बुधवार, 31 अगस्त 2016

जीबी रोड का डॉन / आफताब- सायरा जेल में



 

GB रोड से रोजाना 10 लाख की कमाई

 IndiaVoice 2016-08-30 14:58:57





 

नई दिल्ली:  दिल्ली पुलिस की एक टीम को बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। दिल्ली पुलिस ने मानव तस्करी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। ये गिरोह लड़कियों को जबरन दिल्ली के रेड लाइट एरिया जीबी रोड़ पर वेश्यावृति के धंधे में धकेलता था।



पुलिस ने इस गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं ऐसा पहली बार हुआ है कि जब मानव तस्करी को लेकर महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) के तहत दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया है। ज्वाइंट सीपी रविंद्र यादव ने पत्रकार वार्ता में कहा कि ये रैकेट लड़कियों को अगवाकर उन्हें वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेल देता थे।


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इस गिरोह का मुखिया है आफाक हुसैन और उसकी पत्नी सायरा जो कि जीबी रोड पर 6 कोठे चलाते थे। उनके कोठों में 40 कमरे हैं, जिनमें करीब 250 लड़किया थीं। क्राइम ब्रांच ने आफाक और उसकी पत्नी को एक हफ्ते पहले गिरफ्तार किया था। दोनों आरोपी अभी रिमांड पर हैं। पुलिस टीम ने इनके साथ छह और लोगों को गिरफ्तार किया है।




इस गिरफ्तारी में जो चौंकाने वाली बात सामने आई है वो है इन पति-पत्नी की आमदनी, जी हां ये पति-पत्नी उन 6 कोठों के जरिए एक दिन में 10 लाख रुपए की कमाई करते थे। वहीं गिरफ्तारी के बाद आफाक हुसैन और सायरा ने इस बात का भी खुलासा किया कि इस धंधे की शुरुआत उन्होंने कैसे की। आफाक हुसैन और सायरा बानो से इसकी मुलाकात कोठे पर ही हुई थी। इसके बाद दोनो ने शादी कर ली। फिर दोनों इसी धंधे में लग गए।

 

क्राइम ब्रांच के मुताबिक, आफाक की रोज की कमाई 10 लाख से ऊपर थी। इसका पूरा गिरोह है, जिसमें अधिकतर लड़कियां पश्चिम बंगाल, झारखंड, नेपाल, बिहार से लाई जा रही थीं। कोठों में लड़कियों को कंट्रोल करने के लिए महिलाएं तैनात थीं, जिन्हें नायिकाएं कहा जाता है।
आफाक के इस कमाई का हिसाब ड्राइवर रमेश पंडित रखता था।
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सोमवार, 29 अगस्त 2016

दूसरों को भी जीने दो जियो रिलांयस



  रिलायंस जीओ से मोबाइल कंपनियों का जीना हुआ हराम

gioi
रिलायंस के 4जी डेटा नेटवर्क जियो के व्यवसायिक लांच से पहले ही मोबाइल डाटा के बाज़ार में खलबली मच गई है. अब तक खुले हाथ से पैसे बना रही मोबाइल कंपनियां डर के उन्हीं दोनों हाथों से डाटा लुटा रही हैं
समाचार एजेंसी पीटीआई ने खबर दी है कि मुताबिक़ एयरटेल ने अपने 4G और 3G डेटा की दरों में 80 फ़ीसदी तक की कटौती कर दी है.
इस नए ऑफ़र को हासिल करने के लिए एटरटेल के ग्राहकों को पहले 1498 रुपए का रिचार्ज कराना होगा.
जिसके बदले में वो एक महीने की वैधता के साथ 1 GB डाटा हासिल कर सकेंगे.
इसके बाद 51 रुपए के प्रत्येक रिचार्ज पर अगले 12 महीने तक एक GB डाटा ग्राहक को मिलता रहेगा.
एयरटेल इस समय 259 रुपए में 28 दिनों की वैधता के साथ एक GB डाटा देता है.
रिलायंस जियो इस समय अपने टेस्ट ग्राहकों को तीन महीने के लिए फ्री डेटा और कॉल की सेवाएं दे रहा है.
रिलायस जियो का सिम कार्ड सिर्फ़ दस्तावेज़ जमा करके हासिल किया जा सकता है.
जुलाई में एयरटेल ने अपने मौजूदा 3जी और 4जी पैक की दरों में 67 फ़ीसदी तक की कटौती कर दी थी.
मोबाइल सेवाएं देने वाली अन्य कंपनियों आइडिया और वोडाफ़ोन ने भी अपनी दरों में कटौती की थी.

