शुक्रवार, 20 जनवरी 2023

स्नेहिल व्यक्तित्व एवं विलक्षण प्रतिभा के साहसी अधिकारी सुनील कुमार

 


  सुनील कुमार  पुलिस उप महानिरीक्षक, 

(केरिपु.बल*CRPF ) 


प्रस्तुति : रूपक़  सिन्हा 



दिनांक 19.09.1968 को बिहार राज्य के भागलपुर जिले में जन्में पटना निवासी  श्री सुनील कुमार पुत्र स्व. श्री राम बृक्ष प्रसाद एवं श्रीमती शान्ति देवी  ने स्नातक उपाधि प्राप्त करने के उपरान्त,  भारत ही नहीं बल्कि विश्व  के सबसे पुराने एवं बड़े आंतरिक सुरक्षा बल यानि केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल में सीधे नियुक्त राजपत्रित अधिकारी के तौर पर दिसम्बर 1994 से बतौर सहायक कमाण्डेंट अपनी सेवाएं प्रारम्भ की तथा अपने इस 27 वर्षों  से अधिक के सेवाकाल के दौरान देश के विभिन्न दुर्गम/अतिदुर्गम/कठिन एवं अशांत क्षेत्रों चाहे वह उग्रवाद से ग्रसित पूर्वोत्तर क्षेत्र हो या जम्मू एवं कश्मीर या नक्सलवाद से ग्रसित एल0डब्ल्यू0ई0 का एरिया हो या कानून एवं व्यवस्था से जूझ रहे देश के अन्य क्षेत्र हों, में विभिन्न पदों पर तैनात रहकर समवाय एवं बटालियनों का केन्द्रीय रिवर्ज पुलिस बल के मापदण्डों के अनुसार कुशल नेतृत्व के द्वारा केरिपु.बल एवं देश की गरिमा को उच्चतम स्तर पर ले जाने का सफल प्रयास किया है। 


    श्री कुमार जो कि वर्तमान में मध्य सेक्टर मुख्यालय केरिपु.बल लखनऊ में पुलिस उप महानिरीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं ने अपने ढाई दशकों से अधिक के शानदार कैरियर में, ज्यादातर देश के आतंकवाद, उग्रवाद एवं नक्सल प्रभावित प्रान्तों जैसे जम्मू-कश्मीर, असम, उड़ीसा, बिहार, नागालैंड, त्रिपुरा, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे अतिदुर्गम, कठिन एवं अशांत क्षेत्रों में  विभिन्न पदों पर तैनात रहकर अपनी व्यावसायिक दक्षता व कुशल नेतृत्व के द्वारा देश की एकता एवं अखण्डता को कामय रखने हेतु अपनी बेहतरीन सेवाएं इस देश के लिए दी है। 


         बतौर सहायक कमाण्डेंट श्री कुमार प्रारम्भ में जम्मू एवं कश्मीर के श्रीनगर, डोडा और बड़गांव जैसे अति संवेदनशील एवं सबसे अधिक आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्रों में अपनी उत्कृष्ट सेवाएं दी तथा आतंकवाद के खिलाफ चलाये गये अनगिनत अभियानों का पूरी कुशलता के साथ नेतृत्व किया तथा आतंकवादी घटनाओं को सफलतापूर्वक कम करने हेतु तैनाती क्षेत्रों में शांति कायम करने में अहम भूमिका निभाई।


   श्री कुमार ने बतौर उप कमाण्डेंट 100 आर.ए.एफ. बटालियन में गुजरात में तैनाती के दौरान गोधरा काण्ड के उपरान्त भड़के हिंसक दंगो को अपनी टीम के साथ कुशल नेतृत्व, व्यावसायिक दक्षता व प्रशिक्षण के समग्र अनुभव का प्रयोग करते हुए सूरत में 48 घण्टें के भीतर कानून एवं व्यवस्था को बहाल करने में अहम भूमिका निभाई जिसकी प्रशंसा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी तत्कालीन मुख्यमंत्री गुजरात द्वारा की गई।  वर्श 2001 में गुजरात में आये विनाशकारी भूकम्प के दौरान  अहमदाबाद में श्री कुमार ने अपनी टीम के साथ मिलकर अपनी जान जोखिम में डालते हुए 74 नागरिकों की अमूल्य जान बचाई जिसकी सराहना स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के उच्चाधिकारियों द्वारा भी की गई।

     

श्री कुमार द्वारा बतौर कमाण्डेंट दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र मेे शांति व्यवस्था कायम करने की कमान संभाली तथा अपनी परिचालनिक दक्षता एवं व्यावसायिक कार्य कुशलता को साबित करते हुए बिना किसी जान-माल व सरकारी सम्पत्ति की क्षति के नक्सलवाद के विरूद्ध सफलतापूर्वक अभियान चलाकर शांति  कायम किया तथा नक्सलवाद से ग्रसित दूर-दराज इलाके के भटके हुए युवाओं को राष्ट्र की मुख्य धारा में लाने का सफल प्रयास किया गया। 


श्री कुमार ने दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा में अवस्थित प्राचीन और ऐतिहासिक पर्यटन नगरी बारसूर की खोई हुई विरासत एवं प्रसिद्धि को फिर से स्थापित करने की पहल करते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी को बारसूर में ऐतिहासिक महत्व के अवशेषों को बहाल करने के लिए पत्र लिखकर की। इस प्रकार श्री कुमार ने अपने सकारात्मक और निःस्वार्थ प्रयासों के जरिये ऐतिहासिक पर्यटन शहर बारसूर की खोई हुई प्रसिद्धि को स्थानीय प्रशासन एवं सम्मानित लोगों के सहयोग से पुनः स्थापित किया। जिला प्रशासन व छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के सहयोग से बत्तीसा मंदिर परिसर में पहला बारसूर महोत्सव आयोजित किया गया जिसकी सराहना शासन एवं प्रशासन के पदाधिकारियों एवं स्थानीय लोगों द्वारा की गयी।


   इसी अनुक्रम में देश के सबसे संवेदनशील तीर्थ स्थलों में से एक माता वैष्णो देवी दरबार की सुरक्षा के साथ-साथ कटरा शहर को व्यापक सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैरान 06 बटालियन केरिपु.बल की कमान श्री कुमार के हाथों में सौंपी गई।  इस दौरान खूॅखार आतंकवादी अजमल कसाब और अफजल गुरु की मौत की सजा के बाद, कटरा के साथ-साथ भवन में आतंकवादी हमले के लिए कई धमकियां मिलीं किन्तु उच्च कोटि की व्यावसायिक दक्षता एवं कुशल रणनीति से श्री कुमार  ने सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त रखा और देशद्रोही ताकतों को उनके मंसूबों में कामयाब नहीं होने दिया। 


