शुक्रवार, 24 मार्च 2023

बेगम हजरत महल

 बेगम हजरत महल  की शख्सियत मामूली पसमंजर वाली ऐसी हिन्दुस्तानी औरत की दास्ताँ है जिसने शोहरत हासिल करने में आसमान की उंचाइयो को छू लिया और जिसने यह साबित कर दिया कि औरत की शख्सियत अपने शौहर से अलग भी और ज्यादा भी हो सकती है | रसल ने उनकी तारीफ़ में कहा , '' यकीनन बेगम हजरत महल का वजूद उनके शौहर से कही बेहतर था '' हजरत शायरा भी थी उन्ही की कलम से ---


हुकूमत जो अपनी थी , अब है पराई |

अजल की तलब थी , अजल भी न आई 

न तख्त और तख्ता असीरी न शाही , 

मुकद्दर हुई है जहा की गदाई ||

अदू बन के आये थे जो दोस्त अपने , 

न थी जिनकी उम्मीद की वह बुराई |

जमाना रखेगा पर अपनी नजर में , 

मेरी सरफरोशी मेरी परसाई ||

लिखा होगा हजरत महल की लहद पर , 

नसीबो जली थी फलक की सतायी |


उन्होंने कहा 

जिन्दगी का फरेब खाना मत , 

सर कता देना मगर झुकाना मत |


सवाल है कि देश के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में जो सबक हमे उन शहीदों और क्रान्तिकारियो ने दिया था हमने उससे कुछ सीखा  ? यदि नही तो अब कब ? जब साम्राज्यवाद हजारो फन फैलाए हमे निगल रहा है और हमारे रहनुमा उन्ही के पाले में खड़े दिखाई दे रहे है |

बुधवार, 22 मार्च 2023

☝हिंदी सिनेमा में प्रेम और आध्यात्म / प्रस्तुति रामरूप यादव

 

           "...ये बदन, ये निगाहें मेरी अमानत है...ये गेसुओं की घनी छांव है मेरी खातिर ..

 ये होठ और ये बाहें मेरी अमानत है..."

    शायद इस उम्दा और ख्यातनाम सिने नज़्म के इन अल्फाजों में ही प्रेम में आत्महत्या अथवा हत्या जैसे कृत्यों का राज छुपा है | 

  मूलत: पुरुष और स्त्री दो भिन्न व्यक्तित्व है...पुरुष जहां स्त्री पर अधिकार चाहता है ..बांध कर रखना चाहता है ..संपति की तरह........वही स्त्री सामान्यत:  चंचला होती है ..एक जगह नही ठहरना ,उन्मुक्तता  व जहां मन हो वहां बिना शर्त समर्पण मानो उसका धर्म है..

   बस सारे फसाद की जड़ यह मूल चरित्र है| अभिनेता रणवीर कपूर ने अपने प्रेम के टूटने पर ठीक ही कहा था कि "मैं उसके फ्लर्ट करने की आदत से तंग था "...स्त्री बहना जानती  है और पुरुष रोकना चाहता है | स्त्री सदैव  प्रत्येक प्राप्त से असंतुष्ट रहती है और पुरुष उससे संतुष्टि का प्रमाण पत्र चाहता है |

       जिस प्रकार दो दिशाएं नहीं मिल सकती वैसे ही  शायद स्त्री -पुरुष चिरशत्रु से है | एक ही साथ दिखते हुए भी दो भिन्न भिन्न ध्रुवों के मालिक है ......मानो दो भिन्न ग्रहों के जीव लाखों बरस पूर्व पृथ्वी पर आए और साथ रहना 'कंडीशनिंग थिअ्री ' जैसी किसी मजबूरी का हिस्सा हो ||

     हिंदी सिनेमा में बनी अनेक फ़िल्में इसकी गवाह है । जहां प्रेम को सुविधा पर क़ुर्बान करती स्त्री नज़र आएगी या पुरुष के स्त्री पर अधिकार की लालसा दिखेगी ।

