शुक्रवार, 4 नवंबर 2022

दिल्ली के मुख्य सचिव को पीएमओ निर्देश की भी परवाह नहीं

 


निगम के करप्ट बॉय सिंघल को बचाने में लगी हैं केजरीवल सरकार 


रामफल सिंह /  सुधीर कुमार 


कहा और माना जाता हैं की किसी भी सरकारी कर्मचारी के पुरे सेवाकाल में एक शिकायत भी भारी पड़ता हैं इससे उसके बेदाग सर्विस बुक में दाग  लग जाता हैं और निर्दोष करार होने के बावजूद सवालिया निशान तो लग ही जाता हैं.   मगर 450 से भी अधिक शिकायतों वाले दागदार इंसपेक्टर मनमोहन सिंघल को इसकी कोई परवाह नहीं हैं.  यह अपने तमाम आला अधिकारियो के नाक का इतना प्यारा बाल हैं की इसको बचाने के लिए पीएमओ से आए पत्र और निर्देश तक से भी कोई परवाह नहीं हैं.  

उल्लेखनीय हैं की साप्ताहिक राष्ट्रीय शान और दैनिक राष्ट्रीय शान में इस भ्रष्ट इंसपेक्टर  के बारे में खबर छापी  गयी इसके बावजूद दिल्ली सरकार ने LG  से कार्रवाई  के लिए कोई दवाब नहीं बनाया.  पीएमओ ने पत्रांक - पीएमओ / D  / 2021/ 0113037 ./ दिनांक....22042021 भेज कर  पीएमओ के सेक्सन अधिकारी आशीष कुमार मिश्रा ने मुख्य सचिव को मनमोहन सिंघल पर एक्शन की सूचना RTI  कार्यकर्त्ता दर्शनलाल को भेजने और पोर्टल पर अपलोड करने का भी निर्देश दिया..  पीएमओ पत्र के बाद करप्ट बॉय के ऊपर एक्शन लेने के नाम पर उसका  ट्रांसफर कर दिया गया.,मगर इसको    ट्रांसफर एक तरह से उसके मौज  का कारण बन गया.   फैक्ट्री लाइसेंस विभाग  से बाहर होकर वह अपने दलालों के माध्यम से जमकर किसी इंस्पेक्टर को लाने और हटाने के काम में लग गया.   सिंघल  के इस काम में  कार्मिक विभाग के प्रभारी जिन्हें फैक्ट्री  लाइसेंस विभाग का अतिरिक्त भार दिया गया था के साथ मिलकर ट्रांसफर करने कराने के काम में जुड़ गया  इस जोड़ी के खिलाफ निगम में जमकर शिकायतों का दौर चला, मगर  उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों और  पार्षद  सिंघल  को बचाने में लगे हैं.  


 आरटीआई कार्यकर्ता दर्शन लाल ने निगम के   करप्शन के खिलाफ शिकायतों  का दौर चलाया   उसी सिलसिले में प्रधानमंत्री कार्यालय को भी कार्यालय को भी शिकायत भेजी.   जिस पर संज्ञान लेते हुए पीएमओ ने दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर दर्शन लाल की शिकायत पर फौरन एक्शन लेने का निर्देश दिया,   साथ  ही  कार्रवाई को  पोर्टल पर अपलोड करने का भी निर्देश दिया मगर मुख्य सचिव द्वारा निगम इंस्पेक्टर मनमोहन सिंघल का ट्रांसफर कर कराया गया मगर इस कार्रवाई को पोर्टल पर आज तक नहीं डाला गया हैं  

  इस संवाददाता द्वारा सरकारी पोर्टल को छान मारने के बावजूद  एक्शन की   सक्रियता का कोई सबूत सरकारी पोर्टल पर नहीं मिला.  उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री  कार्यालय को भी सचिव द्वारा ट्रांसफर की प्रतिनिधि भेजी गई,   मगर सीएमओ दिल्ली द्वारा इसकी प्रतिलिपि एलजी  कार्यालय को नहीं भेजी जा स्की ताकि निगम  के  प्रमुख एलजी इस बाबत कोई रिपोर्ट मंगा सके.  

 

 गौरतलब है कि शीला दीक्षित सरकार द्वारा दिल्ली नगर निगम को तीन भागों में बांटा गया था    निगम के विभाजन वजन की काली कहानी पूरी दिल्ली देख चुकी है और अब फिर से तीनो  नगर निगम को भंग करके  पहले की तरह  राजधानी दिल्ली में  मैं केवल एक  दिल्ली नगर निगम  की शासन व्यवस्था बहाल कर दी गई है निगम एक होने के बाद से  फैक्ट्री लाइसेंस विभाग  का कार्यभार बढ़ गया है,   मगर विभाग से दूर होने के बावजूद निगम इंस्पेक्टर मन मोहन सिंघल का  दबदबा और रुतबा पहले की तरह ही बरकरार है अब देखना यह है कि   जिस तरफ इंस्पेक्टर का तबादला से ज्यादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी  कुछ नहीं कर सके क्या ऐसे अधिकारियों पर अपने आप को ईमानदार कहने वाली आप सरकार भी कोई कार्रवाई करेगी या नगर निगम में इस करप्शन बॉय को रोकने का माद्दा दिल्ली सरकार में भी नहीं हैं. .  

आरटीआई कार्यकर्ता दर्शन लाल ने बताया सिंघल की पूरी फाइल  ईडी और सीबीआई को भेज दी जाएगी  ताक़ि   उसकी बेनामी संपत्तियों और अवैधतौर पर उसके इशारे पर काम करने वाले निगम अधिकारियो से उसकी काली कमाई के संबंधों का राज खुल सके.  

 मामला अब आप सरकार के पाले में हैं कि जो काम पीएमओ नहीं करा सकी  उसको अंजाम तक आप ले जाकर करप्शन फ्री दिल्ली कानारा बुलंद करें या खुद को सिंघल और निगम कर सामने लाचार और पंगु ही नजर आए. करप्ट बॉय सिंघल कि बेधड़क रफ़्तार के सामने सरकारी व्यवस्था पंगु साबित हो रही हैं  i

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