          इसके अतिरिक्त श्री कुमार ने श्री वैष्णो  माता दरबार श्राईन बोर्ड के साथ-साथ देश के विभिन्न प्रान्तों से आये श्रद्धालुओं की सुरक्षा व उनकी हर प्रकार से मदद के लिए सैदव तत्परात के साथ कार्य किया।  श्री वैष्णो माता दरबार में भव्य जागरण का शुभारंभ श्री कुमार के नेतृत्व में किया गया और इनके पदास्थापित रहने तक 04 बार कटरा वासियों के सहयोग से सफलतापूर्वक कराया गया जिसकी हर स्तर पर प्रशंसा की गई।


श्री कुमार ने 87 बटालियन जो कि मणिपुर के अत्यधिक उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में तैनात थी की कमान संभाली तथा उग्रवाद के विरूद्ध लगातर अभियान चलाकर शान्ति व्यवस्था को कायम रखा।  इसी दौरान  पूर्वोत्तर में उत्पन्न अर्थव्यवस्था अवरुद्ध ( Economic Blockade)स्थिति को पूरी कुशलता व रणनीति से संभाला जिसके परिणामस्वरूप कोई घटना घटित नहीं हुई। इसके साथ ही श्री कुमार ने मणिपुर राज्य के विधानसभा चुनाव के दौरान 03 जिलों एवं संसदीय चुनाव के दौरान 02 जिलों के नोडल अधिकारी की जिम्मेदारियों का निवर्हन कुशलतापूर्वक बिना किसी व्यवधान के चुनाव सम्पन्न कराने में अहम भूमिका निभाई।


श्री कुमार माॅ वैष्णो देवी सेवा संस्था पटना से पिछले कई वर्षों से जुड़े रहकर समाजसेवा के  कार्योे में अपना अभूतपूर्व योगदान दे रहे हैं। इसी अनुक्रम में उन्होंने माॅ वैष्णो देवी सेवा समिति, पटना के सहयोग से दिनांक 07 फरवरी 2022 को पीरबहोर थाना इलाके के दरियापुरगोला ब्रहमस्थान मंदिर के निकट माॅ ब्लड सेंटर का शुभारंभ कराया गया जो पूरी तरह से नाॅन कामर्शियल है। माॅ ब्लड सेंटर द्वारा थैलीसिमिया, हीमोफीलिया और एप्लास्टिक एनीमिया सहित समाज के बेहद निर्धन एवं असहाय व्यक्तियों को निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जायेगा। इसके अतिरिक्त यह संस्था प्रत्येक वर्ष आर्थिक रूप से कमजोर कन्याओं की षादी कराने में भी सहभागिता करती है। 


श्री कुमार एक प्रतिभावान, कर्मठ, ईमानदार एवं सक्रिय पुलिस अधिकारी होने के साथ-साथ एक सहृदयी एवं समाज सेवक के रूप में भी किसी से पीछे नहीं है। श्री कुमार समाज के असहाय एवं अत्यन्त गरीब बच्चों के उत्थान हेतु कार्य कर रहीं समाजसेवी संस्थानों से भी जुड़े रहकर उनके उत्थान में अपना विशेष योगदान दे रहे हैं तथा समाज के अन्य लोगों को भी समाज सेवा हेतु प्रेरित करते हैं। अपने सरल एवं सुशील स्वभाव से परिपूर्ण श्री कुमार सदैव देश एवं समाज के जरूरतमंदों को यथोचित मदद करने में सदैव अपने आप को प्रथम पंक्ति में स्थापित रखते हैं। 


   श्री कुमार को उनके कुशल नेतृत्व एवं सराहनीय सेवाओं के लिए अब तक केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के उच्चाधिकारियों के साथ-साथ सम्बंधित तैनाती क्षेत्रों के शासन एवं प्रशासन के उच्चप्राधिकारियों द्वारा कुल 119 प्रशस्ति पत्रों/ डिस्क एवं उत्तम  प्रवष्टियों से सम्मानित/अलंकृत किया जा चुका है।




अर्थराइटिस के लिए घरेलू उपचार क्या हैं?

 

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जैसा की हम जानते हैं अर्थराइटिस एक लम्बी चलने वाली बीमारी है इसलिए इसके लक्षणों से निजात पाने के लिए आपको अपने लाइफस्टाइल को भी बदलने की जरूरत होती है। बीमारी के अनुसार अपने लाइफस्टाइल में बदलाव लाना बहुत ही फायदेमंद होता है।


यहाँ हमने आपको कुछ ऐसी जीवनशैली के बारे में बताई है जो इसके लक्षणों से निजात पाने में सहायक होती है और कुछ ऐसे है जिसने आपको बचनी चाहिए।


क्या करें


अपने जॉइंट्स को मूवमेंट कराते रहें। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है स्ट्रेचिंग।


रोजाना व्यायाम करने से आपके जॉइंट का लचीलापन बढ़ता है इसलिए व्यायाम को अपने डेली लाइफ में अपनानी चहिये।


अच्छी मुद्रा (Posture) बनाये रखें। एक फ़िज़ियोथेरेपिस्ट आपको सही तरीके से बैठना, खड़े होने और चलना आदि के बारे में बता सकते हैं।


अपने क्रियाकलाप के सिमा को निर्धारित करें। आपको न हीं ज्यादा काम करनी चाहिए और न हीं आराम।


हीट पैड या गर्म पानी का इस्तेमाल दर्द से निज़ात पाने के लिए किया जा सकता है परन्तु 20 मिनट से अधिक इसका इस्तेमाल न करें।


मसाज कुछ देर के लिए जोड़ों के दर्द से आराम दे सकता है।


क्या न करें


धूम्रपान न करें। यह आपके सॉफ्ट कनेक्टिव टिश्यू को नुकसान पहुँचता है, जिससे जोड़ों की समस्या उत्पन्न होती है।


मोटापा से दूर रहें। शारीरिक वजन अधिक होने से आपके जोड़ों पर दबाव बढ़ता है और यह अर्थराइटिस के जटिलताओं को बढ़ा सकता है।


दोहराने वाली तथा एक जैसी क्रिया करने से बचनी चाहिए जैसे – दौड़ना, कूदना


केवल और केवल अपने बीमारी के बारे में हीं सोचते रहने से बचें। ऐसा करने से आपके दर्द की संवेदना बढ़ सकती है।

सर्दी खांसी होने पर पिएं ये काढ़ा

 

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अदरक का काढ़ा 


सर्दी-खांसी होने पर अदरक के काढ़े (Ginger Kadha) का सेवन करना चाहिए। क्योंकि अदरक में एंटी वायरल, एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी जैसे गुण मौजूद होते हैं, जो सर्दी-खांसी जैसे समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। 


