मंगलवार, 28 जून 2011

चांदनी चौक और लाल किला दिल्‍ली के इतिहास का हिस्‍सा नहीं!

चांदनी चौक और लाल किला दिल्‍ली के इतिहास का हिस्‍सा नहीं!


राष्ट्रमण्डल खेल के रंगों में दिल्ली को रंगने पर 20 करोड़ रुपए खर्च किया गया है। दिल्ली के पुल, बस स्टैण्ड व सार्वजनिक जगहों पर होर्डिंग व बैनर लगाने पर यह खर्च किए गए हैं । दिल्‍ली में खासकर इन जगहों पर होर्डिंग अधिक लगाया गया है, जहां जहां काम पूरे नहीं हुए है  ताकि विदेशी मेहमानों के समक्ष गंदगी छुपाई जा सके ।
इसका काम आयोजन समिति के इमेज एण्ड लुक विभाग ने किया है, जिसकी एडीजी संगीता विलंग्कर के पिता एक पूर्व हॉकी खिलाड़ी हैं । यानी चुन-चुन कर ऐसे लोगों को काम दिया गया है, जिसकी पहुंच थी ।  भले ही काम की गुणवत्‍ता से ही क्‍यों न समझौता करना पड़े।
अब इसी मामले में देखिए खेलों के सभी डिजायनों में दिल्‍ली के इतिहास को दर्शाने की कोशिश की गई है, लेकिन संगीता की नजर में दिल्‍ली का इतिहास केवल इंडिया गेट और कुतुबमीनार में ही दर्ज है । इमेज एंड लुक विभाग ने यमुना नदी, लाल किला , जामा मस्जिद और चांदनी चौक की संस्कृति को 19 वें राष्ट्रमण्डल खेल के डिजायन से बाहर रखा है । इन्हें राष्ट्रमण्डल खेल के ग्राफिक में कहीं भी प्रदिर्शत नहीं किया गया है। इमेज एण्ड लुक की एडीजी संगीता विलंग्कर का तर्क सुनिए, `दिल्ली में इण्डिया गेट व कुतुबमीनार ज्यादा प्रसिद्ध हैं, इसलिए केवल उन्हें ही प्रदिर्शत किया गया है।'
सच तो यह है कि आयोजन समिति के इमेज एण्ड लुक विभाग ने आनन-फानन में इंटरनेट से तस्वीर लोड कर एक प्रस्तुतिकरण तैयार किया और करोड़ों रुपए बटोर लिया। इस विभाग को न तो दिल्ली का पता है और न ही दिल्ली की संस्कृति का। जब नेताओं, अधिकारियों व खेलाडि़यों के बच्‍चों के हाथ में खेल की कमान हो तो फिर 'बंदर के हाथ में उस्‍तरे' जैसी बात ही सामने आएगी न !
सच तो यह है कि राष्‍ट्रमंडल खेलों के आयोजन में केवल पैसा बनाने का खेल हुआ है देश की गरिमा, उसकी संस्‍क़ति और उसके गौरव को बढ़ाने के लिए यह खेल आयोजित नहीं किया जा रहा है, जैसा कि भ्रष्‍टाचार की पोल खुलने पर नेता और अधिकारी दुहाई दे रहे हैं । केंद्रीय शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी का बयान सुनिए, 'मीडिया को खेल का सकारात्‍मक पहलु पेश करना चाहिए ।' यानी ये भ्रष्‍टाचारी जनता का अरबों-खरबों रुपया हड़प लें और इनकी पोल खोलने की जगह मीडिया इनकी चापलुसी में झुनझुना बजाता रहे! यही चाहती है यह सरकार !

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