बुधवार, 12 अक्तूबर 2022

कामसूत्र ( धर्म, विज्ञान एवं दर्शन शास्त्र)

 कामसूत्र ( धर्म, विज्ञान एवं दर्शन शास्त्र) 

(1) पति और पत्नि को चाहिए कि जब किसी को सहवास की इच्छा हो तो अपने साथी को समय पूर्व सूचित करे ताकि वह इसके लिए स्वयं को शारीरिक एवं मानसिक रुप से तैयार कर सके.


(2) सहवास से पूर्व शोंच क्रियाओं से निवृत हो लेना तथा स्नान करना अति उत्तम है.स्नान न कर सको तो ब्रश करें हाथ पैर तथा मुंह धो लें और खुशबू लगा लें.


(3) सहवास के लिए उत्तम पहर रात का आखरी पहर है क्योंकि इस समय पेट भी खाली होता है तथा दिनभर की थकान से दोनों सहयोगी फ्रेश हो चुके होते है.परंतु अन्य समय पर यह अवश्य ध्यान दें कि पेट भरा न हो अतः सहवास से लगभग तीन चार घंटे पहले भोजन कर लें.


(4) संभोग का प्राकृतिक आसन तो यह है कि स्त्री सीधी लेटे तथा पुरुष ऊपर रहे.यह दोनों के लिए सुविधा जनक एवं लाभदायक है.परंतु आपसी सहमति से अन्य आसन भी प्रयोग किये जा सकते हैं.परंतु खड़े हो कर संभोग करने से शारीरिक क्षति होती है तथा स्त्री पुरुष के ऊपर रहे तो कभी कभी पुरुष स्पर्म पूरी तरह निकल नही पाता.जिसके कारण पुरुष जननांग में सूजन हो सकती है तथा बुखार हो सकता है.


(5) यौन संबंध स्थापित करने से पूर्व अर्ध नग्न अवस्था में हो कर दोनों एक दूसरे के विशेष अंगो को सहला कर अथवा चूमकर उत्तेजित करें न कि जानवरों की भांति व्यवहार करे.


(6) अप्राकृतिक यौन सम्बन्धों से बचे जैसे कि मुख मैथुन अथवा गुदा मैथुन क्यों कि मुख मैथुन और गुदा मैथुन से महिला को किसी प्रकार के आनंद की अनुभूति नही होती है. कुछ  महिला एवं पुरुष इस तरह के संबंधों में आनंद के पक्षधर हैं परंतु यह उनकी गलत फहमी है.क्योंकि वह आनंद नही अपितु पुरुष वीर्य के गुदा में इंफेक्शन के कारण खुजली होने को मिटाना है और यह गंभीर हो सकता है.गुदा मैथुन से शोंच स्थान में कसाव समाप्त हो जाता है.जिसके कारण असमय शौंच के कारण अन्तः वस्त्र खराब हो सकते है.


(7) रतिक्रिया के पश्चात महिला एवं पुरुष कुछ समय उसी स्थिति में रहैं.फिर अलग हो कर यौनांगों को साफ कपड़े से साफ करें. दोनों पैशाब करें यथा संभव स्नान करें अथवा यौनांगों को स्वच्छ पानी से धोएं. सहवास के तुरंत बाद पानी न पिएँ.परंतु स्वच्छ हो कर दूध खजूर गुड़ या अन्य शक्ति वर्धक व्यंजनों में से कुछ खा लें.


(8) पति और पत्नि को चाहिए कि मासिक धर्म के समय संभोग न करें क्योंकि इस समय रक्त स्त्राव के कारण महिला की शारीरिक और मानसिक स्थिति सामान्य नही होती.


Medical science के अनुसार इस समय रक्त के साथ गंदे और विशैले पदार्थों का स्राव होता रहता है अतः संभोग के समय स्पर्म के क्रिया करने पर दोनों को गंभीर और लाईलाज बीमारी हो सकती हैं. कभी कभी ऐसा भी होता है कि मासिक धर्म भी रुक जाता है और घर्षण के कारण योनि में सूजन और खुजली हो जाती है तथा AIDS जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है.


(9) दोनों सहयोगी स्वस्थ और सहमत हों और एक से अधिक बाद यौन संबंध बनाने के इच्छुक हो तो लगभग आधे से एक घंटे का अंतराल अवश्य रखें ताकि इस समय में यौनांगो को स्वच्छ कर सके. इसके अतिरिक्त यौन संबंधों में कम से कम एक दिन का अंतराल, मासिकधर्म के समय तीन से सात दिन का अंतराल तथा प्रेग्नेंसी के पश्चात कम से कम डेढ दो महीने का अंतराल रखे.शिशु की दुग्ध पान अवस्था में कम से कम सहवास करे.क्योंकि फिर से गर्भधारण करने पर दूध खराब हो जाता है जिसके कारण बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है तथा सूखा नामक रोग हो सकता है.गर्भधारण से बचने के लिए मासिक चक्र से फ्री होने के के पहले पन्द्रहवें तथा मासिकधर्म होने से पहले वाले दिन संभोग करें.


(10) यौन संबंध बनाने से पहले तंबाकू धुम्रपान शराब अथवा उत्तेजना के लिए दवाओं का प्रयोग न करें.यह क्षणिक उत्तेजना शनैः शनैः आपको नपुंसकता की और ले जाती है.



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