गुरुवार, 27 अप्रैल 2023

जीवन का एक रूप संगीत भी / अशोक मेहरा


संगीत हमारे जीवन का अटूट हिस्सा है । संगीत आत्मा की तृप्ति है । संगीत हमारे दैनिक जीवन की झंकार है ,



 और भी बहुत कुछ लिखा और कहा गया है संगीत के बारे में । संगीत की उत्पत्ति कब और कहां हुई इसके बारे में कोई ठोस प्रमाण तो उपलब्ध नहीं है । लेकिन फिर भी ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि मनुष्य जाति की सभ्यता जिस वक्त नए प्रयोग करके कुछ सीख रही थी , तभी पाषाण टुकड़ो उपजी ध्वनियों ने संगीत को जन्म दिया । धीरे-धीरे मनुष्य में सभ्यता का विकास होता गया और उनकी जीवन शैली में भी परिवर्तन हुआ । इंसान धीरे-धीरे भाव प्रधान होने की प्रक्रिया को समझने भी लगा । ईश्वर के प्रति कुछ लगाव भी पैदा होने लगा । प्रभु स्तुति के लिए गाए हुए भजन संगीत के माध्यम से सजाए जाते थे । युगो युगो से चलता हुआ संगीत अनेकों परिवेश से गुजरता हुआ आज वर्तमान में भी अपना अस्तित्व कायम किए हुए हैं । लगभग सभी दौर में गीतकार , संगीतकार और गायक आते रहे और जाते रहे । जिन्होंने संगीत की अखंड साधना की , उन्होंने एक ऐसा मुक़ाम हासिल कर लिया जिसे लोग आज भी याद करते हैं । ऐसा कहा जाता है कि तानसेन ने अपनी गायन शैली से बुझे हुए दीपको  को जला दिया था । लोग गायन की शक्ति को देखकर आश्चर्यचकित रह गए । कितना शक्तिशाली है संगीत का प्रभाव । कुछ इस तरह का भी अनुसंधान किया गया है कि जो पेड़ पौधे खाद पानी के बावजूद सही ढंग से पनप नहीं पा रहे थे ,उन पर संगीत का प्रयोग किया गया और कुछ हफ्तों में उनके उगने की रफ्तार काफी तेज पाई गई । 

इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि संगीत हमारे लिए एक शक्ति है , उपहार है ,औषधि है , उपचार है । क्योंकि आप देखिए कि मां की लोरी में वह प्रभाव शामिल है Iजिसको सुनकर एक बालक भी धीरे से निंदिया के आंचल में चला जाता है । एक बेचैन मन बांसुरी की सुरीली तान सुनकर शांति का अनुभव करने लगता है । और भी अनेकों उदाहरण हमें इतिहास में पढ़ने को मिलते हैं । आज के दौर में भी हम संगीत के बिना जीवन की कोई कल्पना नहीं कर सकते । यह संगीत हमें विभिन्न स्रोतों से प्राप्त होता है जैसे- सुगम संगीत , शास्त्रीय  संगीत फिल्मों में दिए जाने वाला संगीत और भी अनेकों तरह के संगीत है , जो हमारे जीवन पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं ! मैं यह भी कहूंगा कि सभी अच्छे गायक दुनिया में अपना नाम नहीं कमा पाते! जिसका कारण एक उचित प्लेटफार्म का अभाव होना भी है । क्योंकि कुछ लोग तो गायन के लिए इतने शौकीन होते हैं कि वह अपना समय संगीत और गायन की साधना में बिताते हैं । वह भले ही नामचीन कलाकार ना बन सके हो , लेकिन अपने हुनर के कारण अपने अंदर एक आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं । 

मेरे एक मित्र हैं जो पेशे से वकील है । लेकिन संगीत साधना का इतना अधिक शौक है कि वह समय मिलते ही संगीत और गायन की साधना में लग जाते हैं । बरसों बरस से वह अपने इस रुचि को जीवित रखे हुए हैं । आज भी उम्र के दौर की परवाह करे बिना गीत संगीत में समय बिता रहे हैं । चूकिं आज का युग डिजिटल युग है , और मोबाइल में ऐसे-ऐसे ऐप आ चुके हैं जिसके माध्यम से आप गीत को अपने स्क्रीन पर देखते हुए , उसमें दिए गए संगीत को सुनते हुए , अपनी आवाज में गीत रिकॉर्ड कर सकते हैं ।

 मेरे मित्र का नाम है श्री अनिल चंचल, जो कि बिहार के औरंगाबाद जिले से हैं । इनसे मेरी मुलाकात औरंगाबाद में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के माध्यम से हुई । मुझे जब इनके बारे में विस्तृत जानकारी मिली तो मैं भी खुद को इनका मित्र बनने से रोक नहीं पाया । आजकल यह मुंबई में निवास कर रहे हैं । साथ ही साथ अपनी वकालत को भी समय दे रहे हैं मगर संगीत साधना को भूलते नहीं । कुल मिलाकर अगर निष्कर्ष निकाले तो हम देखेंगे की जैसे शरीर के लिए भोजन , हवा  व पानी आवश्यक है उतना ही दिलो-दिमाग एवं आत्म शांति के लिए संगीत की भी आवश्यकता होती है ।

 ऐसा भी देखा गया है कि जो कलाकार गीत संगीत गायन आदि में अपने को व्यस्त रखते हैं , वह नकारात्मक जीवन से बहुत दूर रहकर एक सुंदर सच्चा सकारात्मक जीवन जीते हैं ,और अन्य लोगों के मुकाबले बीमार भी कम पड़ते हैं । इसका अभिप्राय यही हुआ कि  संगीत से हम जीवन को एक खुशहाल रूप में देख सकते हैं । लिखने वालों ने बहुत कुछ लिख दिया है , संगीत इतना गहरा समुंदर है कि इस पर जितना लिखा जाए उतना ही कम है । मैं अपने इन शब्दों से उन सभी कलाकारों को शुभकामनाएं देना चाहूंगा जो किसी न किसी रूप से इस कला से जुड़े हैं । संगीत हमें प्रेम ,भाईचारा, सद्गुण, सहजता , सहनशीलता  आदि गुण सिखाता है ।


*अशोक मेहरा*

फ़िल्म क्रिटिक ,

रंगकर्मी , निर्देशक , फ़िल्म फेस्टिवल्स ज्यूरी ।



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें