रविवार, 19 जुलाई 2020

माँ तो माँ होती हसि / डॉ नीतू पाण्डेय


माँ तो माँ होती है,
माँ हो या सासु माँ,
अन्तर क्या है दोनों में,
आओ जाने हम तुम मिलकर||

माँ ने विदा किया मायके से,
तुमने स्वागत किया सासरे में,
कुछ माँ ने सिखलाया मुझको,
बहुत कुछ सिखाया तुमने||

माँ ने जन्म दिया मुझको,
चलना उसने सिखलाया,
लगी सासरे में जब ठोकर,
गिरकर उठना सिखाया तुमने||

माँ देती प्यार, दुलार और आशीर्वाद मुझे,
तुमने भी तो सौभाग्यवती बनाया मुझको,
संस्कार ज्ञान मिला माँ से मुझको,
उन पर चलना सिखाया तुमने||

जब मैं मायके से आती हूँ,
माँ हर एक समान सजाती है,
पति संग जब मैं कही जाती हूँ,
तुम भी तो हर समान सजोंती हो||

मैं जब भी विदा होती हूँ,
माँ के आंसू नदी से बहते हैं,
पति संग जब भी मैं विदेश जाती हूँ,
तुम भी तो गंगा- जमुना बहाती हो||

तुम कहने को सास हो मेरी,
पर माँ जैसी ही हो तुम भी,
माँ वो भी है, माँ तुम भी हो,
न तुम कम हो, न वो कम है||

मैंने तो तुममे माँ को ही पाया,
             क्योंकि
       माँ तो माँ होती है,
       माँ हो या सासु माँ||

           
   

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