गुरुवार, 17 मार्च 2016

पिता के बचाव में, खुशवंत सिंह की बेशर्मी



मेरे पिता ने तो सिर्फ भगत सिंह की शिनाख्त की थी। उसे फांसी हो गई तो इसमें उनका क्या कसूर…? : खुशवंत सिंह

भगत सिंह के खिलाफ गवाही देने वाले ‘ सर ‘ शोभा सिंह के नाम पर नई दिल्ली के विंडसर प्लेस का नामकरण करने की दिल्ली और केंद्र सरकार की कोशिशों के विरुद्ध मीडिया दरबार की मुहिम पर अभूतपूर्व रिस्पॉन्स मिल रहा है। देश भर से लोगों की प्रतिक्रियाएं न सिर्फ इस वेबसाइट पर बल्कि फेसबुक, ऑरकुट व गूगल प्लस पर भी बड़ी तादाद में आ रही हैं। हजारों लोग हर दिन इन लेखों के तथा उनपर हुई टिप्पणियों को पसंद कर रहे हैं और खुद ही इसे विभिन्न संचार माध्यमों पर प्रचारित कर रहे हैं।
खुशवंत सिंह और उनके पिता ‘ सर ‘ शोभा सिंह
जहां इस सीरीज़ के प्रकाशित होने से आम पाठक सर शोभा सिंह के लिए अपमानजनक टिप्पणियां कर रहा है, वहीं कई ऐसे भी हैं जो खुशवंत सिंह तथा उनके पिता को पाक-साफ ठहरा रहे हैं।
क्योंकि खुशवंत सिंह ने अपने कॉलम में यह दावा किया है कि नई दिल्ली सिख बिल्डरों को उनका कर्ज़ नहीं चुका रही है, इसलिए हमने कुछ नामचीन सिख हस्तियों से इस मसले पर बात की।
एमएस बिट्टा
कांग्रेस नेता मनिंदर जीत सिंह बिट्टा ने दिल्ली सरकार के इस कदम को बेहद अफसोस-जनक और गैर जरूरी करार दिया। उन्होंने मीडिया दरबार से बातचीत करते हुए कहा कि वे ऐसा हरगिज़ होने नहीं देंगे और सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करेंगे। बिट्टा ने कहा कि विंडसर प्लेस से उन्हें खास लगाव है क्योंकि उसी चौराहे पर उनपर हमला हुआ था।
शहीद भगत सिंह सेवा दल के अध्यक्ष व दिल्ली के निगम पार्षद जीतेंद्र सिंह शंटी ने भी सरकार के इस कदम का विरोध किया है। उन्होंने बताया कि
जितेन्द्र सिंह शंटी
जल्दी ही उनका सेवा दल विंडसर प्लेस और संसद पर धरना देने की तैयारी कर रहा है।
उधर कुछ हस्तियां ऐसी भी हैं जो इतिहास को सिरे से नकारने मं लगी हैं। दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटि के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना  ने
परमजीत सरना
कहा कि उन्होंने पूरा इतिहास खंगाल लिया है, लेकिन इस तथ्य में कोई दम नही मिला कि शोभा सिह ने भगत सिंह के खिलाफ गवाही दी थी। हालांकि उन्होंने मीडिया दरबार को यह भरोसा दिलाया कि जैसे ही उन्हें ठोस सुबूत मिल जाएंगे, वह भी इस मुहिम में खुल कर साथ देंगे। यह अलग बात है कि बार-बार संपर्क करने और इतिहास की किताबों के सदर्भ देने के बावजूद सरना ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया।
दिलचस्प बात यह है कि खुद खुशवंत सिंह ने  कुबूल किया है कि उनके पिता ने भगत सिंह के किलाफ गवाही दी थी। उन्होंने यह स्वीकारोक्ति 1997  में मचे ऐसे ही हंगामे के बाद अंग्रेजी पत्रिका आउटलुक की एक प्रशनोत्तरी में की थी। यह स्वीकारोक्ति 13 अक्तूबर सन् 1997 के  अंक में छपी थी। हिंदी पाठकों की सुविधा के लिए सवाल-जवाब का हिंदी अनुवाद भी साथ ही प्रकाशित किया जा रहा है:-
Did you know about the existence of records where your father deposed against Bhagat Singh?
(क्या आपको उन दस्तावेज़ों का पता था जिनके मुताबिक आपके पिता ने भगत सिंह के खिलाफ़ गवाही दी थी?)
Of course, I knew.It was an open trial.
(निस्संदेह, मुझे पता था। यह एक खुला मुकद्दमा था।)

Were you aware of these events as they unfolded?
(क्या जो बातें सामने आईं उनका आपको पता था ?)
All this was published openly in the papers.
(यह सबकुछ खुलेआम अखबारों में छप चुका था।)

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