शनिवार, 3 सितंबर 2016

क्यों रुक नहीं रहीं किसानों की आत्महत्याएँ











विदर्भ
विदर्भ में पिछले 16 महीनों में 1000 किसान आत्महत्या कर चुके हैं
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में कर्ज़ में डूबे चार और किसानों ने आत्महत्या कर ली है और इसी के साथ इस क्षेत्र में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या 1000 हो गई है.
आत्महत्याओं का यह ताज़ा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पूरा देश दिवाली का पर्व मना रहा है.
एक अनुमान के मुताबिक पिछले वर्ष जून से लेकर अभी तक 1000 किसान आत्महत्या कर चुके हैं.
जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं के सामने आने की एक वजह यह भी है कि राज्य सरकार इन किसानों से कपास खरीदने में देर कर रही है.
उधर किसानों ने भी माँग की है कि सरकार को उनसे जल्द ही फसल ख़रीद लेनी चाहिए और उसके बदले में उन्हें उचित दाम दिया जाना चाहिए.
किसानों का कहना है कि अगर सरकार उनसे तुरंत कपास नहीं ख़रीदती है तो स्थितियाँ और भी बदतर हो सकती हैं.
ग़ौरतलब है कि यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर कपास की खेती के लिए जाना जाता है पर पिछले 16 महीनों से यहाँ किसानों की आत्महत्या के मामले लगातार सामने आ रहे हैं.
चिंता
किसानों की आत्महत्याओं से संबंधित विवरण अपने पास रखने वाले किशोर तिवारी बताते हैं कि इस बार फसल के समय की स्थितियाँ पिछले वर्ष की तुलना में और ज़्यादा चिंताजनक हैं.
 अभी फसल का समय ख़त्म भी नहीं हुआ है और मरने वालों की तादाद 464 हो चुकी है. पिछले वर्ष फसल के समय में केवल 77 किसानों ने आत्महत्या की थी
किशोर तिवारी
वो बताते हैं, "अभी फसल का समय ख़त्म भी नहीं हुआ है और मरने वालों की तादाद 464 हो चुकी है. पिछले वर्ष फसल के समय में केवल 77 किसानों ने आत्महत्या की थी."
तिवारी बताते हैं कि सरकारी ख़रीद केंद्र अभी तक बंद हैं और इस वजह से किसान अपनी फसल कम दामों पर बिचौलियों के हाथों बेचने के लिए मजबूर हैं.
कपास के लिए मौजूदा दाम 20,000 रूपए प्रति क्विंटल है. किसानों का कहना है कि इसे बढ़ाकर 27,000 रूपए प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए.
ग़ौरतलब है कि लगभग 32 लाख की आबादी वाले इस क्षेत्र में 90 प्रतिशत ग्रामीण कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं.

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