्मीयता है 


 *अर्थात-* 

 *रिश्ते अंदरूनी एहसास, आत्मीय अनुभूति के दम पर ही टिकते हैं ।* 

 


 *इसीलिए कहा गया है कि...* 

 *रिश्ते खून से नहीं, परिवार से नही मित्रता से नही, व्यवहार से नही,* 


 *बल्कि...*

 सिर्फ और सिर्फ आत्मीय अनुभूति के  "अनुभव " से ही बनते और निर्वहन किए जाते हैं


🌷🙏🏼सुप्रभात

कांपती हुई आवाज़ के मालिक मरहूम तलत महमूद

 तुझे याद हो कि न याद हो ! / दिल में उतर जाने वाली भावुक, रेशमी और कांपती आवाज़ के मालिक मरहूम तलत महमूद अपने दौर के सबसे अलग पार्श्वगायक रहे। भावनाओं की मर्मस्पर्शी अदायगी के बूते उन्होंने अपने समकालीन मोहम्मद रफ़ी, मुकेश, मन्ना डे और हेमंत कुमार के बरक्स अपनी एक अलग पहचान बनाई थी।

 पिछली सदी के तीसरे दशक में मात्र सोलह साल की उम्र में ग़ज़ल गायक के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले तलत को फिल्मों में पहचान मिली अनिल बिस्वास के संगीत निर्देशन में फिल्म 'आरजू' में दिलीप कुमार के लिए गाए गीत 'ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल' से। गायकी का उनका सिलसिला चल तो निकला, लेकिन अपनी राह में उन्होंने ख़ुद कई बाधाएं खड़ी की। वे अपने को एक सफल अभिनेता के तौर पर भी देखना चाहते थे।

 खूबसूरत चेहरे वाले तलत को 'वारिस', 'डाक बाबू', 'एक गांव की कहानी' सहित कुछ फिल्मों में नायक की भूमिकाएं मिली भी, लेकिन महान अभिनेताओं के उस दौर में उनकी कोई पहचान न बन सकी।

 उसके बाद उन्होंने ख़ुद को गायन के क्षेत्र तक सीमित कर लिया। गायक के तौर पर उनके कुछ कालजयी गीत हैं - चल दिया कारवां, हमसे आया न गया तुमसे बुलाया न गया, जाएं तो जाएं कहां, ऐ मेरे दिल कहीं और चल, सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया, तस्वीर बनाता हूं तस्वीर नहीं बनती, आसमां वाले तेरी दुनिया से जी घबड़ा गया, दिले नादां तुझे हुआ क्या है, ये हवा ये रात ये चांदनी, इतना न मुझसे तू प्यार बढ़ा, आंसू समझ के क्यों मुझे आंख से तूने गिरा दिया, जलते हैं जिसके लिए तेरी आंखों के दीये, मेरी याद में तुम न आंसू बहाना, फिर वही शाम वही गम वही तन्हाई है, मैं तेरी नज़र का सरूर हूं, मैं दिल हूं एक अरमान भरा, अश्कों में जो पाया है वो गीतों में दिया है, रात ने क्या क्या ख्वाब दिखाए, ऐ गमे दिल क्या करूं, प्यार पर बस तो नहीं है मेरा, तेरी आंख के आंसू पी जाऊं, होके मज़बूर मुझे उसने भुलाया होगा।


तलत के बारे में कहा जाता है कि उनके आवाज़ की रेंज बहुत सीमित थी। उल्लास, उमंग, श्रृंगार और शरारत उनके गले को रास नहीं आती थी। वे मूलतः दुख-दर्द और शायद अवसाद के गायक थे। उनके गीतों और उनकी आवाज़ की व्यथा उनके श्रोताओं के भीतर जीवन के साथ तारतम्य नहीं, एक एकांत, एक पलायन रचती थी। यही वजह है कि पिछली सदी के सातवें दशक के बाद हिंदी फिल्मों का संगीत लाउड होते ही उसमें तलत जैसी कोमल, रूहानी आवाज़ के लिए गुंजाइश नहीं बची। उनके ग़ैरफ़िल्मी और मंचीय गायन का सिलसिला उनके आख़िरी दिनों तक चलता रहा।



✌️🙏🙏🙏✌️


आज तलत महमूद के यौमे पैदाईश पर उन्हें श्रद्धांजलि !


