मध्य प्रदेश के
व्यापमं घोटाले की जांच के दौरान और उसके शुरू होने के पहले भी कई ऐसी
मौतें हुईं हैं जिन को लेकर न सिर्फ विपक्षी पार्टियों ने बल्कि तमाम
व्हिसल ब्लोअर्स ने भी शिवराज सरकार पर निशाना साधा है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 34 ऐसी मौतें हो चुकीं हैं जिनका कुछ न कुछ लेना व्यापमं घोटाले की जांच से था.पढ़िए उन मौतों के बारे में.
हैरान करने वाली बात ये भी है कि मध्य प्रदेश सरकार ने पहले जिन 25 लोगों की सूची पर हामी भरी थी उनमें सभी मृत व्यक्तियों को 'रैकेटियर' बताया गया था.
1. अनुज उइके: 22 साल के अनुज की मृत्यु मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले की होशंगाबाद रोड पर एक कार हादसे में हुई थी. एसटीएफ़ जांच के अनुसार 'परिजनों को आरोपी की मृत्यु में कोई शंका नहीं है'.
2. अंशुल सचान: 24 साल के अंशुल सचान भी अनुज के साथ थे जब उनकी कार दुर्घटना की शिकार हुई और उनकी भी मौत हो गई. अंशुल ने 2009 में सागर मेडिकल कॉलेज में दाखिल लिया था और जांचकर्ताओं के अनुसार वे एक 'दलाल' थे.
4. विकास सिंह ठाकुर: जांचकर्ताओं के अनुसार विकास सिंह ठाकुर की मौत की वजह थी अत्याधिक शराब पीने के बाद एस्पिरिन दवाई खा लेना. ग्वालियर, सागर और जबलपुर में व्यापमं घोटाले से जुड़े तीन मामलों की एफ़आईआर में इनका नाम शामिल था.
5. ज्ञान सिंह जाटव: 29 साल के ज्ञान सिंह जाटव की मौत अत्याधिक शराब पीने के कारण हुई क्योंकि इनका लिवर ख़राब हो गया था. ये तथ्य एसटीएफ़ की रिपोर्ट में दर्ज है. इन पर व्यापमं से जुड़े कम से छह मामले दर्ज थे.
6. नम्रता डामोर: नम्रता का नाम उस लिस्ट में नहीं था जो एसटीएफ़ ने तैयार की थी.
टीवी पत्रकार अक्षय सिंह इनकी मौत की जांच में जुटे थे जब उनके घर पर तबीयत खराब होने के बाद अक्षय की मौत हो गई.
जनवरी 2012 में नम्रता की मौत को पुलिस ने आत्महत्या क़रार दिया था. लेकिन अक्षय की मौत के बाद नम्रता का पोस्टमार्टम करने वाले एक डॉक्टर ने कहा है कि 'उन्होंने जो रिपोर्ट दी थी उसके अनुसार नम्रता की मौत हिंसा के ज़रिए दम घुटने के कारण हुई थी'.
9 . आदित्य चौधरी: चौधरी को व्यापमं घोटाले की जांच के दौरान उनके दूसरे नाम 'रवि पिप्पल' के नाम से भी संबोधित किया गया है. एसटीएफ़ की रिपोर्ट के अनुसार इन्होंने साल 2012 में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली और इनके परिवार वालों को इनकी मौत पर कोई संदेह नहीं है.
10. अरविंद शाक्य: जांचकर्ताओं के अनुसार 'रैकेटियर' अरविंद जबलपुर मेडिकल कॉलेज से बाहर अपने मित्रों के साथ भ्रमण करने गए थे. लौटते समय एक बस कंडक्टर से टिकट को लेकर हुई झड़प के दौरान कंडक्टर के धक्का दिए जाने की वजह से बस से बाहर गिरने से इनकी मौत हो गई.
11 . तरुण मचार: 19 साल के तरुण भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के छात्र थे और पुलिस ने इन पर अपनी पीएमटी परीक्षा देने के लिए किसी दूसरे का उपयोग करने का आरोप लगाया था. पुलिस के अनुसार इनकी मौत एक सड़क हादसे में हुई और ये अपने एक मित्र के साथ बाइक पर पीछे बैठ कर कहीं जा रहे थे.
14. प्रेमलता पांडे: नेहरूनगर, भोपाल की रहने वाली मेडिकल छात्रा प्रेमलता पांडेय के पति अरविंद ने एसटीएफ़ को बताया कि उनकी पत्नी की मौत मई 2013 में लिवर कैंसर के कारण हुई थी.
