सोमवार, 31 जनवरी 2022

31 जनवरी 1999 चेन्नई टेस्ट और दुख की परिभाषा

 

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और दुख का परिमाण इतना था कि सचिन तेंडुलकर मैन ऑफ द मैच का अपना पुरस्कार लेने भी नहीं आये।

राजसिंह डूंगरपुर ने तत्कालीन कोच अंशुमान गायकवाड़ जो इशारा किया कि वह सचिन को प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन सेरेमनी में आने को कहें। मगर गायकवाड़ ने कहा- सर, वो नहीं आ सकता। वह रो रहा है। डूंगरपुर स्वयं सचिन के पास गए और  उन्हें आने को कहा। यह भी कहा की  तुम सारा दोष अपने ऊपर क्यों लेते हो! तुमने एक असंभव को संभव करने का प्रयास तो किया ही था।

सचिन ने कहा- नहीं सर, मैच मैंने ही गंवाया है।

सचिन किसी हाल प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन में नहीं आये। 


ऐसा नहीं है कि यह दुख कुछ नया था। क्रिकेट के शैदाई सरहद के दोनों जानिब ही इस दुख से परिचित हैं। खेल हार-जीत का ही नाम है। मगर यह हार कुछ खास थी। देर तक, दशकों तक की टीस दे जाने वाली।


बात सकलैन की करते हैं। अपने घर की छत पर अपने भाइयों को टेबल टेनिस की प्लास्टिक गेंद फेकते हुए इस बच्चे ने गौर किया कि गेंद को अंगूठे से धकेल देने पर गेंद ऑफ स्पिन के एक्शन में ही दूसरी ओर घूम जा रही है। पहले तो उसे लगा कि यह हवा के कारण हो गया। मगर दो-चार बार ऐसा करने पर उसने देखा कि यह कुछ अलग है। बच्चे ने इसे जलेबी नाम दिया (बाद में जब मोइन ने इसे ‘दूसरा’ कह कर पुकारा तो सकलैन ने अपनी अगली खोज का नाम जलेबी दिया)


जलेबी गेंद इतनी अलग थी कि 18 साल की उम्र में ही सकलैन को ग्रीन कैप पहनने का सौभाग्य मिल गया। सकलैन कहर बरसाने लगे।


गैर-परंपरागत ऑफ स्पिन सचिन की जान को बवाल रही ही है, इसकी तसदीक सचिन की क्रिकेट को ध्यान से देखने समझने वाले करते हैं। सकलैन और बाद में सईद अजमल ने उन्हे बारहा तंग किया है। यह रिकॉर्ड में है। 

सचिन और सकलैन की भिड़ंत दिलचस्प होती रही थी। याद आता है कि शारजाह के एक मुक़ाबले ने सचिन को आउट करने के बाद सकलैन ने उन्हे बाहर का रास्ता दिखाया था और फिर दूसरी पारी में पाकिस्तान के अंतिम विकेट के लिए जब सकलैन बैटिंग करने आए तो सचिन ने अजहर से लगभग गेंद छीनकर बौलिंग की थी और सकलैन को न सिर्फ एलबीडबल्यू किया था बल्कि धराशायी भी कर दिया था। बाद में सचिन ने सकलैन को नसीहत देते हुए कहा था कि ‘पियक्कड़ मछेरों की भाषा छोड़ दो, बहुत आगे जाओगे।’ सकलैन ने पियक्कड़ मछेरो की भाषा छोड़ दी थी।सकलैन बहुत आगे गए। 


मैच पर आते हैं।चेन्नई टेस्ट की आखिरी पारी में भारत को जीत के लिए 271 रन की दरकार थी। सकलैन पहली पारी में भी कहर बरपा चुके थे। अपने पाँच विकेट में उन्होने सचिन को शून्य पर बाहर भेजा था। दूसरी पारी जब शुरू हुई तो अपना पहला टेस्ट खेल रहे सदगोपन रमेश 5 रन के स्कोर पर राहुल द्रविड़ के आने का रास्ता साफ कर दिया और 6 रन के स्कोर पर लक्ष्मण ने सचिन के आने का रास्ता साफ कर दिया। 


271 के स्कोर का पीछा करते हुए भारत जैसे तैसे 50 तक पहुंचा ही था कि स्विंग सुल्तान वसीम अकरम ने ‘द वाल’ कही जाने वाली दीवार के सरिये उखाड़ दिये। भारत 50 पर 3. 


मोहम्मद अजहरुद्दीन उन दिनों या तो गुस्से में सत्तर गेंदों पर शतक पीट जाते थे या फिर विरोधी टीम को कैच प्रैक्टिस कराते थे। इस मैच में उन्होने सकलैन को एलबीडबल्यू की प्रैक्टिस करायी और 7 के व्यक्तिगत स्कोर पर वापस हुए। सकलैन उन दिनों क्रिकेट की सिलेबस के बाहर का सवाल थे। वह कॉपीबुक क्रिकेट खेलने वालों को क्या ही समझ आते। सो 2 के स्कोर पर दादा गांगुली भी पवेलियन रवाना हो गए। आधी भारतीय टीम लंच के थोड़ी देर बाद तक ड्रेसिंग रूम में थी। 82 पर 5. जीत से 189 रन दूर।  जीत तो दूर कि बात थी, अब बस हार का अंतर कम करना था। मगर एक योद्धा खड़ा था। सचिन तेंदुलकर। सचिन को चौतरफा हमले का सामना करना था। पाकिस्तान की तेज तिकड़ी, सकलैन की फिरकी, चेन्नई की गर्मी और दूसरी तरफ से तेजी से गिरते जा रहे विकेट।उन्होने भरसक कोशिश की कि मोंगिया को स्ट्राइक से दूर रखा जाये।  हालाकि मोंगिया ने बहुत अच्छा साथ दिया और  तीन घंटे से ऊपर खड़े रहकर 52 रन बनाए। 


रन बने तो पारी बनने लगी। 100 लगे। 150 लग गए। दोनों खिलाड़ी अच्छे ताल मेल से आगे बढ़ने लगे। मगर तभी सचिन पर पांचवा हमला हुआ। सचिन की पीठ में दर्द का पहला प्रवेश इसी मैच में हुआ। उनके पीठ और ऊपरी कंधे में दर्दीली जकड़न आ गयी। उन्हें फिजियोथेरेपी के लिए बाहर जाने की नसीहत आई।  मगर आज यह खिलाड़ी कुछ अलग ही सोच कर बैठा था। उसने दर्द को धता बताया और खेलना जारी रखा। रन 218 तक पहुँच गए थे। और अब पाकिस्तानी टीम के चेहरे पर परेशानी दिखने लगी थी। जीत के लिए महज 53 रन की जरूरत थी और विकेट 5 बचे हुए थे। 


मगर यहीं किस्मत ने पलटा खाया। या यूँ कहें जो सकलैन कहते हैं – उस दिन अल्लाह हमारे साथ था। नयन मोंगिया, सचिन पर से दबाव हटाने के चक्कर में शॉट लगा बैठे और वकार के हाथों कैच हुए। छठा विकेट गिरा।  


खेल फिर भी चाय के बाद का पूरा बचा हुआ था। हालाकि सचिन अब समझ गए थे कि खेल जल्द न खत्म किया गया तो या तो ये पीठ दर्द जीत जाएगा और फिर बाकी के तीन पुछल्ले बल्लेबाजों को आउट कर पाकिस्तान। यानी दोनों सूरतों में पाकिस्तान। 


यहीं से सचिन ने दूसरा तेवर दिखाया। अपना स्टांस बदला और ताबतोड़ क्रिकेट खेलने लगे। अगले पाँच ओवर में देश ने 34 रन जोड़ दिये। यानी स्कोर 254 पहुंचा दिया। अब जीत के लिए महज 17 रनों  की जरूरत थी। 