      त्रासदी यह है कि हिंदी सिनेमा में ख़ासकर निर्माता निर्देशक ज़्यादातर कम पढ़े लिखे है फिर ऊपर से सिनेमा उनके लिये व्यवसाय है प्रतिबद्धता नहीं सो वे चालू चाशनी वाली कहानियाँ परोस कर धन बटोरने में लगे रहते है । इधर देश की ७०% से अधिक अनपढ़ व अभावों से जूझती जनता के वास्तविक जीवन में इतने दुख है कि वो एक और दुख पर्दे पर झेलने को तैयार नहीं है ।सो वह आलिया अनुष्का में तीन घंटे अपनी फंतासी ढूँढता है।

      अक्षय खन्ना और बॉबी की एक फ़िल्म थी जिसमें नायिका अक्षय के साथ मिलकर अमीर बॉबी को लूटने के लिये झूठ मूठ ब्याह रचाती हैं मगर अंत में पति के पक्ष में वोट डालते हुए प्रेमी को रास्ते से हटा देती है । 

     ठीक इसके उलट रूस्तम में नायक सम्पूर्ण अधिकार अपनी स्त्री पर चाहता है सो उसके चालचलन पर शक होने पर  नायिका को मार डालता है ।

       सुंदरता की ओर आकर्षण एक सामान्य प्रकृति है मगर स्त्री सजीव है जिसकी सुंदरता की ओर  सहज आकर्षण से पूर्व  पुरुष को लगाम ज़रूरी है ।

            प्रेम कहानियाँ यदि विवाह में परिवर्तित होती है महज शरीर रह जाती है और संतानोत्पत्ति करते हुए समाप्त हो जाती है और अगर  असफल रहती है तो कविता या शायरी बन शराब में डूब जाती है ।  मगर प्रेम को दर्शन तक पहुँचाने की कला आध्यात्म है । यदि ओशो के जीवन में लक्ष्मी होती तो शायद वे सामान्य गृहस्थ होते ।

       यह हिंदी सिनेमा का दुर्भाग्य है कि वो प्रेम को आध्यात्म की ऊँचाई दे पाने में असफल रहा है । वो शरीर या कविता तक ही दाँये बांये हुआ है । हाँ ..पाकीज़ा, एक दूजे के लिये , ओक्टोबर , इजाज़त जैसी चंद फ़िल्में इस कसौटी पर खरी उतरती है । 

       काश हिंदी सिनेमा प्रेम पर सिनेमा बना पाता ।

नदिया के पार फिल्म की कुछ सुनी अनसुनी जानकारियां ?

 नदिया के पार फिल्म की कुछ सुनी अनसुनी जानकारियां ? 


प्रस्तुति - स्वामी शरण           


नदिया के पार फिल्म उत्तर भारत में बसे दो गाँवों की कहानी है और क्योंकि इस फिल्म को एकदम जीवंत भाव देने के लिए वैसे ही एक आदर्श लोकेशन मैं शूटिंग करने की आवश्यकता थी तो अब ऐसे में उत्तर प्रदेश से बढ़िया लोकेशन और क्या हो सकती थी? इसलिए फिल्म को शूट करने के लिए उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के हिस्से को चुना गया। नदिया के पार फिल्म की 90% शूटिंग जौनपुर के केराकत तहसील के विजयपुर और राजेपुर नामक गांवों में हुई। ये दोनों गांव सई नदी और गोमती नदी के किनारों पर बसे हैं। फिल्म में जिस नदी की बात की जाती है वह यही दो नदियां है। इसी स्थान पर सई नदी और गोमती नदी आपस में मिल जाती हैं।


आइये नदिया के पार फिल्म से जुड़े कुछ रोचक तथ्य जानते हैं।

1. केराकत नामक गांव यानी जहां नदिया के पार फिल्म की शूटिंग हुई थी वहां के स्थानीय निवासी बताते हैं कि फिल्म की शूटिंग लगभग डेढ़ दो महीने तक चली। फिल्म की पूरी टीम उस गांव में ही लगभग डेढ़ दो महीने तक रहे।