gst को लेकरसंभावनाएं और आशंकाएं





जीएसटी के बाद क्या सस्ता और क्या महंगा

  • 19 जुलाई 2016
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देश में गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी जीएसटी का लागू होना टैक्स सुधार की दिशा में आज़ादी के बाद सबसे बड़ा कदम होगा.
पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस और भाजपा कम से कम इस मुद्दे पर बात कर रही हैं जिससे उम्मीद की जा रही है कि संसद के इस सत्र में ये बिल राज्य सभा से भी पास हो जाएगा.
सरकार नागरिकों से दो तरह के कर लेती है. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष. इनकम टैक्स यानी आयकर प्रत्यक्ष कर है और किसी सामान पर लगा हुआ कर या टैक्स अप्रत्यक्ष कर माना जाता है.
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अप्रत्यक्ष कर से सरकार की कमाई प्रत्यक्ष कर के मुकाबले कहीं ज़्यादा है और इसका एक हिस्सा राज्यों को भी मिलता है. लेकन इस कर प्रणाली में एक दिक्कत है. कई सामानों पर अप्रत्यक्ष टैक्स की दरों में एक राज्य से दूसरे राज्य में ही फर्क है. एक चीज़ के अलग अलग प्रोडक्ट पर कर की दर भी अलग अलग है. अब राज्यों के बीच इस टैक्स की दरों में फर्क ख़त्म होने से कुछ सामानों की कीमतों में थोड़ा फेरबदल हो सकता है.खाने के कई सामान पर टैक्स नहीं लगाया जाता है और जीएसटी लागू होने के बाद कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है. इसलिए अनाज की कीमतों में कोई बदलाव नहीं आएगा.
लेकिन जब भी किसी खाने की वस्तु को ब्रांड के रूप में बनाया जाएगा तो उस पर टैक्स ज़रूर लगेगा. तो गेहूं पर टैक्स नहीं लगेगा लेकिन अगर आटे का इस्तेमाल बिस्कुट के लिए किया जाएगा तो उस पर पहले की तरह ही जीएसटी लगेगा.
छोटी गाड़ियों पर फिलहाल एक्साइज ड्यूटी 8 फीसदी लगती है जबकि एसयूवी जैसी बड़ी गाड़ियों पर ये दर 30 फीसदी है. साफ़ है अगर सभी राज्यों ने मिलकर जीएसटी की दर को 18 फीसदी तय किया तो छोटी गाड़ियां महंगी हो जाएंगी और बड़ी गाड़ियां सस्ती. राज्यों के बीच टैक्स दरों में फर्क ख़त्म होने के कारण अलग राज्य में गाडी रजिस्टर करके कम टैक्स देने की प्रथा भी अब ख़त्म हो जायेगी.
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सभी सर्विसेज यानी सेवाएं अब महंगी हो जाएंगी. टेलीकॉम, रेस्टोरेंट में खाना, हवाई टिकट, अस्पताल, स्टॉक ब्रोकर, ब्यूटी पार्लर, बीमा, ड्राई क्लीनिंग जैसी सेवाओं पर केंद्र सरकार सर्विस टैक्स लगाती है. स्वच्छ भारत टैक्स और किसान कल्याण सेस (उपकर) मिलाकर ऐसी 100 से भी ज़्यादा सेवाएं हैं जिन पर टैक्स देना पड़ता है. अगर सभी राज्य मिल कर 18 फीसदी की जीएसटी रेट तय करते हैं तो चपत सभी की जेब पर लगेगी.हालांकि शराब, क्रूड ऑयल, हाई स्पीड डीज़ल, पेट्रोल, प्राकृतिक गैस और विमान ईंधन को जीएसटी से बाहर रखा गया है. इस पर फ़ैसला जीएसटी काउंसिल को करना है.
तंबाकू को जीएसटी के दायरे में लाया गया है, केंद्र सरकार इस पर उत्पाद शुल्क लगा सकती है.
इसके अलावा राज्यों को ये छूट दी गयी है कि वो ज़्यादा से ज़्यादा दो साल तक अपनी तरफ से ऐसे सामान पर ज़्यादा से ज़्यादा एक फीसदी टैक्स लगा सकते हैं जो उनके राज्य की अधिकार क्षेत्र में आ रहा है लेकिन बन रहा है किसी और राज्य में. इन कुछ राज्यों में सामान की खरीदारी पर सीमित समय के लिए आपको टैक्स भरना पड़ सकता है.