सचिन थक चुके थे। उन्हें खेल खत्म करने की जल्दी थी। सकलैन गेंदबाजी पर आए, मगर अपने सबसे मारक हथियार दूसरा फेकने से डर रहे थे। उन्हें सचिन के तेवर का अंदाजा था। मगर कप्तान वसीम ने उन्हें अपना यही अस्त्र इस्तेमाल करने की ताकीद की। पाँचवी गेंद को सीमा रेखा से बाहर पहुंचाने के चक्कर में सचिन गेंद को मिस टाइम कर गए। गेंद दूरी तरफ जाती हुई वसीम अकरम के सुरक्षित  हाथों मे समा गयी। जीत के लिए वांछित 17 रनों से दूर  सचिन आंखो मे निराशा लिए लौटे।  हालाकि लौटते हुए भी उन्हे इस बात का अंदाजा नहीं होगा जिस बात को सोच वसीम अकरम हाथ में कैच पकड़े मुसकुराते हुए सकलैन की ओर बढ़े आ रहे थे।


खैर, खेल सचिन के जाने के बाद 20 मिनट भी नहीं चला। पाकिस्तानी टीम ने वह 3 विकेट महज 4 रनों के भीतर समेत दिये। जोशी, कुंबले और श्रीनाथ ने मिलकर बाद में 4 रन जोड़े। भारत वह टेस्ट 12 रनों से हार गया।  

  

बात वसीम के मुस्कुराहट की। 


वसीम ने एक दफा भारतीय ड्रेसिंग रूम में मज़ाक में एक बात कही थी। बस सचिन आउट हो जाये। बाकी की पूरी टीम हम 50 रनों मे समेट देंगे। यहाँ तो फिर भी 3 विकेट ही समेटने थे। विकेट समेट दिये गए। 


#दुःख

खबर ही खबर / कुमार सूरज

*उपेक्षा 


सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत 20 हजार से अधिक डाटा इंट्री ऑपरेटर, आईटी ब्वॉय* आदि को वेतनादि मामला देखने के लिए बेल्ट्रॉन ने एक बार फिर अपने पुराने आदेश को दरकिनार कर एजेंसी की सेवा लेने का निर्णय लिया है। 


सरकार के इस फैसले के खिलाफ बिहार राज्य डाटा इंट्री/कंप्यूटर ऑपरेटर संघ उतर गया है। संघ ने मंत्री व बेल्ट्रॉन के एमडी को पत्र लिखकर इस बाबत नाराजगी जताई है। पत्र में संघ ने कहा है कि वर्ष 2016 में बेल्ट्रान प्रबंधन द्वारा कोलकाता व पटना की दो आउटसोर्सिंग एजेंसी/सर्विस प्रोवाइडर पर ईएसआई व ईपीएफ घोटाला करने व सरकारी राशि के गबन का मामला पटना के शास्त्री नगर थाने में दर्ज कराया है। अब फिर से बेल्ट्रॉन में एजेंसियों की सेवा लेने की कार्रवाई की जा रही है। जबकि बेल्ट्रॉन के तत्कालीन एमडी राहुल सिंह ने सामान्य प्रशासन विभाग को दो बार पत्र लिखकर कहा था कि अगर एजेंसियों की सेवा नहीं ली जाए तो सरकार को 50 करोड़ की बचत होगी। साथ ही सरकारी राशि के गबन की गुंजाइश भी समाप्त हो जाएगी। 


बिहार राज्य डाटा इंट्री/कंप्यूटर ऑपरेटर संघ के प्रदेश महासचिव विशाल कुमार ने कहा कि देश के किसी भी राज्य में लगातार दो दशकों से आउटसोर्सिंग के माध्यम से सरकारी कार्यालयों में काम नही लिया जा रहा है। सरकार एजेंसियों की सेवा समाप्त कर सीधे विभाग से सेवा लें।


राहत / इंटर परीक्षा 2022  कल से 


*बिहार बोर्ड इंटर परीक्षा 2022 कल से शुरू होने* जा रही है। इंटर परीक्षा के लिए राज्यभर में 1471 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इंटरमीडिएट की वार्षिक परीक्षा 1 से 14 फरवरी तक आयोजित होगी।  इसमे 13 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल होंगे। परीक्षा दो शिफ्ट - सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक और दोपहर 1:45 से शाम 5 बजे तक आयोजित की जाएंगी। छात्रों को परीक्षा हॉल में प्रवेश परीक्षा शुरू होने के दस मिनट पहले तक मिलेगा। पहली पाली के लिए 9.20 मिनट और दूसरी पाली के लिए 1.35 मिनट तक प्रवेश मिलेगा। परीक्षा हाल में प्रवेश से पहले दो बार परीक्षार्थी की जांच की जायेगी। 


परीक्षाओं में छात्र अब जूता-मोजा पहनकर परीक्षा दे सकते हैं। शीतलहर के कारण छात्रों को जूता-मोजा पहनकर परीक्षा केंद्रों/परीक्षा कक्ष में प्रवेश करने की अनुमति दी गई है। 


अपना एडमिट कार्ड साथ जरूर लाएं। प्रवेश पत्र में त्रुटि होने पर आधार कार्ड, वोटर आई कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट या बैंक पासबुक से प्रवेश मिलेगा। प्रवेश पत्र गुम हो जाने पर उपस्थिति पत्रक से पहचान की जाएगी। प्रवेश पत्र एवं उपस्थिति पत्रक से परीक्षार्थी का मिलान किया जायेगा। 

 

परीक्षा केंद्र में कैलकुलेटर, मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, ईयरफोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स लेकर नहीं जाना है। 


परीक्षा हॉल में दूसरे परीक्षार्थी से बातचीत किया तो निष्कासित होंगे। 


बिहार बोर्ड परीक्षा 2022 : इंटर में प्रश्न पत्रों के 10 सेट होंगे, सवाल नहीं बदलेंगे


परीक्षा के दौरान अतिरिक्त उत्तरपुस्तिका नहीं मिलेगी। 


ओएमआर पर व्हाइटनर, इरेजर, नाखून, ब्लेड आदि का इस्तेमाल करने पर ओएमआर रद्द हो जायेगा


परीक्षा शुरू होने के एक घंटे तक बाहर जाने की नहीं होगी अनुमति


उत्तरपुस्तिका के पहले पन्ने के बायीं तरफ केवल विषय का नाम और उत्तर देने का माध्यम छात्रों द्वारा भरा जाएगा। वहीं प्रश्न पत्र के सेट कोड को उत्तर पुस्तिका में नीले या काले बॉल पेन से भरा जाना है। उत्तर पुस्तिका के दाहिने भाग में प्रश्न पत्र सेट कोड को बॉक्स में भरा जाएगा। 


इसके अलावा प्रश्न पत्र क्रमांक और छात्र अपना पूरा नाम और विषय का नाम लिख कर वहीं हस्ताक्षर करना है। बीच बार भाग को परीक्षार्थी छोड़ देंगे, क्योंकि यह भाग परीक्षक द्वारा भरा जाएगा। उत्तरपुस्तिका पर परीक्षार्थी का हस्ताक्षर नहीं रहेगा तो ओएमआर रद्द हो जाएगा।


मास्क लगाकर ही परीक्षा केंद्र पर प्रवेश मिलेगा। मास्क में ही परीक्षा देनी होगी। परीक्षा केंद्र में सोशल डिस्टेंसिंग व कोविड-19 गाइडलाइंस का पालन करना होगा। कक्षाओं के बाहर हैंड सेनेटाइजर भी रखा जायेगा। वहीं, हर छात्र को मास्क या फेस कवर पहन कर ही परीक्षा देना है। 


बिहार बोर्ड ने इंटर परीक्षा में दिव्यांग छात्रों को प्रति घंटा 20 मिनट का अतिरिक्त समय दिया है। दिव्यांग परीक्षार्थियां की सुविधा के लिए बैठने की व्यवस्था हर केंद्र पर ग्राउंड फ्लोर पर की गई है। जिन छात्रों को राइटर की सुविधा चाहिए, उन्हें डीईओ कार्यालय से संपर्क करना होगा।