2. फिल्म की पूरी टीम का गांव के लोगो के साथ बहुत ही गहरा रिश्ता बन गया था। 


3. गांव के स्थानीय निवासी बताते हैं की राजश्री प्रोडक्शंस के मालिक ताराचंद बड़जात्या ने गाँव के लोगो को उस दौर में फिल्म की शूटिंग करने के लिए ८ लाख रुपये भी देने की पेशकश की थी मगर क्योंकि फिल्म के यूनिट मैनेजर रामजनक सिंह उसी गाँव के निवासी थे और उन्हें अपनी ही फिल्म कंपनी के मालिक से अपने ही गाँव में शूटिंग करने के लिये पैसे लेने का दिल नहीं था इसीलिए उन्होंने फिल्म बनाने के लिए उनके गाँव की लोकेशन का इस्तेमाल करने के लिए एक भी रूपया नहीं लिया था।


4. गाँव वाले कहते हैं की फिल्म की पूरी शूटिंग के दौरान वहाँ पर हमेशा पुलिस तैनात रहती थी क्योंकि कभी कभी शूटिंग देखने आयी भीड़ बेकाबू हो जाती थी और उन्हें कण्ट्रोल करने का काम केवल पुलिस ही कर सकती थी।


5. फिल्म के होली वाले गीत जोगी जी धीरे धीरे के लिए कई बोरियां भर भर के रंग और गुलाल मंगाए गए थे और गाने में दिख रहे ज़्यादातर लोग वही के ग्रामीण ही थे। 


6. नदिया के पार फिल्म में भाषा अवधी और भोजपुरी है, नायक सचिन मराठी हैं और गायक जसपाल सिंह जी पंजाबी हैं। सचमुच ये हैं अनेकता में एकता का जीवंत उदाहरण। 


7. जसपाल जी के पंजाबी होने के बाद भी उनकी की आवाज़ में साँची कहें तोरे आवन से हमरे और कौन दिसा में लेके चला रे बटोहिया जैसे देहाती गाने सुनने पर ऐसा लगता है जैसे कोई अवधी या भोजपुरी गवैय्या ही गा रहा हो।


8. ऐसा कहा जाता है की जब फिल्म की शूटिंग ख़तम हो गयी थी और फिल्म की टीम गाँव छोड़ कर जा रही थी तो जाते हुए पुरे गाँव के लोग ही नहीं बल्कि फिल्म का पूरा स्टाफ - पूरी की पूरी फिल्म की टीम के लोग - गाँव के लोगो से बिछड़ने के दुःख में फूट फूट के रोये।  


महान संगीतकार रविंद्र जैन जी के संगीत से सजे नदिया के पार फिल्म के मिट्टी की खुशबू से ओतप्रोत दिल को छू लेने वाले कालजई गाने...


(1) जब तक पूरे न हों फेरे सात - हेमलता

(2) बबुआ ओ बबुआ - हेमलता

(3) जोगी जी धीरे धीरे - जसपाल सिंह

(4) साँची कहें तोरे आवन से हमरे - जसपाल सिंह

(5) गुंजा रे चन्दन -  सुरेश वाडकर

(6) कौन दिसा में लेके चला रे बटोहिया - हेमलता और जसपाल सिंह


मुझे यकीन है इन कालजई गानो के हर गीत के साथ हमारी यादों का कोई ना कोई खुबसूरत किस्सा जरूर जुड़ा होगा और आप सभी इन गानों को इस समय गुनगुनाते हुए उन यादों को याद करते हुए मुस्कुरा रहे होंगे..

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उम्मीद हैं आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। अंत में बस इतना ही कहना चाहू की नदिया के पार फिल्म को बने आज लगभग ४० साल होने को हैं मगर यह फिल्म आज भी चाहे जितनी बार भी देखि जाए दिल नहीं भरता।


दरसल फिल्म देखने पर ऐसा लगता ही नहीं की कोई शूटिंग हो रही हैं और कोई एक्टिंग कर रहा है। ऐसा लगता हैं मानो गाँव के लोग अपनी ज़िन्दगी जी रहे हैं और बस किसी ने बिना बताये उनकी ज़िन्दगी को कैमेरा में रिकॉर्ड कर लिया है।