तुलसी का काढ़ा 


सर्दी-खांसी की समस्या होने पर तुलसी के काढ़े (Tulsi Kadha) का सेवन बेहद फायदेमंद होता है। क्योंकि तुलसी में एंटी बैक्टीरियल गुण मौजूद होता है, इसलिए अगर आप तुलसी के काढ़े का सेवन करते हैं, तो इससे सर्दी-खांसी की समस्या दूर होती है। 


गिलोय का काढ़ा 


गिलोय (Giloy) एक आयुर्वेदिक दवा है, इसलिए सर्दी-खांसी जैसी समस्या होने पर अगर आप गिलोय के काढ़े का सेवन करते हैं, तो यह फायदेमंद होता है। इसके सेवन से सर्दी-खांसी की समस्या दूर होती है। 


दालचीनी का काढ़ा 


सर्दी-खांसी की शिकायत होने पर दालचीनी के काढ़े (cinnamon kadha) का सेवन फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, इसलिए अगर दालचीनी के काढ़े में शहद मिलाकर पीते हैं, तो इससे सर्दी-खांसी की समस्या से छुटकारा मिलता है। 


गुड़ और अजवाइन का काढ़ा 


सर्दी-खांसी और जुकाम की परेशानी को दूर करने में गुड़ और अजवाइन के काढ़े (Jaggery and ajwain kadha) का सेवन फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें कई ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो सर्दी-खांसी, जुकाम और गले में खराश की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं। 


काली मिर्च का काढ़ा 


सर्दी-खांसी की शिकायत होने पर अगर आप काली मिर्च के काढ़े (Black pepper kadha) का सेवन करते हैं, तो यह फायदेमंद होता है। क्योंकि काली मिर्च में एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होता है, जो सर्दी-खांसी की समस्या को दूर करने में मदद करता है।

गुरुवार, 19 जनवरी 2023

मृणाल सेन: जिन्होने तैयार किया ‘नए सिनेमा’ का रास्ता

 

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मृणाल सेन एक ऐसे फिल्मकार थे जिन्होने हिंदी सिनेमा को एक नई ज़मीन दी। 

बांग्ला सिनेमा जो हमेशा से संवेदना और सरोकारों के चित्रण को लेकर काफी गंभीर रहा है, उसके सबसे बड़े तीन कर्णधार जो फिल्मकार माने जाते हैं, उनमें सत्यजित राय, ऋत्विक घटक और मृणाल सेन हैं। 

मृणाल सेन की पहली हिंदी फिल्म भुवन शोम (1969) को हिंदी सिनेमा के इतिहास में दो मायनों में मील का पत्थर माना जा सकता है। पहला तो ये कि इसने समांतर सिनेमा या नई धारा (न्यू वेव सिनेमा)की नींव रखी। 1969 की तीन फिल्मों भुवन शोम (मृणाल सेन), सारा आकाश (बासु चटर्जी) और उसकी रोटी (मणि कौल) वो तीन फिल्में हैं जिनसे हिंदी सिनेमा में नई धारा या समांतर सिनेमा की नींव पड़ी। इसी के बाद कम बजट में यथार्थपरक फिल्में बनाने की राह खुली और फिर 70 के दशक में श्याम बेनेगल, गोविंद निहलानी, प्रकाश झा, केतन मेहता, सईद अख्तर मिर्ज़ा जैसे कई गंभीर फिल्मकारों ने इस धारा के सिनेमा को और मज़बूती दी।

दूसरी अहम वजह ये है कि 'भुवन शोम' में ही पहली बार अमिताभ बच्चन को फिल्मों में मौका मिला था। भुवन शोम फिल्म में कमेंट्री के लिए अमिताभ बच्चन की आवाज़ इस्तेमाल की गई। फिल्म की शुरुआत उनकी कमेंट्री से ही होती है। अमिताभ बच्चन ने कभी बताया था कि इस काम के लिए उन्हे 200 रुपए मिले थे। तो अमिताभ की फिल्मी यात्रा एक तरह से भुवन शोम से ही शुरु हुई थी...बाकी 70 के दशक के मुख्य धारा के सिनेमा को कैसे उन्होने पुनर्परिभाषित किया ये इतिहास है। 

मृणाल सेन को एक ऐसे गंभीर निर्देशक के तौर पर जाना जाता है, जो सामाजिक चेतना को लेकर प्रतिबद्ध और समकालीन विषयों और चुनौतियों को लेकर भी जागरुक रहे हैं। 

1956 में मृणाल सेन ने अपनी पहली फिल्म ‘रातभोर’ बांग्ला बनाई। उनकी अगली फिल्म ‘नील आकाशेर नीचे’ ने उनको स्थानीय पहचान दी और उनकी तीसरी फिल्म ‘बाइशे श्रावण’ ने उनको अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि दिलाई। 

पांच और फिल्में बनाने के बाद मृणाल सेन ने भारत सरकार के छोटे से आर्थिक सहयोग से 1969 में ‘भुवन शोम’ बनाई थी, जिसने उनको बड़े फिल्मकारों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया और उनको राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्रदान की।

भुवन शोम के अलावा मृगया (1965, मिथुन चक्रवर्ती की पहली फिल्म), आकाश कुसुम (1965, सौमित्र चटर्जी, अपर्णा सेन), खंडहर (1984, शबाना, नसीर), एक दिन प्रतिदिन (1979), कोलकाता त्रयी की तीनों फिल्में (इंटरव्यू, 1970; कैलकटा ’71, 1972; पदातिक,1973) वो फिल्में हैं, जिन्हे ज़रुर देखा जाना चाहिए और जिन्हे देश-विदेश में काफी सराहना व सम्मान हासिल हुए। 

आज मृणाल सेन की चौथी बरसी पर सार्थक सिनेमा की परंपरा में उनके अमूल्य योगदान के प्रति कृतज्ञता के साथ उन्हे हार्दिक श्रद्धांजलि।

#MrinalSen 

#ParallelCinema

मंगलवार, 17 जनवरी 2023

बात

 मैं मैके अपने आई सखी, कई दिन साजन से दूर रही

मन मयूर मेरा नाच उठा, जब साजन मेरे घर आया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


एकांत जगह मेरे घर में, बाँहों में मुझको कैद किया

मेरे होठों को होठों से, सखी जोंक की भांति जकड लिया

मैं भी न चाहूँ होंठ हटें, साजन को करीब और खीच लिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


कुछ हलचल हुई, मैं चौंक गई, साजन को परे हटाय दिया

रात में मिलूंगी साजन ने, सखी मुझसे वादा धराय लिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


जैसे-तैसे तो शाम हुई, रात्रि तो मुझे बड़ी दूर लगी

होते ही रात सखी साजन को, बहनों ने मेरी घेर लिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


हँसी ठिठोली बहनों की, मुझको बिलकुल न भाई सखी

सिरदर्द के बहाने मैंने तो, बहनों से किनारा काट लिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