3  सात फ़रवरी से खुलेंगे शैक्षणिक संस्थान



  कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की गति कम होने से राज्य के शैक्षणिक संस्थान 6 फरवरी के बाद खोले* जाने के आसार हैं। संक्रमण की मौजूदा दर कायम रही या और क्षीण पड़ी तो प्रदेश के सभी सरकारी व निजी स्कूल, कॉलेज, कोचिंग व अन्य शैक्षणिक संस्थानों के 7 फरवरी से खोल देने की प्रबल संभावना है। हालांकि इसको लेकर अंतिम फैसला राज्य सरकार द्वारा गठित आपदा प्रबंधन समूह की बैठक में लिया जाएगा। माना जा रहा है कि इस समूह की बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 5 फरवरी को होगी क्योंकि कोरोना संक्रमण को लेकर राज्य सरकार का वर्तमान दिशा-निर्देश 6 फरवरी तक के लिए प्रदेश में लागू है। जिसके तहत तमाम शैक्षणिक संस्थान तो बंद हैं लेकिन उनके दफ्तर 50 फीसदी उपस्थिति के साथ संचालित हो रहे हैं।


7 फरवरी से स्कूल खोले जाने की तैयारी को लेकर पूछे जाने पर शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सोमवार को कहा कि शिक्षा विभाग की मंशा है कि शिक्षण संस्थान खुलें। लेकिन बच्चों के स्वास्थ्य को जोखिम में डालकर हम स्कूल चलाना नहीं चाहते। कोरोना संक्रमण काफी कम हुआ है। आपदा प्रबंधन समूह स्कूल खोलने पर बच्चों के जोखिम का आकलन कर अंतिम फैसला करेगा। लगातार स्कूल बंद रहने से बच्चों को पढ़ाई का भारी नुकसान हुआ है। इसलिए हम चाहते हैं कि पढ़ाई की अनियमितता समाप्त हो।


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सामान्य हालत की उम्मीद



: *स्थानांतरण को लेकर निबंधन कार्यालयों में कार्य बहिष्कार के मामले पर मंत्री सुनील कुमार* ने कहा कि एक-दो दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी। उन्होंने इसके चलते राजस्व की किसी प्रकार की हानि से इनकार किया। कहा कि सोमवार तक संविदा पर बहाल 80 से 90 प्रतिशत कार्यपालक सहायक व कंप्यूटर ऑपरेटरों ने नई जगह पर योगदान दे दिया है। शनिवार को जिन दस्तावेजों का निबंधन नहीं हो पाया था, उनका एक-दो दिनों में निपटारा कर दिया जाएगा। निबंधन विभाग अभी तक 100 फीसद लक्ष्य से अधिक राजस्व की प्राप्ति कर चुका है।


कुमार सूरज

मध्य बिहार में अभी ठंड और बारिश का दौर

 *औरंगाबाद  मे 4 एवं 5 फरवरी को बारिश होने की है  संभावना*


कुमार सूरज 


कड़ाके की ठण्ड से जूझ रहे औरंगाबाद जिला मे एक बार फिर मौसम का मिजाज बिगड़ने वाला है । *4 से 5 फरवरी को मध्यम बादल छाए रहने के साथ बारिश होने की संभावना है ।*  

*कनकनी बढ़ाने वाली पछुआ हवा की थमी रफ्तार*  औरंगाबाद जिला में पछुआ हवा के तेज बहाव 10 से 12 किलोमीटर प्रति घण्टा के रफतार से था । जिसके कारण कनकनी बढ़ गई थी । अभी हवा के बहाव में कमी आते ही इसके बहाव से आगामी दिनों में न्यूनतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने की संभावना बन रही है ।  पछुआ हवा की रफ्तार में कमी आने एवं न्यूनतम तापमान में बृद्धि होने से औरंगाबाद में ठण्ड से राहत मिलने की संभावना है ।


*सलाह*


किसानों को सलाह दी जा रही है कि अपने खेतों में हल्की भी नमी है तो सिंचाई के लिए इंतज़ार करें 

मौसम खराब होने पर घर मे या सुरक्षित जगह पर रहे और बारिश होते समय बाहर न निकले 

पशुओं को भी सुरक्षित जगह पर रखे एवं उन्हें भी बारिश में भीगने न दे ।


पशुओं को ठण्ड  से बचाने के लिए गौशाला के उचित प्रबंधन करने एवं पशुओं के पीने का पानी ठंडा न हो ताजे पानी का प्रबन्ध करे । पशुओं को सूखे जगह पर एवं जुट के बोर से ढक कर रखना चाहिए l  


डॉ अनूप कुमार चौबे,

कृषि मौसम वैज्ञानिक,

कृषि विज्ञान केन्द्र,

सिरिस, औरंगाबाद

बिहार 

गुरुवार, 27 जनवरी 2022

सुमन कल्याणपुर

 28 जनवरी पार्श्वगायिका सुमन कल्याणपुर जी को 85वे जन्मदिन पर ढ़ेरों बधाई 🎂

  ✍️ पारो शैवलिनी 


 सन 1954 में पार्श्वगायिका सुमन कल्याणपुर ने हिंदी सिनेमा जगत में अपना कैरियर शुरू किया था। 

34 साल तक लगातार हिन्दी सिनेमा को अपनी आवाज़ में  गीत सुनाती रही मगर संगीत प्रेमियों के लिए वो हमेशा पहेली  बनी रही कि-"कौन गा रही है। लता तो नहीं?"


मगर किसी भी संगीत प्रेमी ने,यहां तक कि किसी फिल्मी हस्ती ने भी यह सबाल नहीं उठाया कि सुमन को कभी फिल्मफेयर अवार्ड  क्यों नहीं मिला? 

किसी फिल्मी पत्रकार को भी यह जानने की फुरसत नहीं मिली  कि सुमन कल्याणपुर अपने फिल्मी कॅरियर से खुश हैं या नहीं?


सुमन कल्याणपुर के इस दर्द को समझा था गीतकार योगेश और संगीतकार रोबिन बनर्जी ने।

सुमन और संगीतकार रोबिन बनर्जी का साथ 1958 में प्रदर्शित रोबिन की पहली फिल्म वजीरे-आजम से लेकर 1971 में प्रदर्शित रोबिन की अंतिम हिंदी फिल्म राज़ की बात तक रहा। 


सुमन कल्याणपुर की आवाज़ के बिना रोबिन बनर्जी की फिल्म अधुरी थी। गीतकार योगेश की फिल्मी पहचान भी सुमन कल्याणपुर के गाये गीतों से ही हुआ था जब संगीतकार रोबिन बनर्जी ने फिल्म सखी रोबिन(1962) में पहली बार योगेश को मौका दिया था। योगेश जी का पहला गाना जो रोबिन बनर्जी ने रिकॉर्ड किया उसे सुमन ने पार्श्वगायक मन्ना डे के साथ गाया था। जिसके बोल थे-" तुम जो आओ तो प्यार आ जाये,जिन्दगी में बहार आ जाये।"


गीतकार योगेश ने खाकसार (पारो शैवलिनी जी) को बताया था कि हालांकि  सुमन ने कभी खुलकर इस बात का विरोध नहीं किया। लेकिन अंदर से वो टूटी हुई जरूर थी।


योगेश दा ने बताया था कि फिल्मों में ये पुरस्कार वगैरह पाने के लिए पैरवी की  जरूरत पड़ती है जो ना तो कभी सुमन ने किया, नाही मैंने किया। रोबिन जी ने तो किया ही नहीं। इसका इससे बेहतर उदाहरण और क्या होगा कि लता जी के रहते हुए 'शारदा' को फिल्मफेयर पुरस्कार मिल गया।


बता दूं ,गीतकार योगेश को भी कभी कोई पुरस्कार नहीं मिला। यही कारण रहा कि 1954 से शेख मुख्तार की फिल्म मंगू से अपना कैरियर शुरू करके 1988 में मात्र 34 साल के कैरियर को,जब वो बेहतर परफोर्मेंस कर रही थी , अलविदा कह दिया सुमन कल्याणपुर ने।


आज सुमन जी का 85वां जन्मदिन है।

सुमन जी सेहतमंद रहे । उनकी दीर्घायु की कामना के साथ जन्मदिन की बधाई। 🎂🎂🎂

राहुल रवेल / रेहान फ़ज़ल

 राहुल रवैल भारत के जानेमाने फ़िल्म निर्देशक हैं. उन्हें कई फ़िल्मों में राज कपूर के साथ बतौर सहायक निर्देशक काम करने का मौक़ा मिला. हाल ही में उन्होंने राज कपूर पर एक दिलचस्प किताब लिखी है- 'राज कपूर: द मास्टर एट वर्क'. इसमें उन्होंने राज कपूर के जीवन पर कुछ यादों का जिक्र किया है.