शनिवार, 11 मार्च 2023

औरंगाबाद की ख़बरें /


कुमार सूरज 


मांगों को लेकर 11 मार्च को होगा जिला मुख्यालय में धरना प्रदर्शन


 बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार पप्पू के आह्वान पर विभिन्न मांगों को लेकर जिले के शिक्षक 11 मार्च को जिले में धरना प्रदर्शन करेंगे। संघ के जिला अध्यक्ष रमेश कुमार सिंह ,प्रधान सचिव विनय यादव और जिला मीडिया प्रभारी अशोक पाण्डेय ने बताया कि पुरानी पेंशन, राज्य कर्मी का दर्जा,अप्रशिक्षित शिक्षकों को बर्खास्तगी पर रोक, एनआईओएस से प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों की वेतन कटौती पर रोक, वेतन विसंगति समेत वेतन उनन्नय, एक्छिक स्थानांतरण करने को लेकर समाहरणालय के सामने शिक्षक शिक्षिकाएं एकता का प्रदर्शन करते हुए धरना प्रदर्शन में भाग लेंगे। प्रदर्शन जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से दोपहर 1:00 बजे निकल कर मुख्य मार्ग होते हुए समाहरणालय के समक्ष धरना में तब्दील हो जाएगी। उसके उपरांत संघ के नेताओं द्वारा विभिन्न मांगों को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा जाएगा।  उन्होंने बताया कि इसके लिए संघ के नेताओं द्वारा शिक्षक शिक्षिकाओं से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में भाग लेकर सफल बनाने का आह्वान किया है। कार्यक्रम की लिखित सूचना अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी को लिखित रूप से दी गई है।

[3/10, 15:32] Ks कुमार Suraj: प्रेस विज्ञप्ति

पृथ्वीराज चौहान जी की पुण्यतिथि आज,सारी तैयारी पूरी

औरंगाबाद 10/3/23जिला मुख्यालय औरंगाबाद के महत्वपूर्ण सामाजिक संस्था पृथ्वीराज चौहान चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वाधान में 11 मार्च को पृथ्वीराज चौहान की पुण्यतिथि मनाई जाएगी। इस आशय की जानकारी देते हुए ट्रस्ट के सचिव स्वर्णजीत कुमार सिंह एवं मीडिया प्रभारी सुरेश विद्यार्थी ने बताया  कि भरथौली रोड के समीप हवेली रिसॉर्ट के प्रांगण में पृथ्वीराज चौहान जी की पुण्यतिथि मनाई जाएगी। पिछले फरवरी माह की 28 तारीख को संपन्न बैठक में लिए गए निर्णय के आलोक में पुण्यतिथि समारोह के निमित्त गठित समिति के संयोजक जयंत प्रकाश एवं कोषाध्यक्ष विकास कुमार सिंह ने तैयारी के संदर्भ में बताया कि सारी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। पुण्यतिथि के मौके पर पृथ्वीराज के तैल पर पुष्पांजलि, पृथ्वीराज चौहान का व्यक्तित्व एवं कृतित्व साहित्यिक एवं ऐतिहासिक उपादानों से विभूषित विषयक विचार संगोष्ठी उनके जीवन पर विशेष काव्य पाठ सहित अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। पुण्यतिथि समारोह के मौके पर औरंगाबाद ज़िले के प्रबुद्ध  राजनैतिकसेवी, समाजसेवी बुद्धिजीवी, साहित्यसेवी की सहभागिता होगी। विदित हो कि पृथ्वीराज चौहान ने भारत माता के अस्मिता की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। पृथ्वीराज चौहान चैरिटेबल ट्रस्ट औरंगाबाद द्वारा उनकी जयंती एवं परिनिर्वाण दिवस प्रत्येक वर्ष मनाई जाती रही है। उनके कृतियों को आमजन से दृष्टिगत कराने वास्ते औरंगाबाद शहर में उनकी आदमकद प्रतिमा 2023 में लगाए जाने की योजना है। उनके साथ में चंदबरदाई की भी प्रतिमा लगाई जाएगी।