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कई रिपोर्ट के अनुसार डर है कि तामिलनाडु जैसे राज्य को करीब 3500 करोड़ रुपये का सालाना नुकसान हो सकता है क्योंकि जीएसटी आने के बाद 1 फीसदी सेंट्रल सेल्स टैक्स को बंद करना पड़ेगा.महाराष्ट्र को सालाना 14000 करोड़ की कमाई आक्ट्राई यानी चुंगी (शहर में बाहर से आने वाले माल पर लगने वाला कर) से होती है. चुंगी यदि हट जाती है तो छोटे बिज़नेस के लिए काम करना ज़रूर थोड़ा सस्ता हो जाएगा. जब किसी छोटे बिज़नेस का सामान एक छोटे ट्रक में महाराष्ट्र जाएगा तो उसे राज्य की सीमा पर कर देने के लिए इतंजार नहीं करना पड़ेगा. और इससे ऐसे बिज़नेस के लिए परेशानी भी जरूर कम होगी.
लेकिन इन सब के जाने से राज्यों को एक नया हथियार मिलेगा. मौजूदा क़ानून के अनुसार सर्विस पर टैक्स लगाने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है. जीएसटी आने के बाद ये अधिकार राज्यों को भी मिल जाएगा.
तो अब कुछ वैसे नए सर्विस पर टैक्स देने के लिए तैयार हो जाइये जिसके पैसे सिर्फ राज्य सरकारों को जाएंगे. यह अधिकार राज्यों को मिल रहा है. इसलिए वो सेंट्रल सेल्स टैक्स और ऑक्ट्राई से होने वाली मोटी कमाई की अनदेखी करने को तैयार हैं.
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फिलहाल तम्बाकू और पेट्रोल-डीजल को लें तो इस बात पर आम सहमति नहीं बनी है कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच इन उत्पादों पर टैक्स कैसे लगाया जाना चाहिए. देश भर में जीएसटी लागू करने की प्रक्रिया दस साल पहले शुरू की गई थी. पिछले महीने पूर्व राज्य वित्त मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा था कि मानसून सत्र में बिल पास हो जाने से अप्रैल 2017 से जीएसटी लागू हो सकता है.हिंदी भाषी इलाके में कई जगह लोग खिचड़ी बड़े चाव से खाते हैं. वहां एक कहावत है, खिचड़ी के चार यार- घी, पापड़, दही, अचार. जीएसटी की कहानी कुछ ऐसी ही हो गयी है.
अब अलग अलग राज्यों की मांग अलग है. गुजरात में पापड़ पसंद किया जाता है तो हरियाणा में दही और पंजाब में घी. लेकिन ये सभी को नहीं चाहिए. हां, जिन्हें वो मिल गया है उनके लिए अचार के बिना काम भी नहीं चलेगा. उससे अगर और कुछ ज़्यादा मिल सकता है तो और बढ़िया!
जीएसटी के असर को लेकर संशय के कई कारण भी हैं.
  • जीएसटी का सबसे बड़ा फायदा जो दिख रहा है वो है कई करों के बजाय एक कर लगेगा. लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है. आर्टिकल 246 ए संसद और सभी राज्यों के विधानसभाओं को ये अधिकार देता है कि वो सामान और सेवाओं पर कर लगा सकते हैं. ऐसे में कर को लेकर एक संससदीय कानून और 28 राज्य कानून हैं जो जीएसटी वसूल करेंगे. ऐसे में सबमें तालमेल नहीं बैठा तो नतीजे बुरे हो सकते हैं.
  • नौ साल बाद भी जीएसटी को आसान करने के संविधान संशोधन का काम पूरा नहीं हुआ है. ये बस शुरुआत है. केन्द्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी और अंतरराजकीय जीएसटी का खाका या ड्राफ्ट बनाना एक बेहद जटिल काम है, जो अभी पूरा होना बाकी है. शेयरधारकों की सलाह के बिना इसका खाका तैयार करने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है.
  • जीएसटी की दर क्या होगी इसे लेकर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. राज्य सरकारें जहां इसकी दर 26 फीसदी करना चाहती हैं वहीं केन्द्र 16 से18 फीसदी दर के पक्ष में है. अगर 16 फीसदी की दर से भी कर वसूला जाता है तो ग्राहक के लिए एक भारी बोझ हो सकता है. नतीजतन फुटकर स्तर पर बड़े पैमाने पर कर चोरी हो सकती है.
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लेकिन जीएसटी को लागू करना अभी थोड़ी टेढ़ी खीर लग रही है. राज्य सभा में बिल के पास होने के बाद उसे आधे राज्यों की विधानसभा में पास कराना होगा क्योंकि जीएसटी बिल के कारण संविधान में संशोधन करना पड़ रहा है.पिछले कुछ दिनों में राज्य सरकारों के रुख को देखें तो अभी सभी राज्य इसके लिए सहमत नहीं हुए हैं. जीएसटी की खिचड़ी खाने के लिए सरकार को राज्यों के लिए थोड़ी घी शायद और मिलानी होगी.