बॉबी' की शूटिंग के दौरान राज कपूर कश्मीर में कुछ शॉट ले रहे थे. जब वो सेना की एक चौकी से गुज़रे तो उनके रास्ते में एक बैरीकेड लगा था. वहां तैनात सैनिकों ने उनसे कहा कि इससे आगे जाने की इजाज़त नहीं है. तो राज साहब ने कहा कि तुम अपने कमांडर को बुलाओ और उनसे कहो कि राज कपूर आए हैं.


कमांडर ने आकर न सिर्फ़ राज कपूर का अभिवादन किया, बल्कि उनके लिए दो जीपों की व्यवस्था की ताकि उनकी टीम को भारत-पाकिस्तान सीमा तक ले जाया सके.


राहुल रवैल बताते हैं, "जब हम सीमा पर पहुंचे तो सारे जवान हमारा इंतज़ार कर रहे थे, क्योंकि उन्हें पहले ही वायरलेस से बता दिया गया था कि राज कपूर वहां आ रहे हैं. उन लोगों ने हमारे लिए पकौड़ों और समोसों का इंतज़ाम किया था. आधे घंटे बाद जब हम वापस चलने के लिए तैयार हुए तो उन्होंने हमसे कहा, 'सर थोड़ी देर और रुक जाइए. हमने पाकिस्तानी सैनिकों को रेडियो पर बता दिया है कि राज कपूर यहां तशरीफ़ लाए हैं. वो आपसे मिलने यहां आ रहे हैं.' थोड़ी देर बाद हमने देखा कि पाकिस्तानी सैनिकों से भरी दो जीपें वहां पहुंची. वो हमारे लिए जलेबियां और मिठाइयां लाए थे. हम ये देखकर बहुत भावुक हो गए कि पाकिस्तानी सैनिकों के बीच भी राज कपूर उतने ही लोकप्रिय थे."


साभार रेहान फ़ज़ल जी बीबीसी संवाददाता

 के आलेख से

मंगलवार, 25 जनवरी 2022

लड़ने के सौ सौ बहाने............

 पत्नियों के लड़ने के सौ बहाने............

जब तनहा-उदासी में मैं हून्गी,

महफिल में भी तन्हा पाऊन्गी,

तब किसपे कसक निकालूंगी,

प्रिये मैं तुमसे लड़ जाऊन्गी!!

         जब ग़लती से गलती मेरी हो,

         चाहे टूटे कप-काम में देरी हो,

         तब किसपे खीझ़ मिटाऊन्गी,

         प्रिय मैं तुमसे लड़ जाऊन्गी!!

जब  कोई  उत्सव-त्यौहार  जो   हो,

सब आएगी फिर जब सज-धजकर,

कभी ख़ुद को  जो  कमतर  पाऊँगी, 

प्रिये  मैं    तुमसे   लड़   जाऊन्गी!!

           कहीं  कुछ भी  अगर   आया   होगा,

           कभी किसी को कुछ जो मिला होगा,

           मैं तो बस तुमसे ही ज़िद दोहराऊन्गी, 

           प्रिय   मैं    तुमसे   लड़    जाऊन्गी!!

कभी नम्बर बच्चो के  कम  आऐ,

या कम्पटीशन में वो पिछड़ जाऐ,

मैं उनसे  ना ज्यादा  कहूँगी  बस,

प्रिये मैं  तुमसे   लड़  जाऊन्गी!!

          कभी कोई बहाना ना लड़ने का हो,

          भला  कब  तक  बोर  हो पाऊन्गी,

          कुछ  शिकवे  प्यार  में कमी  के ले,

          प्रिये  मैं   तुमसे   लड़   जाऊन्गी!!

                               पंकज श्रीवास्तव 

                                  बेहद उदास। ।

शनिवार, 15 जनवरी 2022

कड़वे फल की शिकायत

 


कृष्ण और सुदामा का प्रेम बहुत ही गहरा था, प्रेम भी इतना कि कृष्ण सुदामा को रात दिन अपने साथ ही रखते थे। कोई भी काम होता था तो वेह दोनों साथ-साथ ही करते। 


एक दिन दोनों वन संचार के लिए गए और रास्ता भटक गए। दोनो भूखे प्यासे एक पेड़ के नीचे पहुंचे, उन्होने देखा पेड़ पर एक ही फल लगा हुआ है। कृष्ण जी ने घोड़े पर चढ़ कर फल को अपने हाथ से तोड़ा, फिर कृष्ण जी ने फल के छह टुकड़े किए और अपनी आदत के मुताबिक पहला टुकड़ा सुदामा को दे दिया। सुदामा ने वह टुकड़ा खा लिया और बोले 'बहुत स्वादिष्ट है। मैने ऐसा फल पहले कभी नहीं खाया है, मुझे एक टुकड़ा और दे दो ओर दूसरा टुकड़ा भी सुदामा को मिल गया। 


दो टुकडे खाने के बाद सुदामा ने एक टुकड़ा और कृष्ण जी से मांग लिया। इसी तरह बारी बारी सुदामा ने पांच टुकड़े कृष्ण जी से मांग कर खा लिए। जब सुदामा ने आखिरी टुकड़ा मांगा, तो कृष्ण जी ने कहा। यह तो सीमा से बाहर है, आखिर मैं भी तो भूखा हूँ। मेरा तुम से बहुत प्रेम है, पर तुम मुझ से प्रेम नहीं करते हो क्या?* और कृष्ण जी ने वह आखरी फल का टुकड़ा अपने मुंह में रख लिया।


मुंह में रखते ही *कृष्ण जी ने उसे बाहर थूक दिया, क्योंकि वह बहुत ही कड़वा था।* कृष्ण जी बोले 'तुम पागल तो नहीं हो, इतना कड़वा फल तुम कैसे खा गए? उस पर सुदामा का उत्तर था, 'जिन हाथों से बहुत मीठे फल खाने को मिले। उस से मै एक कड़वे फल की शिकायत कैसे करूँ? मै सब टुकड़े इस लिए लेता गया, ताकि आप को पता ना चले। 


बिल्कुल ऐसे ही सतगुरु ने हमे ज़िंदगी भर की खुशियाँ दी है और हमे अगर कभी कोई दुख आ जाए तो हमे उस के लिए गुरु से नाराज नहीं होना चाहिए। हमे उस पल के लिए भी गुरू का शुकराना ही करना चाहिए और हंसते हंसते उस दुख को पार करना चाहिए। पर हम इंसान थोड़ा सा भी हमारी जिंदगी में दुख आ जाए, तो हम घबरा जाते हैं डोल जाते हैं। और हम अपने रास्ते से भटक जाते हैं, भजन सुमिरन करना छोड़ बैठते हैं। 


हमें दुख मै घबराना नहीं चाहिए, बल्कि परमार्थ की राह पर चलते हुए हमें निडर होकर भजन सिमरन करना चाहिए। हमे उस कुल मालिक को याद करते रहना चाहिए, दुख और सुख तो आते जाते रहते हैं। जब दुख का समय टल जाता है, फिर हमारी जिंदगी में सुख आ जाता है। और फिर हमारा सुख चैन चला जाता है तो दुख का समय आ जाता है। इसलिए हमें घबराना नहीं है और समय निकाल कर भजन सिमरन पर बैठ कर नाम की शब्द की कमाई करते रहना है। 


इस लिए हमें समझाने के लिए कबीर साहिब जी ने भी बाणी में लिखा है।  दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय। जो सुख में सुमिरन करे दुःख काहे को होय॥ 


*कबीर दास जी कहते हैं, कि दुःख के समय सभी भगवान् को याद करते हैं। पर सुख में कोई नहीं करता, यदि सुख में भी भगवान् को याद किया जाए तो दुःख हो ही क्यों!