[3/11, 11:46] Ks कुमार Suraj: आज भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता, माननीय विधान पार्षद, पूर्व केंद्रीय मंत्री भारत सरकार एवं बिहार सरकार के पूर्व मंत्री  सैयद शाहनवाज हुसैन का आगमन देव प्रखंड के सिमरी गांव में हुआ । सिमरी गांव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भागलपुर विभाग के विभाग प्रचारक विजेंद्र जी के पिता के निधन की सूचना पाकर पीड़ित परिवार से मिलें और इस दुख की घड़ी में परिजनों को ढाढस बंधाया और कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरा भाजपा परिवार उनके परिवार के साथ है ।

वहीं सिमरी गांव से लौटने के दौरान देव के दतू बिगहा गांव निवासी समाजसेवी सह भाजपा जिला मंत्री आलोक सिंह के आवास पर पहुंचे  ।आलोक सिंह के आवास पर जिला मंत्री आलोक सिंह और उनकी धर्म पत्नी रिंकू सिंह ने फूलमाला से भव्य स्वागत किया । इस दौरान बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगो ने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी  के सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास और सबका प्रयास नीतियों से प्रभावित हो कर भाजपा में शामिल हुये .इस दौरान शाहनवाज हुसैन ने कहा कि भाजपा ही एक मात्र राष्ट्रीय पार्टी है जो सब का विकास और सब का साथ लेकर चलती है ।कांग्रेस की दुर्दशा के लिए खुद कांग्रेस पार्टी जिम्मेदार है और आज इसकी दशा डूबते हुए उस जहाज की तरह हो गई है जिस पर सवार लोग अपनी जान बचाने के लिए उससे कूद कर भाग रहे हैं।वर्तमान में विशेषकर कांग्रेस के युवाओं को यह समझ में आ गया है कि पार्टी नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में न तो उनका भला होने वाला है और न ही देश का भला होने वाला है।

राजद पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की तरह राजद का भविष्य भी अंधकारमय है ।क्योंकि राजद को भी देश और राज्य की नही बल्कि अपने परिवार की चिंता है ।बिहार में पुनः जंगलराज दिखाई दे रहा है ,यही कारण है कि हर जगह ,हत्या,लूट जैसी घटनाएं आम हो गई है ।

आज भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सह विधान पार्षद शाहनवाज हुसैन जी ने मो. अहमद रजा, मो. आबिद, मो. इस्लाम, मो. अखलाख अहमद, मो. मोइनुद्दीन, मो. हसनैन रजा, मो. नवाब खान, सिवा प्रवीण, मो. कैफ, मो. ताबिश, मो. गयासुद्दीन, मो. मोजाहिद, तस्लीम नाज, सबीना प्रवीण, आयशा प्रवीण, यास्मीन प्रवीण सहित कई लोगो को भाजपा में स्वागत करते हुये भाजपा में शामिल कराया। इस दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बड़े भाई गोपाल शरण सिंह, निवर्तमान जिलाप्रवक्ता उज्ज्वल कुमार सिंह, बड़े भाई दीपक कुमार सिंह, कृष्ण कुमार सिंह उर्फ लालमणि सिंह, राजू कुमार, कुमार विशाल, सचिन कुमार सिंह, दिलीप कुमार गुप्ता, कुमार सरोज सिंह, सुजीत कुमार सिंह, संतोष कुमार यादव, बिपिन कुमार सिंह, प्रमोद कुमार सिंह, भानु प्रताप सिंह, गोपाल सिंह, सत्येंद्र सिंह, बिहार के उदीयमान क्रिकेट खिलाड़ी हर्ष राज पुरु, नंदलाल मेहता, सहित सैकड़ों की संख्या में लोगो ने अपने नेता शाहनवाज हुसैन जी का स्वागत किया ।

[3/11, 19:03] Ks कुमार Suraj: समाहरणालय, औरंगाबाद

(जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय)