रविवार, 28 अगस्त 2016

प‌ितृपक्ष में नहीं करे यह 7 काम



  जानिए क्यों?

These 7 things don’t do during pitru paksha (shraddh paksh) in Hindi: प‌ितृपक्ष यानी श्राद्ध का पक्ष शुरु हो चुका है। ऐसी मान्यता है क‌ि इन द‌िनों प‌‌ितर यानी पर‌िवार में ज‌िनकी मृत्यु हो चुकी है उनकी आत्मा पृथ्वी पर आती है और अपने पर‌िवार के लोगों के बीच रहती है। इसल‌िए प‌ितृपक्ष में शुभ काम करना अच्छा नहीं माना जाता है। इन द‌‌िनों कई ऐसे काम हैं ज‌िन्हें करने से लोग बचते हैं। जान‌िए यह काम कौन से और इन्हें भला क्यों नहीं करना चाह‌िए।
These 7 things don't do during pitru paksha (shraddh paksh) in Hindi
1. ऐसी मान्यता है क‌ि प‌ितृपक्ष के द‌िनों में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाह‌िए यानी स्‍त्री पुरुष संसर्ग से बचना चाह‌िए। इसके पीछे यह धारणा है क‌ि प‌ितर आपके घर में होते हैं और यह उनके प्रत‌ि श्रद्धा प्रकट करने का समय होता है इसल‌िए इन द‌िनों संयम का पालन करना चाह‌िए।
2. प‌ितृपक्ष में स्वर्ण और नए वस्‍त्रों की खरीदारी नहीं करनी चाह‌िए। ऐसा इसल‌िए माना जाता है क्योंक‌ि प‌ितृपक्ष उत्सव का नहीं बल्क‌ि एक तरह से शोक व्यक्त करने का समय होता है उनके प्रत‌ि जो अब हमारे बीच नहीं रहे।
3. इन द‌िनों दाढ़ी मूंछें भी नहीं काटे जाते हैं। इसका संबंध भी शोक व्यक्त करने से है।
4. प‌ितृपक्ष में द्वार पर आए अत‌िथ‌ि और याचक को ब‌िना भोजन पानी द‌िए जाने नहीं देना चाह‌िए। माना जाता है क‌ि प‌ितर क‌िसी भी रुप में श्राद्ध मांगने आ सकते हैं। इसल‌िए क‌िसी का अनादर नहीं करना चाह‌िए।
5. माना जाता है क‌ि प‌ितृपक्ष में नया घर नहीं लेना चाह‌िए। असल में घर लेने में कोई बुराई नहीं है असल कारण है स्‍थान पर‌िवर्तन। माना जाता है ‌क‌ि जहां प‌ितरों की मृत्यु हुई होती है वह अपने उसी स्‍थान पर लौटते हैं। अगर उनके पर‌िजन उस स्‍थान पर नहीं म‌िलते हैं तो उन्हें तकलीफ होती है। अगर आप प‌ितरों के ल‌िए श्राद्ध तर्पण कर रहे हैं तो उन्हें आपके घर खरीदने से कोई परेशानी नहीं होती है।
6. प‌ितृपक्ष को लेकर ऐसी मान्यता है क‌ि इन द‌िनों नए वाहन नहीं खरीदने चाह‌िए। असल में वाहन खरीदने में कोई बुराई नहीं है। शास्‍त्रों में इस बात की कहीं मनाही नहीं है। बात बस इतनी है क‌ि इसे भौत‌िक सुख से जोड़कर जाना जाता है। जब आप शोक में होते हैं तो या क‌िसी के प्रत‌ि दुख प्रकट करते है तो जश्न नहीं मनाते हैं। इसल‌िए धारणा है क‌ि इन द‌िनों वाहन नहीं खरीदना चाह‌िए
7. प‌ितृपक्ष में ब‌िना प‌ितरों को भोजन द‌िया स्वयं भोजन नहीं करना चाह‌िए इसका मतलब यह है क‌ि जो भी भोजन बने उसमें एक ह‌िस्सा गाय, कुत्ता, ब‌िल्ली, कौआ को ख‌िला देना चाह‌िए।
अन्य धार्मिक लेख-
    