अपने कमरे में आकर मैं, सखी बिस्तर पर थी लेट गई

बंद करके आँखें पड़ी रही, साजन के सपनो में डूब गई

हर आहट पर सखी मैंने तो, साजन को ही आते पाया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


दरवाज़े खुले फिर बंद हुए, कुण्डी उन पर सरकाई गई

मैं जान – बूझकर सुन री सखी, निद्रा-मुद्रा में लेट गई

साजन की सुगंध को मैंने तो, हर साँस में था महसूस किया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


साजन ने बैठकर बिस्तर पर, मेरे कंधे सहलाए सखी

गालों पर गहन चुम्बन लेकर, अंगिया की डोर को खींच दिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


नग्न पीठ पर साजन ने, ऊँगली से रेखा खींच दई

बिजली जैसे मुझमे उतरी, सारे शरीर में दौड़ गई

निस्वास लेकर फिर मैंने तो, अपनी करवट को बदल लिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


करवट तो मात्र बहाना था, बैचेन बदन को चैन कहाँ

मुझे साजन की खुसबू ने सखी, अंग लगने को मजबूर किया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


एक हाथ से उसने सुन ओ सखी, स्तन दबाये और भीच लिया

मैंने गर्दन को ऊपर कर, उसके हाथों को चूम लिया

दोनों बाँहों से भीच मुझे, साजन ने करीब और खींच लिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


साजन ने जोर लगा करके, मोहे अपने ऊपर लिटा लिया

मेरे तपते होठों को उसने, अपने होठों में कैद किया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


उसने भींचा मेरा निचला होंठ, मैंने ऊपर का भींच लिया

दोनों के होंठ यूँ जुड़े सखी, जिह्वाओं ने मिलन का लुत्फ़ लिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


साजन ने उठाकर मुझे सखी, पलंग के नीचे फिर खड़ा किया

खुद बैठा पलंग किनारे पर, मेरा एक-एक वस्त्र उतार दिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


मुझे पास खींचकर फिर उसने, स्तनों के चुम्बन गहन लिया

दोनों हाथों से नितम्ब मेरे, सख्ती से दबाकर भींच लिया

कई तरह से उनको सहलाया, कई तरह से दबाकर छोड़ दिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


स्तन मुट्ठी में जकड सखी, उसने उनको था उभार लिया

उभरे स्तन को साजन ने, अपने मुंह माहि उतार लिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


बोंडियों को जीभ से उकसाया, होठों से पकड़ उन्हें खींच लिया

रस चूसा सखी उनसे जी भर, मेरी काम- क्षुधा भड़काय दिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


साजन का दस अंगुल का अंग, सखी मेरी तरफ था देख रहा

उसकी बेताबी समझ सखी, मैंने उसको होठास्थ किया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


पलंग के कोर बैठा साजन, मैं नीचे थी सखी बैठ गई

साजन के अंग पर जिह्वा से, मैंने तो चलीं कई चाल नई

वह ओह-ओह कर चहुंक उठा, मैंने अंग को ऐसा दुलार किया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


अब सब कुछ था बिपरीत सखी, साजन नीचे मैं पलंग कोर

जिस तरह से उसने चूसे स्तन, उसी तरह से अंग को चूस लिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


उसने अपनी जिह्वा से सखी, अंग को चहूँ ओर से चाट लिया

बहके अंग के हर हिस्से को, जिह्वा- रस से लिपटाय दिया

रस में डूबे मेरे अंग में, अन्दर तक जिह्वा उतार दिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


मैं पलंग किनारा पकड़ सखी, अंग को उभार कर खड़ी हुई

साजन ने मेरे नितम्बों पर, दांतों से सिक्के छाप दिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


उसके बिपरीत मुख करके सखी, घुटनों के बल मैं बैठ गई

कंधे तो पलंग पर रहे झुके, नितम्बों को पूर्ण उठाय दिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया



साजन ने झुककर पीछे से, अंग ऊपर से नीचे चाट लिया

खुले-उभरे अंग में उसने, जिह्वा को अंग बनाय दिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया



साजन ने अपने अंग से सखी, मेरे अंग को जी भरके रगडा

अंग से स्रावित रस में अंग को, सखी पूर्णतया लिपटाय लिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


कठोर -सख्त अंग से री सखी, रस टपक-टपक कर गिरता था

दस अंगुल की चिकनी सख्ती, मेरे अंग के मध्य घुसाय दिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


जांघों के सहारे उठे नितम्ब, अब स्पंदन का सुख भोग रहे

स्पंदन की झकझोर से फिर, स्तन दोलन से डोल रहे

सीत्कार, सिसकी, उई, आह, ओह, सब वातावरण में घोल दिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


ऐसे स्पंदन सखी मैंने, कभी सोचे न महसूस किये

पूरा अंग बाहर किया सखी, फिर अन्तस्थल तक ठेल दिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


मैंने अंग में महसूस करी, अंग की कठोर पर मधुर छुहन

अंग की रसमय मधुशाला में, अंग ने अंग को मदहोश किया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


पहले तो थे धीरे-धीरे, अब स्पंदन क्रमशः तेज हुए

अंग ने अब अंग के अन्दर ही, सुख के थे कई-कई छोर छुए

तगड़े गहरे स्पंदन से, मेरा रोम-रोम आह्लाद किया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


साजन ने अब जिह्वा रस की, एक धारा नितम्ब मध्य टपकाई

उसकी सारी चिकनाई सखी, हमरे अंगों ने सोख लई

चप-चप, लप-लप की ध्वनियों से, सुख के द्वारों को खोल दिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


जैसे-जैसे बड़े स्पंदन, वैसे-वैसे आनंद बड़ा

हर स्पंदन के साथ सखी, सुख घनघोर घटा सा उमड़ पड़ा

साजन की आह ओह के संग, मैंने आनंदमय सीत्कार किया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


वारिस होने के पहले ही, सखी मेरा बांध था टूट गया

मेरी जांघों ने जैसे की, नितम्बों का साथ था छोड़ दिया

अंग का महल ढह गया सखी, दीर्घ आह ने सुख अभिव्यक्त किया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


मेरे नितम्बों के आँगन पर, साजन ने मोती बिखेर दिया

साजन के अंग ने मेरे अंग को, सखी अद्भुत यह उपहार दिया

आह्लादित साजन ने नितम्बों का, मोती के रस से लेप किया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


मोती रस से मेरी काम अगन, मोती सी शीतल हुई सखी

मन की अतृप्त इस धरती पर, घटा उमड़-उमड़ कर के बरसी

मैंने साजन का सिर खीच सखी, अपने बक्षों में छुपाय लिया

उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया


रजस्वला स्त्री अपवित्र क्यों होती है?

 


इस विषय पर भारतीय महर्षियों ने ही जाना और तदनुकूल विविध नियमों की रचना की। विदेशों में भी इस संबंध में नए सिरे से अन्वेषण हुआ है और हो भी रही है।


रजोदर्शन क्या है?


