शनिवार, 27 नवंबर 2021

भारतीय प्रतिभा की दुनियां भर में गूंज रहा हैं डंका ,


 लक्ष्य पर स्टूडेंट्स खुद क़ो करें फोकस: कुलाधिपति


तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के एफओईसीएस में रिसेंट ट्रेंड्स ऑन इन्नोवेशन्स इन सिविल एंड मेकैनिकल इंजीनियरिंग पर दो दिनी नेशनल कॉन्फ्रेंस का शंखनाद


ख़ास बातें 


मुरादाबाद स्मार्ट सिटी के 39 प्रोजेक्ट्स में से 03 मुकम्मल: चीफ इंजीनियर


प्रोफेशनल दो प्रकार के होते हैं - आई शेप और टी शेप : प्रो. रघुवीर


समाज कल्याण के लिए सिस्टम के चार मापदंड प्रमुख, इन्हें  संजीदगी से लें: संजय पंत


डिजाइजिंग इंजीनियर मशीन लर्निंग से किसी भी निर्माण स्थल में विफलता का जोखिम कम: प्रो. द्विवेदी


फर्स्ट डे यूपी समेत 08 सूबों के 17 रिसर्चर्स ने पढ़े अपने  पेपर्स 




प्रो.श्याम सुंदर भाटिया/डॉ. संदीप वर्मा

मुरादाबाद   

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति  श्री सुरेश जैन ने कहा, भारतीय मेधा बेमिसाल है,इसीलिए दुनिया हमारे युवाओं का लोहा मानती है। ऐसे में युवा अपने टारगेट्स से न भटकें,बल्कि अपने लक्ष्यों पर फोकस करें। छात्रों से मुखातिब होते हुए बोले, यह नेशनल कॉन आपके जीवन में मील का पत्थर साबित होगी।यदि विद्वानों के अनुभव को सुनने और  सीखने का अवसर खो दिया  तो यह केवल आपका नुकसान होगा। आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि आपके माता-पिता ने आपको  कितने बलिदान करके यहां सीखने के लिए यहां भेजा है। उन्होंने कहा कि भारतीय लोग विदेशों में अत्याधिक सफल हैं, क्योंकि उनमें वहां के लोगों की तुलना में काम करने की अधिक क्षमता है। साथ ही सलाह दी, छात्रों को अपने स्नातक के समय में अपने कैरियर के प्रति स्वार्थी होना चाहिए। उन्होंने एक शेर के जरिए छात्रों को सावधान करते हुए कहा..पहुँच गए जो मंजिल पे, उनको नहीं गुरूर-ए-सफर... जो चार कदम चले नहीं, रफ़्तार की बातें करते हैं...। कुलाधिपति श्री जैन फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड कम्प्यूटिंग साइंसेज - एफओईसीएस की ओर से रिसेंट ट्रेंड्स ऑन इन्नोवेशन्स इन सिविल एंड मेकैनिकल इंजीनियरिंग पर आयोजित दो दिनों नेशनल कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। इससे पूर्व अतिथियों का बुके देकर वॉर्म वेलकम किया गया। अंत में मेहमानों को स्मृति चिन्ह भी भेंट किए गए। यह कॉन्फ्रेंस ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में हो रही है।  कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ टीएमयू के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन की गरिमामई मौजूदगी में बतौर मुख्य अतिथि मुरादाबाद महानगर- स्मार्ट सिटी प्रोजेट के मुख्य अभियंता श्री एके मित्तल, कुलपति प्रो. रघुवीर सिंह, एफओईसीएस के निदेशक प्रो. आरके द्विवेदी, टीएमयू के रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा और टीएमयू  की एसोसिएट डीन एकेडेमिक्स प्रो. मंजुला जैन, कॉन्फ्रेंस कन्वीनर एवं सिविल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष प्रो. आरके जैन, मेकैनिकल इंजीनियरिंग के कोऑर्डिनेटर श्री हरीश कुमार ने माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित करके किया। कॉन्फ्रेंस में टीएमयू के बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के सम्मानित सदस्य श्री अक्षत जैन की उल्लेखनीय मौजूदगी रही, जबकि भारतीय मानक ब्यूरो, नई दिल्ली के उप महानिदेशक मानकीकरण-II (एजीएम-क्यूसी) इंजीनियर श्री संजय पंत बतौर विशिष्ट अतिथि ऑनलाइन मौजूद रहे। काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, यूपी के साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. अश्वनी कुमार बतौर आब्जर्वर भी उपस्थित थे।अतिथियों ने कॉन्फ्रेंस प्रोसीडिंग का भी विमोचन किया। सिविल इंजीनियरिंग फ़ाइनल ईयर की नेहा सिंह पटेल, महक जैन और अभि जैन ने णमोकार मंत्र और सरस्वती वंदना की सुंदर प्रस्तुति से सभी का दिल जीत लिया। संचालन सीनियर फैकल्टी मिस इन्दु त्रिपाठी ने किया। 