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मैकलुस्कीगंज मिनी लंदन का



शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

भारत में बढ़ रहे हैं टीबी मरीज


टीबी को हराने की तैयारी

सौ सालों के लम्बे इंतजार के बाद आखिरकार अब लग रहा है वैज्ञानिक टीबी के लिए टीका विकसित करने के करीब पहुंच रहे हैं. फिलहाल हर साल 14 लाख लोग टीबी से मारे जाते हैं.
दुनिया भर के विशेषज्ञ मेडिकल ट्राएल के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. एमवीए85ए के नाम से जानी जाने वाली यह दवा दुनिया भर में कई और जगह भी विकसित की जा रही दवाइयों में से एक है. इन सभी रिसर्चों के पीछे मकसद एक ही है, माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्यूलॉसिस के संक्रमण को रोकना. एमवीए85ए से वैज्ञानिकों को काफी उम्मीदें हैं. अगर परीक्षण सफल नहीं भी हुआ तो भी यह वैज्ञानिकों को टीके की खोज की दिशा में आगे बढ़ने में बहुत मदद करेगा.
सिएटल में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन में काम करने वाले पेगी जॉनस्टन कहते हैं, "मुझे लगता है कि इस दवाई का ट्रायल ही अपने आप में बड़ी बात है. भले ही परिणाम वह न निकले जिसकी हम उम्मीद कर रहे हैं, मगर यह तो साफ है कि हम इस दिशा में सही बढ़ रहे हैं. अगर परिणाम सकारात्मक आता है तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी."
टीबी क्यों है खतरनाक
टीबी के खिलाफ टीका विकसित करने में कई और बड़ी कंपनियां भी लम्बे डग भर रही हैं जिनमें जॉनसन एंड जॉनसन भी शामिल है. वैज्ञानिक मानते हैं कि टीके का विकसित होना टीबी से लड़ने के सबसे बड़े हथियार का विकसित होने जैसा होगा. यह बीमारी हर साल 90 लाख लोगों को अपनी चपेट में ले लेती है.
अमेरिका के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीजेज में काम करने वाली क्रिस्टीन साइजमोर कहती हैं, "जिस हिसाब से आजकल शरीर में दवाइयों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती जा रही है उसे देखते हुए दवाओं का विकास बहुत धीमे हो रहा है. हम हमेशा इस बात के पीछे नहीं भाग सकते कि अब कौन सी दवाई का असर होना बंद हो गया है और हम उससे अधिक प्रभावशाली दवाई कैसे विकसित करें." मैरीलैंड की डॉक्टर एन गिंसबर्ग के अनुसार जब तक हमें इस बात का पता चलता है कि किसी इंसान को टीबी है तब तक वह पहले ही कम से कम 10 लोगों को संक्रमित कर चुका होता है.
नई उपलब्धि
टीबी के लिए इस टीके को ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की लैब में विकसित किया गया है. एमवीए85ए वैक्सीन के विकास की दिशा में ज्यादातर कामयाबी पिछले 10 सालों में दवाओं को भी हरा देने वाले यानि ड्रग प्रतिरोधी टीबी के पनपने के बाद हासिल की हुई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ड्रग प्रतिरोधी टीबी को अगर रोका नहीं गया तो 2015 तक 20 लाख लोग इससे जूझ रहे होंगे.
टीबी का इलाज लंबा होता है. शुरुआती 6 महीनों तक कई सारी एंटीबायोटिक दवाइयां खाने की जरूरत पड़ती है. कई बार मरीज लगातार इलाज नहीं कर पाते हैं और ऐसी स्थिति में ड्रग प्रतिरोधी टीबी को पनपने का मौका मिल जाता है. भारत में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें टीबी पूरी तरह प्रतिरोधी क्षमता हासिल कर चुका है, जिसके इलाज के लिए कोई दवाइयां मौजूद नहीं हैं. बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के जॉनस्टन के अनुसार पहले इस बीमारी को इतना नजरअंदाज किया गया कि अब इसे हराना बड़ी चुनौती बन गया है.