शब्द मनिये गुर पाइए


विचों आप गवाइ,


अनदिन भगति करे सदा


साचे की लिव लाइ,


नाम पदार्थ मन वसिआ


नानक सहज समाइ ।।


Radha Soami ji

#अपनी गठरी टटोलें!

✍🏻 दो आदमी यात्रा पर निकले! दोनों की मुलाकात हुई, दोनों का गंतव्य एक था तो दोनों यात्रा में साथ हो चले... सात दिन बाद दोनों के अलग होने का समय आया तो एक ने कहा : भाई साहब! एक सप्ताह तक हम दोनों साथ रहे क्या आपने मुझे पहचाना? दूसरे ने कहा : नहीं, मैंने तो नहीं पहचाना। पहला यात्री बोला : महोदय मैं एक नामी ठग हूँ परन्तु आप तो महाठग हैं। आप मेरे भी गुरू निकले। दूसरे यात्री बोला "कैसे?" पहला यात्री : कुछ पाने की आशा में मैंने निरंतर सात दिन तक आपकी तलाशी ली, मुझे कुछ भी नहीं मिला। इतनी बड़ी यात्रा पर निकले हैं तो क्या आपके पास कुछ भी नहीं है? बिल्कुल खाली हाथ हैं। दूसरा यात्री "मेरे पास एक बहुमूल्य हीरा है और थोड़ी-सी रजत मुद्राएं भी है। पहला यात्री बोला : तो फिर इतने प्रयत्न के बावजूद वह मुझे मिले क्यों नहीं? दूसरा यात्री "मैं जब भी बाहर जाता, वह हीरा और मुद्राएं तुम्हारी पोटली में रख देता था और तुम सात दिन तक मेरी झोली टटोलते रहे। अपनी पोटली सँभालने की जरूरत ही नहीं समझी, तो फिर तुम्हें कुछ मिलता कहाँ से?"

ईश्वर नित नई खुशियाँ हमारी झोल़ी मे डालता है परन्तु हमें अपनी गठरी पर निगाह डालने की फुर्सत ही नहीं है ! यही सबकी मूलभूत समस्या है। जिस दिन से इंसान दूसरे की ताकझाक बंद कर देगा उस क्षण सारी समस्या का समाधान हो जाऐगा... अपनी गठरी टटोलें!

 जीवन में सबसे बड़ा गूढ मंत्र है स्वयं को टटोले और जीवन-पथ पर आगे बढ़े सफलताये आप की प्रतीक्षा में है।

मंगलवार, 11 जनवरी 2022

वेतन आयोग लीला

 *पहला वेतन आयोग 1947 -      40 % वृद्धि*

*दूसरा वेतन आयोग 1959  -     50 % वृद्धि*

*तीसरा वेतन आयोग 1973  -     25 % वृद्धि*

*चौथा वेतन आयोग 1986  -     40 % वृद्धि*

*पाँचवां वेतन आयोग 1996  -    35 % वृद्धि*

*छठा वेतन आयोग    2006  -     40 % वृद्धि*                                                                                    *अब आया अच्छे दिन वालो का वेतन आयोग  मतलब,                                                     

 सातवाँ वेतन आयोग 2016 -  14% वृद्धि*

*"देश" में "तीन बार" "जनता" ने "भाजपा" को शासन का अवसर दिया !*                                                                                *"पहली" ने 'पेंशन' "खतम" की और "दूसरी" ने 'वेतन आयोग' और तीसरी ने वेतन और पेन्सन के "डीए वृद्धि" को खत्म किया !*

*बीजेपी की सरकार उस "नई नवेली बहू" की तरह "साबित" हो रही है*

*जो "रोटी" कम "बेलती" है !*

*"चूड़ी" ज्यादा खनकाती है!* *जिससे "मोहल्ले" में "सबको" पता" चल "जाए" कि "बहू" काम" कर रही है !*


कर्मचारियों के हित मे जारी

सोमवार, 10 जनवरी 2022

11 जनवरी 2022 का पंचांग / कृष्ण मेहता


 🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞


⛅ *दिनांक - 11 जनवरी 2022*


⛅ *दिन - मंगलवार*

⛅ *विक्रम संवत - 2078*

⛅ *शक संवत -1943*

⛅ *अयन - दक्षिणायन*

⛅ *ऋतु - शिशिर* 

⛅ *मास -  पौस*

⛅ *पक्ष -  शुक्ल* 

⛅ *तिथि - नवमी दोपहर 02:21 तक तत्पश्चात दशमी*

⛅ *नक्षत्र - अश्विनी सुबह 11:10 तक तत्पश्चात भरणी*

⛅ *योग - सिध्द सुबह 10:56 तक तत्पश्चात साध्य*

⛅  *राहुकाल -  शाम 03:31 से शाम 04:53 तक*

⛅ *सूर्योदय - 07:19*

⛅ *सूर्यास्त - 18:13*

⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*

⛅ *व्रत पर्व विवरण - 

💥 *विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

          🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞


🌷 *Diabetes( मधुमेह) नियंत्रित करने के लिए* 🌷

👉🏻 *Diabetes नियंत्रित करने के लिए सुबह १/२ किलो कच्चा करेला टुकड़े - टुकड़े करके तसले में डाल दें और अपने पैरों से १/२ से ३/४ घंटे तक तक कुचलें जब तक जीभ में कड़वाहट का अहसास ना हो l ७-१० दिन तक ये प्रयोग करें l इससे Diabetes नियंत्रित होती है l*

👉🏻 *हो सके तो इन दिनों में मेथी की सब्जी खाए या मेथी के दाने रात को भिगा दे और सुबह  खाए | इससे लाभ होगा |*

🙏🏻 

               🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞


🌷 *होंठ फटने पर* 🌷

➡ *नाभि में सरसों के तेल की २-४ बूंदे डालें तथा जरा से मक्खन में नमक मिलाकर होंठों पर लगायें इससे लाभ होता है l*

🙏🏻 *

          🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞


🌷 *राग और ताल की महिमा* 🌷

👉🏻 *राग और ताल सुनने से बहुत सी बीमारियाँ दूर होती हैं*

🎼 *राग मारवा और राग भोपाली से आंतों की बीमारियाँ दूर होती हैं l*

🎼 *राग आसारी से मस्तक के रोग दूर होते हैं l*

🎼 *राग भैरवी से सिरदर्द ठीक होने लगता है l*

🎼 *राग सोहनी से सिरदर्द और मरुरज्जू (रीड़ की हड्डी में जो मनके घिस गए, वो ठीक होने लगते हैं l)*

🎼 *राग वसंत और राग सोरट से नपुंसकता दूर हो जाती है l*


          🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏

शनिवार, 8 जनवरी 2022

शेख मुजीबुर्रहमान / रेहान fzlb

 50 वर्ष पूर्व  आज ही के दिन शेख मुजीबुर्रहमान पाकिस्तानी जेल से छूट लंदन पहुंचे थे......