15 . आशुतोष तिवारी: जांचकर्ताओं की रिपोर्ट में 'रैकेटियर' कह कर संबोधित किए गए आशुतोष की मौत 'शराब पीने से संबंधित' बीमारी की वजह से टीकमगढ़ में हुई थी.
16. देवेंद्र नागर: मध्य प्रदेश में पुलिस कॉन्स्टेबलों की भर्ती के दौरान फर्ज़ीवाड़े का आरोप लगाया गया था देवेंद्र पर. देवेंद्र अपनी बाईक पर जा रहे थे और एक सड़क हादसे में उनकी मृत्यु हो गई.
17 . आनंद सिंह यादव: 'रैकेटियर' बताए गए, फतेहपुर-उत्तर प्रदेश के रहने वाले, आनद सिंह यादव की मृत्यु भी रायसेन में हुई एक सड़क दुर्घटना के दौरान हुई थी.
20 . दीपक जैन: जांचकर्ताओं ने व्यापमं घोटाले में 'रैकेटियर' क़रार दिया था. दीपक की मौत भी फ़रवरी 2014 में ग्वालियर में हुई एक सड़क दुर्घटना में हुई थी.
21 . विकास पांडे: 'रैकेटियर' बताए गए और उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद के रहने वाले विकास की मौत अपने घर में ब्रेन हैम्रेज के कारण हुई बताई गई.
22. रवींद्र प्रकाश सिंह: सिंगरौली, मध्य प्रदेश के रहने वाले रवींद्र के बारे में एसटीएफ़ का कहना है कि 'उनकी मौत ज़हर पीने के कारण हुई'. इनके ऊपर पीएमटी घोटाले में शामिल होने का आरोप था.
23. नरेंद्र राजपूत: जांच के दौरान 'रैकेटियर' बताए गए नरेंद्र की मौत जुलाई, 2014 में झाँसी में 'बीमारी की वजह से' बताई गई.
26 . रामेंद्र सिंह भदौरिया: रामेंद्र का नाम उस सूची में नहीं है जिसमे अभियुक्तों को 'रैकेटियर' बताया गया है लेकिन इनके ऊपर दर्ज हुए मामले में इन्हें कई बार पूछताछ के लिए बुलाया गया. कुछ महीनों के बाद इन्होंने आत्महत्या कर ली. हालांकि एसटीएफ़ ने मौत के अगले दिन कहा था कि उसने रामेंद्र को क्लीन चिट दे दी थी.
27 अमित सागर: मेडिकल के छात्र अमित का शव शिवपुरी, मध्य प्रदेश में फरवरी 2015 में मिला था. अमित का नाम कथित तौर से एक दूसरे अभियुक्त ने लिया था और जब जांचकर्ताओं ने अमित तक पहुँचने की कोशिश की तो पता चला कि उनकी मौत हो चुकी है.
28 . शैलेश यादव: व्यापमं घोटाले की सबसे 'हाई प्रोफ़ाइल' मौत 50 साल के शैलेश की कही जा सकती है क्योंकि इनके पिता राम नरेश यादव मध्य प्रदेश के राज्यपाल हैं. एसटीएफ़ ने इनके ख़िलाफ़ 'रैकेटियर' होने का मामला दर्ज किया था और इनकी मौत लखनऊ में अपने पिता के निवास पर हुई. मौत का कारण हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक बताया गया है.
31 . विजय सिंह पटेल: व्यापमं घोटाले से जुड़े दो मामलों में विजय के खिलाफ केस दर्ज किया गया था और वे पेशे से फार्मासिस्ट थे.
अप्रैल, 2015 में छत्तीसगढ़ के कांकेर में उनका शव एक लॉज में मिला था और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि उनके शरीर में ज़हर की थोड़ी मात्रा थी. मामले को आत्महत्या के तौर पर दर्ज किया गया है.
32. राजेंद्र आर्य: राजेंद्र आर्य सागर मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर थे और इन पर परीक्षार्थियों की 'नकल में मदद' कराने का आरोप था.
साढ़े छह महीने जेल में बिता कर ज़मानत पर आने के बाद ग्वालियर के रहने वाले डॉक्टर आर्य की तबीयत खराब हुई और दो दिनों के भीतर ही उनकी अस्पताल में मौत हो गई.
34. रमाकांत पांडे : रमाकांत पांडे मध्य प्रदेश पुलिस में कॉन्स्टेबल थे.
उनकी मौत के कुछ हफ़्ते पहले कथित तौर पर एसटीएफ़ ने उनसे पूछताछ की थी. 6 जुलाई, 2015 को 35 वर्षीय रमाकांत का शव टीकमगढ़ में एक सीलिंग फैन पर लटका हुआ पाया गया था. दर्ज हुई रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने आत्महत्या की थी.
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