दिनांक- 11 मार्च 2023


आज दिनांक 11 मार्च 2023 को जिला पदाधिकारी, श्री सौरभ जोरवाल ने भवन निर्माण के अभियंता, कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद औरंगाबाद एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी के साथ गेट स्कूल के कैंपस में परित्यक्त भवनों का निरीक्षण किया गया।


विद्यालय के कैंपस में कुछ भवन ऐसे थे जिन्हें मरम्मती कराया जाना संभव था। ऐसे ही एक भवन के लिए मरम्मती का आदेश भवन निर्माण विभाग को दिया गया। उक्त भवन की मरम्मती के लिए लगभग 5 लाख की राशि की आवश्यकता थी तथा वर्षों से इस भवन का प्रयोग नहीं हो रहा था। उक्त भवन तक जाने के मार्ग में झाड़ियां थी जिसे साफ कराने का निर्देश कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद औरंगाबाद को दिया गया।


इसके अतिरिक्त गेट स्कूल की भूमि में से ही इंडोर स्टेडियम के सामने एक स्थल था जिसे विकसित किया जाना संभव था। कार्यपालक पदाधिकारी को इंडोर स्टेडियम के दूसरी ओर अवस्थित इस प्लॉट में साफ सफाई कर, बेंच एवं लाइट लगाकर पार्क के रूप के विकसित करने का निर्देश दिया गया ताकी विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों के द्वारा इसका उपयोग किया जा सके।

[3/11, 19:13] Ks कुमार Suraj: समाहरणालय, औरंगाबाद

(जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय)

दिनांक- 11 मार्च 2023


आज दिनांक 11 मार्च 2023 को अनुग्रह मध्य विद्यालय, औरंगाबाद के प्रांगण में जिला स्तरीय निपुण टी एल एम मेला 2023 का आयोजन किया गया जिसमें सभी प्रखंडों से चयनित 10 सर्वश्रेष्ठ शिक्षक स्वनिर्मित टी एल एम के साथ उपस्थित हुए। कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी, श्री सौरभ जोरवाल ने सभी चयनित शिक्षकों के द्वारा प्रदर्शित टी एल एम का अवलोकन किया एवं उनका उत्साह वर्धन भी किया। 


जिला स्तर पर जिला स्तरीय आकलन प्रकोष्ठ के सदस्य डायट तरार के प्राचार्य संतोष कुमार, डायट तरार के व्याख्याता ऊधम सिंह एवं अमरेंद्र कुमार सिन्हा, प्राचार्य गोपाल प्रसाद गुप्ता, शिक्षक सुनील कुमार एवं पीरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि सुजीत कुमार सुमन ने सभी प्रतिभागी शिक्षकों के टी एल एम का आकलन किया। 


जिला शिक्षा पदाधिकारी, औरंगाबाद द्वारा यह बताया गया कि जिला स्तर पर  चयनित 10 सर्वश्रेष्ठ टी एल एम का प्रदर्शन राज्य स्तर पर दिनांक 16 मार्च 2023 को आयोजित राज्य स्तरीय टी एल एम मेला में किया जाएगा। इस अवसर पर दया शंकर सिंह, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, स्थापना एवं गार्गी कुमारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, प्रा० शि० एवं समग्र शिक्षा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संभाग प्रभारी नीतीश कुमार, शिक्षक विनय कुमार गुप्ता, संजीव कुमार सिंह एवं सुमंत कुमार, साथ ही पीरामल फाउंडेशन की टीम का आवश्यक सहयोग रहा।