स्मार्ट सिटी लिमिटेड- एमएससीएल के मुख्य अभियंता श्री एके मित्तल ने बतौर मुख्य अतिथि  राष्ट्रीय स्मार्ट सिटी अभियान की चर्चा करते हुए कहा, पूरे भारत में चयनित कुल सौ शहरों में मुरादाबाद का चयन चौथे चरण में हुआ है। मुरादाबाद के लिए इस परियोजना की लागत 825 करोड़ रूपए है। इस योजना में शुमार 39 परियोजनाओं में तीन पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने स्मार्ट सिटी के ब्लू प्रिंट पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा, शाही तिराहे से लेकर टाउन हाल तक बाजार का जीर्णोद्धार, सुन्दर गलियारा और सड़क चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। स्मार्ट शौचालय 17 स्थानों पर स्थापित किया गया है, जहां ऑटो लाइटनिंग और ऑटो फ्लशिंग सिस्टम स्थित हैं।17 सरकारी भवनों को भूमिगत जल संग्रहण के लिए चुना गया है।  विभिन्न उपयोग के लिए सौर प्रणाली प्रदान करने के लिए शहर में 25 स्थानों का चयन किया गया है। इलेक्ट्रिक बस सेवा के तहत दिसंबर से 25 बसें जनता के उपयोग के लिए उपलब्ध होंगी, जो कम शोर और प्रदूषण में अत्यधिक प्रभावी हैं। वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली के तहत 24 घंटे काम करने वाले उपकरणों से हवा का नमूना प्राप्त करने के लिए 5 स्थानों का चयन किया गया है। इसका औसत वायु गुणवत्ता का मूल्य तय करेगा। छात्रों के लिए ई बाइक परियोजना भी इसमें शामिल है। कम किराए पर ई रिक्शा के लिए चार्जिंग प्वाइंट या स्टेशन भी होंगे। 35 स्थानों पर मुफ्त वाई-फाई, आपातकालीन कॉल के लिए 57 स्थान, संदेश प्रदर्शन बॉक्स, 37 स्थानों पर लाउडस्पीकर का उपयोग करके सार्वजनिक पता प्रणाली, इत्यादि का भी प्रावधान हैं। उन्होंने प्रौद्योगिकी में अंतःविषय प्रवृत्तियों पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर देते हुए कहा, जो विभिन्न सरकारी परियोजनाओं को संभव बनाने में कारगर हैं।


टीएमयू के कुलपति प्रो. रघुवीर सिंह ने कहा, अंतःविषय प्रवृत्ति को अपनाकर इंजीनियरिंग रखरखाव की समस्याओं को हल किया जा सकता है। पेशेवर दो प्रकार के होते हैं। एक है- आई शेप, जहां हम समस्या को हल करने के लिए अपने मस्तिष्क के सतही ज्ञान का उपयोग करते हैं, दूसरा- टी शेप ,जहां किसी भी औद्योगिक रखरखाव समस्या को हल करने के लिए गहन ज्ञान की आवश्यकता होती है। हाल के दशकों में इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सिविल इंजीनियरिंग की भागीदारी जैसे अंतःविषय दृष्टिकोण का बहुत महत्व है, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी तकनीक की भागीदारी ने औद्योगिक और इंजीनियरिंग क्षेत्र के बारे में लोगों के दृष्टिकोण को बदल दिया है। साथ ही सॉफ्ट स्किल टेक्नोलॉजिस्ट को यह जानने में मदद करती है कि अलग-अलग लोगों को कैसे हैंडल करना है। तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय छात्रों को अपने कैरियर और उज्जवल भविष्य में खुद को विकसित करने के लिए इन अंतःविषय कौशल को सीखने का बड़ा अवसर प्रदान करता है।     

     


भारतीय मानक ब्यूरो, नई दिल्ली के उप महानिदेशक मानकीकरण-II (एजीएम-क्यूसी) इंजीनियर श्री संजय पंत ने बतौर विशिष्ट अतिथि ऑनलाइन बोलते हुए कहा, भारतीय मानक ब्यूरो में 32 साल के अपने कैरियर में उन्हें पहली बार सिविल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग सहित अंतःविषय सत्र के इस तरह के कार्यक्रम को संबोधित करने का अवसर मिला है। उन्होंने समाज के कल्याण के लिए किसी भी प्रणाली को उपयोगी बनाने के लिए उसके कुछ महत्वपूर्ण मापदंडों पर जोर दिया। सबसे पहले किसी भी प्रणाली की कार्यप्रणाली उसके उचित डिजाइन और योजना के आधार पर होती है। दूसरा, अग्नि सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा और भूकंप जैसी आपदा के संबंध में सुरक्षा। तीसरा, सभी मनुष्यों जैसे कम आयु वर्ग के बच्चों के साथ-साथ अधिक उम्र के व्यक्ति जैसे उनके जीवन के 90 के दशक में प्रणाली की पहुंच है। चौथा है, जेंडर सेंसिटिविटी, जो किसी भी स्वस्थ समाज के लिए बहुत जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर स्थिरता है, जिसका अर्थ है कि हमें किसी भी प्रणाली के विकास के लिए ऐसी सामग्रियों का उपयोग करना होगा। किसी भी देश के विकास के लिए दो स्तंभ हैं। एक भूमि विकास ,जबकि दूसरा इष्टतम भवन डिजाइन। वेंटिलेशन,  रोशनी, शोर नियंत्रण और विभिन्न कार्यों को प्रभावी ढंग से करने के लिए मैकेनिकल इंजीनियरिंग की भागीदारी अति महत्वपूर्ण है।


एफओईसीएस के निदेशक एवं प्राचार्य प्रो. आरके द्विवेदी ने सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा, निर्माण क्षेत्र में अब सेल्फ हीटिंग एलिमेंट्स, थर्मल और काइनेटिक टूल मटीरियल, मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन इत्यादि जैसी अवधारणाएं विकसित हो रही हैं। आईओटी आधारित कार्य और मशीन से मशीन संचार निर्माण की जटिलता को काफी कम कर देता है। डिजाइनिंग इंजीनियर मशीन लर्निंग किसी भी निर्माण स्थल में विफलता के जोखिम को कम करता है। कॉन्फ्रेंस के पहले दिन तकनीकी ट्रैक सत्र के दौरान यूपी, एमपी, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक, हरियाणा के कुल 17 शोधार्थियों ने शोध पfत्र पढ़े। अंत में प्रो. एस आर अली ने सभी का हार्दिक आभार व्यक्त किया।



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मंगलवार, 23 नवंबर 2021

एशिया का सबसे बड़ा होगा जेवर एयरपोर्ट : योगी

 

संजय सिंह / राजेश सिन्हा 

ग्रेटर नोएडा ।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश का ही नहीं एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। इस एयरपोर्ट से 2024 में उड़ान शुरू हो जाएगी। यह यूपी का पांचवां इंटरनेशनल एयरपोर्ट होगा। इससे पहले लखनऊ, वाराणसी में इंटरनेशनल एयरपोर्ट थे। कुशीनगर का भी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट शुरू हो चुका है। अयोध्या में भी इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन रहा है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पूरी तरह से प्रदूषणमुक्त होगा। मुख्यमंत्री मंगलवार को 25 नवम्बर को होने वाले जेवर एयरपोर्ट के शिलान्यास कार्यक्रम की तैयारियों का निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण मिलकर बना रहा है। केंद्र सरकार का पूरा सहयोग मिल रहा है। व्यापक संभावनाओं को देखते हुए युवाओं को रोजगार देगा। एयरपोर्ट के पास ही फिल्म सिटी बनने जा रही है जहां बहुत बड़ा निवेश होगा। एयरपोर्ट के पास ही डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर अलीगढ़ में बन रहा है। मेडिकल डिवाइस पार्क व इलेक्ट्रानिक्स सिटी भी बनने जा रही है। यूपी में इंफ्रास्ट्रक्चर के बहुत बड़े काम हो रहे हैं। यूपी में एक्सप्रेस वे का जाल फैल रहा है। देश के सबसे बड़े एक्सप्रेस वे पूर्वांचल एक्सप्रेस वे शुरू हो चुका है। बुदेलखंड एक्सप्रेस वे भी लगभग बनकर तैयार हो चुका है। गंगा एक्सप्रेस वे का निर्माण कार्य भी बहुत जल्द शुरू होने जा रहा है। ईस्टर्न व वेस्र्टन फ्रेट कॉरिडोर भी महत्वपूर्ण है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस व बलिया एक्सप्रेस वे पर काम चल रहा है। 

उन्होंने कहा कि इंटरस्टेट कनेक्टविटी के तहत नेपाल, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हरियाणा स्टेट को फोर लेन से जोड़ रहे हैं। वर्ष 2017 तक प्रदेश में सिर्फ दो एयरपोर्ट चालू थे। उड़ान योजना के तहत 9 एयरपोर्ट शुरू हो चुके हैं। 11 नए एयरपोर्ट बन रहे हैं। सोनभद्र, ललितपुर, आजमगढ़, अलीगढ़, सहारनपुर, मेरठ, श्रावस्ती में एयरपोर्ट बन रहे हैं। मुरादाबाद में एयरपोर्ट का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। प्रदेश के 80 स्थानों को एयरपोर्ट से जोड़ दिया गया है। पिछले चार-पांच साल में एयर कनेक्टविटी बहुत बढ़ गई है। उन्होंने विपक्षियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि लोग यह कहते फिर रहे हैं कि यह काम हमने करने की सोची थी। इस मौके पर प्रशासन, पुलिस के अधिकारी मौजूद थे।



रविवार, 21 नवंबर 2021

आवश्यक निर्देश

 स्वास्थ्य संबंधी कुछ चेतवानी और सलाह जो अपने बड़े बूढ़ों से सुनी वो यहां पेश है।


पुराने समय की कहावत... अमूल्य अनुकरणीय सीख


चैते गुड़, वैसाखे तेल. 

जेठ के पंथ¹, अषाढ़े बेल.

सावन साग, भादौ दही². 

कुवांर करेला, कार्तिक मही³.

अगहन जीरा, पूसै धना. 

माघे मिश्री, फागुन चना.

जो कोई इतने परिहरै, 

ता घर बैद पैर नहीं धरै.


किस माह में क्या न खाएँ  - आवश्यक निर्देश


चैत्र माह में नया गुड़ न खाएं.

बैसाख माह में नया तेल न लगाएं.

जेठ माह में दोपहर में नहीं चलना चाहिए.

आषाढ़ माह में पका बेल न खाएं.

सावन माह में साग न खाएं.

भादों माह में दही न खाएं.

क्वार माह में करेला न खाएं.

कार्तिक माह में जमीन पर न सोएं.

अगहन माह में जीरा न खाएं.

पूस माह में धनिया न खाएं.

माघ माह में मिश्री न खाएं.

फागुन माह में चना न खाएं.


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चैत्र माह में नया गुड़ न खाएं. (15 March - 15 April)


बैसाख माह में नया तेल न लगाएं. (16 April - 15 May)


जेठ माह में दोपहर में नहीं चलना चाहिए. (16 May - 15 June)


अषाढ़ माह में पका बेल न खाएं. (16 June - 15 July)


सावन माह में साग न खाएं.  (16 July - 15 August)


भादों माह में दही न खाएं.  (16 August - 15 Sep)


क्वार माह में करेला न खाएं. (16 Sep - 15 Oct)


कार्तिक माह में जमीन पर न सोएं. (16 October - 15 Nov)


अगहन माह में जीरा न खाएं. (16 Nov -15 Dec)


पूस माह में धनिया न खाएं. (16 Dec - 15 Jan)


माघ माह में मिश्री न खाएं. (16 Jan - 15 Feb)


फागुन माह में चना न खाएं. (16 Feb- 14 March)


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1. पंथ=रास्ता. जेठ माह में दिन में रास्ता नहीं चलना चाहिए.

2. दही=मट्ठा या दही व दही से बने पदार्थ. ऐसी कहावत है कि भादो मास में दही या मट्ठा अगर घास या दूब की जड़ में डाल दें तो उसको भी फूक देता है. अर्थात् भादो मास में दही व दही से बने पदार्थ काफी हानिकारक हैं.

3. मही=भूमि पर कार्तिक मास में न सोएँ.


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अन्य निर्देश

(1) स्नान के पहले और भोजन के बाद पेशाब जरूर करें.

(2) भोजन के बाद कुछ देर बायी करवट लेटना चाहिये.

(3) रात को जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठाना चाहिये.

(4) प्रातः पानी पीकर ही शौच के लिए जाना चाहिये.

(5) सूर्योदय के पूर्व गाय का धारोष्ण दूध पीना चाहिये, व्यायाम के बाद दूध अवश्य पियें.

(6) मल, मूत्र, छीक का वेग नही रोकना चाहिये.

(7) ऋतु (मौसमी) फल खाना चाहिये.. रसदार फलों के अलावा अन्य फल भोजन के बाद खाना चाहिये.. रात्रि में फल नहीं खाना चाहिये.

(8) भोजन करते समय जल कम से कम पियें.

(9) भोजन के पश्चात् कम से कम 45 मिनट के बाद जल पीना चाहिए.

(10) नेत्रों में सुरमा / काजल अवश्य लगायें.

(11) स्नान रोजाना अवश्य करना चाहिये.

(12) सूर्य की ओर मुह करके पेशाब न करें.

(13) बरगद, पीपल, देव मन्दिर, नदी व

 शमशान् में पेशाब न करें.

(14) गंदे कपड़े न पहने, इससे हानि होती है.

(15) भोजन के समय क्रोध न करें बल्कि प्रसन्न रहें. 

(16) आवश्यकता से अधिक बोलना भी नहीं चाहिये व बोलते समय भोजन करना रोक दें.

(17) ईश्वर आराधना अवश्य करनी चाहिये.

*🏵️प्रेतों का भोजन*🏵️

                      एक बार महर्षि गौतम ने प्रेतों से पूछा - संसार में कोई भी प्राणी बिना भोजन के नहीं रहते अतः बताओ तुम लोग क्या आहार करते हो       

प्रेतों ने कहा-

_अप्रक्षालितपादस्तु   यो   भुङ्क्ते  दक्षिणामुखः।_

 _यो वेष्टितशिरा भुङ्क्ते प्रेता भुञ्जन्ति नित्यशः।।_

अर्थात-          

द्विजश्रेष्ठ ! जहाँ भोजन के समय आपस में कलह होने लगता है वहाँ उस अन्न के रस को हम ही खाते हैं।          

जहाँ मनुष्य बिना लिपी-पुती धरती पर खाते हैं, जहाँ ब्राह्मण शौचाचार से भ्रष्ट होते हैं वहाँ हमको भोजन मिलता है।

जो पैर धोये बिना खाता हैं, और जो दक्षिण की ओर मुँह करके भोजन करता है, अथवा जो सिर पर वस्त्र लपेटकर भोजन करता है, उसके उस अन्न को सदा हम प्रेत ही खाते हैं।          

जहाँ रजस्वला स्त्री-चाण्डाल और सूअर श्राद्ध के अन्न पर दृष्टि डाल देते हैं, वह अन्न पितरों का नहीं हम प्रेतों का ही भोजन होता है।

जिस घर में सदा जूठन पड़ा रहता है, निरन्तर कलह होता रहे, और बलिविश्वैदैव न किया जाता हो वहाँ हम प्रेत लोग भोजन करते हैं।

महर्षि गौतम ने पूछा -

कैसे घरों में तुम्हारा प्रवेश होता है, यह बात मुझे सत्य-सत्य बताओ।

प्रेत बोले - जिस घर में बलिवैश्वदेव होने से धुँए की बत्ती उड़ती दिखाई देती है, उसमें हम प्रवेश नहीं कर पाते।

जिस घर में प्रातःकाल की वेला में चौका लग जाता है, तथा वेद मंत्रों की ध्वनि होती रहती है, वहाँ की किसी भी वस्तु पर हमारा अधिकार नहीं होता।

गौतम ने पूछा -किस कर्म के परिणाम में मनुष्य प्रेत भाव को प्राप्त होता है?

प्रेत बोले -जो धरोहर हड़प लेते हैं, जूठे मुँह यात्रा करते हैं, गाय और ब्राह्मण की हत्या करने वाले हैं  वे प्रेत योनि को प्राप्त होते हैं।

चुगली करनेवाले, झूठी गवाही देने वाले, न्याय के पक्ष में नहीं रहने वाले, वे मरने पर प्रेत होते हैं।

सूर्य की ओर मुँह करके थूक-खकार और मल-मूत्र का त्याग करते हैं, वे प्रेत शरीर प्राप्त करके दीर्घकाल तक उसी में स्थित रहते हैं।

गौ-ब्राह्मण तथा रोगी को जब कुछ दिया जाता हो उस समय जो न देने की सलाह देते हैं, वे भी प्रेत ही होते हैं, 

यदि शूद्र का अन्न पेट में रहते हुए ब्राह्मण की मृत्यु हो जाये तो वह अत्यंत भयंकर प्रेत होता है।

विप्रवर ! जो अमावस्या की तिथि में हल में बैलों को जोतता है वह मनुष्य प्रेत बनता है।

जो विश्वासघाती, ब्रह्महत्यारा, स्त्रीवध करने वाला, गोघाती, गुरुघाती और पितृहत्या करने वाला है वह मनुष्य भी प्रेत होता है। 

मरने पर जिसका अन्तिम संस्कार तथा श्राद्ध नहीं किये गये हैं, उसको भी प्रेतयोनि प्राप्त होती है।

*जय श्री कृष्ण*

🙏🙏💐🙏🙏*

सोमवार, 15 नवंबर 2021

खबर ही खबर / कुमार सूरज



: *दिल्ली-एनसीआर में हवा जहरीली होती जा रही है और वायु प्रदूषण की वजह से लोगों* का जीना मुहाल हो गया है। दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को इमरजेंसी मीटिंग बुलाने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए निर्माण, गैर-जरूरी परिवहन, बिजली संयंत्रों को रोकने और घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) लागू करने जैसे मुद्दों पर कल एक इमरजेंसी बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। 


सुप्रीम कोर्ट ने मामले को 17 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दिया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और एनसीआर क्षेत्र से जुड़े राज्य सरकारों को अपने कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम पर विचार करने को कहा। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र द्वारा कल होने वाली इमरजेंसी बैठक में पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा के मुख्य सचिवों को भी उपस्थित रहने को कहा है और अपने सुझाव प्रस्तूत करने का आदेश दिया।


दिल्ली में प्रदूषण मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए आप क्या बड़े कदम उठाने का प्रस्ताव रखते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि वायु प्रदूषण में पराली जलाए जाने का योगदान मात्र चार प्रतिशत है, ऐसे में इसे लेकर हल्ला मचाने का कोई आधार नहीं है।


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*केरल के पल्लकड़ में आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या की खबर* मिली है। खबर के मुताबिक, यह कार्यकर्ता सोमवार सुबह करीब 9 बजे अपने परिवार के साथ कहीं जा रहा था, तभी उसपर हमला किया गया। मृतक की पहचान 27 वर्षीय एस संजीत के तौर पर हुई है।


समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, आरएसएस कार्यकर्ता अपनी पत्नी के साथ सफर कर रहा था। बीजेपी जिला अध्यक्ष केएम हरीदास ने इस हत्या के लिए सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया पर आरोप लगाया है, जो कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई की राजनीतिक इकाई है।


पुलिस ने बताया कि संजीत के शरीर पर 50 से ज्यादा बार धारधार हथियार से वार के निशान मिले हैं। हत्या के बाद इलाके में तनाव का माहौल है और पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी है। फिलहाल जांच जारी है। 


हालांकि, यह पहली बार नहीं जब केरल में आरएसएस वर्कर की जान ली गई हो। इसी साल फरवरी में भी एक आरएसएस कार्यकर्ता की मौत के बाद राज्य में बीजेपी और हिंदू संगठनों ने बंद का आह्वान किया था। उस समय चेर्थला के पास नगमकुलनगरा इलाके में आरएसएस और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के बीच हुई झड़प में संघ के कार्यकर्ता नंदू की मौत हो गई थी। एसडीपीआई इस्लामिक संगठन पीएफआई की राजनीतिक इकाई है।


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 *डेंगू का डंक अब बेकाबू होता दिख रहा* है। दिल्ली सरकार की तमाम कवायदों के बावजूद राजधानी में डेंगू और मलेरिया की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। दिल्ली में बीते एक सप्ताह में डेंगू के रिकॉर्ड करीब 2570 मरीजों की पुष्टि होने के बाद मच्छर जनित बीमारी के कुल मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 5270 तक पहुंच गया है। इसके साथ ही दिल्ली में डेंगू के मामलों का छह साल का रिकॉर्ड टूट गया है। 


दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (SDMC) द्वारा सोमवार को जारी साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में इस सीजन में डेंगू के मामले बढ़कर 5,277 हो गए हैं, जो 2015 के बाद से राजधानी में मच्छर जनित बीमारी के सबसे अधिक मामले हैं। पिछले एक सप्ताह में 2,569 नए मामले दर्ज किए गए हैं, हालांकि, डेंगू के कारण कोई भी ताजा मौत की सूचना नहीं मिली है। अब तक कुल 9 लोगों की मौत हो चुकी है।


नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार, इस सीजन में 13 नवंबर तक 5,277 डेंगू के मामले दर्ज किए गए हैं, जो 2015 के बाद से एक साल में सबसे ज्यादा मामले हैं। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो- साल 2016 में 4431 मामले, साल 2017 में 4726 मामले, साल 2018 में 2798 मामले, साल 2019 में 2036 मामले और साल 2020 में 1072 डेंगू के कुल मामले दर्ज किए गए थे।  


हर साल मॉनसून की शुरुआत के साथ दिल्ली में डेंगू का प्रकोप देखा जाता है, जो आमतौर पर सर्दी का मौसम आते ही समाप्त हो जाता है। हालांकि, इस वर्ष राजधानी में मामलों में बड़ी वृद्धि देखी जा रही है जो अब भी जारी है।