बेहतर टीके का विकास
फिलहाल टीबी से बचने के लिए बच्चों को बीसीजी का टीका लगाया जाता है, लेकिन इससे मिलने वाला रक्षा तंत्र कुछ सालों में अपना असर खो देता है. इसके बाद यह खांसने, छींकने से भी आप तक पहुंच सकता है. एमवीए85ए विकसित करते समय वैज्ञानिकों ने दक्षिण अफ्रीका में 3,000 बच्चों की बीसीजी जांच की. इनमें से कुछ को बीसीजी दिया गया और कुछ को प्रायोगिक दवा दी गई. उन्होंने पाया कि जिन बच्चों को दोनो दवाइयां मिली थीं, वे उके मुकाबले ज्यादा सुरक्षित थे जिन्हें केवल बीसीजी दिया गया था.
केपटाउन विश्विद्यालय में प्रोफेसर विलेम हानेकॉम के अनुसार दक्षिण अफ्रीका में टीबी के मामलों को लेकर बहुत बुरी हालत है. जहां अमेरिका में हर साल .01 फीसदी आबादी टीबी से ग्रसित होती है वहीं दक्षिण अफ्रीका में एक फीसदी.
टीके के लिए विकसित की जा रही इस दवाई में रूपांतरित स्मॉल पॉक्स वाइरस का इस्तेमाल हो रहा है. इससे इम्यूनिटी यानि प्रतिरोध की क्षमता पैदा करने की कोशिश की गई है.
एसएफ/ओएसजे (रॉयटर्स)

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थाईलैंड का हाथी मसाज





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प्रस्तुति-- स्वामी शरण 


 हाथी भी करते है इंसानो की मसाज

आज की इस भाग-दौड़ भरी ज़िन्दगी में तनाव और थकान दूर करने  का सबसे कारगर और आसान उपाय है मसाज। लगभग विशव के हर देश में मसाज पार्लर चलते है जहां कमसिन लड़कियां मसाज करती है। लेकिन दुनिया के कई देशों में मसाज बड़े ही अनोखे और डरावने अंदाज़ में की जाती है। जैसे की इंडोनेशिया में सांप और अजगर द्वारा होने वाली मसाज, जिसके बारे में आपको विस्तारपूर्वक बता चुके है।
Elephant massage Thailand Chiang Mai
आज हम बात करेंगे थाईलैंड की हाथी मसाज की। आप शायद यक़ीन ना करें पर थाईलैंड में 3000 किलो के भारी भरकम हाथियों के पैरों के द्वारा इंसानों की मसाज करवाई जाती है।
Elephant massage Thailand Chiang Mai in Hindi
इस मसाज में हाथी अपने पैरों के द्वारा इंसान के मजबूत अंगो के साथ-साथ उनके कोमल अंगो की भी मसाज करता है। जरा सोचिए कि अगर एक भी पल के लिए हाथी का बैलेंस बिगड़ा तो आदमी की क्या हालत हो जाएगी।
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Elephant massage 3
थाईलैंड के चांग मई में हाथियों से मसाज कराने के लिए दूर-दूर से आने वाले टूरिस्ट भी काफी उत्साहित रहते हैं। मसाज के दौरान हाथी से थोड़ी दूरी पर एक इंस्ट्रक्टर भी होता है जो हाथी को निर्देश देता है। हाथी अपने पैरों के अलावा सूंड से भी मसाज करता है।
elephant-massage
इस वीडियो में एक महिला और एक विदेशी पुरुष हाथी से मसाज करा रहे हैं। टूरिस्ट इस दौरान तौलिया पहनकर जमीन पर लेट गए हैं और हाथी से मसाज से गुदगुदी महसूस करते नजर आते हैं।
Thai Elephant Massage Video
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गुरुवार, 25 अगस्त 2016

