बुधवार, 24 अगस्त 2016

दुल्हन की आस में हरियाणा के लोग बेहाल





प्रस्तुति- स्वामी शरण 

(14 Sep) कोख में ही जांच कर मादा भ्रूण को मार डालने के सिलसिले से आज यह नौबत आई है. भारत के कई गांवों में कुंवारे बैठे हैं और शादी के लिए लड़की नहीं मिल रही. दूर दराज के राज्यों और अपहरणकर्ताओं तक से खरीदी जा रही हैं दुल्हनें. हरियाणा के सोरखी गांव के रहने वाले साधूराम बर्नवाल शादी करना चाहते थे. परिवार ने पारंपरिक भारतीय अंदाज में संबंधियों, पड़ोसियों मंदिर के पंडित को भी उनकी इस इच्छा से अवगत करा दिया. लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी अपनी जाति-बिरादरी की कोई लड़की नहीं मिली. हरियाणा, जहां लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या देश में सबसे कम है, ये स्थिति तो आनी ही थी. उत्तर भारत के कई राज्यों में गर्भ में ही भ्रूण के लिंग का पता कर, मादा भ्रूण को मार डालने का चलन है. आर्थिक कारणों से कोई लड़की नहीं पैदा करना चाहता. एक दोस्त की मदद से बर्नवाल को घर से कुछ 2,700 किलोमीटर दूर एक लड़की मिली. लड़की दक्षिण भारतीय राज्य केरल की थी और शादी को तैयार भी. लेकिन एक अलग भाषा और संस्कृति से आने वाली दुल्हन हरियाणा की अपनी नई जिंदगी को लेकर घबराई हुई थी. बर्नवाल की यह शादी करीब 10 साल पहले हुई. इससे उनका गांव सोरखी सकते में था. लेकिन तबसे लेकर अब तक केवल इस गांव में ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में इस तरह की घटनाएं आम हो चुकी हैं. हरियाणा के हालात करीब 7,000 लोगों की आबादी वाला सोरखी गांव राजधानी दिल्ली से केवल 150 किलोमीटर ही दूर है. यहां पिछले कितने ही सालों से कुछ ज्यादा बदला हुआ नहीं दिखता. केवल एक चीज काफी बदली है और वह है, लड़कियों की संख्या में भारी कमी. गांव के रिटायर्ड स्कूल टीचर ओम प्रकाश बताते हैं, "केवल सोरखी में ही इस समय 200 से 250 ऐसे जवान लड़के हैं जो शादी करना चाहते हैं लेकिन शादी के लिए लड़की ही नहीं मिल रही है." भारत में प्रीनेटल सेक्स निर्धारण टेस्ट पर 1994 में ही प्रतिबंध लग गया था. डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को भी सोनोग्राम करने पर मनाही है. लेकिन आज भी कई जगहों पर छुप कर ऐसा किया जाता है. हरियाणा में हालत सबसे असंतुलित है, जहां हर छह साल से कम उम्र के हर 1,000 लड़कों पर औसतन केवल 834 लड़कियां ही हैं. इसी उम्र के बच्चों में पूरे भारत का अनुपात 1,000 पर केवल 919 लड़कियों तक गिर गया है. शादी के लिए अपहरण शादी के समय भारी दहेज के बोझ के कारण आज भी कई भारतीय परिवार बेटियां नहीं चाहते. इसके अलावा वे शादी के बाद अपने पति के घर चली जाती हैं और माता-पिता की बुढ़ापे में देखभाल नहीं कर पातीं. इस कारण भी लोग लड़की पैदा कर उसके पालन पोषण और शादी तक का खर्च नहीं उठाना चाहते. बर्नवाल की शादी के साथ ही उनके गांव में केरल से दुल्हन लाने का एक चलन बन गया. इसके अलावा वहां बिहार और पश्चिम बंगाल से भी लड़कियों को लाया गया. केरल की लड़कियों ने हरियाणा के लड़कों से शादी का प्रस्ताव इसलिए मान लिया क्योंकि वे दहेज नहीं मांग रहे थे और शादी का खर्च उठाने को भी तैयार थे. आज महिलाओं की कमी के चलते कई मानव तस्कर लड़कियों को अगवा कर रहे हैं और दूसरे राज्यों में ले जाकर उन्हें बेच रहे हैं. केलव 2013 में ही 15 से 30 साल की ऐसी करीब 25,000 लड़कियों को अगवा कर शादी के लिए बेचे जाने के आंकड़े दर्ज हैं. आरआर/आईबी (एपी) Analytics pixel

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