भुट्टो आख़िरी समय तक पाकिस्तान के साथ किसी न किसी तरह का संबंध बनाए रखने के लिए शेख मुजीब पर दबाव डालते रहे. जिस दिन शेख़ को छोड़ा जाना था और वो लंदन के लिए उड़ान भरने वाले थे, भुट्टो ने उनसे कहा कि वो एक दिन के लिए और रुक जाएं , क्योंकि अगले दिन ईरान के शाह आ रहे थे और वो उनसे मिलना चाहते थे. मुजीब समझ गए की भुट्टो ईरान के शाह से उनपर दबाव डलवाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि भुट्टो का प्रस्ताव उन्हें मंज़ूर नहीं है. अगर वो चाहें तो उन्हें दोबारा जेल भिजवा सकते हैं. पढ़िए पूरा लेख इस लिंक को क्लिक कर

Syed Badrul Ahsan Mahendra Ved Manmohan Sharma Raman Hitkari

दो बीघा जमीन / बिमला रॉय

 हिंदी सिनेमा के उस महान निर्देशक जिसकी एक फिल्म ‘ दो बीघा जमीन’ ने  दुनियाभर में तहलका मचा दिया। 

उन्होंने बंगाली और हिंदी भाषा में कई फिल्में बनाई हैं। बिमल रॉय की फिल्में परिणीता, बिराज बहु, मधुमती, सुजाता, परख, बंदिनी भी शामिल हैं। इन फिल्मों को अलग अलग कैटेगरी में अवॉर्ड दिया गया था। 


12 जुलाई 1909 में बिमल रॉय का जन्म हुआ। वे एक जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते थे। पिता की आकस्मिक मौत के बाद उनके घर पर पारिवारिक विवाद हुआ जिसकी वजह से उन्हें जमीदारी से बेदखल होना पड़ा। पढ़ाई करने के बाद वे फिल्मों में कुछ करने के लिए कलकत्ता चले गए। बिमल रॉय की लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि मधुबाला को उनकी फिल्म में काम न कर पाने का अफसोस था।


बिमल रॉय ने मानवीय सरोकारों से जुड़े मुद्दों को अपने सिनेमा के जरिए दिखाया। संगीतकार सलिल चौधरी को बिमल रॉय ने 'दो बीघा जमीन' के लिए हिंदी सिनेमा में पहला ब्रेक दिया। सलिल चौधरी ने फिल्म की कहानी भी लिखी थी और बलराज साहनी को मुख्य भूमिका के लिए बिमल रॉय से मिलवाया था। यह वही फिल्म थी जिसने बिमल रॉय को अमर कर दिया। दो बीघा जमीन 1953 में आई थी। साल 1953 में बिमल रॉय की फिल्म दो बीघा जमीन को कांस में इंटरनेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया था।


ये फिल्म न सिर्फ किसानी को समर्पित जबरदस्त फिल्म है बल्कि अभिनेताओं के लिए भी धर्मपुस्तक है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे काफी सराहा गया और कई पुरस्कार अपनी झोली में बटोरे। फिल्म देखने के बाद एक बार राजकपूर ने कहा था कि मैं इस फिल्म को क्यों नहीं बना सका। अगले हजार साल बाद भी भारत की 100 सर्वश्रेष्ठ फिल्मों की सूची बनी तो ये फिल्म उसमें शामिल जरूर होगी।


 1958 में उनकी फिल्म 'मधुमति' को 9 फिल्मफेयर पुरस्कार मिले थे। उनके नाम यह रिकॉर्ड कई साल तक कायम रहा। कैंसर से पीड़ित बिमल रॉय साल 1965 में 55 साल की उम्र में चल बसे और हमेशा के लिए सिनेमा को अमर कर गए।

   

अमर उजाला के आलेख के

कोरोना से बिहार में तीसरी लहर की पहली मौत

कोरोना की तीसरी लहर फैलने के बाद मुजफ्फरपुर में संक्रमण से पहली मौत शनिवार* को हो गई। मृतक सकरा के शहदुलापुर पिपरी गांव का रहने वाला था। उसकी उम्र 62 वर्ष बताई जा रही है। उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तीन दिन पहले तबीयत खराब हुई थी। इसकी पुष्टि सिविल सर्जन डॉ. विनय कुमार ने की है।


कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत पर सिविल सर्जन ने बताया कि संक्रमित मरीज हृदय रोगी था। उसके हार्ट के दोनों वॉल्व खराब हो गए थे। हार्ट का इलाज कराने के लिए वह निजी अस्पताल में भर्ती हुआ था। अस्पताल में ही जांच के दौरान संक्रमित पाया गया था। मरीज का दाह संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया गय

: *राजधानी पटना में एक बार फिर से कोरोना का संक्रमण बढ़ता* जा रहा है, जिसे देखते हुए राजद के प्रदेश कार्यालय को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के निर्देश पर राजद कार्यालय को बंद किया गया है। अभी तक पार्टी का कोई भी व्यक्ति या कर्मचारी संक्रमित नहीं पाया गया है लेकिन बाहर से आए कुछ लोगों की जब जांच कराई गई तो उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसलिए राजद प्रदेश कार्यालय को तत्काल बंद कर दिया गया है।



तीसरी लहर से चिंता




राजद प्रवक्ता के अनुसार तीसरी लहर को देखते हुए पार्टी कार्यालय को बंद किया गया है। हालांकि अगर किसी कार्यक्रम या बैठक की आवश्यकता होगी तो उसे दो चार लोगों की उपस्थिति में पूरा किया जा सकता है। 


गौरतलब है कि इसके पूर्व कोरोना संक्रमण के खतरे और कुछ कर्मचारियों के संक्रमित होने के बाद पटना स्थित जदयू कार्यालय को भी बंद कर दिया गया था। बाद में दिल्ली स्थित जदयू कार्यालय को भी बंद कर दिया गया। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए बिहार विधानसभा को 16 जनवरी तक के लिए बंद कर दिया गया है। स्पीकर विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को यह फैसला लिया। विधानसभा में पिछले 72 घंटे में 25 से ज्यादा कर्मचारी कोरोना संक्रमित पाए गए है। इसी कारण विधानसभा स्पीकर विजय कुमार सिन्हा ने 16 जनवरी तक विधानसभा को बंद करने की घोषणा की है।

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से तय होगा भाजपा के भविष्य की राजनीति / पवन कुमार *


पवन  कुमार


*करोना के जोर पकड़ने से पहले होंगे चुनाव,

फिर लग सकता है देश में लॉक डाउन*


8 जनवरी l आज दोपहर बाद चुनाव आयोग ने करोना को चुनौती देते हुए 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव कि तिथि घोषित कर दी है I पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में वालिंटाइन दिवस यानि 14 फरवरी को होंगे,मणिपुर में 27 फरवरी और 3 मार्च को होंगे I उत्तरप्रदेश में 10 फरवरी से 3 मार्च के बीच 7 चरणों में होंगे I पंजाब और उत्तरप्रदेश में जमकर चुनाव प्रचार होगा I चुनावी रैलियों होंगी और फिर करोना फैलेगा है I 10 मार्च को रिजल्ट आएगा और फिर करोना को फैलने से रोकने के लिए लगेगा लॉकडाउन, ऐसा मेरा मानना है I सरकार चाहे किसी कि भी बने पर नुक्सान तो जनता का ही होगा I उनका कारोबार खत्म,नौकरी छूटेगी,स्कूल बंद रहेंगे,खुला होगा तो बस राजनैतिक चर्चाओं का बाजार I उसके बाद जोड़-तोड़ करके हर राज्यों में सरकार भी बन जायेगी और उसके बाद करोना को रोकने के लिए चलाया जयेगा राष्ट्रव्यापी अभियान I