भरत के चोर बाजार





प्रस्तुति-  स्वामी शरण 

Know About India’s Top 5 Chor Bazaar : आज हम आपको देश के 5 ऐसे बड़े बाजारों के बारे में बता रहे हैं, जहां चोरी का सामान मिलता है। यहां चोरी के जूते, फोन, मोबाइल, गैजेट्स, ऑटो पार्ट्स से लेकर कार तक बेची जाती है। देश के इन चोर बाजार में चोरी की गाडी को मॉडिफाई करके बेचा जाता है। यहां अपनी गाड़ी या बाइक खड़ी करना खतरे से खाली नहीं हैं। गलती से आप अपनी गाड़ी पार्क कर देंगे, तो हो सकता है कि उसके स्पेयर पार्ट्स चोर बाजार की दुकानों पर नजर आएं। जानते हैं देश के ऐसे बाजारों के बारे में…..
India's Top 5 Chor Bazaar, Hindi, Information, Jankari, History, Story, Itihas, Kahani,
मुंबई चोर बाजार (Mumbai Chor Bazaar) :-
Chor Bazaar Mumbai, Hindi, Information, Jankari, History, Story, Itihas, Kahani,
मुंबई का चोर बाजार दक्षिणी मुंबई के मटन स्ट्रीट मोहम्मद अली रोड के पास है। ये मार्केट करीब 150 साल पुराना है। ये बाजार पहले ‘शोर बाजार’ के नाम से शुरू हुआ था क्योंकि यहां दुकानदार तेज आवाज लगाकर सामान बेचते थे, तो यहां काफी शोर रहता था। लेकिन अंग्रेज लोगों के ‘शोर’ को गलत बोलने के कारण इसका नाम ‘चोर’ बाजार पड़ गया।
यहां सेकंड हैंड कपड़े, ऑटोमोबिल पार्ट्स और चुराई हुई घड़ियां और ब्रांडेड घड़ियों की रेप्लिका, चोरी के विंटेज और एंटीक सजावटी सामान मिलते हैं। इस मार्केट के लिए कहावत कही जाती है कि यहां आपके घर से चोरी हुआ सामान भी मिल जाएगा। मुंबई जाने पर ‘चोर बाजार’ जरूर घूमें।
क्या है फेमस
यहां के रेस्तरां और कबाब काफी फेमस है। यहां जेबकाटने वालों से सावधान रहें।
कब खुलता है?
ये मार्केट रोजाना सुबह 11 बजे से शाम के 7.30 तक खुला रहता है।
यहां के किस्से भी फेमस हैं
यहां के बारे में कहा जाता है कि मुंबई की यात्रा के दौरान क्वीन विक्टोरिया का सामान शिप में लोड करते समय चोरी हो गया था। यही सामान बाद में मुंबई के चोर बाजार में मिला।
दिल्ली का चोर बाजार (Chor Bazaar, Delhi) :-
Chor Bazaar, Delhi, Hindi, Information, Jankari, History, Story, Itihas, Kahani,
ये देश का सबसे पुराना चोर बाजार है। पहले ये संडे मार्केट के तौर पर लाल किले के पीछे लगता था। अब ये दरियागंज में नावेल्टी और जामा मस्जिद के पास लगता है। ये बाजार मुंबई से अलग है। इसे कबाड़ी बाजार भी कहा जाता है। यहां हार्डवेयर से लेकर किचन इलेक्ट्रॉनिक का सामान मिलता है।
कब लगती है मार्केट
ये मार्केट जामा मस्जिद के पास संडे के दिन लगती है। यहां खरीदते समय प्रोडक्ट जांच ले क्योंकि जैसा वेंडर कहते हैं, वैसा प्रोडक्ट नहीं निकलता।
यहां का किस्सा भी फेमस हैं