साभार ~ Dhruv Gupt

नलिनी जयवंत'

 'नलिनी जयवंत' (जन्म १८ फरवरी १९२६) प्रसिद्ध अभिनेत्री शोभना समर्थ (अभिनेत्रियों नूतन और तनुजा की मां) की चचेरी बहन थी। १९४१ में फ़िल्म- 'राधिका' से नलिनी जयवंत ने  अपने कैरियर की शुरुआत शुरू की।


सन १९४२ में रिलीज हुई फिल्म ‘आंख मिचौली’ ने नलिनी जयवंत को सफल अभिनेत्रियों की पंक्ति में ला खड़ा कर दिया था। इसके बाद नलिनी को अनेकों फिल्मों के ऑफर मिलने शुरू हो गए। अपने २५ वर्षों के लंबे फिल्मी कैरियर (१९४१ से १९६५ तक) के दौरान नलिनी जयवंत ने लगभग ६० फिल्मों में काम किया था। उनकी प्रमुख फिल्मों में - 'राही', 'शिकस्त', 'रेलवे प्लेटफार्म', 'आवाज़', 'काला पानी', 'एक नजर', 'जादू', 'नौजवान', 'दोराहा', 'काफिला', 'नौबहार', 'नास्तिक', 'मुनीम जी', 'लगान', 'आन-बान', 'दुर्गेश नंदिनी', 'हम सब चोर हैं', 'मिस बॉम्बे', 'मिस्टर एक्स', 'शेरू', 'मिलन', 'गल्र्स होस्टल', 'ज़िन्दगी और हम', 'कितना बदल गया इंसान', 'मां के आंसू', 'बाप-बेटी', 'नाज़', 'महबूबा' इत्यादि का नाम लिया जाता है।


अभिनेता दिलीप कुमार अपनी सभी सह-नायिकाओं में से 'नलिनी जयवंत' को सबसे अधिक प्रतिभावान अभिनेत्री मानते थे, जो किसी भी फिल्म-दृश्य के सार को बखूबी समझ लेती थी और उस चरित्र में डूब जाती थी। एक कैमरामैन सर्वेक्षण द्वारा नलिनी को सबसे फोटोजेनिक चेहरे वाली भारतीय अभिनेत्री के रूप में चयन किया गया था। अपने दौर की बोल्ड और ब्यूटीफुल अदाकारा नलिनी जयवंत, जीवन की संध्या-बेला में बिलकुल तन्हा हो गई थी। २१ दिसंबर २०१० को मुंबई में उनका निधन हो गया। तीन दिन तक उनकी मौत की खबर तक किसी को नहीं लगी। फिल्म 'मुनीम जी' के लिए साहिर लुधियानवी ने कितना सही गीत लिखा था ~


'जीवन के सफर में राही, मिलते हैं बिछड़ जाने को,

और दे जाते हैं यादें,  तन्हाई में तड़पाने को…


नलिनी जयवंत ने बहुत सी फिल्मों में स्वयं के लिए करीब ३८ गाने भी गाये। उनके गाये कुछ गीत ~


* हवा बसंत की डोल रही थी

बन में कोयल बोल रही थी


फ़िल्म : बहन (१९४१)

स्वर : नलिनी जयवंत / हरीश

गीतकार : सफ़दर आह सीतापुरी

संगीत : अनिल विश्वास


* आहें भर-भर के तुझे याद किया करती हूँ

याद किया करती हूँ, फ़रियाद किया करती हूँ


फ़िल्म : मुक़द्दर (१९५०)

स्वर : नलिनी जयवंत

गीतकार : राजा मेंहदी अली ख़ान

संगीत : खेमचंद प्रकाश/भोला श्रेष्ठ 


* जब नैनों में कोई आन बसे, फिर नींद कहाँ ओ फिर चैन कहाँ

जब दिल में प्यार की हूक उठे, फिर नींद कहाँ ओ फिर चैन कहाँ


फ़िल्म : मुक़द्दर (१९५०)


* रखती हूँ मैं प्यार तेरा सीने से लगा के

तेरी तस्वीर पिया नैनों में छुपा के


फ़िल्म : हिंदुस्तान हमारा (१९५०)

स्वर : नलिनी जयवंत

गीतकार : दीवान शरार

संगीत : वसंत देसाई

मशहूर संगीतकार मरहूम इक़बाल कुरेशी

 आज 21 मार्च को मशहूर संगीतकार मरहूम इक़बाल कुरेशी साहब की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके मधुर धुनों पर रफ़ी साहब के सर्वश्रेष्ठ

सदाबहार नग़मों की सूची पेश है...