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नहीं रही मन्नू भंडारी 


*हिंदी साहित्य की मशहूर लेखिका मन्नू भंडारी का निधन हो गया* है। आंखों देखा झूठ, आपका बंटी जैसे लोकप्रिय उपन्यासों के लिए चर्चित रहीं मन्नू भंडारी का जन्म 3 अप्रैल, 1931 को हुआ था। उनके निधन से हिंदी साहित्य जगत की एक पीढ़ी का अवसान हो गया है। भोपाल में जन्मीं मन्नू भंडारी नई कहानी आंदोलन का हिस्सा रही हैं, जिसकी शुरुआत निर्मला वर्मा, राजेंद्र यादव, भीष्म साहनी, कमलेश्वर जैसे लेखकों ने की थी। मन्नू भंडारी उन लेखिकाओं में से रही हैं, जिन्होंने आजादी के बाद के भारत की आकांक्षी महिलाओं की कहानियों को लिखा है। उनकी कहानियों और उपन्यासों में महिला किरदारों के संघर्ष और समाज में उनकी स्थिति का चित्रण किया गया है। 


उनके महिला किरदार पुरानी रुढ़ियों को तोड़ते, स्वतंत्र अस्तित्व की बात करते दिखते हैं। मशहूर लेखक राजेंद्र यादव उनके पति थे। उनके साथ ही मन्नू भंडारी का पहला उपन्यास 'एक इंच मुस्कान' 1961 में प्रकाशित हुआ था। इस उपन्यास को उन्होंने राजेंद्र यादव के साथ ही मिलकर लिखा था। यह उपन्यास काफी लोकप्रिय हुआ था, जिसमें दो महिलाओं की एक ही पुरुष से प्रेम कहानी दिखाई गई थी। इस उपन्यास के पुरुष संवादों को राजेंद्र यादव ने लिखा था, जबकि दोनों महिलाओं को अभिव्यक्त करने का काम मन्नू भंडारी ने किया था। 


इसके बाद मन्नू भंडारी का दूसरा उपन्यास आपका बंटी प्रकाशित हुआ था। यह उपन्यास एक ऐसे बच्चे की कहानी पर आधारित था, जिसके माता-पिता का तलाक हो गया है और उन्होंने अलग-अलग लोगों से शादी कर ली थी। पैरेंट्स की शादी के टूटने का बच्चे पर क्या असर होता है, उसका चित्रण इस उपन्यास में देखने को मिला था। यह अपने आप में हिंदी साहित्य में नई तरह की कहानी का लेखन था, जिसकी काफी सराहना की गई थी। इस उपन्यास की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे फ्रेंच, बंगाली और इंग्लिश में भी अनुवाद किया गया था।  


मन्नू भंडारी के लेखन की काफी सराहना की गई और उन पर आधारित फिल्में भी आईं। ऐसी ही एक मशहूर फिल्म रजनीगंधा थी, जो 1974 में रिलीज हुई थी। यह फिल्म उनकी शॉर्ट स्टोरी 'यही सच है' पर आधारित थी। यही नहीं इस फिल्म ने फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीता था। 


बेटी ने बताया- 10 दिन से थीं बीमार, मंगलवार को दिल्ली में होगा अंतिम संस्कार

मन्नू भंडारी की बेटी रचना यादव ने बताया, 'वह करीब 10 दिन से बीमार थीं। उनका हरियाणा के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां आज दोपहर को उन्होंने अंतिम श्वांस ली।' रचना ने बताया कि मन्नू भंडारी का अंतिम संस्कार मंगलवार को दिल्ली के लोधी रोड स्थित श्मशान घाट में किया जाएगा। तीन अप्रैल 1931 को मध्य प्रदेश के भानपुरा में जन्मीं भंडारी प्रसिद्ध साहित्यकार राजेंद्र यादव की पत्नी थीं। उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस कॉलेज में अध्यापिका के पद पर भी अपनी सेवाएं दी थीं।



गुरुवार, 11 नवंबर 2021

सौरभ गाँगुली

 सौरव गांगुली! जिन्होंने अपनी कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम को विपक्षी टीम से आँख में आँख मिलाकर खेलना सिखाया, न कि दबकर। गांगुली का जन्म कोलकाता के एक रईस परिवार में हुआ था। उस दौर में कोलकाता में फुटबॉल बहुत प्रसिद्ध हुआ करता था और शुरु-शुरू में सौरव गांगुली भी फुटबॉल के प्रति आकर्षित थे। पर अपने बड़े भाई स्नेहाशिष गांगुली के कहने पर, उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरु किया। स्नेहाशिष ने, छोटे भाई सौरव की प्रतिभा को देखते हुए घर में ही क्रिकेट खेलने के लिए पिच बना दी।

1990-91 का साल था, जब सौरभ गांगुली ने रणजी ट्राफी में बेहतरीन प्रदर्शन किया। उनकी इस लगन ने सभी को उनके बारे में सोचने को मजबूर कर दिया और उन्हें 1992 में वेस्टइंडीज दौरे के लिए भारतीय क्रिकेट टीम में चुन लिया गया। लेकिन यह दौरा उनके लिए काफी बुरा साबित हुआ। उन्होंने केवल एक मैच खेला, जिसमें उन्होंने तीन रन बनाए। इतना ही नहीं, इस दौरे पर ही उनपर घमंडी होने की ‘छाप’ पड़ गई और उनके रवैये पर उंगली तक उठी।

चार साल बाद, समय पलटा और गांगुली को 1996 में, इंग्लैंड दौरे के लिए फिर से टीम में चुना गया। तीन वनडे में से, उन्हें सिर्फ एक मैच में ही मौका मिला, जिसमें उन्होंने 46 रन बनाए। लेकिन अब भी सौरभ अपने खेल से संतुष्ट नहीं थे। दुनिया को उनके अंदर की आग अब तक नहीं दिखी थी। आखिरकार लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर सौरभ गांगुली ने अपने टेस्ट करियर का आगाज एक असली महाराजा की तरह किया। इस मैच में सौरभ ने 131 रनों की पारी खेली और अगले टेस्ट में भी उन्होंने सेंचुरी ठोककर दिखा दिया कि उनमें शान से खेलने की काबिलियत है। इसके साथ ही, वह अपने दोनों शुरुआती टेस्ट मैचों में सेंचुरी ठोकने वाले दुनिया के तीसरे बल्लेबाज बने।