यहां के लिए एक स्टोरी फेमस है कि एक आदमी ने यहां गाड़ी पार्क की थी। उसे अपनी गाड़ी के टायर दुकान में बारगेन करते समय मिले।
सोती गंज, मेरठ, यूपी (Soti Ganj, Meerut):-
Soti Ganj, Meerut, Hindi, Information, Jankari, History, Story, Itihas, Kahani,
यूपी के मेरठ में सोती गंज मार्केट काफी फेमस है। इस मार्केट को चोरी की गाड़ियों और स्पेयर पार्ट्स का गढ़ माना जाता है। यहां सभी गाड़ियों के ऑटो पार्ट्स मिल जाएंगे। यहां चोरी, पुरानी और एक्सीडेंट में खराब हुई गाड़ियां आती है। मेरठ की सोतीगंज मार्केट एशिया की सबसे बड़ी स्क्रैप मार्केट भी है।
कब खुलती है मार्केट
ये मार्केट मेरठ सिटी में सुबह 9 बजे से शाम को 6 बजे तक खुलती रहती है। यहां सामान खरीदने के लिए आपको सही डीलर मिलना जरूरी है।
यहां क्या है फेमस
सोतीगंज में 1979 की अंबेस्डर का ब्रेक पिस्टन, 1960 की बनी महिंद्रा जीप क्लासिक का गेयर बॉक्स, वर्ल्ड वार II की विलिज जीप के टायर मिल जाएंगे।
चिकपेटे, बेंगलुरु (Chickpet market, Banglore) :-
Chickpet market, Banglore, Hindi, Information, Jankari, History, Story, Itihas, Kahani,
दिल्ली और मुंबई के चोर बाजार के मुकाबले बेंगलुरु कम फेमस है। ये मार्केट बेंगलुरु में चिकपेटे जगह पर संडे के दिन लगती है। यहां सेकेंड हैंड गुड्स, ग्रामोफोन, चोरी के गैजेट्स, कैमरा, एंटीक, इलेक्ट्रॉनिक आइटम और सस्ते जिम इक्विपमेंट मिलते हैं। ये मार्केट लोकल मार्केट की ही तरह है।
कब लगती है मार्केट
ये मार्केट एक गांव के मार्केट की ही तरह संडे के दिन लगती है।
कहां लगती है मार्केट
ये मार्केट बीवीके अयंगर रोड पर एवेन्यू रोड के पास लगती है।
पुदुपेत्ताई, चेन्नई (Pudhupettai, Chennai) :-
Pudhupettai, Chennai, Hindi, Information, Jankari, History, Story, Itihas, Kahani,
सेंट्रल चेन्नई में स्थित ‘ऑटो नगर’ में पुरानी और चोरी की कारों को मॉडिफाई करते हैं। यहां हजारों की संख्या में दुकानें हैं। ये दुकानें गाड़ियों के ऑरिजनल पार्ट्स और कार को बदलने के लिए फेमस है। इन्हें इस काम में इंटरनेशनल एक्सपर्टीज है। यहां गाड़ियों के तमाम स्पेयर पार्ट्स से लेकर कार मॉडिफाई का सामान और सर्विस मिलती है। ये चोर बाजार गाड़ियों को बदलने का सबसे सस्ता जरिया है। इस मार्केट में कई बार पुलिस की रेड़ पड़ी है लेकिन ये तब भी कभी बंद नहीं हुई है।
कब खुलती है मार्केट
ये मार्केट एग्मोर ट्रेन स्टेशन से 1 किलोमीटर दूर है। ये सुबह 10 बजे से शाम के 6 बजे तक खुली रहती है।
यहां क्या है फेमस
यहां अपनी गाड़ी या बाइक कभी भी पार्क न करे। हो सकता है कि आपको अपनी गाड़ी के पार्ट्स मार्केट की दुकानों पर मिले।
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