*रफ़ी-इक़बाल कुरैशी के सर्वश्रेष्ठ नग़मे*

*संकलनकर्ता-संतोष कुमार मस्के*

*फ़िल्म-चा चा चा*

१)-

ख़ुशी जिसने खोजी वो धन ले के लौटा,हँसी जिसने खोजी वो तन लेके लौटा,मगर प्यार को खोजने गया जो,न तन लेके लौटा न धन लेके लौटा,

सुबहा न आयी,शाम न आयी,जिस दिन तेरी याद न आयी,याद न आई,आ जाओ,आ जाओ- *एकल*

२)-

वो हम न थे वो तुम न थे,वो रहगुज़र थी प्यार की- *एकल*

३)-

इक चमेली के मंडवे तले,दो बदन प्यार की आग में जल गए,इक चमेली के मंडवे तले- *साथ आशा*

४)-

इक लाली घर से चली,तन सँवार के,कजरा डाल के,अपने श्याम की कुंज गली- *एकल*

५)-

तुमसे मानो या ना मानो,मुझे तुमसे प्यार है- *साथ आशा*

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*फ़िल्म-ये दिल किसको दूँ*

६)-

फिर आने लगा याद मुझे,प्यार का आलम,इक़रार का आलम- *साथ उषा खन्ना*

७)-

कितनी हसीं हो तुम,कितनी हसीं हो तुम,ये गेसू के साए,मेरी जिंदगी में छाए- *साथ आशा*

८)-

जब तक दुनिया रहेगी,रहेगा तेरा नाम मेरा नाम,लाख मिटाए मिट न सकेगा,तेरा नाम मेरा नाम- *साथ आशा*

९)-

मेरा दिल तुम पे आ गया,मेरे पहलूँ से दिल गया- *एकल*

१०)-

लोग कहते है तो सच ही कहते होंगे,ये दिल किसको दूँ- *एकल*

११)-

क्या हुआ इश्क़ का मैंने अगर इज़हार किया- *साथ आशा*

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*फ़िल्म-लव इन शिमला*

१२)-

डीग डीग डीग,हसीनो की सवारी है,बड़ी तक़दीरवाली है,ये रिक्शा हमारी है- *साथ सुमन कल्याणपुर*

१३)-

दिल थाम चले हम आज किधर चले कोई देखे- *एकल*

१४)-

अलिफ़ जेब्रा,अली के अली पेसो, अजी बेजबरबा,बेजबरबे,बेपेसो- *साथ सुधा मल्होत्रा*

१५)-

गाल गुलाबी किसके है,नैन शराबी किसके है,बालों पे किसके रात बसे,देख के जिसको सुबह हँसे- *एकल*

