रविवार, 19 जुलाई 2020

कृष्णासोबती


यशस्वी साहित्यकार #कृष्णासोबती
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जन्म – 18 फरवरी 1925 ई०
जन्म स्थान – गुजरात ( अब पाकिस्तान में )
मृत्यु -25 जनवरी 2019
संयमित अभिव्यक्ति और सुथरी रचनात्मकता से अपने लेखन का सृजन करने वाली कृष्णा सोबती का जन्म पाकिस्तान के गुजरात प्रांत में 18 फरवरी 1925 ई० को हुआ था ! भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद इनका परिवार दिल्ली में आकर रहने लगा और यहीं पर इन्होनें साहित्य की सेवा को करना आरम्भ कर दिया ! अपनी रचनाओं के माध्यम से कृष्णा सोबती ने नारी के उपर होने वाले विभिन्न प्रकार के अत्याचारों को उजागर किया उनकी विभिन्न समस्याओं के साथ उन्हें प्राप्त होनें वाले सामजिक अश्लीलता का बखूबी वर्णन किया ! इनकी रचना “जिंदगीनामा” के लिए 1980 में इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया और 1996 में साहित्य अकादमी का फेलो बनाया गया जो कि अकादमी का सर्वश्रेष्ठ सम्मान है ! इन्हें 2017 के प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया ! इनकी समस्त रचनाओं में सामाजिक और नैतिक बहसों की जो फिजा मिलती है वह पाठकों के दिलों पर छा जाने वाली है !
साहित्यिक परिचय –
साहित्य रचना में इन्होनें एक स्वत्रंत और मूल समस्याओं को उजागर करने का प्रयत्न किया अपनी रचनाओं के माध्यम से नारी अत्याचार और सामाज से जुड़ी अन्य मूल समस्याओं का उल्लेख इन्होनें किया है !’
रचनाये:-
#उपन्यास:-
1.डार से बिछुड़ी (1958)
2. सूरजमुखी अंधेरे के (1972)
3. जिंदगी नामा (1979)(साहित्य अकादमी पुरस्कार)
4. मित्रो मरजानी (1984)
5. ऐ लड़की (1991)
6. दिलो दानिश (1993)
7. समय सरगम (2000)
8. यारों के यार
9. तिन पहाड़
#कहानी:-
1.बादलों के घेरे(1980)
2.सिक्का बदल गया
(मित्रों मरजानी,सिक्का बदल गया को लघु उपन्यास भी कहा जाता हैं)
सम्मान –
साहित्य अकादमी पुरस्कार (1980)
शिरोमणी पुरस्कार (1981)
हिन्दी अकादमी पुरस्कार (1982)
शलाका पुरस्कार (2000-01)
ज्ञानपीठ पुरस्कार (2017)

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