भाजपा का गांव की ओर रुख करना यूं ही नहीं है। हाल के पंचायत चुनावों के नतीजे गांवों में पार्टी की दुर्गति साबित करने के लिए काफी हैं। सूबे के आठ नगर निगमों पर काबिज भाजपा 72 जिला पंचायतों में से मात्र एक ही जीत सकी। इसके अलावा 813 ब्लाकों में होने वाले प्रमुखों के चुनाव को लेकर भी पार्टी उत्साहित नहीं हैं। गांवों में सियासत की धुरी माने जाने वाले पंचायत, सहकारी समितियां, गन्ना व दुग्ध उत्पादक समिति जैसे चुनावों को लेकर भाजपा उदासीनता बरतती रही है, जबकि समाजवादी पार्टी सत्ताधारी बसपा के सामने समर्पण करने के बजाय जमकर डटी रही। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि दिल्ली के आसपास बड़े नेताओं का कार्यक्रम लगाने की वजह कुछ और नहीं बल्कि गाजियाबाद में क्षेत्रीय समिति की बैठक होना रहा। उनका यह भी कहना है कि गांव चलो अभियान में नेताओं का रात्रि प्रवास अनिवार्य नहीं वरन स्वेच्छा पर निर्भर है। मुख्य उद्देश्य गांवों में जनसंपर्क कर उनकी समस्या सुनना और भाजपा की रीति नीति से अवगत कराते हुए प्रदेश व केंद्र सकार की विफलताएं बताना है। इसके लिए विशेष पत्रक भी घर-घर बांटा जा रहा है।
दिल्ली भले ही देश का दिल हो, मगर इसके दिल का किसी ने हाल नहीं लिया। पुलिस मुख्यालय, सचिवालय, टाउनहाल और संसद देखने वाले पत्रकारों की भीड़ प्रेस क्लब, नेताओं और नौकरशाहों के आगे पीछे होते हैं। पत्रकारिता से अलग दिल्ली का हाल या असली सूरत देखकर कोई भी कह सकता है कि आज भी दिल्ली उपेक्षित और बदहाल है। बदसूरत और खस्ताहाल दिल्ली कीं पोल खुलती रहती है, फिर भी हमारे नेताओं और नौकरशाहों को शर्म नहीं आती कि देश का दिल दिल्ली है।
मंगलवार, 19 जुलाई 2011
गांव के नाम पर शहर में ठांव
भाजपा का गांव की ओर रुख करना यूं ही नहीं है। हाल के पंचायत चुनावों के नतीजे गांवों में पार्टी की दुर्गति साबित करने के लिए काफी हैं। सूबे के आठ नगर निगमों पर काबिज भाजपा 72 जिला पंचायतों में से मात्र एक ही जीत सकी। इसके अलावा 813 ब्लाकों में होने वाले प्रमुखों के चुनाव को लेकर भी पार्टी उत्साहित नहीं हैं। गांवों में सियासत की धुरी माने जाने वाले पंचायत, सहकारी समितियां, गन्ना व दुग्ध उत्पादक समिति जैसे चुनावों को लेकर भाजपा उदासीनता बरतती रही है, जबकि समाजवादी पार्टी सत्ताधारी बसपा के सामने समर्पण करने के बजाय जमकर डटी रही। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि दिल्ली के आसपास बड़े नेताओं का कार्यक्रम लगाने की वजह कुछ और नहीं बल्कि गाजियाबाद में क्षेत्रीय समिति की बैठक होना रहा। उनका यह भी कहना है कि गांव चलो अभियान में नेताओं का रात्रि प्रवास अनिवार्य नहीं वरन स्वेच्छा पर निर्भर है। मुख्य उद्देश्य गांवों में जनसंपर्क कर उनकी समस्या सुनना और भाजपा की रीति नीति से अवगत कराते हुए प्रदेश व केंद्र सकार की विफलताएं बताना है। इसके लिए विशेष पत्रक भी घर-घर बांटा जा रहा है।
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