१६)-

मुस्कुराते खेत बिन प्यासे तरसे- *साथ सुमन*

१७)-

किया है दिलरूबा प्यार भी कभी- *साथ आशा*

१८)-

ऐ बेबी,ए जी,इधर आओ,आ गया,घूम जाओ,घूम गया- *साथ आशा*

१९)-

यूँ जिंदगी के रास्ते,सँवारते चले गए,सँवारते चले गए- *एकल*

२०)-

लव का मतलब है प्यार,दिल का क़रार- *साथ आशा*

२१)-

हुस्न वाले वफ़ा नहीं करते,ये किसी का भला नहीं करते- *साथ शमशाद बेग़म*

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*फ़िल्म-बनारसी ठग*

२२)-

आज मौसम की मस्ती में गाये पवन,सन सनन सन,हर तरफ़ है महक,हर तरफ़ है चहक- *साथ लता*

२३)-

अब मोहब्बत में जो पहेली थी,अब न रही- *एकल*

२४)-

दिलबर जब तेरा नाम लिया,हमने तो दिल थाम लिया- *साथ उषा मंगेशकर*

२५)-

सुन सुन मेरे भाई,ये रुपिया आना पाई,सब माया है पराई- *एकल*

----- *संतोष कुमार मस्के-संकलन से* -----

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भाग-2

*रफ़ी-इक़बाल कुरैशी के सर्वश्रेष्ठ/ सदाबहार नग़मे*

*संकलनकर्ता-संतोष कुमार मस्के*

*फ़िल्म-क़व्वाली की रात*

२६)-

कहने वाले कुछ भी कह ले,जो दिल की बात है,कव्वाली की रात है,कव्वाली की रात- *साथ आशा व मन्नाडे*

२७)-

हुस्न वाले हुस्न का अँजाम देख,डूबते हुए सूरज को वक्त-ए-शाम देख- *साथ आशा*

२८)-

दिल गया,दिल का एतबार गया, जिंदगी भर का राज़दार गया- *साथ सुमन कल्याणपुर*

२९)-

ऐ जान-ए-नजऱ,चिलमन से अगर, हल्का सा इशारा हो जाये,पैग़ाम-ए- मोहब्बत मिल जाये,जीने का सहारा हो जाये- *साथ मुबारक़ बेग़म*

३०)-

प्यार की हसरतें ख़ाक में मिल गयी,दो कदम चलके,दो हमसफ़र जल गए,जिंदगी आग बनती है जिस मोड़ पर,दोनों उसी मोड़ पर जल गए- *साथ आशा*

३१)-

देख कर मेरी तरफ़,ख़ामोश हो जाना ज़रा,मैं फ़साना जब कहूँ,आँसू न भर लाना ज़रा- *साथ मुबारक़ बेग़म*

३२)-

आ मैं बताऊँ,तू है क्या,सिर्फ़ नज़र का है धोखा- *साथ आशा*

३३)-

जाते जाते इक नज़र भर देख लो,देख लो- *साथ शमशाद*

३४)-

वो चाँद सा चेहरा लिए,छत पर तेरा आना- *एकल*

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*फ़िल्म-बिंदिया*

३५)-

मैं अपने आप से,घबरा गया हूँ,मुझे ऐ,जिंदगी दीवाना कर दे- *एकल*

३६)-

तने तंदाने भाई,ताने तंदाने,गोरे गोरे हाथ लगे,टोकरी उठाने- *साथ आशा*

३७)-

ख़्वाब में कहाँ मिलोगे,किसलिए जी?,दिल से दिल की होगी बातें, इसलिए जी- *साथ लता*

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*फ़िल्म-दास्तान-ए-लैला मजनूँ*

३८)-

पुकारती है मोहब्बत,क़रीब आ जाओ- *साथ सुमन कल्याणपुर*

३९)-

आजा आजा आ भी जा,ऐ जाने-तमन्ना आ भी जा- *साथ सुमन*

४०)-

लौट के आ लौट के आ,छोड़ न जा वीराने में- *एकल*

४१)-

आजा,आजा रे जाने तमन्ना- *एकल*

४२)-

आया है तेरे दर पे सवाली- *एकल*

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*फ़िल्म-पँचायत*

४३)-

हाल ये कर दिया ज़ालिम तेरे तड़पाने ने,आग दामन में लगा ली,तेरे दीवाने ने- *साथ गीतादत्त*

४४)-

मैं ये सोचकर उसके दर से उठा था- *एकल*

४५)-

मिलके बैठो,जोड़ो बंधन,किसी को हो जो कभी शिक़ायत,अपनी पँचायत कर लो- *एकल*

४६)-

छूनक छूनक,टूनक टूनक- *साथ गीतादत्त*

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*फ़िल्म-ज़माना बदल गया*

४७)-

सोचो जी सोचो जी,ज़माना क्या कहता है- *साथ आशा*

४८)-

लाहौल वला,अजी माशा अल्लाह- *साथ आशा*

४९)-

एक चाय प्याली,एक चाय बनाने वाली- *एकल*

५०)-

उधर से तू आ,इधर से हम- *साथ आशा*

५१)-

नाच बदल दो रँग बदल दो- *साथ बलबीर*

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*फ़िल्म-आलमआरा 1973*

५२)-

सुनो रमज़ान की दास्तान तो सुनो, रहमतों का बयान है बयान तो सुनो- *एकल*

५३)-

ऐ जी जी जी,सरकार,दो और दो, आँखे हुई चार,हो गया मुझको तुमसे प्यार,सुन लो प्यार की शर्तें चार,सब पूरी होगी,लाओ हाथ- *साथ चन्द्राणी मुख़र्जी*