सौरभ गांगुली के जीवन में एक क्षण ऐसा भी आया, जब पूरे भारत की उम्मीदें उनपर थीं और उन्हें खुद को साबित करना था। वह साल था 2000, जब उस समय के कप्तान पर मैच फिक्सिंग का आरोप लगा और सौरव गांगुली को टीम की कप्तानी दी गयी ।

उस समय गांगुली के लिए इन सब से टीम को उबारना इतना आसन नहीं था । पूरे देश का भारतीय क्रिकेट टीम पर से भरोसा खो चुका था और टीम भी लगातार बुरे प्रदर्शन से 8वें पायदान पर आ चुकी थी। तब गांगुली की ही कप्तानी का असर था कि भारत दूसरे पायदान पर आ पाया। दादा की ही कप्तानी में भारत दूसरी बार 2003  फाइनल में पंहुचा। जहाँ एक समय पर लग रहा था कि इंडियन क्रिकेट का कोई अस्तित्व नहीं, वह टीम वर्ल्ड कप के फाइनल तक पहुँच गयी। यह असल में गांगुली की ही मेहनत का नतीजा था।


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मंगलवार, 9 नवंबर 2021

देव छठ पर्व का अपने गर्भ में समेटे हुए इतिहास

 देव, त्रेतायुगीन देव सूर्यमंदिर और कालजयी इतिहास

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 देव अपने आप में अद्भुत कालजयी इतिहास समेटे है। कितने आये, कितने गए, पर देव, देव ही है। देव का अपना इतिहास है, अर्थात देवताओं के इतिहास से शुरू हुआ देव और उसका कालजयी इतिहास। इस इतिहास में  अनंत गाथायें भी है, कुछ प्रकट है, कुछ अप्रकट है, कुछ गाथाओं में चर्चित है। अभी भी देव का इतिहास खोज का विषय है। यथार्थ के अनसुलझे रहस्य जो बड़े केंद्र है, वह आस्थाओं पर टिक नहीं पाते।  बहरहाल, देव जो आस्थाओं में समेटे है, वह देव की गौरवशाली अतीत के पृष्टभूमि को जरूर परिलक्षित करती है।

देव सूर्य मंदिर ही नहीं, आध्यात्मिक मार्ग पर कभी शीर्षस्थ था।  भगवान राम का सीता के साथ आगमन, कृष्ण का साम्ब के साथ आना, पांचों पांडवों का आना, गौतमबुद्ध का आना, जगद्गुरु शंकराचार्य, बाण भट्ट, मयूर भट्ट, राहुल सांकृत्यायन सहित अनेक इतिहास कारों, अन्वेषण कर्ताओं, खोजी फक्कड़ लोगों का आना यहां संस्कृति विरासत की पहचान रही है। सूर्योपासना के बहाने आध्यामिक ज्ञान की गंगा यहां सदैव से प्रवाहित रहा है।


यहां करीब एक सौ फुट ऊंचा देव सूर्य मंदिर स्थापत्य और वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। बिना सीमेंट अथवा चूना-गारा का प्रयोग किये आयताकार, वर्गाकार, अर्द्धवृत्ताकार, गोलाकार, त्रिभुजाकार कई रूपों और आकारों में काटे गये पत्थरों को जोड़कर बनाया गया यह मंदिर अत्यंत आकर्षक व विस्मयकारी है।


जनश्रुतियों के आधार पर इस मंदिर के निर्माण के संबंध में कई किंवदंतियां प्रसिद्ध हैं, जिससे मंदिर के अति प्राचीन होने का स्पष्ट पता तो चलता है लेकिन इसके निर्माण के संबंध में अभी भी भ्रामक स्थिति बनी हुई है। निर्माण के मुद्दे को लेकर इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के बीच चली बहस से भी इस संबंध में ठोस परिणाम प्राप्त नहीं हो सका है।


सूर्य पुराण से सर्वाधिक प्रचारित जनश्रुति के अनुसार ऐल एक राजा थे, जो किसी ऋषि के शापवश श्वेत कुष्ठ से पीड़ित थे। वे एक बार शिकार करने देव के वनप्रांत में पहुंचने के बाद राह भटक गये। राह भटकते भूखे-प्यासे राजा को एक छोटा सा सरोवर दिखायी पड़ा, जिसके किनारे वे पानी पीने गये और अंजुरी में भरकर पानी पिया। पानी पीने के क्रम में वे यह देखकर घोर आश्चर्य में पड़ गये कि उनके शरीर के जिन जगहों पर पानी का स्पर्श हुआ उन जगहों के श्वेत कुष्ठ के दाग जाते रहे। इससे अति प्रसन्न और आश्चर्यचकित राजा अपने वस्त्रों की परवाह नहीं करते हुए सरोवर के गंदे पानी में लेट गये और इससे उनका श्वेत कुष्ठ पूरी तरह जाता रहा। 

अपने शरीर में आश्चर्यजनक परिवर्तन देख प्रसन्नचित राजा ऐल ने इसी वन प्रांतर में रात्रि विश्राम करने का निर्णय लिया और रात्रि में राजा को स्वप्न आया कि उसी सरोवर में भगवान भास्कर की प्रतिमा दबी पड़ी है। प्रतिमा को निकालकर वहीं मंदिर बनवाने और उसमें प्रतिष्ठित करने का निर्देश उन्हें स्वप्न में प्राप्त हुआ।