प्रधानमंत्री फिर देंगे राष्ट्र के नाम सन्देश,जनता पर उसका पालन करने के लिए थोपा जायेगा I देश पर आई आपदा और करोना कि मार को देखते हुए विधानसभा चुनाव टाले भी जा सकते थे,पर नहीं सत्ता कि भूख इतनी कि,शिक्षा और रोजगार का नुकसान सत्ता धारियों को दिखाई नहीं देता I दिखाई देता है तो बस चुनाव,चुनाव और चुनाव I पंजाब में भाजपा चुनाव  जीते,ऐसी सम्भावना कम है I उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव कि स्पष्ट तस्वीर अभी नजर नहीं आ रही, यह भी सच है के उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के आने वाले परिणान भाजपा के भविष्य कि राजनीति को अवश्य प्रभावित करेंगे I यह 10 मार्च को आने वाले परिणाम ही तय करेंगे कि भाजपा चुनाव के बाद फ्रंट पर रहती है या बैकफूट पर आती है I पंजाब में तो विधानसभा चुनाव भाजपा के विरोध में होने है I पंजाब विधानसभा सभा का चुनाव मोदी बनाम सिख हो गया और इस सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि पंजाब में भाजपा को मुंह कि खानी पड़ सकती I उत्तराखंड,गोवा और मणिपुर के बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता I बाकि आगे समय बताएगा I


*पवनकुमार(संपादक)*

एसएसपी टाइम्स 

फ़ोन: 8168465934

श्रीवल्लभ व्यास

 श्रीवल्लभ व्यास हिन्दी रंगमंच के बहुत प्रसिद्ध और बड़े अभिनेता थे। उनके अभिनय की सहजता और संवाद अदायगी अद्भुत थी। फिल्मों से ज्यादा मैंने उन्हें मंच पर देखा है। श्रीवल्लभ व्यास रंगमंच के चर्चित स्टार रहे हैं। हिंदी रंगमंच पर उनके योगदान और कार्य का मूल्यांकन अभी बाकी है। 

श्रीवल्लभ व्यास जब फिल्मों मे गए तो वहां भी अलग पहचान बनाई। कई यादगार रोल फिल्मों मे कर दर्शकों के चहेते बने। पर 2008 मे फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें पेरालाइसिस का अटैक हुआ। त्रासद पेरालाइसिस और स्मृति लोप के बाद,पिछले कुछ सालों से जयपुर में उनका इलाज चल  रहा था। 

पिछली बार जब मिला था तो मैने कहा धा, वल्लभ भाई एक बार फिर नाटक  करेंगे।  वल्लभ भाई बालसुलभ तरीके से मुस्कराहट से खिलखिला उठे। और मुश्किल से उठते हाथों मे मेरा हाध पकड़ गरदन हिलाने लगे। 

हम सबको और उनके परिवार को भी उम्मीद  थी कि कुछ चमत्कार होगा और सब ठीक हो जाएगा। पर श्रीवल्लभ भाई,त्रासदी का पटाक्षेप कर नेपथ्य मे चले गए।

अभिनय की दुनिया में जहां ग्लैमर है, शोहरत  है और बेइंतहा पैसा  है,वही कड़वी सच्चाइयों और दुखदायी त्रासदी भी है। 

श्रीवल्लभ व्यास ने जिन्दगी के हर पहलू को अभिनय मे बखूबी दर्शाया और अब हमे स्तब्ध और भाव-विभोर कर नेपथ्य मे चले गए। 

श्रीवल्लभ व्यास के हिन्दी रंगमंच और फिल्मों में यादगार योगदान को Asmita Theatre Group और सभी रंगकर्मियों का सादर सलाम और विनम्र श्रद्धांजलि।

#ShrivallabhVyas

#Actor #drama #cinema #indiancinema #bollywood #acting

शुक्रवार, 7 जनवरी 2022

स्काउट योग शारीरिक शिक्षा

 

भारत स्काउट एवं गाइड की पूरी जानकारी Scout and Guide full detail in Hindi

इस लेख आप भारत स्काउट एवं गाइड की पूरी जानकारी Scout and Guide full detail in Hindi पढ़ सकते हैं। जिसमें हमने स्काउट एण्ड गाइड की प्रार्थना, झंडा गीत, इतिहास, उद्देश्य, नियम, ध्वज, कैसे जुड़ें, करियर के विषय में पढ़ेंगे।

भारत स्काउट एवं गाइड की पूरी जानकारी Scout and Guide full detail in Hindi

Contents [show]

भारत स्काउट एवं गाइड प्रार्थना

दया कर दान भक्ति का हमें परमात्मा देना,
दया करना हमारी आत्मा में शुद्धता देना .
हमारे ध्यान में आओ ,प्रभु आँखों में बस जाओ,
अँधेरे दिल में आकर के ,परम ज्योति जगा देना.
बहा दो प्रेम की गंगा,दिलो में प्रेम का सागर,
हमे आपस में मिलजुलकर प्रभु रहना सिखा देना.
हमारा कर्म हो सेवा,हमारा धर्म हो सेवा,
सदा ईमान हो सेवा व सेवकचर बना देना.
वतन के वास्ते जीना,वतन के वास्ते मरना,
वतन पर जां फ़िदा करना प्रभु हमको सिखा देना.
दया कर दान भक्ति का हमें परमात्मा देना,
दया करना हमारी आत्मा में शुद्धता देना.

(प्रार्थना में लगने वाला समय – 90 सेकण्ड)
प्रार्थना के रचियता – श्री वीर देव वीर

स्काउट एवं गाइड झंडा गीत

भारत स्काउट गाइड झंडा ऊँचा सदा रहेगा,
ऊँचा सदा रहेगा झंडा ऊँचा सदा रहेगा.
नीला रंग गगन सा विस्तृत भात्र भाव फैलाता,
त्रिदल कमल नित तीन प्रतिज्ञाओं की याद दिलाता.
और चक्र कहता है प्रतिपल आगे कदम बढेगा,
ऊँचा सदा रहेगा झंडा ऊँचा सदा रहेगा.
भारत स्काउट गाइड झंडा ऊँचा सदा रहेगा.

(झंडा गीत में लगने वाला समय – 45 सेकण्ड)
भारत स्काउट एवं गाइड झंडा गीत के रचियता -श्री दयाशंकर भट्ट

भारत स्काउट एवं गाइड का इतिहास History of Scout and Guide

क्या आपको पता है स्काउट एवं गाइड आंदोलन वर्ष 1908 में ब्रिटेन में सर बेडेन पॉवेल द्वारा आरम्भ किया गया? धीरे-धीरे यह आंदोलन हर एक सुसंगठित राष्ट्र में फैलने लगा, जिसमे भारत भी शामिल था। 

भारत स्काउट एवं गाइड की शुरुआत वर्ष 1909 में हुई, तथा आगे चलकर भारत वर्ष 1938 में स्काउट आंदोलन के विश्व संगठन का सदस्य भी बना। वर्ष 1911 में भारत में गाइडिंग की शुरुआत हुई, तथा 1928 में स्थापित गर्ल गाइड्स तथा गर्ल स्काउट्स के विश्व संगठन में भारत ने एक संस्थापक सदस्य की भूमिका निभाई। 

भारतवासियों के लिए स्काउटिंग की शुरूआत न्यायाधीश विवियन बोस, पंडित मदन मोहन मालवीय, पंडित हृदयनाथ कुंजरू, गिरिजा शंकर बाजपेई, एनी बेसेंट तथा जॉर्ज अरुंडाले के प्रयासों से वर्ष 1913 में हुई। 

भारत में ‘भारत स्काउट एवं गाइड (बी.एस.जी.)’ राष्ट्रीय स्काउटिंग एवं गाइडिंग संगठन है। इसकी स्थापना 7 नवम्बर, 1950 को स्वतंत्र भारत में जवाहरलाल नेहरूमौलाना अबुल कलाम आज़ाद तथा मंगल दास पकवासा के द्वारा की गई।

इसमें ब्रिटिश भारत में मौजूद सभी स्काउट एवं गाइड संगठनों को सम्मिलित किया गया। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। इसके एक वर्ष पश्चात् 15 अगस्त, 1951 को आल इंडिया गर्ल गाइड्स एसोसिएशन को भी भारत स्काउट्स एंड गाइड्स संगठन में शामिल कर लिया गया।

विश्व स्काउट संगठन में वर्ष 1947 से 1949 तक अपने अहम योगदान के लिए विवियन बोस जी को विशेष तौर पर याद किया जाता है। वर्ष 1969 में विश्व स्काउटिंग में अद्वितीय सेवा के लिए श्रीमती लक्ष्मी मजूमदार को विश्व स्काउटिंग द्वारा ‘ब्रॉन्ज़-वोल्फ’ सम्मान से सम्मानित किया गया था।

भारत स्काउट एवं गाइड क्या है? What is Scout and Guide in Hindi?