[3/11, 19:31] Ks कुमार Suraj: प्रेस विज्ञप्ति

पृथ्वीराज के पुण्यतिथि पर संगोष्ठी का आयोजन

इतिहास के साथ साथ साहित्यिक उपादानों से विभूषित

औरंगाबाद 11/3/23 जिला मुख्यालय औरंगाबाद के महत्वपूर्ण सामाजिक संस्था पृथ्वीराज चौहान चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में भरथौली रोड के समीप हवेली रिसॉर्ट के सभागार में भारत माता के अमर सपूत वीर शिरोमणि पृथ्वीराज चौहान जी की 831 वी पुण्यतिथि समारोह मनाई गईं। पुण्यतिथि समारोह के अवसर पर आयोजित  विविध कार्यक्रमों की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह ने की जबकि संचालन मीडिया प्रभारी सुरेश विद्यार्थी ने किया। दीप प्रज्वलन के साथ उद्घाटन के पश्चात सर्वप्रथम पृथ्वीराज चौहान के तैल चित्र पर उपस्थित जनसमूह ने पुष्पांजलि अर्पित किया। तत्पश्चात्, वीर रस गत्यात्मक विचार गोष्ठी में पृथ्वीराज चौहान का व्यक्तित्व कृतित्व साहित्यिक एवं ऐतिहासिक उपाधियों से विभूषित विषय पर वक्ताओं ने कहा कि पृथ्वीराज चौहान इतिहास के साथ-साथ साहित्य के भी नायकत्व प्राप्त करने वाले महापुरुष थे।चंदबरदाई रचित पृथ्वीराज रासो महाकाव्य के नायक के रूप में चर्चित रहे। उपाध्यक्ष डॉ ज्ञानेश्वर प्रसाद सिंह प्रतिमा निर्माण संयोजक जगदीश सिंह प्रोफेसर विजय कुमार सिंह सचिव स्वर्णजीत कुमार सिंह, चंद्रप्रकाश विकास, शिक्षक नेता राम भजन सिंह, कोषाध्यक्ष विकास कुमार सिंह संयोजक जयंत प्रकाश एवं भीम सिंह ने कहा कि पृथ्वीराज चौहान ने संपूर्ण जीवन संघर्ष में व्यतीत करते हुए भी भारत माता की अस्मिता की रक्षा करने वास्ते अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। इतिहास के साथ-साथ उनका साहित्य में भी अप्रतिम स्थान रहा है। उनके राष्ट्रीय स्तर पर स्मारकों को संरक्षण वास्ते ट्रस्ट को आगे आना चाहिए। आज के पुण्यतिथि समारोह में शैलेंद्र सिंह, राकेश कुमार सिंह उर्फ पप्पू बाबू , गोकुल सेना के संजीव कुमार सिंह,रामप्रवेश सिंह, गोरख सिंह सहित अन्य उपस्थित थे।

गुरुवार, 9 मार्च 2023

झारखंड के पर्यटन स्थल

 

झारखंड के पर्यटन स्थल

झारखंड की प्राकृतिक और धार्मिक स्थल

झारखंड को प्रकृति ने अप्रतिम सौंदर्य और असीमित पर्यटन स्थलों से नवाजा है। एक ओर सदियों के प्राकृतिक परिवर्तनों ने इन नयनाभिराम दृश्यों और स्थलों की रचना की है, जिनमें ख़ूबसूरत झरने, नदी, पहाड़, पठार और वन्य प्रदेश शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर कई मानवनिर्मित पर्यटन भी हैं जैसे उद्यान, मंदिर और प्राचीन कला स्थल। झारखंड क्षेत्र विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों एवं धर्मों का संगम क्षेत्र है। यहां आदिवासियों का अनूठा जीवन और उनके विविधतापूर्ण रीति-रिवाज भी पर्यटकों का बरबस मन मोह लेते हैं।

झारखंड की प्राकृतिक और धार्मिक स्थल

झारखंड को प्रकृति ने अप्रतिम सौंदर्य और असीमित पर्यटन स्थलों से नवाजा है। एक ओर सदियों के प्राकृतिक परिवर्तनों ने इन नयनाभिराम दृश्यों और स्थलों की रचना की है, जिनमें ख़ूबसूरत झरने, नदी, पहाड़, पठार और वन्य प्रदेश शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर कई मानवनिर्मित पर्यटन भी हैं जैसे उद्यान, मंदिर और प्राचीन कला स्थल। झारखंड क्षेत्र विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों एवं धर्मों का संगम क्षेत्र है। यहां आदिवासियों का अनूठा जीवन और उनके विविधतापूर्ण रीति-रिवाज भी पर्यटकों का बरबस मन मोह लेते हैं।