इस विषय का विवेचन करते हुए भगवान धन्वन्तरि ने लिखा है।

मासेनोपचितं काले धमनीभ्यां तदार्तवम्।

ईषत्कृष्ण विदग्धं च वायुर्योनिमुखं नयेत।।

(सुश्रुत शारीरस्थान अ.3 वाक्य 8)


अर्थात्: स्त्री के शरीर में वह आर्तव (एक प्रकार का रूधिर) एक मास पर्यन्त इकट्ठा होता रहता है। उसका रंग काला पड़ जाता है। तब वह धमनियों द्वारा स्त्री की योनि के मुख पर आकर बाहर निकलना प्रारम्भ होता है इसी को रजोदर्शन कहते हैं।


रजोदर्शन की उपरोक्त व्याख्या से हमें ज्ञात होता है कि स्त्री के शरीर से निकलने वाला रक्त काला तथा विचित्र गन्धयुक्त होता है। अणुवीक्षणयन्त्र द्वारा देखने पर उसमें कई प्रकार के विषैले कीटाणु पाये गए हैं। दुर्गंधादि दोषयुक्त होने के कारण उसकी अपवित्रता तो प्रत्यक्ष सिद्ध है ही। इसलिए उस अवस्था में जब स्त्री के शरीर की धमनियां इस अपवित्र रक्त को बहाकर साफ करने के काम पर लगी हुई है और उन्हीं नालियों से गुजरकर शरीर के रोमों से निकलने वाली उष्मा तथा प्रस्वेद के साथ रज कीटाणु भी बाहर आ रहे होते हैं, तब यदि स्त्री के द्वारा छुए जलादि में वे संक्रमित हो जाएं तथा मनुष्य के शरीर पर अपना दुष्प्रभाव डाल दें, तो इसमें क्या आश्चर्य? अस्पतालों में हम प्रतिदिन देखते हैं कि डाक्टर ड्रेसिंग का कार्य करने से पहले और बाद अपने हाथों तथा नश्तर आदि को,हालांकि वे देखने में साफ सुथरे होते हैं, साबुन तथा गर्म पानी से अच्छी तरह साफ करते हैं। हमने कभी सोचा है? ऐसा क्यों करते हैं? एक मूर्ख की दृष्टि में यह सब, समय साबुन और पानी के दुरूपयोग के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है, किन्तु डाक्टर जानता है कि यदि वह ऐसा नहीं करे तो वह कितने व्यक्तियों की हत्या का कारण बन जाये। इसी सिद्धांत को यहाँ लिजिए और विचार करें कि उस दुर्गंध तथा विषाक्त किटाणुओं से युक्त रक्त के प्रवहरण काल में स्त्री द्वारा छुई हुई कोई वस्तु क्यों न हानिकारक होगी?


"भारतीय मेडिकल एसोसिएशन" ने नवम्बर १९४९ के अंक में डा.रेड्डी तथा डॉ.गुप्ता ने लिखा है कि, पाश्चात्य डॉक्टरों ने भी रजस्वला के स्राव में विषैले तत्वों का अनुसंधान किया है। १९२० में डोक्टर सेरिक ने अनुभव किया कि कुछ फूल रजस्वला के हाथ में देते ही कुछ समय में मुरझा जाते हैं, १९२३ में डाक्टर मिकवर्ग और पाइके ने यह खोज निकाला कि, रजस्वला स्त्री का प्रभाव पशुओं पर भी पड़ता है, उन्होंने देखा कि उसके हाथों में दिए हुए मेंढक के हृदय की गति मन्द पाई गई है। १९३० में डोक्टर लेनजो भी इसी परिणाम पर पहुंचे और उन्होंने अनुभव किया कि कुछ काल तक मेंढक को रजस्वला के हाथ पर बैठा रखने से मेंढक की पाचन शक्ति में विकार आ गया। डॉक्टर पालेण्ड तथा डील का मत है कि यदि खमीर, रजस्वला स्त्री के हाथों से तैयार कराया जायेगा तो कभी ठीक नहीं उतरता। यह सब परिक्षण किए गए प्रयोग है। आप घर पर भी कुछ प्रयोग कर सकते हैं, जैसे तुलसी या किसी भी अन्य पौधे को रजस्वला के पास चार दिनों के लिए रख दिजीये वह उसी समय से मुरझाना प्रारंभ कर देंगे और एक मास के भीतर सूख जाएंगा।


रजोदर्शन एक प्रकार से स्त्रीयों के लिए प्रकृति प्रदत्त विरेचन है। ऐसे समय उसे पूर्ण विश्राम करते हुए इस कार्य को पूरा होने देना चाहिए। यदि ऐसा न होगा तो दुष्परिणाम भुगतने पड़ेंगे।


अतः अनिवार्य है की रजस्वला स्त्री को पुर्ण सम्मान से आराम कराना चाहिए। उस चार दिनों तक वह दिन में शयन न करें, रोवे नहीं, अधिक बोले नहीं, भयंकर शब्द सुने नहीं, उग्र वायु का सेवन तथा परिश्रम न करें, क्यों कि हमारे और आपके भविष्य के लिए यह जरूरी है क्योंकि रजस्वला धर्म संतानोत्पति का प्रथम चरण है।


इस विषय पर लिंगपुराण के पूर्वभाग अध्याय ८९ श्लोक ९९ से ११९ में बहुत ही विशद वर्णन किया गया है। उसमें रजस्वला के स्त्री के कृत्य और इच्छित संतानोत्पति के लिए इस कारण को उत्तरदायी बताया गया है इससे शरीर शुद्धि होती है।


लिंग पुराण में एक स्थान पर लक्ष्मी जी और सरस्वती जी के द्वारा शिवलिंग की पूजा का वर्णन है। इससे स्पष्ट होता है कि किसी भी मंदिर में चाहे वह शिव का हो या किसी और देवता का उसमें महिलाओं को पूजा करने से कोई भी रोकना नहीं चाहिए। किन्तु वर्तमान समय की महिलाए रजस्वला समय में भी घर और बाहर कार्यरत रहती है।यह हमारे समाज की दुर्गति का कारण है।

शनिवार, 14 जनवरी 2023

डॉ हीरालाल साहा... 🙏🙏🙏🙏

 हजारीबाग चेंबर ने डॉ हीरालाल साहा के निधन पर गहरा शोक 


हजारीबाग शहर के जाने-माने लब्ध प्रतिष्ठित चिकित्सक,समाजसेवी साहित्यकार, बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर हीरालाल साहा के अचानक निधन पर हजारीबाग चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने गहरा शोक व्यक्त किया है।  डॉक्टर साहा के निधन से हजारीबाग ने एक कर्मठ चिकित्सक एवं जनहित के मुद्दे उठाने वाले एक जननायक को खो दिया है।  