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५४)-

सज धज के समझाने आये,और हमे बहकाने आये- *नेक परवीन 1982* *एकल*

५५)-

बुम्बई पुरानी,कलकत्ता पुराना- *उमर क़ैद 1961* *साथ कमल बारोट*

----- *संतोष कुमार मस्के-संकलन से* -----

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संगीतकार खुर्शीद अनवर का संगीत संसार

 आज 21 मार्च को पुराने ज़माने के संगीतकार मरहूम ख़ुर्शीद अनवर साहब के जन्मदिन पर सादर नमन के साथ उनके संगीत से सजे भूले बिसरे नग़मों की सूची पेश है...

*खुर्शीद अनवर के संगीत से सजे भूले बिसरे नग़मे*

*संकलनकर्ता-संतोष कुमार मस्के*

*फ़िल्म-परवाना 1947*

१)-

इस मस्त नज़र पे पड़ी जो नज़र- *के एल सहगल*

२)-

जब तुम ही नहीं अपने,दुनिया ही बेगानी है- *सुरैय्या*

३)-

जीने का ढँग सिखाये जा- *के एल सहगल*

४)-

टूट गए सब सपने मेरे,ये दो नैना रोये- *के एल सहगल*

५)-

पापी पपीहा रे,पी पी ना बोल रे बैरी- *सुरैय्या*

६)-

सैय्यां ने उँगली मरोड़ी रे- *राजकुमारी*

७)-

आजा बालमा रे नगरिया,डर लागे- *सुरैय्या*

८)-

मेरे मुंडेर ना बोल,जा कागा जा- *सुरैय्या*

९)-

मोहब्बत में कभी ऐसी तो हालत होती नहीं- *के एल सहगल*

१०)-

ऐ फूल हँसके बाग़ में,कलियाँ खिलाए जा- *के एल सहगल*

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*फ़िल्म-सिंगार 1949*

११)-

कौन समझेगा,दिल आने के ढँग निराले है- *सुरिंदर कौर*

१२)-

ऐ दर्द-ए-मोहब्बत,तूने मुझे- *सुरैय्या व सुरिंदर कौर*

१३)-

धड़क धड़क तेरे बिन मेरा जियरा- *सुरैय्या*

१४)-

नया नैनो में रँग,नयी उठी उमंग- *सुरैय्या*

१५)-

अरी वो,मुझे छेड़ गया- *राजकुमारी*

१६)-

चँदा रे,मैं तेरी गवाही लेने आयी- *सुरिंदर कौर*

१७)-

वो दिन किधर गए कहो- *सुरैय्या*

१८)-

ओ बेदर्दी हमको यूँ सता ना- *सुरिंदर कौर*

१९)-

ऐ भूलने वाले,तुझे ये कौन बताए- *सुरैय्या*

२०)-

आई आई आई,सुहाग की रात- *शमशाद बेग़म*

----- *संतोष कुमार मस्के-संकलन से* -----

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भाग-2

*ख़ुर्शीद अनवर के संगीत से सजे भूले बिसरे नग़मे*

*संकलनकर्ता-संतोष कुमार मस्के*

*फ़िल्म-ईशारा 1943*

२१)-

शबनम क्यूँ नीर बहाये- *गौहर सुल्ताना*

२२)-

जमकर ये मुरलिया बाजे- *सुरैय्या*

२३)-

इश्क़ का दर्द सलोना हो- *वत्सला कुमठेकर*

२४)-

बागों में कोयल बोली- *सुरैय्या*

२५)-

दिल लेकर,दगा नहीं देना- *वत्सला कुमठेकर*

२६)-

धीरे-धीरे बोल मोरे राजा- *राजकुमारी व गीतादत्त*

२७)-

हमे ग़म देके ना जा ओ सजन- *गौहर सुल्ताना*

२८)-

रँग रँगीला फ़ागुन आया- *गौहर सुल्ताना,राजकुमारी व सुरैय्या*

२९)-

सजनवा आ जा रे- *गौहर सुल्ताना*

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*फ़िल्म-परख 1944*

३०)-

आये दिन प्यार के सजना- *कौशल्या*