स्काउट्स एवं गाइड्स एक स्वयंसेवी, गैर-राजनीतिक, शैक्षिक आंदोलन है, जो हर एक नव जवान को मानवता की सेवा करने का मौका प्रदान करता है, बिना किसी भी तरह के रंग, मूल अथवा जाति भेद के।

भारत स्काउट एवं गाइड अपने लक्ष्यों, सिद्धांतों एवं विधियों के आधार पर कार्य करताज है, जिन्हें इसके संस्थापक लार्ड बेडेन पॉवेल द्वारा 1907 में बनाया गया था।

भारत स्काउट एवं गाइड का उद्देश्य Aim of Scout and Guide in Hindi

स्काउट एवं गाइड का उद्देश्य नवयुवकों की पूर्ण शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक क्षमताओं का विकास करना है, जिससे कि वे एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी क्षमताओं के द्वारा स्थानीय, राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर योगदान कर सकें।

भारत स्काउट एवं गाइड निम्न कुछ प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित है –

  1. ईश्वर के प्रति कर्तव्य:- आध्यात्मिक नियमों का पालन करना, अपने धर्म के प्रति निष्ठावान रहना तथा अपने ईश्वर द्वारा प्रदत्त कर्तव्यों एवं ज़िम्मेदारियों को स्वीकार करना।
  2. अन्य लोगों के प्रति कर्तव्य:- अपने राष्ट्र के प्रति निष्ठावान रहते हुए, स्थानीय, राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय शांति, समझ एवं आपसी सहयोग की प्रोत्साहित करना।
  3. स्वयं के प्रति कर्तव्य:- स्वयं के विकास की ज़िम्मेदारी को निभाना।

स्काउट एवं गाइड की विधियां Methods

भारत स्काउट एवं गाइड पद्धति प्रगतिशील स्वयं शिक्षा प्रणाली है, यद्यपि –

  • यह एक वचन तथा कानून भी है।
  • यह कर के सीखने में विश्वास रखता है।
  • किसी वयस्क के नेतृत्व में छोटे समूहों की सदस्यता।
  • प्रतिभागियों की रूचि के अनुसार विभिन्न प्रगतिशील एवं प्रेरणादायक कार्यक्रमों का आयोजन।

स्काउट एवं गाइड के नियम Laws of Scout and Guide

भारत स्काउट एवं गाइड के कुछ मुख्य कानून व नियम –

  • स्काउट / गाइड विश्वसनीय होता/होती है।
  • स्काउट/गाइड वफादार होता/होती है।
  • स्काउट/गाइड सबका/सबकी मित्र ओर प्रत्येक दुसरे स्काउट /गाइड का/की भाई/बहिन होता/होती है।
  • स्काउट/गाइड विनम्र होता/होती है।
  • स्काउट/ गाइड पशु पक्षीयो का मित्र ओर प्रकृति – प्रेमी होता/होती है।
  • स्काउट/गाइड अनुशासनशील होता/होती है ओर सार्वजनिक सम्पत्ति की रक्षा करने में सहायता करता / करती है ।
  • स्काउट/ गाइड साहसी होता/होती है ।
  • स्काउट/गाइड मितव्ययी होता/होती है।
  • स्काउट/गाइड मन,वचन,और कर्म से शुद्ध होता/होती है ।

भारत स्काउट एवं गाइड मोटो(सिद्धांत): “बी प्रिपेयर्ड (तैयार रहो)”

भारत स्काउट एवं गाइड के वचन

“अपने सम्मान को साक्षी बनाकर, मैं यह वचन देता हूँ कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करूंगा,
अपने ईश्वर तथा राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने में,
अन्य व्यक्तियों की सहायता करने में तथा,
स्काउट नियमों का पालन करने में।”

भारत स्काउट एवं गाइड का ध्वज Flag of Scout and Guide

स्काउट के ध्वज में प्रतीक के रूप में चक्र है जिसमे 24 तीलियाँ है। इसे अशोक चक्र कहा जाता है, क्योंकि यह चक्र सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ से लिया गया है। ध्वज के पार्श्व पर भगवा तथा हरा रंग होता है।

आमतौर पर “स्काउट्स एंड गाइड्स” शब्द में बालक तथा बालिकाओं दोनों को ही सम्मिलित किया जाता है। इसके अलावा इन्हें ” कब्स एंड बुलबुल” तथा ” रोवर्स एंड रेंजर्स” भी कहा जाता है। 

स्काउट एवं गाइड से कैसे जुड़ें? How Join Scouts and Guides?

स्काउट एवं गाइड ज्वाइन करने के लिए निम्न दो तरीके हैं-

  • अगर आप किसी विद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, तो आपको अपने विद्यालय के ऑफिस में सीधे जाकर उनसे कहना होगा कि आप भारत स्काउट एवं गाइड ज्वाइन करने के इच्छुक हैं तथा इसमें आपको शामिल किया जाये।
  • और अगर आप किसी विद्यालय में नही हैं, तो इसे ज्वाइन करने के लिए स्काउट्स के रेलवे डिवीज़न में जाकर उन्हें इस बारे में सूचित करना होगा। जिसके बाद वो आपको इसमें शामिल करने पर विचार- विमर्श तथा वार्ता करेंगे।
  • इसके अलावा एक सबसे अहम बात जो आपको पता होनी चाहिए कि आप भारत स्काउट एवं गाइड क्यों ज्वाइन करने के इच्छुक हैं? तथा हर वर्ष के अंत तक वे ऐसे कौन- कौन से लक्ष्य होंगे, जिन्हें आप हर हाल में पूरा करना चाहते हैं, एकल रूप से, तथा एक समूह के तौर पर??

भारत स्काउट एवं गाइड सर्टिफिकेट आपके करियर में क्या भूमिका निभा सकते हैं? How can scout and guide certificate help you with your career?

भारत स्काउट एवं गाइड में राष्ट्रपति तथा राज्य पुरस्कार सर्टिफिकेट से सीधे तौर पर जॉब की प्राप्ति नही हो सकती। परंतु ये सर्टिफिकेट आपके बायोडाटा के साथ संलग्न होने पर आपके जॉब पाने की सम्भावना को, बिना सर्टिफिकेट वाले लोगों से, कहीं अधिक बढ़ा देते हैं।

इंटरव्यू के वक़्त स्काउट गाइड प्रशिक्षण में मिले अनुभव आपको अपने प्रतिद्वंदियों से हमेशा दो कदम आगे रखते हैं। इसके अलावा भारतीय रेलवे में जॉब के लिए स्काउट्स/गाइड्स आरक्षण का भी प्रावधान है।

कुल मिलाकर आपको अपनी स्काउट/गाइड में मिले उपलब्धियों पर गर्व होना चाहिए। ये अनुभव प्रत्यक्ष रूप में तो न सही, परंतु अप्रत्यक्ष रूप में आपके आगामी जीवन में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रपति तथा राज्यपाल द्वारा हस्ताक्षरित तथा स्टाम्पड सर्टिफिकेट बहुत अधिक महत्ता रखते हैं।

आशा करते हैं आपको भारत स्काउट एवं गाइड की पूरी जानकारी Scout and Guide full detail in Hindi आपको पसंद आई होगी।

24 thoughts on “भारत स्काउट एवं गाइड की पूरी जानकारी Scout and Guide full detail in Hindi”

  1. Dear sir/madam i am a rastrapati scout and completed my PG Degree. is any option for any job in Scout and Guide?
    Please guide me.

    Reply

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