डॉक्टर हीरालाल साहा के निधन पर हजारीबाग चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के संस्थापक अध्यक्ष राजेंद्र लाल, अध्यक्ष राजकुमार जैन टोंगिया, सचिव विजय केसरी ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि डॉक्टर साहा हजारीबाग के एक लोकप्रिय चिकित्सक के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल हुए थे । वे  बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे।  उनका व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों बेमिसाल था।  उन्होंने व्यवसायियों की हितों की रक्षा के लिए हजारीबाग चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की स्थापना की थी । वे हजारीबाग चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के संस्थापक उपाध्यक्ष रहे थे । वे लगातार हजारीबाग चेंबर की बैठकों में भाग लिया करते थे।  व्यवसायियों की हितों की रक्षा के लिए सदैव कदम से कदम मिलाकर चलते थे । वे एक कर्मठ समाजसेवी थे।  वे व्यवसायिक मुद्दों पर लगातार अपनी बातों को रखा करते थे । वे जिले की बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए लगातार मुखर होकर अपनी बातों को रखा करते थे। स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर उनके विचार सदैव लोगों को अपनी और आकृष्ट करता रहेगा।उनके निधन से हजारीबाग वासियों ने एक कर्मठ समाजसेवी को खो दिया है।


हस्ताक्षर,

 विजय केसरी,

(सचिव)

 हजारीबाग चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज

बाडम बाजार, गोला रोड, हजारीबाग - 825 301,

 मोबाइल नंबर  :-92347 99550.

दिनांक : 13.01.23.

गुरुवार, 12 जनवरी 2023

सागर भक्ति संगम का धूमधाम से सम्पन्न हुआ 29 वां स्थापना दिवस समारोह


                                               

महापुरुषों के विचारों को जन जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया


आध्यात्मिक व सामाजिक संस्था सागर भक्ति संगम ने स्थानीय स्वर्ण जयंती पार्क में 29 वां स्थापना दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया।  इस अवसर पर सदस्यों ने महापुरुषों के विचारों को आत्मसात एवं जन जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। विश्व शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना किया। सांप्रदायिक सौहार्द स्थापना में संगम की भूमिका पर सदस्यों ने हर्ष व्यक्त किया । बीते 29 वर्षों में दस हजार से अधिक बैठकों पर सदस्यों ने प्रसन्नता व्यक्त की। स्थापना दिवस समारोह की अध्यक्षता संगम के संयोजक विजय केसरी एवं संचालन संजय खत्री ने किया।

अध्यक्षता करते हुए संगम के संयोजक विजय केसरी ने कहा कि सागर भक्ति संगम एक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक वैचारिक एवं सामाजिक संस्था है। यह संस्था बीते 29 वर्षों में दस हजार से अधिक बैठकें कर सांप्रदायिक सौहार्द की दिशा में एक सार्थक पहल किया है।  सामाजिक और अध्यात्मिक नवजागरण की दिशा में संगम निरंतर प्रयासरत है।

युवा समाजसेवी संजय खत्री ने कहा कि जब से मैं सागर भक्ति संगम आ रहा हूं, खुद में विराट परिवर्तन महसूस कर रहा हूं।  जीवन अनुशासन मय बन गया है। जीवन जीने की कला और सरल बन गई है।

पूर्व कार्यपालक अभियंता शंभू सिन्हा ने कहा कि सागर भक्ति संगम प्रातः कालीन टहलने वाले लोगों के लिए एक बहुत ही जीवंत संस्था है । इस संस्था से जुड़कर बहुत कुछ जान पाया हूं। मुश्किलों से सामना कैसे किया जाए ? यह मैं जान पाया हूं।

युवा व्यवसाई प्रदीप स्नेही ने कहा कि सागर भक्ति संगम लोगों के बीच प्रेम और दोस्ती बांट रहा है।  सभी धर्मों के मार्ग एक हैं, यह अपने भजनों के माध्यम से बता रहा है । सांप्रदायिक सौहार्द कायम करने की दिशा में इस संस्था का पहल स्वागत योग्य है।

आध्यात्मिक साधक जयप्रकाश गुप्ता ने कहा कि आज की बदली परिस्थिति में जहां सब लोग भौतिकवादी बन गए हैं । परिणाम हम सबों के सामने हैं । घोर अशांति की आग में दुनिया जल रही है । इससे मुक्ति का एक ही मार्ग है, खुद से साक्षात्कार कर ईश्वर को महसूस करना।  इस मार्ग पर चलकर ही दुनिया को बचाया जा सकता है।  रूस - यूक्रेन युद्ध खुद को ना जानने के परिणाम के रूप में सामने हैं ।‌ इसलिए सबों को अध्यात्मिक ज्ञान की ओर बढ़ने की जरूरत है। सागर भक्ति संगम इस दिशा में लोगों को जागृत कर रहा है।

समाजसेवी योगेंदर प्रसाद गुप्ता ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मैं इस संस्था का एक संस्थापक सदस्य हूं । इस संस्था ने जीवन जीने की कला से अवगत कराया।  जीवन की दिशा निर्धारित करने में संगम के भजन मेरे लिए अनुकरणीय है।

वस्त्र वेबसाइट सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि सागर भक्ति संगम एक अनूठी संस्था है।‌ एक और इस संस्था में सामूहिक भजन, कीर्तन, प्रवचन, हास्य, व्यंग है, वहीं दूसरी ओर  खुद से साक्षात्कार करने की विधि विद्यमान है।

स्वर्ण व्यवसाई इंद्र सोनी ने कहा कि मैं कुछ दिन पूर्व ही सागर भक्ति संगम से जुड़ पाया हूं। इस संस्था से जुड़कर मैं खुद में काफी परिवर्तन पा रहा हूं । मैं पहले से ज्यादा शांति महसूस कर रहा हूं। सामूहिक भजन गायन की चर्चा हमारे सनातन शास्त्रों में भी दर्ज है।

इन वक्ताओं के अलावा सुरेश मिस्त्री, अशोक प्रसाद,विकास जयसवाल, मनोज कुमार,सतीश होर्रा, सुमेर सेठी आदि ने भी अपने अपने विचार रखें।  धन्यवाद ज्ञापन सुरेश मिस्त्री ने किय


 विजय केसरी,

( संयोजक)

 सागर भक्ति संगम,

 स्वर्ण जयंती पार्क, हजारीबाग - 825 301,

 मोबाइल नंबर :- 92347 99550.

 दिनांक :- 12.01.23.

