रविवार, 19 जुलाई 2020

मोटापा उर्फ़...... / सीमा मधुरिमा


एक व्यंग्य

मोटापा अर्थात आपदा में अवसर पर बज्रपात

दक्षिण अमेरिका और लातिनि अमेरिका में सबसे बड़ा देश है ब्राजील जिसको फूटबाल प्रेमी स्वर्ग के रूप में देखते है ....अभी हुआ कुछ ऐसा की वहाँ के एक पादरी मार्सेलो रासि ने एक बड़े धार्मिक समारोह् में घोषणा की कि " मोटी महिलाओं को स्वर्ग नहीं मिलता है "
उनका ऐसा कहना था कि भीड़ से एक मोटी महिला उठी और उसने उन्हें मन्च् पर से धक्का दे दिया ......
अब इसी घटना से उपजा है ये व्यंग ......

पहले एक दो कविता देखिये .....

"नारी बैठी छ्त्त् पर कुद्न् को तैयार

कुदन् को तैयार भली करे करतार....

भली करे करतार् न् दे दे कोई धक्का

की ऊपर मोटी नारी की निचे पतरे कक्का ...

आप देखिये लेखक कितना डरा हुआ है ....

इन्हीं की एक और दो पंक्तिया देखिये .....

ढाई मन् से कम नहीं तौल सके तो तौल ....

किसी किसी के भाग्य में लिखी ठोस फुटबाल ..

कह काका कविराज खाए वह् ठूसम चूसा

यदि गिर पड़े पति के ऊपर बना देवे उसका भूसा !!!!

ये कवि बहुते पीड़ित लगते हैं अपने पत्नी से .....
गौर से देखेंगे  तो पाएंगे कि कमी पत्नी में नहीं बल्कि पति में है उनका वजन् बढ़ नहीं रहा इसलिए पत्नी में कमियां गिना गिनाकर् खुद में ही खुश हो लेते हैं अब वो अपने पुरुश्त्व् का रौब झाड़ नहीं पा रहे हैं वो घर में डरे सहमे रहते है ....पत्नी से धीमी आवाज में बात करना उनकी मज़बूरी है ...न् ही पत्नी को गले लगा कर. फ़िल्मी हीरो की तरह मोहबब्त झाड़ पा रहे हैं और न् ही उनकी कमर में हाथ डालकर उनकी  डान्स की इक्षा ही पूरी हो पा रही है ....
ये मनोदशा केवल कक्का जी की ही नहीं है कमोवेश् ज्यदातर् पुरुषों की है ....इसलिए बड़े ही सुनियोजित तरीके से पुरुष वर्ग ने मोटी माहिलाओं के प्रति विरोधी भ्रम फैलाई.... जबकि यह एक् बैज्ञानिक तथ्य है कि महिला माँ बनने के उपरांत उसके शरीर में तमाम हर्मोनल् परिवर्तन होते हैं जिसके तहत उनका शरीर बदल जाता है ....पर पुरूष वर्ग तमाम तरह के भ्रामक अफवाहों से महिलाओं के भीतर एक प्रकार की कुऩ्ठा को जन्म दे देते हैं ..... उन कुंठा के चलते महिला खुद को सामाजिक समारोहो से दूर करने लग जाती है जिससे पुरुषों को उनपर पतले होने का प्रेसर बनाने में आसानी होती है .....
पुरुषों को वो महिला पसंद होती है जो देवी शैव्या की तरह अपने पति को ( कोढ़ी ) पीठ पर बैठाकर् उसकी वैश्यागमन् की इक्षा के लिए ले जाती है ....अब एक मोटी पत्नी तो खुद ही चलने को तरसती है वो कहाँ हिम्मत कर पाएगी और हिम्मत कर भी गई तो बीच रास्ते में ही ऐसे बोझे को पटक कर अपनी जान बचा लेगी ....
और मोटी पत्नी देवी सवित्री की तरह न् तो तीन दिन बिना खाये पिये रह् पाएगी और न् ही पीछे पीछे जाकर कोई वरदान ले पाएगी ..वो तो यमराज के पिछे पिछे भागने से पहले ही गुजर जाएगी .....
ये तो रही पति पत्नी की बात अब आते है अन्य मोटी स्त्रीयो की तरफ रुख करते है ....सभी को पता है कि अधिकतर पुरुष वर्ग जब महिला को भीड़ में देखता है तो किसी न् किसी प्रकार के  अवसर् लेने से नहीं  चूकता  यानी इसे कहते हैं आपदा को अवसर में बदलना ....अब आप ही बताओ कोई स्त्री जो दिखने में ही दारा सिंह जैसी हो तो उससे छेड़खानी करने में कोई भी पुरुष हजार बार्  डरेगा ! कभी किसी पुरूष को मोटा देखने पर कोई उसे हिदायत देना शुरू करता है नही न तो फिर स्त्रियों को ही क्यों दी जाती हैं ???   क्योंकि एक खाती पिती घरवाली से उसका पति भयभीत रहता है कि जाने कब बिगड़ जाय और भरे समाज में इज्जत उतार दे इसी डर के चलते कभी मोटी स्त्रीयो के पति लोग बाहरवाली ऱखने से भी डरते हैं ....
अब आते है पादरी की बातों पर जो स्वर्ग में ठेका लिए बैठा है ....पादरी महाशय खुद कितनी बार सैर करके आए हैं स्वर्ग का जो वहाँ के इंतजाम को बखूबी बयान कर रहे हैं ....तुम्हारी अक्ल पादरी जी घास खाने गई है क्या जब मरने के बाद ही स्वर्ग नर्क जाना होता है तो यहाँ का शरीर तो यही छूट गया ....फिर मोटापा और पतला का विषय तो यही रखा रह गया ...और हाँ तुमको मन्च् पर से ही एक स्त्री ने धक्का देकर सिद्ध कर दिया कि स्वर्ग का रास्ता मोटी स्त्रीयां खुद ही बना लेंगी ...और तुम जैसों को वहाँ से धकिया कर भगा देंगी ...कभी किसी मोटी औरत के मन् में झान्का है तुम जैसों के बनाये इन मिथकों के कारण जीना भूल गई हैं वो ...हर पल अवसाद में जीती हैं ....न हंस सकती खुल के न बोल सकतीं ...खुद को समाज से दूर करने लग जातीं हैं घर मे भी सब उन्हें एक आठवां आश्चर्य की तरह ही देखते हैं .....आजकल एक मुहिम चल रही है विश्व में " ब्लैक लाइफ मैटर्स " जिसके तहत जिस्म के रंग पर बात करना गुनाह बताया जा रहा है ...अब एक और मुहिम की जरूरत है " फैटी बाडी मैटर्स " सोचिए कितनी महिलाएँ जीना सीख जाएंगी ....जब वो खुश होंगी तो अपने लिए और अपनों के लिए मेहनत भी करेंगी ....फिर् उनका अपनी सेहत का ध्यान रखना उनकी पसंद होगा भार नहीं .....
एक स्त्री जो नई पीढ़ी को जनम देती है और उसे केयर करती है उसे खुद भी ये महसूस होना चाहिए कि उसका भी कोई केयर करता है !!!

सीमा"मधुरिमा"
लखनऊ !!!

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