३१)-

दुनिया है ये प्यार की दुनिया- *ईरा निगम*

३२)-

लेती है दम ब दम बलाए- *कौशल्या*

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*फ़िल्म-निशाना 1950*

३३)-

तू तू तू,घर आजा- *गीतादत्त*

३४)-

इश्क़ में हम,मर जाएंगे- *शमशाद व राजकुमारी*

३५)-

वो रूठ गए,दिल टूट गया- *गीतादत्त*

३६)-

कैसी मुरली बजाई श्याम ने- *गीतादत्त*

३७)-

कटीले तोरे नैना- *शमशाद*

३८)-

हटो जाओ परे,मत छेड़ो- *शमशाद*

३९)-

कोई किसी से दिल न लगाना- *शमशाद*

४०)-

सीने की धड़कन तेज़ हुई- *गीतादत्त*

----- *संतोष कुमार मस्के-संकलन से* -----

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भाग-3

*ख़ुर्शीद अनवर के संगीत से सजे भूले बिसरे नग़मे*

*संकलनकर्ता-संतोष कुमार मस्के*

*फ़िल्म-नीलमपरी 1952*

४१)-

क़िस्मत ने ये ज़ुल्म किया है- *गीतादत्त*

४२)-

छम छम छम,रहे दोनों साथ हरदम- *गीतादत्त व आशा*

४३)-

रात चाँदनी करे ईशारे- *गीतादत्त*

४४)-

चाहे क़िस्मत हमे रुलाये और अपना पराया समझाए- *रफ़ी व गीतादत्त*

४५)-

जब तक चले चाँद सितारे- *जी एम दुर्रानी व गीतादत्त*

४६)-

सपनो में आनेवाला बालम,मन मे समाने वाला बालम- *गीतादत्त व आशा*

४७)-

आज मैं जोगन बनके- *आशा*

४८)-

एक तुम,दूजी मैं,तीजा चाँद,चौथी ठंडी हवा- *गीतादत्त*

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*फ़िल्म-आज और कल 1947*

४९)-

जाम उठा ले,आओ पीने वाले- *नसीम अख़्तर* 

५०)-

पड़े इश्क़ में जान के हमको लाले- *जीनत बेग़म*

५१)-

आओ सभी आओ माँझी तुम कित ओर चले- *ज़ीनत बेग़म*

५२)-

कलियों को मसलने आये है- *नसीम अख़्तर*

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*फ़िल्म-पगडंडी 1947*

५३)-

तुम जुग जुग जियो जहाँ में, मन के जाए- *ज़ीनत बेग़म*

५४)-

आँख के पानी,आँख में रह गए- *मुनव्वर सुल्ताना*

५५)-

झूलना डाल दें,मोरे सैय्यां को झूला दें- *मुनव्वर सुल्ताना व ज़ीनत बेग़म*

५६)-

अम्बुआ में गाये कोयलिया- *ज़ीनत बेग़म* 

५७)-

बालमा पटवारी हो गए- *मुनव्वर सुल्ताना*

५८)-

आये हो बादल आये- *ज़ीनत बेग़म*

५९)-

पँछी बावरा,पँछी बावरा,चाँद से प्रीत लगाए- *ख़ुर्शीद बानो*

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*फ़िल्म-यतीम 1945*

६०)-

मैं उसे करूँ प्यार- *जी एम दुर्रानी*

६१)-

झुम रही बागों में भीगी हुई डालियाँ- *जी एम दुर्रानी व राजकुमारी*

६२)-

क़यामत है कि- *राजकुमारी*

६३)-

सोजा मेरे प्यारे- *राजकुमारी*

----- *संतोष कुमार मस्के-संकलन से* -----

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कुमार best veteran Actor

 Kumar___ veteran actor of yesteryears' Hindi cinema


Kumar is best known for his portrayal of Sangtarash (Sculptor) in K Asif's Mughal-e-Azam (1960).