शनिवार, 7 जनवरी 2023

112 वीं नारायणी गंडकी. MHA Aarti karykram

 

प्रस्तुति - 

दया nand 

वाल्मीकि नगर -  भारत नेपाल सीमा पर अवस्थित बेलवा घाट परिसर में अंतर्राष्ट्रीय न्यास स्वरांजलि सेवा संस्थान द्वारा पौष पूर्णिमा के अवसर पर  112 वीं नारायणी गंडकी महाआरती कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ  मुख्य अतिथि फिल्म निर्देशक अनिल बाबा पाठक, स्वरांजलि सेवा संस्थान के मैनेजिंग डायरेक्टर सह समाजसेवी संगीत आनंद, अभिनेता डी.आनंद, विशिष्ट अतिथि डी. ओ. पी. रमन वर्मा, पार्श्व गायक  मुरली शेखर श्रीवास्तव, फैशन डिजाइनर रूपक कुमार, तुषार कुमार, संस्था के कोषाध्यक्ष  शिवचंद शर्मा, वरिष्ठ सदस्य कामेश्वर श्रीवास्तव, आचार्य पंडित अनिरूद्ध दूबे, एडिटर स्वरंजलि सरगम,नायिका निहारिका राज, नायिका रागिनी सोनी, एवम् ट्रस्ट की अध्यक्षा अंजू देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित करके किया। महाआरती के माध्यम से उपस्थित सभी भक्तों ने पर्यावरण संरक्षण संवर्धन  का संकल्प लिया।  कथा पूजा, व  हवन द्वारा विश्व शांति और निरोगी दुनिया की कामना की गई। कड़ाके की ठंड, शीत लहर और सर्द हवा के झोंको से भी भक्तों की आस्था कम नहीं हो पाई।  मुख्य अतिथि अनिल बाबा पाठक ने कहा कि हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का खास महत्व माना जाता है।  संस्था द्वारा दैनिक चलंत दरिद्र नारायण भोज एवं नारायणी गंडकी महाआरती का निरंतर आयोजन एक ऐतिहासिक पहल है। प्लेबैक सिंगर मुरली शेखर के भजनों पर देर तक तालियां बजती रही। गायक एवं डीओपी रमन वर्मा ने कहां की  इस महा आरती में भाग लेकर और सम्मानित होकर मेरा जीवन धन्य हो गया है। संगीत आनंद ने कहा कि पौष पूर्णिमा के दिन नदियों की पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती है, ऐसा मैने भी सुना है। डी. आनन्द ने अपने भजनों से माहौल को भक्तिमय कर दिया। शिवचंद्र शर्मा ने बेहतरीन नाल वादन करके सबका मन मोह लिया। गायक राजा कुमार ने भोजपुरी भजन प्रस्तुत किया। निर्देशक अनिल बाबा पाठक, गायक मुरली शेखर श्रीवास्तव ,डीओपी रमन वर्मा, फैशन डिजाइनर रूपक कुमार, डिजाइनर तुषार कुमार ,नायिका निहारिका राज, नायिका रागिनी सोनी, समेत कई प्रतिभाशाली व्यक्तित्व फूलों की माला और अंगवस्त्रम द्वारा सम्मानित किए गए। लेट्स इंपायर बिहार के संस्थापक आईपीएस अधिकारी विकास वैभव के सामाजिक कार्यों की भूरी भूरी प्रशंसा की गई । होटल पूर्वा के प्रबंध निदेशक चंदन जायसवाल  द्वारा महाप्रसाद का इंतजाम किया गया वही वशिष्ठ डेरी उद्योग नेपाल के सौजन्य से आगत अतिथि गण अंगवस्त्रम द्वारा सम्मानित किए गए। इस मौके पर  राजेश शर्मा, अनमोल कुमार,अभिनेता मंटू मनरंग, मेकअप मैन रोशन श्रीवास्तव, अभिनेता अनुभव राज, पप्पू कुमार, बलिस्टर कुमार, एडिटर स्वरांजलि सरगम , हिरमति देवी, मधु देवी, रवि कुमार, गायक राजा कुमार, राजकुमार , फरीदा खातून,चंदन कुमार, मनोज कुमार,सुजीत, एवम् अक्षय कुमार की भूमिका सराहनीय रही। संचालन डी. आनंद ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन कामेश्वर श्रीवास्तव ने किया। कड़ाके की ठंड और शीतलहर में भी भक्तों की उपस्थिति बनी  रही। सर्द तेज हवाओं में  भी नारायणी गंडकी माता की जय, गंगा मैया की जय, वाल्मीकि धाम की जय, आदि स्वर गुंजायमान होते रहे।

सोमवार, 2 जनवरी 2023

सहारनपुर में 11 जनवरी, 2023 तक धारा 144 लागू



राजेश सिन्हा 


*सहारनपुर* जिला मजिस्ट्रेट अखिलेश सिंह ने निकट भविष्य में सम्पन्न होने वाले वीरांगना ऊदा देवी शहीद दिवस, चौधरी चरण सिंह का जन्म उत्सव, क्रिसमस डे एवं गुरु तेग बहादुर शहीद दिवस

 व अन्य विभिन्न आयोजनों के अवसर पर तथा विभिन्न विभागों द्वारा आयोजित की जाने वाली चयन व प्रवेश परीक्षाओं एवं चयन/प्रवेश परीक्षाओं व औद्योगिक संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों व शिक्षण संस्थानों और रेलवे स्टेशन आदि पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा अप्रिय घटनायें घटित की जाने की साजिश की जा सकती है तथा कुछ तत्व/लोग जानबूझकर ऐसे कृत्य कर सकते है जिससे लोक परिशांति भंग होने की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता, इसलिए सी.आर.पी.सी. की धारा-144 के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जनपद में निषेधाआज्ञा लागू की है डीएम ने इस आशय के आदेश जारी करते हुए कहा  कि किसी भी सार्वजनिक स्थल पर 4 या इससे अधिक व्यक्ति बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के धरना जुलूस प्रदर्शन आदि के लिए एकत्रित नही होंगे और ना ही ऐसा करने के लिए किसी को प्रेरित करेंगे। कोई भी जाति विशेष का व्यक्ति/व्यक्तियों का समूह अपने नगर/गांव/मौहल्ले व अन्य स्थानों पर जाकर कोई भी ऐसा कार्य नही करेगा जिससे जातिय हिंसा व अन्य विवाद उत्पन्न होने की सम्भावना हो। जनपद में किसी भी गांव अथवा मौहल्ले मे ऐसे व्यक्ति को प्रवेश नही दिया जायेगा, जिसके जाने से उस क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न होने की सम्भावना हो। कोई भी व्यक्ति सक्षम प्राधिकारी/संबंधित उप जिला मजिस्ट्रेट/नगर मजिस्ट्रेट, अपर जिला मजिस्ट्रेट, जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जुलूस/सभा/सम्मेलन, धरना प्रदर्शन रैली आदि आयोजित नही करेगा। विवाह एवं शवयात्रा पर यह प्रतिबन्ध लागू नहीं होगा परन्तु वर्तमान में लागू कोविड-19 गाईडलाइन का अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा। 

