सोमवार, 12 अप्रैल 2021

स्टार मेकर शानदार केदार शर्मा

 आज 12 अप्रैल को पुराने ज़माने के मशहूर निर्माता,निर्देशक,कहानीकार, पटकथा लेखक,संवाद लेखक, गीत कार स्व.केदार शर्मा जी के जन्मदिन पर सादर नमन करते हुए उनके फिल्मी जीवन पर एक संक्षिप्त विवरण नीचे दिया है...


*स्व.केदार शर्मा-जीवनी*

*संकलनकर्ता-संतोष कुमार मस्के*


1)- *जन्म-12अप्रैल 1910, नारोवाल,पँजाब में*

2)- *मृत्यु-29अप्रैल 1999,बम्बई महाराष्ट्र*

3)- *विधा-निर्माता,निर्देशक, कहानीकार,पटकथा लेखक, गीतकार*

4)- *प्रथम १)-फ़िल्म-गौरी 1943*

5)- *अन्य फिल्में* ....

     २)- *मुमताजमहल-1944*

     ३)- *धन्ना भगत-1945*

     ४)- *चाँद चहोरी-1945*

     ५)- *दुनिया एक सराय-1946*

     ६)- *नीलकमल-1947*

     ७)- *सुहागरात-1948*

     ८)- *नेकी और बदी-1948*

     ९)- *बावरे नैन-1950*

    १०)- *जोगन-1950*

    ११)- *गुनाह-1953*

    १२)- *छोरा छोरी-1954*

    १३)- *रँगीन रातें-1956*

   १४)- *हमारी याद आएगी1961*

6)- *कहानीकार के रूप में*

        १)- *चित्रलेखा-1964*

        २)- *काज़ल-1965*

----- *संतोष कुमार मस्के-संकलन से* -----

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*स्व.केदार शर्मा जी की फिल्मों से रफ़ी साहब के गाये चुनिंदा नग़मे*

*संकलनकर्ता-संतोष कुमार मस्के*


*फ़िल्म-चित्रलेखा*

१)-

मन रे तू काहे न धीर धरें,ओ निर्मोही, मोह न जाने,काहे का मोह करें- *एकल*

२)-

छा गए बादल नीलगगन में,धूल गया कजरा,साँझ ढले- *साथ आशा*

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*फ़िल्म-काज़ल*

३)-

छू लेने दो नाज़ुक होठो को,कुछ और नहीं बस जाम है ये,क़ुदरत ने जो हमको बक्शा है वो एक हसीं इनाम है ये- *एकल*

४)-

ये ज़ुल्फ़ अगर खुलके,बिखर जाए तो अच्छा- *एकल*

५)-

ज़रा सी और पीला दो भांग ओ जय बम भोला- *साथ आशा*

६)-

क़बीरा निर्भय राम जपे,महफ़िल में तेरी यूँ ही रहे- *साथ आशा*

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*फ़िल्म-बावरे नैन*

७)-

मेरे रूठे हुए बालमा,अजी रूठे हुए चँदा,चलो अब मान भी जाओ,हमारे पास तो आओ- *साथ आशा*

८)-

मोहब्बत के मारों का हाल दुनिया मे ये होता है,ज़माना उनपे हँसता है,नसीबा उनपे रोता है- *साथ आशा*

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*फ़िल्म-छोरा छोरी*

९)-

खाली जेबें हो,कड़की हो,मेरा दिल माँगे वो लड़की हो,हाये रे हाये,जिसके लिए मेरे दिल मे प्रेम की ज्वाला भड़की हो- *एकल*

१०)-

आ बेदर्दी बाला आ,प्रीत का कर हिसाब,कभी तू आँख बचाकर,कभी तू आँख मिलाकर- *साथ लता*

११)-

ये बता दें मुझे जिंदगी की फ़ातिमा, सामने तूने लूटा क्यूँ - *साथ सीता अग्रवाल*

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१२)-

बहुत आसान है चिलमन से लगाकर मुस्कुराना,बहुत मुश्किल है हाये सामने आकर नज़रें मिलाना- *रँगीन रातें* *साथ लता*

----- *संतोष कुमार मस्के-संकलन से* -----

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