कहा जाता है कि राजा ऐल ने इसी निर्देश के मुताबिक सरोवर से दबी मूर्ति को निकालकर मंदिर में स्थापित कराने का काम किया और सूर्य कुण्ड का निर्माण कराया लेकिन मंदिर यथावत रहने के बावजूद उस मूर्ति का आज तक पता नहीं है। जो अभी वर्तमान मूर्ति है वह प्राचीन अवश्य है, लेकिन ऐसा लगता है मानो बाद में स्थापित की गयी हो। मंदिर परिसर में जो मूर्तियां हैं, वे खंडित तथा जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं।


 मंदिर निर्माण के संबंध में एक कहानी यह भी प्रचलित है कि इसका निर्माण एक ही रात में देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने अपने हाथों किया था और कहा जाता है कि इतना सुंदर मंदिर कोई साधारण शिल्पी बना ही नहीं सकता। इसके काले पत्थरों की नक्काशी अप्रतिम है और देश में जहां भी सूर्य मंदिर है, उनका मुंह पूरब की ओर है, लेकिन यही एक मंदिर है जो सूर्य मंदिर होते हुए भी उषाकालीन सूर्य की रश्मियों का अभिषेक नहीं कर पाता वरन अस्ताचलगामी सूर्य की किरणें ही मंदिर का अभिषेक करती हैं।


जनश्रुति है कि एक बार बर्बर लुटेरा काला पहाड़ मूर्तियों और मंदिरों को तोड़ता हुआ यहां पहुंचा तो देव मंदिर के पुजारियों ने उससे काफी विनती की कि इस मंदिर को कृपया न तोड़े क्योंकि यहां के भगवान का बहुत बड़ा महात्म्य है। इस पर वह हंसा और बोला- यदि सचमुच में तुम्हारे भगवान में कोई शक्ति है तो मैं रात भर का समय देता हूं और यदि इसका मुंह पूरब से पश्चिम हो जाये तो मैं इसे नहीं तोडूंगा। पुजारियों ने सिर झुकाकर इसे स्वीकार कर लिया और वे रातभर भगवान से प्रार्थना करते रहे। सबेरे उठते ही हर किसी ने देखा कि सचमुच मंदिर का मुंह पूरब से पश्चिम की ओर हो गया था और तब से इस मंदिर का मुंह पश्चिम की ओर ही है।


कहा जाता है कि एक बार एक चोर मंदिर में आठ मन (एक मन 40 किलोग्राम के बराबर) वजनी स्वर्ण कलश को चुराने आया। वह मंदिर के ऊपर चढ़ ही रहा था कि उसे कहीं से गड़गड़ाहट की आवाज सुनायी दी और वह वहीं पत्थर बनकर चिपक गया। आज लोग सटे चोर की ओर अंगुली दिखाकर बताते हैं। इस संबंध में पूर्व सांसद प्रख्यात साहित्यकार एवं देव के बगल के ही गांव भवानीपुर के रहने वाले स्व, शंकर दयाल सिंह का मानना था कि इसके दो कारण हो सकते हैं। उनमें एक यह कि कोई सोना चुराने नहीं आये, इसलिए यह किंवदंति प्रसिद्धि में आयी और दूसरी बात यह कि जिसे चोर की संज्ञा दी जाती है वह देखने पर बुद्ध की मूर्ति नजर आती है। हालांकि यह तस्वीर शेर की मुखड़े के रूप में है।


वहीं, इस मत से भिन्न रुख रखने वालों में पंडित राहुल सांकृत्यायन प्रमुख हैं, जिनके अनुसार यह प्राचीनकाल में बुद्ध मंदिर था जिसे विधर्मियों से भयाक्रांत भक्तजनों ने इसे मिट्टी से पाट दिया था। कहा जाता है कि सनातन धर्म के संरक्षक और संस्कारक शंकराचार्य जब इधर आये तो संशोधित और सुसंस्कृत कर यहां मूर्ति प्रतिष्ठित की। 


पुरातत्व से जुड़े डॉ. के.के. दत्त और पंडित विश्वनाथ शास्त्री ने भी इसकी अति प्राचीनता का प्रबल समर्थन किया है। इस मंदिर के निर्माण से संबद्ध विवाद चाहे जो भी हो, कोई साफ अवधारणा भले ही नहीं बन पायी हो लेकिन इस मंदिर की महिमा को लेकर लोगों के मन में अटूट श्रद्धा एवं आस्था है। यही कारण है कि हर साल चैत्र और कार्तिक के छठ मेले में लाखों लोग विभिन्न स्थानों से यहां आकर भगवान भास्कर की आराधना करते हैं। भगवान भास्कर का यह त्रेतायुगीन मंदिर सदियों से लोगों को मनोवांछित फल देने वाला पवित्र धर्मस्थल रहा है। यूं तो सालों भर देश के विभिन्न जगहों से लोग यहां पधारकर मनौतियां मांगने और सूर्यदेव द्वारा उनकी पूर्ति होने पर अर्घ्य देने आते हैं लेकिन लोगों का विश्वास है कि कार्तिक एवं चैती छठ व्रत के पुनीत अवसर पर सूर्य देव की साक्षात उपस्थिति की रोमांचक अनुभूति होती है। यहां दो तस्वीरें प्रस्तुत है, एक 50 वर्ष पहले की और एक अब की।  सिर्फ रंग रोगन बदला है, मुख्य छवि जीवंत है।


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