जारी आदेश में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति/व्यक्तियों का समूह जनपद में शांति व्यवस्था भंग करने संबंधी कोई कार्य नहीं करेगा, न किसी ऐसे व्यक्ति/व्यक्तियों का सहयोग करेगा जो शांति व्यवस्था को प्रभावित करने का कृत्य कर रहे है अथवा ऐसे कार्य करने में संलिप्त है ऐसे तत्वों जिनके भ्रमण आदि कार्यक्रमों से साम्प्रदायिक सदभाव एवं समरसता पर कुप्रभाव पडता हो, को प्रतिबंधित किया जाता है। कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का अस्त्र, शस्त्र, विस्फोटक पदार्थ या ऐसी वस्तु जिनका प्रयोग आक्रमण किये जाने में किया जा सकता है यथा चाकू, भाला, बरछी, तलवार, छूरा आदि लेकर नहीं चलेगा और न ही इनको किसी स्थान पर एकत्रित करेगा न ही इनका सार्वजनिक प्रदर्शन करेगा। इस प्रतिबन्ध से पुलिस कर्मी एवं अपने दायित्वों के निवर्हन की प्रक्रिया मे शस्त्र धारण करने वाले अधिकृत अधिकारी/कर्मचारी मुक्त होंगे। इसके अतिरिक्त लाठी, डण्डा लेकर भ्रमण करने वाले वृद्ध एवं विकलांग व्यक्ति भी मुक्त होंगे। यह धार्मिक रिति रिवाजों को भी प्रभावित नही करेगा। कोई व्यक्ति अथवा व्यक्तियों का समूह किसी भी सार्वजनिक स्थल व अपने घर की छत पर किसी प्रकार की ईंटें, पत्थर, किसी भी प्रकार की मिट्टी, कांच की बोतलें, सोडा वाटर की बोतलें एवं कोई भी ऐसा ज्वलनशील पदार्थ एकत्रित नही करेगा, जिससे मानव जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड सकता हो और न ही ऐसा करने के लिए किसी को प्रेरित करेगा।

जिला मजिस्ट्रेट ने अपने आदेश में कहा है कि कोई भी पैट्रोल पम्प मालिक या खुदरा विक्रेता पैट्रोल व डीजल की बिक्री वाहन के अतिरिक्त बोतल अथवा किसी कन्टेनर में नही करेंगे क्योंकि यह सम्भावना है कि अराजक तत्व इस प्रकार खरीदे गये पैट्रोल डीजल का प्रयोग हिंसात्मक कार्यों के लिये कर सकते है। अतः इस प्रकार वाहन के अतिरिक्त डीजल अथवा पैट्रोल का क्रय एवं विक्रय प्रतिबंधित किया जाता है। कोई भी होटल/धर्मशाला आदि का प्रबन्धक/मालिक किसी भी व्यक्ति को बिना उसकी पहचान स्थापित कराये कमरा आवंटित नही करेगा। कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया या प्रिन्ट मीडिया के माध्यम से ऐसी बात नही कहेगा और न ही प्रकाशन के माध्यम से प्रचारित/प्रसारित करेगा, जिससे सामाजिक भावनाओं को ठेस पंहुचे। किसी भी व्यक्ति, अभ्यर्थी, राजनैतिक दल द्वारा किसी भी प्रकार की चुनाव प्रचार सामग्री विज्ञापन यथा प्रिण्टेड पम्पलेट्स, इलेक्ट्रानिक माध्यम इत्यादि का प्रयोग विहित रूप से सक्षम प्राधिकारी की पूर्वानुमति के बिना प्रयोग नही किया जायेगा। कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक रूप से मदिरा एवं नशीले पदार्थों का प्रयोग नही करेगा, जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने की सम्भावना हो और न ही ऐसा करने के लिए किसी को प्रेरित करेगा। परीक्षार्थियों/अभ्यर्थियों एवं परीक्षा कार्य में लगे अधिकारियों/कर्मचारियों के अलावा परीक्षा केन्द्र के 100 गज की परिधि में चार से अधिक व्यक्ति किसी भी स्थान पर न तो एकत्रित होंगे और न ही समूह में विचरण करेंगे। परीक्षा केन्द्रों से न्यूनतम 01 किमी0 की परिधि में फोटो कॉपियर एवं स्कैनर का संचालन परीक्षा अवधि में पूर्णतः प्रतिबन्धित किया जाता है। परीक्षा केन्द्रों के आस-पास परीक्षावधि में ध्वनि विस्तारक यन्त्रों का प्रयोग प्रतिबन्धित किया जाता हैं। परीक्षाओं के दृष्टिगत समाज विरोधी तत्वों एवं परीक्षा केन्द्रों के आस-पास नकल गति विधियों में संलिप्त बाह्य व्यक्तियों को प्रतिबन्धित किया जाता है। आदेश का उल्लंघन होने पर विधिक कार्यवाही करते हुए दण्डित किया जाय। परीक्षा केन्द्रों पर तैनात सुरक्षा कर्मियों के अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्रकार के शस्त्रादि लेकर परीक्षा स्थल पर जाना प्रतिबन्धित है तथा इसका उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को भारतीय दण्ड संहिता की धारा-188 के अन्तर्गत दण्डित करने की कार्यवाही की जाये। परीक्षा केन्द्रों पर तैनात केन्द्र अधीक्षक/अध्यापक सुनिश्चित करेंगे कि परीक्षा अवधि में किसी व्यक्ति/व्यक्तियों द्वारा परीक्षा से संबद्ध किसी कार्मिकों के प्रति अपराधिक/धमकी भरे व्यवहार किये जाने पर तत्काल संबंधित मजिस्ट्रेट को सूचित करेंगे। सभी थानाध्यक्ष सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी व्यक्ति जनपदीय सीमा के अन्तर्गत अनुचित मुद्रण, फोटो स्टेट तथा अवैध प्रकाशन कर परीक्षार्थियों/अभ्यर्थियों एवं अन्य किन्ही भी व्यक्तियों को गुमराह नही करेगा। परीक्षार्थियों द्वारा परीक्षा केन्द्र परिसर के अन्दर सेलुलर फोन, पेजर या अन्य कोई इलेक्ट्रोनिक वस्तु लाने-ले-जाने को प्रतिबन्धित किया जाता है जब तक कि इस प्रकार की कोई सामग्री परीक्षा केन्द्र के अन्दर लाने की अनुमन्यता न हो। सरकार द्वारा पॉलिथीन, प्लास्टिक पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा होने के कारण कोई भी व्यक्ति पॉलिथीन, प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करेगा। उपरोक्त वर्णित आदेश में शर्ताें का उल्लंघन भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 188 के अन्तर्गत दण्डनीय होगा। सी.आर.पी.सी. की धारा 144 का यह आदेश जनपद में 11 जनवरी, 2023 तक प्रभावी रहेंगा।