Kumar was born in Lucknow. He belonged to a highly respected Lucknow family of Shia Syeds. His real name was Syed Hasan Ali Zaidi. From film Pooran Bhagat (1933), he became popularly known as Kumar. A personable man, he was considered the most well dressed and polished person in the Indian film industry. His acting and dialogue delivery had an individual class, which is evident in Mughal-e-Azam, and in many films including Kamal Amrohi's Mahal (1949) where as the father of the accused, he implores the barrister to advocate his case well. As Haji Sahab in Nek Parveen (1945) and as Madhubala's father in film Tarana (1951), his performance was par excellence.


His other notable films include Yahudi Ki Ladki (1933), Najma (1943), Doosri Shadi (1947), Daaera (1953), Gul Bahar (1954), Shree 420 (1955), Lal Quila (1960, Shama (1961), Jhumroo (1961), Razia Sultana (1961), and Yeh Dil Kisko Doon (1963).


Kumar married a very well known Jewish Bollywood actress of her days, Pramila and both of them established their own film company, called Silver House, making films like Naseeb, Jhankar, Bade Nawab Sahab (1944) and many more. His daughter from Pramila was Naqi Jahan, who was a most stunning beauty, and later participated in a Miss India contest.

रविवार, 21 मार्च 2021

😃😀दुर्घटना और नारी शक्ति 😃 😥

 😢      एक आदमी बड़े आराम से अपनी गाड़ी में जा रहा था कि अचानक सामने से आ रही एक महिला की गाड़ी आ कर उसकी गाड़ी से टकरा गयी … 

पर एक्सिडेंट के बाद भी,

दोनों सुरक्षित बच गए।


🚗🚘


जब दोनों गाड़ी से बाहर आए तो महिला ने पहले अपनी गाड़ी को देखा जो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी, फिर वो सामने की तरफ गयी जहाँ आदमी भी अपनी गाड़ी को बड़ी गौर से देख रहा था।

🚕🚗


तभी वह महिला उससे रूबरू होते हुए बोली ~ देखिये कैसा संयोग है कि गाड़ियाँ पूरी तरह से टूट-फूट गयी पर हमें चोट तक नहीं आई!

यह सब भगवान की मर्जी से हुआ है ताकि हम दोनों मिल सकें।


मुझे लगता है कि अब हमें 

आपस में दोस्ती कर लेनी चाहिए।


😘😘


आदमी ने भी सोचा कि इतना नुकसान होने के बाद भी गुस्सा करने के बजाय दोस्ती के लिए कह रही है तो कर लेता हूँ और बोला ~ आप बिल्कुल ठीक कह रही हैं कि ये सब भगवान की मर्जी से हुआ है।


🌹🌹


तभी महिला ने कहा ~ 

एक चमत्कार और देखिये कि …

पूरी गाड़ी टूट-फूट गयी पर अंदर रखी शराब की बोतल बिल्कुल सही है।


🍺🍻


आदमी ने कहा ~ वाकई …

यह तो हैरान करने वाली बात है।

महिला ने बोतल खोली और बोली ~ 

आज हमारी जान बची है,

हमारी दोस्ती हुई है तो, क्यों न

थोड़ी सी ख़ुशी मनाई जाए!


🍺🍺


महिला ने बोतल को उस आदमी की तरफ बढ़ाया! आदमी ने बोतल को पकड़ा, मुँह से लगाया और आधी करके बोतल वापस महिला को दे दी।

फिर कहने लगा ~ आप भी लीजिये!


😜😜


महिला ने बोतल को पकड़ा

उसका ढक्कन बंद किया और

एक तरफ रख दी!


आदमी ने पूछा ~ 

क्या आप शराब नहीं पियेंगी ?

महिला बड़े आराम से बोली ~


नहीं, मैं तो अब पुलिस का इंतज़ार करूंगी,ताकि मैं बता सकूँ कि इस शराबी ने नशे में मेरी गाड़ी ठोक दी है!


*(सम्पूर्ण नारी - शक्ति को कोटि - कोटि प्रणाम* )



🤔🤔🤔😂😂👍